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Chapter 2

“ब्रह्मांड का सम्राट: गौरव राज” - Episode 2

“ब्रह्मांड का सम्राट: गौरव राज”

EPISODE 2 : सिस्टम की पहली चाल और छुपी हुई दुनिया

रात गहरी हो चुकी थी।

राधागांव की छत पर लेटा हुआ गौरव राज तारों को देख रहा था, लेकिन उसका ध्यान आसमान में नहीं था। उसकी आँखें बार-बार उसी जगह टिक जाती थीं, जहाँ कुछ देर पहले नीली रोशनी की पारदर्शी स्क्रीन उभरी थी।

“ये सच है…”

उसने धीमे से कहा, जैसे खुद को यक़ीन दिला रहा हो।

उसके कानों में अब भी वही शब्द गूंज रहे थे— सुपर ओरिजिन सिस्टम।

नींद आँखों से कोसों दूर थी। उसने आँखें बंद कीं, और मन ही मन बोला, “सिस्टम… अगर तुम सच में हो, तो सामने आओ।”

एक हल्की कंपन हुई।

[सुपर ओरिजिन सिस्टम सक्रिय]

नीली रोशनी फिर उभरी। इस बार गौरव घबराया नहीं। बल्कि उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।

होस्ट: गौरव राज

स्थिति: प्रारंभिक जागरण

उपलब्ध संसाधन: सीमित

“सीमित?” गौरव ने भौंहें चढ़ाईं। “मतलब आगे बहुत कुछ बाकी है?”

“हाँ।”

एक शब्द। ठंडा, सीधा।

“पृथ्वी लोक में अभी शक्ति का स्तर बहुत निम्न है।”

“होस्ट को धीरे-धीरे अनुकूलित किया जाएगा।”

गौरव उठकर बैठ गया। “और अगर मैं तेज़ी से बढ़ना चाहूँ?”

कुछ सेकंड का मौन।

“जोखिम बढ़ जाएगा।”

गौरव हँसा। “ज़िंदगी में बिना जोखिम के क्या मिलता है?”

स्क्रीन पर एक नया सेक्शन खुला।

[स्टेटस]

शक्ति: 1.2

गति: 1.1

सहनशक्ति: 1.3

ऊर्जा अनुभूति: सक्रिय (निम्न)

“ये नंबर…” गौरव ने खुद को महसूस किया। उसे सच में पहले से ज़्यादा हल्का, मज़बूत और सतर्क लग रहा था।

“ताबीज विद्या – बेसिक स्तर सक्रिय।”

उसके दिमाग में कल सीखे प्रतीक फिर उभरे। अब वो उन्हें थोड़ा और साफ़ देख पा रहा था। जैसे किसी धुंधले नक्शे पर अचानक रेखाएँ गहरी हो गई हों।

“मतलब मैं इसे अभ्यास से बढ़ा सकता हूँ?”

“हाँ।”

गौरव ने लंबी साँस ली। “ठीक है। धीरे-धीरे सही… लेकिन रुकना नहीं है।”

नीली रोशनी मंद पड़ी और गायब हो गई।

अगली सुबह कॉलेज का माहौल हमेशा जैसा था—लेकिन गौरव के लिए सब कुछ अलग लग रहा था। आवाज़ें थोड़ी तेज़, रंग थोड़े गहरे, लोगों के चेहरे… ज़्यादा साफ़।

“भाई, आज तू कुछ ज़्यादा ही फ्रेश लग रहा है,” अमन ने कहा।

“हाँ, रात को जल्दी सो गया होगा,” रोहित ने हँसते हुए जोड़ा।

गौरव मुस्करा दिया। सच बताने का सवाल ही नहीं था।

लेक्चर के दौरान प्रोफेसर बोर्ड पर लिख रहे थे। गौरव का ध्यान आधा वहाँ था, आधा अपने भीतर। उसे महसूस हो रहा था कि कमरे में कुछ और भी है—एक हल्की-सी ऊर्जा, जो आम लोग महसूस नहीं कर पा रहे थे।

“ऊर्जा प्रवाह: पृथ्वी लोक – निम्न।”

गौरव ने चौंककर नीचे देखा।

“तो यही है वो दुनिया, जो सबको दिखती है… लेकिन सबको पूरी नहीं दिखती,” उसने सोचा।

ब्रेक के समय सब दोस्त कैंपस के पीछे वाले मैदान में बैठे। बातों-बातों में राजनीति, देश, भविष्य सब निकल आया।

