अपहरण चक्रव्यूह - Chapter 7
अपहरण चक्रव्यूहअगली सुबह अलार्म की आवाज़ सुनकर अंश की आँख खुल जाती है।
वो उठते हुए अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोलता है
चलो, आज तो देर नहीं हुई जल्दी तैयार हो जाता हूँ।
वो जल्दी-जल्दी फ्रेश होकर कपड़े पहनता है और नीचे नाश्ता करने बैठता है। तभी उसका फोन बजने लगता है।
स्क्रीन पर नाम दिखाई देता है मयंक।
अंश कॉल उठाता है
हेलो मयंक बोलो, कुछ पता चला क्या?
मयंक की आवाज़ जल्दी और गंभीर थी
सर, उस खबर को छापने वाले जर्नलिस्ट का पता चल गया है। उसके बारे में मैंने सारी जानकारी निकाल ली है। आप जल्दी आइए।
अंश: हाँ, ठीक है मैं अभी आ रहा हूँ।
इतना कहकर अंश जल्दी से अपना बैग उठाता है, दरवाजा बंद करता है और कार लेकर निकल जाता है।
रास्ते में वह तारा और नेहा को भी पिक कर लेता है।
ऑफिस पहुँचते ही अंश सीधे मयंक के पास जाता है।
अंश: मयंक, बताओ क्या पता लगा उसके बारे में?
मयंक: सर, उस जर्नलिस्ट का नाम नवीन त्रिवेदी है। उम्र करीब 35 साल। कुछ साल पहले वह इस शहर में काम की तलाश में आया था। तीन साल पहले उसने वही खबर छापी थी जिसमें इस मरे हुए इंसान नरेंद्र का ज़िक्र था।
दो दिन बाद उसने एक और खबर छापी जिसमें उसने लिखा था कि इन ड्रग्स और अवैध हथियारों के पीछे किसी और का हाथ है। उसने यह भी कहा था कि कई लड़कियाँ जो गायब हो रही हैं, उसमें भी शायद इसी का हाथ है।
उस खबर के बाद उसने रिपोर्टिंग छोड़ दी और अब उसका खुद का एक न्यूज़ चैनल है।
अंश ने माथे पर हाथ रखकर सोचा, फिर बोला
**मतलब, पहले तो उसने शक के तौर पर नरेंद्र का नाम लिया फिर दो दिन बाद किसी और को आरोपी बताया, और फिर अचानक रिपोर्टर की नौकरी छोड़कर खुद चैनल खोल लिया।
ऐसा क्या हुआ था कि उसने रिपोर्टिंग छोड़ दी? और जिसे उसने दूसरी बार आरोपी बताया, वो कौन था? उसके बारे में कुछ पता चला?**
मयंक ने सिर हिलाते हुए कहा
सर, वो एक लड़की थी। कुछ साल पहले उसकी मौत हो गई थी। किसी कारण से मामला दबा दिया गया था। लेकिन मुझे लगता है, नवीन को इस सबके बारे में कुछ ज़रूर पता होगा।
अंश ने कहा
ठीक है, अब शाम तक का काम खत्म करते हैं, फिर उसके घर जाकर बात करते हैं। हो सकता है वहीं से कुछ बड़ा हाथ लगे।
शाम के 7:00 बजे,
अंश और मयंक दोनों नवीन के घर पहुँचते हैं।
अंश दरवाज़े की डोरबेल बजाता है।
कुछ सेकंड बाद एक आदमी दरवाज़ा खोलता है।
अंश: सुनिए, हमें नवीन त्रिवेदी से मिलना है। कुछ ज़रूरी बातें करनी हैं। क्या वो घर पर हैं?
आदमी: जी आप लोग कौन हैं?
अंश: हम पुलिस से हैं। एक मर्डर केस के सिलसिले में पूछताछ करनी है। कृपया उन्हें बुलाइए।
वो आदमी अंदर जाकर नवीन से कहता है
साहब, दो लोग आपसे मिलने आए हैं। कह रहे हैं कि एक मर्डर केस के सिलसिले में बात करनी है।
नवीन (थोड़ा परेशान होकर): नहीं उनसे कह दो कि मैं बहुत बिजी हूँ। अभी उनसे नहीं मिल सकता। मुझे किसी मर्डर केस के बारे में कुछ नहीं कहना।
वो मन ही मन सोचने लगता है
ज़रूर ये लोग नरेंद्र के मर्डर के बारे में पूछने आए हैं।
आदमी वापस बाहर आकर कहता है
सर, वो आपसे नहीं मिल सकते। बहुत बिजी हैं और किसी केस के बारे में कुछ नहीं जानते।
अंश कुछ बोलने ही वाला था कि उसने देखा
नवीन अपने घर के पिछले दरवाज़े से भागता हुआ बाहर निकल रहा है।
अंश (तेज़ आवाज़ में): नवीन! रुको! अगर तुम्हें उस मर्डर केस के बारे में कुछ पता है तो हमें बताओ। तुम्हारी जान भी खतरे में हो सकती है! वो इंसान तुम्हें भी मार सकता है!
लेकिन नवीन बिना कुछ सुने तेज़ी से अपनी कार में बैठता है और वहाँ से निकल जाता है।
अंश: मयंक, चलो! उसका पीछा करते हैं। अब पक्का यकीन हो गया कि उसे कुछ पता है। तभी तो ऐसे भागा!
