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भाग्य चक्र का योद्धा
Fantasy
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भाग्य चक्र का योद्धा

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​आकाशपुर विद्यालय के बड़े से मैदान में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। सब सांस रोके सामने का नजारा देख रहे थे। एक तरफ ताराग्नि विद्यालय का सबसे होनहार छात्र खड़ा था, और दूसरी तरफ था हमारा नायक, षट् कन्नौजिया।<br>​षट् के चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था, जै...

Storyline

​आकाशपुर विद्यालय के बड़े से मैदान में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। सब सांस रोके सामने का नजारा देख रहे थे। एक तरफ ताराग्नि विद्यालय का सबसे होनहार छात्र खड़ा था, और दूसरी तरफ था हमारा नायक, षट् कन्नौजिया।<br>​षट् के चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था, जैसे उसे सामने खड़े दुश्मन की ताकत से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा हो। तभी हवा में एक जोरदार सरसराहट हुई। सामने वाले ने अपनी सबसे खतरनाक विधा 'हिम तलवारबाज़ी का तांडव' शुरू कर दिया था। देखते ही देखते पूरे मैदान का तापमान गिर गया और हवा में बर्फीले कांटे तैरने लगे। 'बर्फीले कांटों की बरसात' षट् की तरफ तेजी से बढ़ने लगी। हर एक कांटा इतना नुकीला था कि पत्थर को भी चीर दे।<br>​"षट्! बचो!" मैदान के कोने से एक सुरीली लेकिन घबराई हुई आवाज गूंजी। यह श्रेया थी। उसकी खूबसूरत आंखें डर के मारे फैल गई थीं, और दिल की धड़कनें जैसे थम सी गई थीं। अपने प्यार को इस तरह खतरे में देखकर उसका चेहरा एकदम सफेद पड़ गया था।<br>​लेकिन षट् ने सिर्फ एक तिरछी नजर श्रेया पर डाली और हलका सा मुस्कुराया। उस एक मुस्कुराहट में इतना भरोसा था कि श्रेया का धड़कता दिल पल भर के लिए थम गया। उसके गालों पर हलकी सी लाली दौड़ गई, इस जानलेवा माहौल में भी वह षट् की उस कातिल नजर से शर्माए बिना नहीं रह सकी।<br>​"अरे भाई, जरा संभलकर! कहीं ऐसा न हो कि इस ठंड में तुम्हारी कुल्फी ही जम जाए!" तभी दर्शकों के बीच बैठे एक छात्र ने जोर से ताना मारा, जिससे वहां मौजूद कुछ लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए।<br>​षट् ने गहरी सांस ली। उसने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उसके भीतर सोई हुई असली ताकत जाग उठी। यह 'नवस्वर्ग पवित्र अग्नि' थी। पल भर में षट् के चारों तरफ गहरे लाल और सुनहरे रंग की लपटें उठने लगीं। वह आग इतनी भयंकर थी कि मैदान की अतिशीत बर्फ और शीतल हिम कोहरा देखते ही देखते भाप बनकर उड़ने लगे।<br>​"यह... यह कैसे मुमकिन है? नवस्वर्ग पवित्र अग्नि?!" सामने खड़ा प्रतिद्वंद्वी हक्का-बक्का रह गया। उसका घमंड पल भर में टूटकर बिखर गया।<br>​षट् ने अपनी दिव्य ऊर्जा को एक जगह इकट्ठा किया और सीधे सामने वाले पर हमला बोल दिया। आग और बर्फ की वह टक्कर इतनी जोरदार थी कि पूरा मैदान दहल उठा। ऐसा लगा मानो आसमान में कोई बिजली कड़की हो। जब धुआं हटा, तो सामने वाला जमीन पर हांफता हुआ गिरा हुआ था और षट् शान से अपनी जगह पर खड़ा था। उसने अपनी कलाई में पहने स्थानिक वलय को हलके से छुआ और अपनी ऊर्जा को शांत किया। पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

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