Midnight - Episode 1
Midnightमुंबई की भीड- भाड वाली local train से उतरकर आर्यन ने अपनी घडी देखी- शाम सात बजकर बीस मिनट. हर रोज का यही routine था. सुबह नौ बजे office, शाम सात बजे घर. बीच में दस घंटे की coding, designing, और बॉस की डांट.
छब्बीस साल की उम्र, और जिंदगी एक loop में फंस गई थी.
आर्यन ने अपने wireless earphones लगाए और Spotify पर कोई random playlist चला दी. Station से बाहर निकलते हुए उसने चारों तरफ नजर दौडाई- वही पुरानी चाय की दुकान, वही flower वाला भैया, वही भीख माँगती बुढिया. कुछ नहीं बदलता था इस शहर में. या शायद, कुछ बदलता था लेकिन आर्यन ने देखना बंद कर दिया था.
Dadar station से उसका flat सिर्फ दस मिनट की walking distance पर था. छोटा सा एकBHK, किराया अठारह हजार महीने का. Mumbai में यह भी luxury थी एक bachelor के लिए.
रास्ते में उसने अपने पसंदीदा paani puri वाले से गोलगप्पे खाए. Bhaiya ने हमेशा की तरह एक extra puri दी और मुस्कुराकर बोला, आर्यन भाई, आज थके हुए लग रहे हो.
हां भैया, office में बहुत काम था आज, आर्यन ने कहा, payment करते हुए.
अरे, इतना काम करोगे तो बीमार पड जाओगे. Life enjoy भी करो थोडी.
आर्यन ने बस मुस्कुराकर हाथ हिलाया और आगे बढ गया. Enjoy? उसे तो याद भी नहीं था आखिरी बार कब उसने कुछ enjoy किया था. Weekend पर भी बस Netflix देखना और सो जाना. Friends? कोई खास नहीं बचा था Mumbai में. College के दोस्त सब अपनी जिंदगी में busy थे.
अपनी building के सामने पहुंचकर आर्यन ने security guard को नमस्ते की. Ramesh kaka, कैसे हैं?
बढिया बेटा. तुम्हारे लिए एक courier आया था आज, मैंने तुम्हारे door पर रख दिया है.
Okay, thanks!
आर्यन fourth floor पर रहता था. Lift अक्सर काम नहीं करती थी, तो सीढियां चढना routine हो गया था. जब वो अपने flat के दरवाजे के पास पहुंचा, तो उसने देखा- सच में एक brown packet पडा था.
उसने packet उठाया. कोई sender का नाम नहीं था, सिर्फ उसका address लिखा था. Weird.
Door खोलकर अंदर घुसते हुए आर्यन ने lights on कीं. Flat वैसा ही messy था जैसा सुबह छोडकर गया था- sofa पर कपडे, dining table पर काल की रात का pizza box, और किचन में बर्तन pile up।
Kal साफ करूंगा, उसने खुद से कहा. यही dialogue पिछले तीन हफ्तों से बोल रहा था.
आर्यन ने अपना laptop bag एक side में फेंका, shoes उतारे, और sofa पर गिर पडा. Packet को उसने side table पर रख दिया- बाद में देखेगा.
Phone निकालकर उसने notifications check कीं:
पंद्रह work emails (ignore)
तीन promotional messages (delete)
एक message from Mom: Beta, खाना खा लिया? Call kar.
एक WhatsApp from Arjun (college friend): Bro, weekend pe milte hain? Long time!
आर्यन ने Mom को quick reply किया- Haan Ma, kha liya. Kal call karta hun. Arjun को- Sure bhai, plan karte hain.
झूठ था दोनों. Mom को call नहीं करेगा कम से कम दो- तीन दिन तक, और Arjun से मिलने का plan भी cancel हो जाएगा किसी बहाने से.
Main itna boring kab ho gaya?
आर्यन ने यह सवाल अक्सर खुद से पूछा था. College में तो वो life of the party था- हर fest में involved, photography club का president, और हमेशा कुछ adventure plan करता रहता था.
फिर क्या हुआ?
दो हजार उन्नीस के बाद सब कुछ बदल गया था.
उस thought को दिमाग से निकालते हुए आर्यन उठा और किचन में गया. Fridge खोला- एक बोतल पानी, थोडा दूध (शायद खराब हो गया होगा), और कुछ बासी sabzi।
Swiggy hi order kar leta hun.
उसने app खोलकर Chinese food order किया- chicken fried rice और chilli chicken। तीस मिनट में आ जाएगा.
Tab तक क्या करे?
Netflix? नहीं, कुछ देखने का mood नहीं था.
Gaming? PSपाँच तो अच्छा खासा dust gather कर रहा था.
फिर उसकी नजर उस brown packet पर गई.
चलो, देखते हैं क्या है इसमें, आर्यन ने packet उठाया और खोला.
अंदर. एक पुरानी diary थी. Brown leather की, corners थोडे घिसे हुए, और pages yellowed।
आर्यन confused था. यह किसने भेजी? और क्यों?