“यार, देश का हाल खराब है,” शिवम बोला।

“कोई ऐसा चाहिए जो सब सीधा कर दे,” अर्जुन ने कहा।

गौरव चुप रहा। लेकिन उसके भीतर कुछ हिला।

“भावनात्मक प्रतिक्रिया दर्ज।”

“सिस्टम?” गौरव ने मन में पूछा।

“होस्ट की इच्छा में दीर्घकालिक लक्ष्य के बीज पाए गए।”

उसने मुट्ठी भींच ली। “अगर मुझे ताकत मिली है… तो सिर्फ़ अपने लिए नहीं होगी।”

शाम को कॉलेज से लौटते समय गौरव ने जानबूझकर रास्ता बदला। वह उसी पुराने पार्क की ओर गया, जहाँ कल बूढ़े आदमी से मिला था।

पार्क आज भी सुनसान था। हवा में अजीब-सी ठंडक थी।

“छुपा हुआ नोड समीप।”

“नोड?” गौरव ने कदम धीमे किए।

एक पुराना बरगद का पेड़। उसकी जड़ों के पास ज़मीन थोड़ी धँसी हुई थी।

“पृथ्वी लोक का सूक्ष्म ऊर्जा बिंदु।”

गौरव का दिल तेज़ धड़कने लगा। “तो पृथ्वी पर भी… छुपी हुई जगहें हैं?”

“हाँ।”

“लेकिन मानव सभ्यता उनसे अनजान है।”

उसने घुटनों के बल बैठकर ताबीज विद्या के अनुसार एक छोटा-सा प्रतीक बनाया। हवा में हल्की चमक हुई। ज़मीन के नीचे से हल्की कंपन आई।

अचानक—

एक साया-सा हिला।

गौरव फुर्ती से पीछे हटा।

घास के बीच से एक काला-सा प्राणी निकला। इंसान जैसा, लेकिन आँखें खाली। शरीर से ठंडी-सी ऊर्जा निकल रही थी।

“ये क्या है…?”

“निम्न स्तर का पृथ्वी छाया प्राणी।”

“जोखिम: मध्यम।”

गौरव ने गहरी साँस ली। इस बार डर ने उसे जकड़ा नहीं।

“अगर यही छुपी हुई दुनिया है,” उसने सोचा, “तो मुझे इसे समझना होगा।”

प्राणी अचानक झपटा।

गौरव ने ज़मीन से एक पत्थर उठाया, और बिना सोचे उसे हवा में घुमाया। ताबीज का प्रतीक चमका।

धम!

पत्थर बिजली की तरह जा लगा। प्राणी पीछे उछला।

“ये… मैंने किया?” गौरव की आँखें फैल गईं।

वो आगे बढ़ा। दिल तेज़ था, लेकिन कदम स्थिर।

एक और वार।

फिर एक।

आख़िरी झटके में प्राणी धुएँ में बदल गया।

सन्नाटा।

“शत्रु नष्ट।”

“अनुभव प्राप्त।”

“ऊर्जा अनुभूति में वृद्धि।”

गौरव हाँफने लगा। हाथ काँप रहे थे, लेकिन अंदर एक अजीब-सी संतुष्टि थी।

“तो ये है पहला कदम,” उसने कहा।

तभी स्क्रीन फिर उभरी।

“विशेष सूचना।”

“पृथ्वी लोक में ऐसे कई नोड और खतरे मौजूद हैं।”

“ARC 1 के दौरान होस्ट को अनुकूलन आवश्यक है।”

गौरव ने आसमान की ओर देखा। शाम का सूरज डूब रहा था।

“कॉलेज, दोस्त, परिवार… और ये छुपी हुई दुनिया,” उसने बुदबुदाया।

“सब साथ-साथ संभालनी पड़ेगी।”

घर लौटते समय उसने फैसला कर लिया था।

वो सिर्फ़ ताकतवर नहीं बनेगा।

वो समझेगा।

सीखेगा।

और फिर… बदलेगा।

राधागांव की साधारण गलियों में चलते हुए,

गौरव राज को पहली बार एहसास हुआ—

पृथ्वी लोक उतना साधारण नहीं है,

जितना वो अब तक समझता आया था।

और यह तो बस शुरुआत थी।

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