अपहरण चक्रव्यूह - Chapter 1
अपहरण चक्रव्यूहएक के बाद एक हो रहे लड़कियों के अपहरण ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। हर एक मिनट में एक लड़की गायब हो रही थी ये कोई आम बात नहीं थी , उसकी चीखें पुलिस फाइलों के पन्नों में दफन होती जा रही थीं। पांच साल तक यह सिलसिला अनसुलझा रहा - कोई सुराग नहीं, कोई रास्ता नहीं। यहाँ तक कि पुलिस वाले भी अपनी बेटियों और पत्नियों की सुरक्षा को लेकर सहम गए थे।
जब इस जिम्मेदारी को दो आईपीएस अधिकारियों अंश मल्होत्रा और इशकी गोयल को सौंपा गया, तो उन्हें भी शुरुआत में निराशा हाथ लगी। लेकिन तभी एक अप्रत्याशित मोड़ आया। आईएसपी इशकी गोयल अपहृत लड़कियों तक पहुँचने में सफल रहीं, लेकिन जो कुछ उन्होंने देखा, उससे उनके पैरों तले जमीन खिसक गई...
दिल्ली – रात 2:17 बजे
दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में सन्नाटा पसरा था।
रात की सड़कें खाली थीं, और स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी में एक छाया अचानक एक दीवार के पीछे से निकलती है। उसके हाथ में कुछ था — शायद क्लोरोफॉर्म से भरा रुमाल।
दूर एक लड़की फोन पर बात कर रही थी —
"हाँ माँ, मैं बस पाँच मिनट में पहुँचती हूँ... आप दरवाज़ा खोलकर रखिए—"
अचानक एक साया उस पर झपटता है। फोन नीचे गिरता है।
अगले पाँच सेकंड में… बस सन्नाटा।
किसी ने कुछ नहीं देखा।
CCTV कैमरे का लेंस ठीक उसी पल धुंधला हो गया था।
अगली सुबह –
दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर,
IPS अंश मल्होत्रा अपनी कुर्सी पर बैठा था, उसका चेहरा गंभीर था। सामने एक पुलिसकर्मी रिपोर्ट पढ़ रहा था:
> "सर, ये इस हफ्ते की चौथी गायब लड़की है। सब 18 से 25 उम्र के बीच, सब सॉफ्ट टारगेट। कोई फिरौती कॉल नहीं, कोई बॉडी नहीं, कोई क्लू नहीं। CCTV तक disable मिलता है, हर बार।"
अंश ने सवाल किया,
"लास्ट लोकेशन क्या मिली?"
> "वसंत कुंज, ब्लॉक D।"
"CCTV?"
"सर, वीडियो corrupt मिला है… या किसी ने overwrite कर दिया। लेकिन टावर लोकेशन से रात 2:16 बजे कॉल कट हुआ। उसके बाद फोन स्विच ऑफ।"
अंश उठ खड़ा हुआ। “इशकी गोयल को बुलाओ।”
कुछ देर बाद
अंश के ऑफिस में तेज कदमों से एक महिला अधिकारी दाखिल होती है।
गुड मॉर्निंग"सर,"
तुम अपने घर पर मैसेज कर दो जब तक के सॉल्व नहीं हो जाता तो मेरे साथ रहोगी ।
इशकी ने सिर हिलाया,
"हमारी टीम आज रात उसी गली की तीनों बिल्डिंग्स से मोबाइल डेटा स्कैन करेगी।
जिन मोबाइलों की लोकेशन बार-बार क्राइम ज़ोन में रिपीट हो रही है — वो अब शक के घेरे में हैं।"
अंश ने कहा,
"अगर अगली लड़की भी गायब हुई — तो शहर में दंगा भड़क सकता है। अब ये सिर्फ अपहरण नहीं, मास्टरप्लान है।"
तभी एक रिपोर्ट आती है “Instagram पर एक पेज मिला है: @DarkAngels_Club — जिसपर गायब लड़कियों की blurred फोटोज़ हैं। IP – Russia से bounce हो रहा है। लेकिन पोस्ट टाइम इंडिया के ही हैं।”
इशकी बोली "कोई डार्क वेब नेटवर्क लड़कियों को टारगेट कर रहा है… और ये सोशल मीडिया सिर्फ डिस्ट्रैक्शन है। असली ट्रैकिंग तो कहीं और से हो रही है।"
अंश और इशकी अपनी टीम के साथ उसी गली में पहुँचते हैं।
साइलेंस… खाली रास्ते… और दीवार पर चॉक से लिखा एक कोड:
> “X:47 | R3:21 | | WELCOME” इशकी ने कहा,
"ये कोड किसी ट्रैप का हिस्सा है। या तो अगला क्लू… या अगली शिकार।" सर कुछ समझ नहीं आ रहा
अंश ने दीवार छूकर देखा चॉक का रंग गीला था। "अभी-अभी लिखा गया है…"
कुछ तेरे बाद एक ऑटो ड्राइवर को पकड़ा गया जो रोज़ रात 2 बजे वहीं से गुजरता है। उसे पुलिस स्टेशन लाया गया।
अंश: “तू रोज़ उधर से जाता है, कुछ देखा?” ड्राइवर (डरा हुआ): “न-नहीं साहब… बस उस रात एक काली SUV गाड़ी खड़ी देखी थी, उसका शीशा बहुत डार्क था…”
इशकी: “SUV का नंबर?”