उसने diary खोली. First page पर बडे- बडे letters में लिखा था:
तुम्हारी यादें यहाँ हैं. लेकिन क्या तुम इन्हें वापस चाहते हो?
आर्यन की धडकन तेज हो गई. यह क्या बकवास थी?
उसने अगला page पलटा. वहां एक photo चिपकी थी- college fest की तस्वीर, दो हजार उन्नीस की. पाँच लोग साथ में खडे थे, सब मुस्कुरा रहे थे.
आर्यन ने photo को ध्यान से देखा:
बाईं तरफ- रोहन, उसका best friend। मोटा, हंसमुख, हमेशा jokes मारता रहता था.
उसके बगल में- कविता, smart और ambitious लडकी. Commerce में top करती थी.
बीच में- आर्यन खुद, camera हाथ में, खुश नजर आ रहा था.
आर्यन के बगल में- एक लडकी, जिसका चेहरा थोडा धुंधला था. शायद photo हिली थी.
और सबसे दाहिनी तरफ- समीर, quiet और introvert type का लडका.
पर वो धुंधली लडकी कौन थी?
आर्यन को याद नहीं आ रहा था.
उसने अगला page देखा. वहां handwriting में कुछ लिखा था:
क्या तुम्हें याद है Lonavala trip? बारिश वाली रात? तेज driving? और फिर. वो चीख?
आर्यन के हाथ काँपने लगे.
Lonavala.
हां, दो हजार उन्नीस में college fest के बाद वो सब Lonavala गए थे. But उसके बाद की memories. blank थीं. Doctors ने बताया था कि उसे head injury हुई थी उस trip में, और इसकी वजह से उसे partial amnesia हो गया था.
पर यह diary किसने भेजी? और उसे क्यों याद दिलाना चाह रहा है कोई?
अगला page:
उस रात पाँच दोस्त गए थे. सिर्फ चार वापस आए. पाँचवीं. गायब हो गई.
आर्यन की सांसें तेज हो गईं.
पाँचवीं? कौन?
उसने desperately अगला page पलटा:
उसका नाम था नेहा. और तुमने. तुमने उसे मारा था, आर्यन.
क्या बकवास है यह! आर्यन ने diary को फेंक दिया.
उसके हाथ पसीने से भीग गए थे. दिल जोर- जोर से धडक रहा था.
यह कोई sick prank था. जरूर कोई मजाक कर रहा था.
नेहा? उसे कोई नेहा याद नहीं थी.
और उसने किसी को मारा? यह तो. यह तो impossible था!
आर्यन ने पानी पिया, खुद को शांत करने की कोशिश की.
Relax. यह कोई मजाक है. Ignore कर इसे.
पर उसका दिमाग शांत नहीं हो रहा था. Diary की वो lines, वो photo. सब दिमाग में घूम रहा था.
तभी doorbell बजी.
आर्यन चौंक गया.
उसने intercom उठाया- कौन?
Sir, आपका food delivery, एक आवाज आई.
Oh, हाँ. आ रहा हूँ.
आर्यन ने door खोला और delivery boy से food लिया, payment किया, और door बंद कर दिया.
Food को dining table पर रखकर वो फिर से sofa पर बैठ गया. Diary उसके सामने floor पर पडी थी.
Should I read more?
उसका एक हिस्सा कह रहा था- नहीं, यह सब bakwas है. But दूसरा हिस्सा curious था.
Finally, उसने diary फिर से उठाई.
अगला page खाली था. उसके बाद वाला भी.
फिर last page पर, बडे- बडे red letters में:
आज रात बारह बजे. तुम्हारा phone बजेगा. उठाना मत भूलना.
आर्यन ने diary फेंक दी फिर से.
यह sickness की हद है, वो बुदबुदाया.
उसने खाना खाने की कोशिश की, लेकिन भूख मर गई थी. Mind में बस वही lines घूम रही थीं:
आज रात बारह बजे.
किसका phone आएगा? और क्यों?
आर्यन ने खुद को समझाया कि यह सब fake है. कोई उसके साथ prank खेल रहा है.
रात नौ बज गए थे. आर्यन ने Television on किया, कुछ random comedy show चलाया distraction के लिए. लेकिन focus नहीं हो रहा था.
दस बजे.
ग्यारह बजे.
ग्यारह: तीस.
आर्यन का दिल तेजी से धडकने लगा था. उसने अपने phone को side table पर रखा और उसे घूरता रहा.
कुछ नहीं होगा. यह सब bakwas है.
ग्यारह: पैंतालीस.
वो उठा, bathroom गया, मुंह धोया. Mirror में अपना चेहरा देखा- आँखों के नीचे dark circles, चेहरा थका हुआ.
ग्यारह: पचास.
वो वापस living room में आया. Phone अभी भी वहीं पडा था.
ग्यारह: पचपन.
आर्यन sofa पर बैठ गया. उसके हाथों में पसीना आ गया था.
This is stupid. Main kya kar raha hun?
लेकिन वो phone से नजर नहीं हटा पा रहा था.
ग्यारह: अट्ठावन.
ग्यारह: उनसठ.
