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Super Manसुपर मैन
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एक विशाल जंगल... काली, अंधेरी रात। चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था, मानो स्वयं मृत्यु ने उस पूरे जंगल को अपनी चादर में ढक लिया हो। ऊँचे-ऊँचे वृक्षों की घनी शाखाएँ आपस में इस तरह उलझी हुई थीं कि चाँद की हल्की-सी रोशनी भी धरती तक पहुँचने का साहस नहीं कर पा र...
Storyline
एक विशाल जंगल... काली, अंधेरी रात। चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था, मानो स्वयं मृत्यु ने उस पूरे जंगल को अपनी चादर में ढक लिया हो। ऊँचे-ऊँचे वृक्षों की घनी शाखाएँ आपस में इस तरह उलझी हुई थीं कि चाँद की हल्की-सी रोशनी भी धरती तक पहुँचने का साहस नहीं कर पा रही थी। जहाँ तक नज़र जाती, वहाँ केवल घना अंधकार दिखाई देता था। हवा भी बहुत धीमी गति से बह रही थी, लेकिन जब वह उन विशाल वृक्षों की टहनियों से टकराती, तो एक अजीब-सी सिहरन पैदा करने वाली आवाज़ पूरे जंगल में गूँज उठती। समय-समय पर जंगल के अलग-अलग हिस्सों से भयानक जानवरों की खतरनाक चीखें सुनाई पड़ती थीं। कभी किसी हिंसक पशु की गर्जना गूँज उठती, तो कभी किसी अनजान जीव की दर्दभरी चीख उस सन्नाटे को चीर देती। उन आवाज़ों को सुनकर ऐसा प्रतीत होता था, मानो पूरा जंगल जीवित हो और वहाँ रहने वाला हर प्राणी अपने भीतर किसी भयानक रहस्य को छिपाए बैठा हो। ऐसा लगता था जैसे वह जंगल अपने भीतर आने वाले हर जीव को निगल जाने के लिए ही बना हो। चारों ओर इतना गहरा अंधकार था कि यदि कोई मनुष्य उस स्थान पर अकेला खड़ा हो जाए, तो शायद वह अपने ही हाथ तक न देख सके। वातावरण में भय इस प्रकार फैला हुआ था कि किसी भी सामान्य मनुष्य के कदम वहीं रुक जाते। तभी... उस गहरे सन्नाटे के बीच अचानक किसी के तेज़ कदमों की आवाज़ सुनाई दी। वह आवाज़ इतनी स्पष्ट थी कि मानो शांत झील में किसी ने एक बड़ा पत्थर फेंक दिया हो। कुछ ही क्षणों में उन कदमों की आवाज़ और तेज़ होती चली गई। अचानक... एक लड़का हवा में उड़ता हुआ दिखाई दिया। उसका शरीर मानो किसी कटी हुई पतंग की तरह पूरी तरह असहाय होकर हवा में उछल रहा था। अगले ही पल वह पूरी ताकत के साथ जमीन पर आकर गिरा। धड़ाम... जमीन पर गिरते ही उसके मुँह से खून की एक बड़ी धार बाहर निकल आई। "खाँ... खाँ..." उसने एक बार फिर खून उगल दिया। उसका पूरा शरीर घावों से भरा हुआ था। कपड़े जगह-जगह से फट चुके थे। उसके शरीर पर बने घावों से लगातार खून बह रहा था। ऐसा लग रहा था कि कुछ ही देर पहले उसके साथ कोई भयंकर लड़ाई हुई हो। उसकी साँसें रुक-रुक कर चल रही थीं। हर साँस के साथ उसके सीने से दर्दभरी आवाज़ निकल रही थी। उसकी आँखें आधी खुली हुई थीं, लेकिन उनमें अब पहले जैसी चमक नहीं बची थी। ऐसा लग रहा था कि वह किसी भी क्षण अपनी अंतिम साँस ले सकता है। तभी... जिस दिशा से वह लड़का उड़कर आया था, उसी दिशा से अचानक ज़ोरदार हँसी की आवाज़ गूँज उठी। "हा... हा... हा... हा..." उस हँसी में दया का नाम तक नहीं था। कुछ लड़के हँसते हुए धीरे-धीरे उस घायल लड़के की ओर बढ़ने लगे। उनके चेहरों पर घमंड साफ दिखाई दे रहा था। कुछ ही क्षणों में वे सभी घायल लड़के के पास आकर खड़े हो गए। उनमें से एक लड़का आगे बढ़ा।
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