कुछ सुना आपने?? - Chapter 1
अजनबी आहटStart
"काश! के हम दोनों मिले ही ना होते तो शायद आज हालत कुछ और होते? शायद मेरी ही ग़लती है, मैंने क्यूँ उसको अलग समझा? क्यु उसे मौका दिया कि वह मेरा दिल दुखा सके!
मोहब्बत से मिले जख्म की कोई दवा नहीं होती, वो उसे कहता है बेवफा पर वो बेवफा नहीं, करने चला है उसे बर्बाद उसके वजूद को, कब वो उसका वजूद बन जाए उसे पता नहीं, जल रहा है वह बदले की आग में उस मासूम की जिंदगी को ज़ख्मों से भर देने की बेताब हैं, एक दिन वहीं मासूम उसके दिल धड़कने का कारण बनेगी, और उसके ज़ख्म उसे दर्द देंगे ये उसे पता नहीं है, लगाएं वह मलहम उसके जख्मों पर जो उसने ही दिए हैं, उस पर जख्म देने वाले मलहम लगाते अच्छे नहीं लगते ये उसे मालूम नहीं..!
अजनबी आहट यह एक काल्पनिक कहानी है, कोई अपने दिल पर ना ले सिर्फ मनोरंजन के लिए लिख रही हूं,इसके पहले मैंने कहानी रोमांटिक और पारिवारिक लिखी है, तो इस बार सोची कुछ अलग लिखूं तो यह है Horror +Love + Thriller suspense टाइप कहानी है, तो चलिए कहानी शुरू करते हैं..!!
(Note :- पर यह लिखने का ideas मुझे मेरी एक पड़ोसी दीदी से आया क्यूंकि उनकी आंटी जो थी, वह किसी की शादी में गई हुई थी उन्होंने बहुत मेकअप और गाजरा लगया हुआ था और रास्ते मे सुलभ शौचालय में गई, वहा उन्हें अलग एनर्जी मेहसूस हुआ, बाद में कुछ अजीब हरकतें करने लगी.. घरवालों को समझ गया और वह ठीक हो गई... तो उन्होंने इतना मुझे बताया था पर इस कहानी को मैं अपने तरीके से लिखूँगी, i hope आप लोगों को पसंद आये)
मुंबई रात 1:25 पर
मलाड से एक बस गुजरी जो अंधेरी के तरफ जा रही थी, बस ना बड़ा था ना छोटा... जो बस के अंदर बैठे लोग थे उन्हें देखकर ही समझ में आ रहा था कि वह एक ही घर के फैमिली वाले हैं, बस में बहुत हंसने गाना गाने की आवाज गूंज रहा था |
तभी बस के अंदर एक लड़की ने दूसरी लड़की के कान में धीरे से कहा_" दीपिका दी, मुझे वॉशरूम जाना है... बहुत जोर से प्रेशर आया है..! "
उस लड़की का इतना कहना कि दीपिका जो मोबाइल में चैटिंग कर रही थी, वह तुरंत उसकी तरफ देख बोली_" अरे यार.. अभी तो बस में चढ़े हैं, और अभी तुझे प्रेशर आ गया थोड़ी देर और कंट्रोल कर ले ना..! "
दीपिका का इतना कहना कि उस लड़की ने एकदम मासूम सा चेहरा बना लिया और अपने पेट पर हाथ रख ना मे सिर हिलने लगी, जो देख दीपिका ने पीछे पलट कर आसपास देखी, तो पास वाले सीट पर दो महिलाये सोयी थी, जिनकी उम्र काफी ज्यादा था |
दीपिका खड़ी होकर दूसरे वाले सीट पर देखने लगी, जो दो सीट छोड़कर एक लड़का अपने मोबाइल में बिजी था, उसने आवाज देकर कहा_" अमित भाई... ओ अमित भाई...! "
उसका इतना कहना कि वह लड़का तुरंत पीछे पलट कर देखा और कहा_" हाँ, बोलो..! "
" जरा बस ड्राइवर को कहना 5 मिनट के लिए कहीं बस रोक दे, वॉशरूम जाना है..! "
उसका इतना कहना कि अमित घुरकर दोनों को देखा और उठकर ड्राइवर के पास गया और उसे बताया |
अमित चलते हुए अपनी बहन के पास आया और कहा _" इधर आसपास कोई होटल या ढाबा दिखाई नहीं दे रहा है, तो अभी सीधे से घर ही चलो..! "
अमित की बातें सुन कर दीया ने दीपिका के हाथ पकड झकझोरते बोली _" प्लीज दी, कंट्रोल नहीं कर पा रही हूं मैं..! "
दीया की हालत दीपिका देख सकती थी और वह अमित से बोली _" अमित भाई, आप यहां आस-पास बस रुकवा दीजिए ना, समझा करो..! "
अमित कुछ बोला नहीं, वह वापस ड्राइवर के पास गया और उसके बगल में बैठकर बस रोकने के लिए कहा..!