Digital clock screen पर शाम ग्यारह बजकर उनसठ मिनट blink कर रहा था.
And then.
रात बारह बजे
बिल्कुल ठीक आधी रात को.
TRRRRRRING!
आर्यन का phone बजा.
Unknown number.
आर्यन की सांस रुक गई. उसके हाथ काँप रहे थे.
यह coincidence है. कोई random call होगा.
Phone बजता रहा.
आर्यन ने हिम्मत करके phone उठाया और screen के पास ले गया.
Caller ID: Unknown
उसने हिचकिचाते हुए green button दबाया.
H- Hello?
कुछ seconds तक silence रही.
फिर. एक आवाज आई. एक लडकी की आवाज. रोती हुई. डरी हुई. Desperate.
मुझे. मुझे बचाओ. प्लीज. कोई तो बचाओ मुझे.
आर्यन के रोंगटे खडे हो गए.
क- कौन हो तुम? यह क्या मजाक है?
मुझे बचाओ. वो. वो मुझे मार देगा. प्लीज. आर्यन. तुम ही बचा सकते हो मुझे.
तुम्हें मेरा नाम कैसे पता? कौन हो तुम?
आवाज और जोर से रोने लगी.
तुम. तुम भूल गए मुझे? सच में भूल गए?
मैंने तुम्हें कभी जाना ही नहीं! तुम कौन हो?
Silence.
फिर, धीमी आवाज में, बिल्कुल ठंडे लहजे में:
Lonavala. बारिश. तेज गाडी. और फिर. धडाम. क्या अब याद आया?
आर्यन का दिमाग सुन्न हो गया.
न- नहीं. मुझे कुछ याद नहीं. तुम गलत नंबर पर.
गलत नंबर? लडकी ने कडवी हंसी हंसी. आर्यन शर्मा. छब्बीस साल. Graphic designer। Dadar में flat। दो हजार उन्नीस में Lonavala गए थे. Head injury हुई थी. Memory loss हो गई. क्या अब भी गलत नंबर लग रहा है?
आर्यन के हाथ से phone गिरते- गिरते बचा.
तुम. तुमने मेरी जासूसी की है? Police में complaint करूंगा मैं!
Police? लडकी फिर हंसी. Police को बताओगे क्या? कि एक dead girl तुम्हें phone कर रही है?
D- Dead girl? तुम पागल हो!
पागल तो तुम हो, आर्यन. जो भूल गए कि तुमने क्या किया था उस रात. लेकिन मैं याद दिलाऊंगी. हर रात. ठीक बारह बजे. जब तक तुम्हें सब याद नहीं आ जाता.
सुनो, यह जो भी prank है, बहुत हो गया! मैं.
Prank? आवाज अब गुस्से में थी. यह prank नहीं है, आर्यन. यह. तुम्हारा पाप है. और पापों की सजा मिलती है.
मैंने कुछ नहीं किया! तुम गलत इंसान को.
गलत इंसान? आवाज अब रो रही थी फिर से. तुमने ही तो मुझे मारा था, आर्यन. तुमने ही तो मेरी जिंदगी छीनी थी. और अब. अब मैं तुम्हारी चैन छीनूंगी.
यह. यह सच नहीं है.
कल रात फिर बात होगी. बारह बजे. Phone उठाना. वरना.
वरना क्या?
वरना तुम्हारे सपनों में आऊंगी.
और line cut गई.
आर्यन का हाथ काँप रहा था. उसने phone को sofa पर फेंक दिया जैसे वो आग का गोला हो.
उसकी सांसें तेज हो रही थीं. Panic attack आने वाला था.
यह real नहीं हो सकता. यह सब fake है. कोई technology use कर रहा है मुझे डराने के लिए.
लेकिन उस लडकी को इतनी details कैसे पता थीं? Lonavala trip, head injury, memory loss.
आर्यन उठा और kitchen में भागा, पानी पिया. फिर bathroom में गया, ठंडे पानी से मुंह धोया.
Relax, Aryan. Calm down. यह सब planned है. कोई तुम्हारे साथ खेल रहा है.
पर कौन? और क्यों?
और वो diary. जिसमें लिखा था- आज रात बारह बजे phone बजेगा"
यह coincidence नहीं हो सकती थी.
आर्यन living room में वापस आया. Diary अभी भी floor पर पडी थी.
उसने उसे उठाने की हिम्मत की. Last page फिर से पढा:
आज रात बारह बजे. तुम्हारा phone बजेगा. उठाना मत भूलना.
और अब, उसके नीचे. नई handwriting में. red ink में.
अच्छा लडका. तुमने उठा लिया. अब असली खेल शुरू होता है.
यह line पहले नहीं थी! आर्यन को पक्का याद था!
उसने diary फेंक दी और कमरे के कोने में चला गया.
यह हो क्या रहा है?
घडी में बारह: पंद्रह हो गए थे.
आर्यन सो नहीं सकता था. वो बस sofa पर बैठा रहा, lights on रखीं, और phone को घूरता रहा.
क्या कल रात फिर call आएगा?