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Chapter 2

Viraj The God Of Cultivation World - Episode 2

Viraj The God Of Cultivation World

विराज को जन्म लिए हुए अब दो महीने भी चुके थे आज विराज अपनी आंखें खोलता है युद्ध के बाद से वह अपनी चेतना में कैद था लेकिन आज उसे जब होश आता है तो वह अपने आप को एक बच्चे के रूप में प्रकार हैरान हो जाता है दो महीने पहले जब उसका पुनर्जन्म हुआ तो वह अपनी मां से अलग हो गया था उसकी मां एक प्राचीन कबीले से थी जिसके परिवार वाले उन्हें उससे दूर ले गए लेकिन विराज को इस बात का पता नहीं था जैसे ही वह होश में आया उसे उसके सामने एक मध्यम वर्ष का व्यक्ति दिखाई दिया वह उसके पिता वीरेंद्र थे उन्हें देखकर विराट सोचता है लगता है मेरा पुनर्जन्म हुआ है और इस जन्म में मैं एक नश्वरसंसार में जन्म हूं बहुत अच्छा बहुत अच्छा मैं महान सम्राट विराज इस संसार में दोबारा आ चुका हूं उन सभी बच्चे हुए सम्राटों को मेरी सद्भावना है तुम्हारे पास जितना समय है जी को मैं लौटूंगा इतना कहकर विराज दोबारा अपनी आंखें बंद कर लेता है क्योंकि युद्ध में उसकी आत्मा घायल हो गई थी इसलिए वह ज्यादा देर तक जाग नहीं सकता था भले ही युद्ध में उसकी आत्मा घायल हो गई हो लेकिन वह एक महान सम्राट था जिस कारण से उसकी आत्मा अभी भी एक संत के बराबर थी जिस कारण से उसके पिता को भी उसे एक दबाव महसूस होता था जिस कारण से वह मानता था कि उसका बेटा एक दिन एक महान योद्धा बनेगा धीरे- धीरे करके समय बीत जाता है और चौदह साल बीत जाते हैं विराज के पिता वीरेंद्र दो साल पहले विराज को छोडकर अकेले ही निकल गए थे लेकिन विराज को यह नहीं पता था कि वह कहां गए हैं लेकिन विराट जानता था कि फिर ठीक है क्योंकि उसके पिता एक संत लोग के योद्धा थे इसके बारे में उसके परिवार वालों को भी नहीं पता था लेकिन विराज केंद्रीय के कारण वह जानता था इस जीवन में विराज ने फैसला किया कि वह अपना जीवन एक नस पर व्यक्ति की तरह अपने कर्तव्य को पूरी तरह निभाकर करेगा पिछले जीवन में विराज के अपने कोई खून के रिश्तेदार जीवित नहीं बचे थे जिस कारण से वह रिश्तो को बहुत अधिक में अहमियत देता था और उसे अपने पिता की भी चिंता रहती थी विराज कहता है चिंता मत कीजिए पिताजी मैं आपको ढूंढने जल्दी ही आऊंगा यह सोचकर विराज पद्मासन में बैठ जाता है और अपनी साधना का पहला दिन शुरू करता है विराज दो साल पहले ही साधना शुरू कर सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया क्योंकि वह एक प्राचीन आदिम काल का प्रयोग करना चाहता था जिस की केवल चौदह साल की उम्र में ही साधना शुरू की जा सकती है इस साधना पद्धति की कई नियम थे जिसमें से एक था व्यक्ति की साधना आधार नहीं होना चाहिए उसका शरीर चौदह वर्ष का होना चाहिए इसका अर्थ था कि इसे केवल एक वही व्यक्ति साथ सकता था जिसने साधना स्वरूप ही हो जब महान सम्राट विराज को यह साधना पद्धति मिली तो वह बहुत निराश हुआ क्योंकि यह एक आदिम प्राचीन साधन पाती थी जो की एक अमूल्य खजाना था जिसे सत्ताईस वर्गों और अमर साम्राज्यों में भी महान खजाना माना जाता था लेकिन यह व्यर्थ था क्योंकि इस सदा नहीं जा सकता था लेकिन पुनर्जन्म के बाद विराज बहुत प्रसन्न था क्योंकि अब वह इसे साध सकता था इस पद्धति को प्राचीन आदम ईश्वर सूत्र कहा जाता है जो कि संसार की सभी ऊर्जाओं को सोकर पवित्र ऊर्जा में बदल सकता है इसका अर्थ है कि वह बेशक राक्षसी क्यों ही हो या फिर खूनी ऊर्जा वह सब कुछ सो कर साधना कर सकता है इस सूत्र में न केवल साधना पढती थी बल्कि मानसिक और शारीरिक साधना पति देवी थी जीने की आदम