बस वाले ने कहा _" हाईवे पर बस जाने दो, वहां सार्वजनिक शौचालय मिल ही जाएगा..! "
आखिरकार 10 मिनट बस तेजी से चलने के बाद एक सार्वजनिक टॉयलेट दिखाई दिया, ड्राईवर ने बस तुरंत रोक दिया |
अमित पीछे पलट कर देख कहां _" जाओ तुम दोनों और जल्दी आ जाना..! "
दीया और दीपिका दोनों सीट पर से उठी और बस में से उतर गई वही अमित बस के डोर पर ही खड़ा था, उन दोनों के आने का इंतजार कर रहा था क्योंकि काफी रात हो गया था |
दोनों चलते हुए उसे शौचालय के पास जाने लगी, जहां पर बड़े में सार्वजनिक शौचालय लिखा था, दूर से ही बहुत गंदी स्मेल आ रहा था जिससे दीपिका वहीं रुक गई..!
और अपने दुपट्टे को मुंह पर रख दीया की तरफ देख बोली _" छी..! बहुत गंदी बदबू आ रहा है, मैं यहीं रुक रही हूं, तुम जल्दी जाकर आ जाओ..! "
दीपिका रोड पर ही रुक गई थी, वही दिया गुस्से में उसे देख बोली _" कम से कम थोड़ा तो आगे चलो, मुझे डर लग रहा है..! "
पर दीपिका नहीं गई उसने मुंह बना लिया और अपना मोबाइल ले चैटिंग करने लगी |
वही दीया अपना हाथ मुंह पर रख, जैसे- तैसे करके चली गई जैसे शौचालय के अंदर गई उसे बहुत गंदी स्मेल आ रहा था जैसे अभी उसे उल्टी हो जाएगा |
वह आस-पास देख रही थी पर अंधेरे में उसे कुछ ही दिखाई नहीं दे रहा, और वह अपना पैंट ओपन करके बैठ गई..!
उसी वक़्त उसे कुछ सनसनी आवाज सुनाई दिया, जहां से उसे आवाज आया वह पलट के उसी तरफ देखी, पर उसे अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं दिया |
वह जल्दी से उठी और अपने पैंट पहन तेजी से बाहर भागी, और अपनी बहन के पास आते ही घबराई हुई आवाज में बोली _" कुछ सुना आपने..??
" हाँ, आ रहा है ना "
" अज़ीब सा आवाज आया ना ? "
दीपिका उसके सिर पर हल्के हाथ से चपात मारते हुए बोली _" पागल लड़की .. भोदू कहीं की... इतनी गहरी और ख़ामोश रात में सनसनी आवाज आता ही है..! बोल तो ऐसी रही हो.. जैसे यहा कोई मुजरा करने आएगा, बहुत अच्छी जगह है..! "
दीपिका दीया का हाथ पकड़ बड़बड़ाते हुई बस तक लेकर आई, इस बीच में दीया कई बार पीछे मुड़-मुड़ के देख रही थी |
मुंबई अंधेरी _
माधव ठाकुर का घर
घर की सजावट और घर में मेहमान इकट्ठा हुए थे, जो देखकर ही समझ में आ रहा था कि शादी का माहौल बना हुआ है, घर के सभी मेंबर यहां से वहां तैयारी कर रहे थे, कोई मेहंदी लगा रहा है... तो कोई अपने कपड़े लेकर दौड़ रहा, तो वहीं बड़े-बड़े बुजुर्ग बैठकर बातें कर रहे थे | गीत संगीत सब कुछ चालू था |
नीचे सभी लोग तैयारी कर रहे थे, उसी वक़्त एक महिला ने एक लड़की को जोर से आवाज देकर पुकारा _" दीया.... दीया.. अरे ओ.. दीया.. कहा है ये लड़की..? "
वह महिला दीया नाम से कब से पुकारे जा रही थी कि उसी वक्त एक लड़की तेजी से दौड़ते हुए उनके पास आई और बोली_" चाची जी, दीया अभी तक उठी नहीं... कब से उसे उठा रही हू.. पर वह तो उठने का नाम ही नहीं ले रही है..! "
मुंबई बांद्रा सिटी_Hinduja family
हिंदुजा बिल्डिंग जो काफी दूर से दिखाई दे रही थी, इसे बिल्डिंग नहीं बहुत बड़ी इमारत या टाॅवर कह सकते हैं, जो दूर-दूर से इस वाइट कलर के मेंशन को देख सकते हैं क्योंकि इसका नक्शा ही बहुत जबरदस्त बना हुआ है..!
