आलसी योद्धा - Episode 7
आलसी योद्धा“आलसी सम्राट मोड का जागरण”
पूरा आकाश अब फट चुका था।
विशाल दरार के भीतर से निकलती काली ऊर्जा ने सूर्य की रोशनी तक निगल ली थी।
नगर अंधकार में डूब गया।
लोग भय से काँप रहे थे।
और उस अंधकार के बीच—
एक विशाल हाथ धीरे-धीरे नीचे उतर रहा था।
उस हाथ की उंगलियाँ पर्वतों जैसी विशाल थीं।
जहाँ उसकी छाया पड़ती, वहाँ जमीन गलने लगती।
नगर प्रमुख घुटनों पर गिर पड़ा।
“ये… ये प्राणी इस दुनिया का नहीं है…”
क्यू अपने नए दैत्य रूप में गुर्राया।
उसके विशाल पंख पूरे आकाश में फैल गए।
लेकिन पहली बार—
उसकी आँखों में भी डर था।
“मालिक… वो चीज बहुत खतरनाक है…”
अथर्व ने धीरे से आँखें खोलीं।
फिर भारी आलस से उठकर बैठ गया।
पूरा नगर स्तब्ध रह गया।
“वो… उठ गया?!”
अथर्व ने गर्दन घुमाई।
हड्डियों से टक…टक…टक की आवाज आई।
“इतना शोर कर दिया… अब सोना मुश्किल है।”
तभी—
विशाल हाथ पूरी तरह नीचे गिरा।
धाऽऽऽऽऽऽऽम!!
पूरा नगर काँप उठा।
सैकड़ों घर टूट गए।
धरती में विशाल दरारें फैल गईं।
लेकिन जैसे ही वह हाथ अथर्व तक पहुँचा—
उसके चारों ओर सुनहरी ऊर्जा घूमने लगी।
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【रहस्यमयी सम्राट मोड सक्रिय】
“आलसी सम्राट जाग चुका है।”
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अचानक—
अथर्व के बाल धीरे-धीरे सुनहरे होने लगे।
उसकी आधी बंद आँखों में रहस्यमयी सुनहरी चमक आ गई।
उसके पीछे विशाल आलसी सिंहासन प्रकट हुआ।
लेकिन सबसे अजीब बात—
वह सिंहासन हवा में लेटी हुई मुद्रा में था।
मानो किसी सम्राट के लिए नहीं…
बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति के लिए बनाया गया हो जो हमेशा आराम करना चाहता हो।
पूरा वातावरण बदल गया।
अब हवा में ऐसा दबाव था कि दानव भी काँपने लगे।
आकाशीय दरार के भीतर से भारी आवाज गूँजी—
“ये शक्ति… अभी भी जीवित कैसे है?!”
अथर्व धीरे से सिंहासन पर लेट गया।
उसने एक हाथ से सिर टिकाया।
“मुझे भी यही सवाल है।”
तभी—
विशाल हाथ दोबारा उसकी ओर बढ़ा।
लेकिन इस बार—
अथर्व ने केवल उंगली हिलाई।
टक्।
पूरा हाथ हवा में रुक गया।
फिर धीरे-धीरे टूटने लगा।
कड़ाक्… कड़ाक्… कड़ाक्…
विशाल दैत्याकार हाथ लाखों काले टुकड़ों में बिखर गया।
पूरा नगर सन्न रह गया।
“एक उंगली से…?!”
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【आलसी सम्राट प्रभाव】
“आपके सामने जितनी अधिक शक्ति होगी, वह उतनी तेजी से क्षीण होगी।”
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आकाश के भीतर हजारों नीली आँखें अचानक बंद हो गईं।
मानो वे भयभीत हों।
लेकिन तभी—
दरार के भीतर से एक और आकृति उभरी।
इस बार केवल हाथ नहीं…
बल्कि पूरा शरीर।
वह एक विशाल काले कवच वाला योद्धा था।
उसकी ऊँचाई बादलों से भी ऊपर थी।
उसकी आँखें नीली आग से जल रही थीं।
और उसके हाथ में एक टूट चुकी ब्रह्मांडीय तलवार थी।
नगर के लोग डर से चीख पड़े।
“समाप्त… सब समाप्त…”
लेकिन अथर्व ने केवल जम्हाई ली।
“इतना बड़ा आदमी… कितनी कैलोरी खाता होगा?”
क्यू लगभग गिर पड़ा।
“मालिक! ध्यान दीजिए!”
विशाल योद्धा ने तलवार उठाई।
जैसे ही तलवार हिली—
आकाश दो हिस्सों में कट गया।
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【खतरा स्तर बढ़ा】
“शून्य सम्राट का प्रथम दूत”
स्थिति: जागृत
विशेषता: विश्व विनाशक शक्ति
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विशाल दूत ने अथर्व की ओर देखकर कहा—
“घुटनों पर झुको, आलस्य के उत्तराधिकारी।”
पूरा नगर दबाव से घुटनों पर गिर गया।
क्यू तक नीचे दब गया।
लेकिन—
अथर्व अब भी सिंहासन पर लेटा था।
उसने आँखें बंद रखीं।
फिर धीमे स्वर में बोला—
“माफ करना… उठने का मन नहीं है।”
अगले ही पल—
विशाल दूत क्रोध से गरज उठा।
उसकी तलवार सीधे अथर्व की ओर गिरी।
और उसी क्षण—
अथर्व की सुनहरी आँखें पूरी तरह खुल गईं।
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【गुप्त क्षमता अनलॉक】
“पूर्ण आलसी क्षेत्र”
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समय रुक गया।