आत्मा सूत्र और आदिम शरीर एकीकरण सूत्र कहा जाता था यह एक ऐसा ग्रंथ था जो की प्राचीन आदम ईश्वर सूत्र के नाम से जाना जाता था माना जाता है कि इस पद्धति के द्वारा पूर्वजों के क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है जहां तक अब तक कोई नहीं पहुंचा है इसलिए विराज अब इस साधना पद्धति को लेकर बहुत ही आशाजनक था इसलिए वह इस पद्धति का शुरू करता है जैसे ही वह साधना शुरू करता है आसपास की एक हजार किलोमीटर के दायरे में जितनी भी पूजा थी उसके चारों और भंवर बनाने लगती है और वह केवल एक घंटे में शरीर एकीकरण के क्षेत्र में प्रवेश कर लेता है इस संसार में साधना के छात्रों इस प्रकार है एक एक क्षेत्र शरीर एकीकरण क्षेत्र दूसरा क्षेत्र कोर गठन क्षेत्र तीसरा क्षेत्र गोल्डन कोर क्षेत्र चौथा क्षेत्र आत्मा एकीकरण क्षेत्र पांचवा क्षेत्र राजा क्षेत्र छाता क्षेत्र महान राजा क्षेत्र सातवां क्षेत्र प्राचीन राजा चित्र आठवां संत क्षेत्र नोवा महान संत क्षेत्र दसवां प्राचीन संत क्षेत्र ग्यारह प्रकाश लोक क्षेत्र बारह महान प्रकाश लोक क्षेत्र तेरह प्राचीन प्रकाश लोक क्षेत्र चौदह दिव्या क्षेत्र पंद्रह महान दिव्या क्षेत्र सोलवा प्राचीन दिव्या क्षेत्र उसे युद्ध के कारण विराज की आत्मा अभी केवल संत क्षेत्र में ही है यह सोचकर विराज मुझे अपनी आत्मा को जल्द ही ठीक करना होगा और जल्द से जल्द मुझे इतना ताकतवर बना होगा कि मैं अपनी रक्षा कर सकूं इस समय मेरी प्राथमिकता संसाधनों कोई इकट्ठा करना होना चाहिए इस समय मेरा शरीर मेरी तलवार की मंशा को प्रयोग नहीं कर सकता यह शरीर बहुत ही कमजोर है मुझे जल्द ही आदम प्राचीन ईश्वर पद्धति से अपने शरीर को मजबूत करना होगा और इसके लिए संसाधनों की आवश्यकता होगी विराज इस बारे में सोच ही रहा था तभी बाहर से एक बुजुर्ग लात मार कर दरवाजा खोलते हैं और विराज से कहती हैं आज से दो महीने बाद परिवार की कुल प्रतियोगिता होगी और उसे समय सभी प्रतियोगी युवा स्वामी के पद के लिए प्रतियोगिता में भाग लेंगे मैं तुम्हें यह बताने आया हूं कि सभी को युवा स्वामी के पद के लिए मौका मिलेगा यह कहकर वह बुजुर्ग तिरस्कार से विराज को तिरस्कारो से देखता है और चला जाता है विराज यह सुनकर उसे नजर अंदाज कर देता है वीरेंद्र के जाने के बाद विराज के कुल में आंतरिक कलश शुरू हो गई जिस कारण से कई बुजुर्ग सोचते हैं कि वह अपनी युवा पीढी को युवा स्वामी पद पर बिठा दे और कल का नेता बने परंतु विराज को इन मामलों से कोई लेना देना नहीं है वह सोचता है कि संसाधनों को इकट्ठा करने के लिए वह क्या करें विराज यह सोचकर परेशान हो ही रहा था तभी उसे याद आता है कि उसके पिता ने जाते समय उसे एक अंगूठी दी थी और कहा था कि यह एक स्पेस रिंग है जिसमें उसकी साधना के लिए कुछ संसाधन छोडे गए थे यह सोचकर वह एक अंगूठी निकलता है यह एक स्पेस रिंग थी जो कि उसके पिता ने उसके लिए छोटी थी चलो देखते हैं कि पिताजी ने मेरे लिए क्या छोडा है यह सोचकर विराज अंगूठी के अंदर दिव्य चेतना के दोबारा देखा है कि इस अंगूठी में प्रचुर मात्रा में संसाधन छोडे गए थे जिससे कि कोई भी आम व्यक्ति संत क्षेत्र तक साधना कर सकता था लेकिन विराज के लिए यह अलग मामला था लेकिन वह इससे बिल्कुल भी निराश नहीं होता क्योंकि इस समय कल्याणपुर में सबसे ताकतवर व्यक्ति भी गोल्डन कर के पहले स्तर पर ही होगा और इन सदा संसाधनों के द्वारा वह गोल्डन कर के अंतिम चरण में पहुंच जाएगा और शायद सीकर पीर पर भी पहुंच जाए फिर वह इस जगह से निकल पाएगा यह सोचकर विराज दोबारा साधना शुरू कर देता है

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