इस मेंशन में तो बहुत सारे मेंबर रहते हैं, जिनके बारे में धीरे-धीरे सबके बारे में आपको पता चल जाएगा |
वहीं उपर टॉप फ्लोर पर स्टडी रूम था, उस रूम मे बहुत ही शांति फैला हुआ था, तभी दरवाजे पर नाॅक हुआ, जो सुनकर अंदर से आवाज आया - coming
एक नौजवान जो दिखने में काफी पहलवान दिख रहा था, वह अंदर आते ही अपना सिर झुकाए बोला_" बॉस, बड़ी मैम आपको नीचे बुला रही है, और यह शादी का इनविटेशन कार्ड आपको देने के लिए कहा है, वह चाहती है कि शादी को आप अटेंड करें..! "
वह पहलवान आदमी शादी का कार्ड टेबल पर रखते हुए सावधान में खड़ा हो गया, वही जो चेयर पर बॉस की तरह बैठा हुआ नौजवान हैंडसम लड़का था |
वह अपनी नजर उठा कर शादी के कार्ड के तरफ देखा और तुरंत तेज तर्रार नजरों से उस पहलवान आदमी की तरफ देख कहा _" सूर्या , ऐसा करो इस शादी में तुम चले जाओ "
उसका इतना कहना कि सामने जो पहलवान जैसा सूर्या खड़ा था, यह उसका बॉडीगार्ड था और वह अपनी नज़रें झुकाए ही बोला_" बॉस सभी लोग आपका नीचे इंतजार कर रहे हैं..! "
ये सुन वह अपना सिर हल्का सा हिला दिया जो देख, सूर्या तुरंत बाहर जाकर खड़ा हो गया |
कुछ देर बाद वह नीचे आया, जहां लिविंग एरिया में सब लोग बैठे थे, वहीं सोफ़े पर एक महिला बैठी हुई थी, जो दिखने मे उनका उम्र लगभग 50+ के उपर ही दिख रहा था |
वह उसे देख उठते हुए बोली _"चिराग बेटा आ गये तुम? तुम्हारा ही इंतजार कर रहीं थीं, वैसे कहीं जा रहे हो?
चिराग सामने वाले सोफ़े पर बैठे बोला_" हाँ, मुझे कुछ जरूरी काम था, इसलिए बाहर जा रहा था, आप बोलिए कुछ काम था? "
सामने जो महिला खड़ी थी वह चिराग की माँ थी, शिल्पा जी जो बहुत ही ठान बान मे रहती है, और रहना भी चाहिए क्योंकि हिंदूजा खानदान की मालकिन जो है और दिखने में भी उनका रुतबा किसी से कम नहीं था |
बहुत ही प्यार और नम्रता से हर किसी से वह बातें करती थी, और मुस्कुराते हुए बोली _"चिराग बेटा, तुम्हारे डैड कह कर गए है, ऑफिस मे जो उनका मैनेजर है, उनकी बेटी की शादी है और उन्होंने तुम्हारे डैड से बहुत रिक्वेस्ट किया है कि वह शादी में आए, और तुम्हारे डैड उनकी शादी में जाना भी चाहते हैं, क्योंकि वह बहुत ही पुराना और ईमानदार उनका एम्पलाइज है..! "
शिल्पा जी का इतना कहना कि चिराग केयरलैस आवाज में बोला_" मॉम शादी में जाने की जरूरत ही क्या है, अगर आपको लगता है जाना जरूरी है तो? सूर्या को भेज दो, वह चला जाएगा और उसके साथ कोई एक्सपेंसिव गिफ्ट भी भेज देना..! "
अपने बेटे की बातें सुनकर शिल्पा जी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा, और एक बार प्यार से वापस बोली _" देखो बेटा मोहन गुप्ता उनका अपने घर के जैसा रिश्ता है बेटा, और उनके बेटी की शादी में अगर चले जाओगे तो कोई छोटा नहीं हो जाओगे, ठीक है... एक वक्त पार्टी या लड़कों की शादी में नहीं गए तो कोई बात नहीं, पर बेटियों की शादी में जाना बहुत जरूरी होता है, एक बाप अपनी बेटी के लिए सब कुछ दाव पर लगा देता है, और ऐसे ही मोहन गुप्ता ने आस लगाकर बैठे हुई है कि तुम्हारे डैड आएंगे? अगर तुम्हारे डैड को वक्त नहीं है तो क्या तुम घर के बड़े बेटे होने नाती नहीं जा सकते हो..? कल को तो तुम्हें ही सब कुछ संभालना है, ये दुनियादारी.. बिजनेस.. खानदान.. रिश्तेदारी सब कुछ तुम्हें ही देखना है बेटा..! "
शिल्पा जी की बातें सुनकर चिराग अब क्या ही बोले और वो अजीब सा एक्सप्रेशन देते हुए कहा_" ओके मॉम, चला जाऊंगा..! "
अपने बेटे के मुंह से हा सुनकर शिल्पा जी मुस्कुराती और आगे बढ़कर उसके चेहरे पर हाथ फेरते हुए प्यार से बोली_" हमेशा अपने और अपने से जुड़े हुए लोगों से प्यार मोहब्बत से रहा ही चाहिए, जैसे तुम्हारे डैड करते आ रहे है, वैसे ही तुम्हें भी आगे करना होगा बेटा..! यही हमारे खानदान की परंपरा है..! "
जो देख चिराग अपना सिर हा में हिला दिया, शिल्पा जी वहां से जाने लगी और जाते हुए बोली_" जल्दी से नीचे आ जाओ, ब्रेकफास्ट रेडी है... बगैर ब्रेकफास्ट किए बाहर नहीं जाना..! "
To be continue....
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