नवीन कार चलाते हुए किसी को कॉल लगाता है
देखो, मुझे अभी मेरे पैसे वापस दो। मुझे उसकी बहुत ज़रूरत है। मैं आ रहा हूँ तुम्हारे पास।
इतना कहकर वो कॉल काट देता है।
कुछ देर बाद उसकी कार एक क्लब के सामने रुकती है।
नवीन गाड़ी से उतरता है और अंदर चला जाता है।
अंश और मयंक भी चुपचाप उसके पीछे-पीछे क्लब में प्रवेश करते हैं।
क्लब के अंदर भीड़ और म्यूजिक था। दोनों उसे ढूंढने लगते हैं।
थोड़ी देर बाद वे देखते हैं नवीन किसी आदमी से बात कर रहा है।
नवीन: देख यार, मुझे अभी पैसे चाहिए। मुझे इस शहर से निकलना है। बस मेरे पैसे लौटा दे।
वो आदमी: पैसे का इंतज़ाम तो हो गया है, लेकिन अभी नहीं दे सकता। थोड़ा इंतज़ार करो। मैंने किसी को भेजा है, वो पैसे लेकर आता ही होगा। तब तक एक ड्रिंक हो जाए।
इतना कहकर वो आदमी दो ग्लास में ड्रिंक डालता है और एक ग्लास नवीन को देता है।
नवीन ग्लास उठा लेता है और एक घूंट लेता है।
उसी वक्त अंश और मयंक उसे देख लेते हैं और उसकी तरफ बढ़ते हैं।
तभी अचानक क्लब की सारी लाइटें और म्यूजिक बंद हो जाते हैं।
पूरा माहौल एकदम से शांत हो जाता है।
लगभग 10 सेकंड बाद लाइटें दोबारा जलती हैं, म्यूजिक फिर चालू हो जाता है।
अंश और मयंक फिर आगे बढ़ते हैं।
वो देखते हैं कि नवीन उस आदमी से बात कर रहा है और अचानक वह आदमी अपनी सीट से उठकर अंदर के एक कमरे की तरफ बढ़ता है।
अंश तेजी से सामने जाकर उसे रोकता है।
नवीन के चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी।
उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।
वह अपने रुमाल से माथा पोंछता है और कहता है
तुम लोग मेरा पीछा क्यों कर रहे हो?
अंश: नवीन, सुनो! हमें केस के बारे में तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है। हम जानते हैं कि तुम नरेंद्र के बारे में कुछ जानते हो। आखिरी बार उसके बारे में खबर तुमने ही छापी थी, और उसकी लाश के पास वही अखबार का टुकड़ा मिला।
नवीन कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक उसका शरीर डगमगाने लगा
और वो बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ा।
उसके गिरते ही एक तस्वीर भी उसके ऊपर आ गिरी।
मयंक झट से उसके पास पहुँचा, उसकी नब्ज़ देखी
सर ये मर चुका है।
अंश हैरान रह गया।
उसने देखा, नवीन के मुँह से थोड़ी झाग निकल रही थी।
मयंक: लगता है इसे किसी ने ज़हर दिया है।
क्लब में मौजूद सारे लोग डर के मारे चिल्लाने लगे और बाहर भागने लगे।
मयंक ने जमीन से वो तस्वीर उठाई और अंश को दी।
तस्वीर में नवीन, नरेंद्र, और एक अजाना आदमी साथ खड़े थे।
अंश ने पास खड़े एक आदमी से पूछा
तुम कौन हो? और नवीन से क्या बात कर रहे थे?
वो आदमी: सर, मैंने नवीन से कुछ पैसे उधार लिए थे। आज उसने मुझसे पैसे मांगे। मैं उसे पैसे लौटाने ही वाला था। हमने बस साथ में ड्रिंक की, उसके अलावा कुछ नहीं हुआ। मैं नहीं जानता ये सब कैसे हुआ।
अंश: ठीक है। अगर जरूरत पड़ी तो तुमसे दोबारा पूछताछ होगी।
मयंक ने बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेजने का आदेश दिया और क्लब से CCTV फुटेज निकलवा ली।
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पोस्टमार्टम के बाद जब अंश बाहर आया, तो इशकी ने उससे पूछा
क्या हुआ? मरने से पहले कुछ बताया उसने? इसे किसने मारा?
अंश ने गहरी साँस ली
मुझे कुछ नहीं पता
फिर उसने पूरी घटना विस्तार से इशकी को बताई।
उसके बाद तीनों अंश, इशकी और मयंक CCTV फुटेज देखने बैठ गए।
पहले उन्होंने क्लब के अंदर की फुटेज देखी कुछ खास नहीं मिला।
फिर क्लब के बाहर की देखी वहाँ भी कोई संदिग्ध नहीं था।
थोड़ी देर बाद अंश को कुछ याद आता है
रुको, फुटेज थोड़ा पीछे करो
उन्होंने वही फुटेज फिर से देखी।
जहाँ नवीन गिरा था, वहाँ ऊपर की छत पर एक खिड़की थी।
वहीं से काले कपड़े पहने हुए एक शख्स को भागते हुए देखा गया।
वो शख्स भागते-भागते एक तस्वीर नीचे फेंकता है वही तस्वीर जो नवीन के ऊपर गिरी थी।
लेकिन उस फुटेज में उसका चेहरा साफ नहीं दिखा।
और क्लब की दूसरी साइड पर कोई कैमरा नहीं था, इसलिए वो किसी भी फुटेज में कैद नहीं हुआ।
अंश ने गंभीर आवाज़ में कहा
अब हमें इसे जल्द-से-जल्द पकड़ना होगा।
वो सोच में डूब गया
यही वही शख्स है जिसने नरेंद्र और नवीन दोनों को मारा है। और मुझे पूरा यकीन है दिल्ली से जो लड़कियाँ गायब हो रही हैं, सब कुछ किसी न किसी तरह इनसे जुड़ा हुआ है