ड्राइवर: “बिलकुल याद नहीं… पर उसके शीशे पर एक ‘X47’ लिखा स्टीकर था… जैसे दीवार पर आपने देखा था।” यह सुन दोनों के होश उड़ गए
“X:47” — वो कोड जो पिछली लड़की के अपहरण जगह की दीवार पर लिखा मिला था।अब वही नंबर एक SUV पर लगे स्टीकर से जुड़ चुका था।और SUV का रिकॉर्ड? सरकारी विभाग के नाम पर दर्ज — Communication Ministry।
अंश ने फाइल बंद की और इशकी से कहा —“अब ये केस एक आम क्रिमिनल से ऊपर जा चुका है।”
इशकी ने जवाब दिया,“मुझे यकीन है ये सिर्फ एक गाड़ी नहीं… एक पूरी नेटवर्क की झलक है।”
इशकी के कहने पर साइबर टीम ने उस रात के समय में वसंत कुंज क्षेत्र में एक्टिव सभी मोबाइल नंबर्स की लिस्ट निकाली। टोटल एक्टिव डिवाइसेस: 721पर एक नंबर हर क्राइम स्पॉट के पास — लगातार तीनों अपहरण वाली रात मौजूद था।
फोन नंबर: 98xxxx4783 नाम पर रजिस्टर: विक्रम चौहान द्वारका सेक्टर 14, दिल्ली प्राइवेट कैब ड्राइवर
विक्रम चौहान को सीधा गिरफ्तार करने की बजाय टीम ने 24 घंटे निगरानी में रखा।
“विक्रम रोज़ 2AM से 4AM के बीच अपनी कार लेकर निकलता है। बिना किसी बुकिंग के।
कोई पिकअप या ड्रॉप नहीं। कार के शीशे पूरी तरह ब्लैक फिल्म से ढके हैं।
उसके मोबाइल में VPN ऐप्स इंस्टॉल हैं और कॉल हिस्ट्री हर दिन डिलीट की जाती है।”
अंश ने प्लान बना लिया था "अब पूछताछ होगी… लेकिन तरीका बदलकर।"
एक सादी वर्दी में टीम ने विक्रम को कैब बुक करके बुलवाया।
अंश खुद पैसेंजर बनकर पीछे बैठा।
कैब में बैठते ही अंश ने कहा:"गाड़ी ठीक से चलाओ… और अगर झूठ बोला, तो ब्रेक लगाने से पहले हाथ में हथकड़ी होगी।"
विक्रम हड़बड़ा गया “स-साहब?”
गाड़ी एक सुनसान जगह पर रोक गई।इशकी ने दरवाज़ा खोला और विक्रम को नीचे उतरने का इशारा किया।
फिर अंश ने सावल कहा “रात को खाली गाड़ी लेकर क्यों घूमता है?”
विक्रम: “बस सर… यूँही… नींद नहीं आती…”
इशकी: “VPN क्यों? कॉल हिस्ट्री क्यों डिलीट?”
विक्रम: “फोन मेरा नहीं, दोस्त का है…”
अंश “तीन लड़कियों के अपहरण वाले दिन, तू हर जगह मौजूद था। और तेरा नंबर हर बार टावर से मिला है। अब भी कहेगा कुछ नहीं पता?”
विक्रम घबराया गया “सर, मैं सच कह रहा हूँ… किसी ने मुझसे गाड़ी किराए पर ली थी… कैश दिया, कोई डिटेल नहीं ली…”
इशकी: “किसने?”
विक्रम: “नाम नहीं पता… एक आदमी था… चेहरा नहीं दिखा, पर वो हर बार रात 1 बजे मिलने आता था… और कार 4 बजे वापस कर जाता था।”