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Chapter 1

Aayan The Super Hero. - Chapter 1

Aayan The Super Hero.

"आयान शर्मा, 36 मार्क्स! इस साल का सबसे खराब रिजल्ट!"

प्रिंसिपल की तीखी आवाज़ पूरी क्लास में गूँज उठी। एक पल के लिए दिल्ली के मशहूर 'डीपीएस' स्कूल की क्लास के सारे स्टूडेंट्स ने आखिरी बेंच पर बैठे उस लंबे, दुबले-पतले लड़के की तरफ देखा। कुछ के मुँह से हँसी भी फूट पड़ी।

सबकी चुभती हुई नज़रों के बीच आयान की साँस गले में अटक गई। दिमाग़ पल भर के लिए सुन्न हो गया और उसे लगा जैसे किसी ने उसे भरी क्लास के बीच नंगा खड़ा कर दिया हो। वह चुपचाप अपनी जगह से उठा और प्रिंसिपल से अपना एग्ज़ाम पेपर ले आया।

"वाह! हमारे जीनियस ने तो फिर से 'रिकॉर्ड' तोड़ दिया! 750 में से 36, कमाल है!"

"हाहा... यही तो है वो लड़का, जिसने पिछले साल नेशनल मैथ्स ओलिंपियाड में सिल्वर मेडल जीता था और IIT दिल्ली का स्पेशल एडमिशन ऑफर ठुकरा दिया था!"

"अरे, अगर ये IIT चला जाता, तो इसके पापा मेयर का इलेक्शन नहीं लड़ पाते क्या?"

ऐसी बातें आयान पिछले एक साल से सुन रहा था और अब उसे आदत हो गई थी। एक साल पहले तक वह स्कूल का हीरो था, लेकिन फिर उसके शरीर में अजीब बदलाव होने लगे। जब भी वह पढ़ाई पर ध्यान लगाने की कोशिश करता, उसकी हड्डियों में एक तेज़ दर्द उठता, मांसपेशियाँ ऐंठने लगतीं और कई बार तो वह बेहोश होते-होते बचा।

इसी वजह से, जो लड़का कभी सबकी आँखों का तारा था, आज सबका मज़ाक बन चुका था।

तभी प्रिंसिपल ने फिर से ऐलान किया:

"सुमन सिंह, टोटल 675 मार्क्स! क्लास में फर्स्ट और पूरे स्कूल में आठवीं रैंक! हमारी क्लास से टॉप टेन में आने वाली यह अकेली स्टूडेंट है। सबको सुमन से सीखना चाहिए!"

यह सुनते ही क्लास में तारीफ की फुसफुसाहटें शुरू हो गईं। डीपीएस जैसे स्कूल में टॉप टेन में आना अपने आप में IIT या दिल्ली यूनिवर्सिटी में आधी सीट पक्की करने जैसा था।

सबसे बड़ी बात यह थी कि सुमन सिंह सिर्फ पढ़ाई में ही अच्छी नहीं थी, बल्कि स्कूल की सबसे स्टाइलिश लड़की भी थी। वह अक्सर स्कूल के नियमों को ताक पर रखकर मिनीस्कर्ट और हल्की हील्स पहनकर आती, लेकिन उसके शानदार ग्रेड्स के आगे टीचर्स भी कुछ नहीं कहते थे।

सुमन किसी घमंडी हंसनी की तरह अपनी सीट से उठी और स्टेज की ओर चल दी।

जब सुमन अपनी सीट पर वापस लौट रही थी, तो उसका हाथ हल्का सा फिसला और उसका एग्ज़ाम पेपर ठीक आयान के पैरों के पास जा गिरा।

आयान ने अनजाने में झुककर पेपर उठा लिया। जैसे ही वह उसे पेपर पकड़ाने के लिए खड़ा हुआ, सुमन की आँखों में नफ़रत और घृणा साफ़ दिखाई दे रही थी। उसने कठोर आवाज़ में कहा:

"आयान, याद रखना, मेरा बॉयफ्रेंड अब युवराज खन्ना है। मेरे आसपास भी दिखे, तो उसे गलतफहमी हो सकती है!"

ये शब्द सुनकर आयान का शरीर हल्का सा काँप उठा। उसके होंठों पर एक कड़वी मुस्कान फैल गई। उसने कहा, "सुमन, तुम कुछ ज़्यादा ही सोच रही हो। मैं तो बस तुम्हारा पेपर उठा रहा था!"

"ओह, सच में? हम्फ़... एक कहावत सुनी है—अजगर कभी साँप के साथ नहीं रहता!"

सुमन का लहजा बर्फीला था। "आयान, तुम एक साल पहले वाले जीनियस नहीं रहे। हम दोनों अब अलग-अलग दुनिया के लोग हैं! मेरी नज़र में, तुम सड़क पर पड़े कचरे से ज़्यादा कुछ नहीं हो। तुम्हारे छूने से यह पेपर भी गंदा हो गया। मुझे नहीं चाहिए!"

सुमन का यह बेरुखा अंदाज़ देखकर आयान का दिल बैठ गया। उसके हाथ पल भर के लिए हवा में ही जम गए और अंदर कुछ टूटने की तेज़ आवाज़ आई। सुमन के शब्द किसी ज़हरीले तीर की तरह सीधे दिल में जा लगे थे।

एक साल पहले, इसी सुमन ने ओलिंपियाड जीतने के अगले ही दिन आयान को प्रपोज़ किया था। आयान की मदद से ही उसके ग्रेड्स सुधरे थे। लेकिन जैसे ही आयान का बुरा वक्त शुरू हुआ, सुमन ने उसे छोड़ने में एक पल भी नहीं लगाया और स्कूल के सबसे अमीर लड़के युवराज को डेट करने लगी।

पर आयान ने यह कभी नहीं सोचा था कि वह उसे सबके सामने इस तरह जलील करेगी।

"अजगर साँप के साथ नहीं रहता?!"

आयान ने यह लाइन धीरे से दोहराई। फिर उसकी गहरी आँखों में एक अजीब सी चमक जागी और उसने शांत लेकिन मज़बूत आवाज़ में कहा:

"आज मेरा वक्त खराब है, कल तुम्हारा होगा! साँप भी एक दिन अजगर बनकर आसमान में उड़ सकता है! और जहाँ तक मेरी बात है, तो मेरी नज़र में न तुम और न ही तुम्हारा बॉयफ्रेंड युवराज अजगर हो। तुम दोनों तो बस गंदे नाले में रेंगने वाले केंचुए हो!"

"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे यह कहने की!"

यह सुनते ही सुमन का खूबसूरत चेहरा गुस्से से पत्थर जैसा हो गया। उसने दाँत पीसते हुए कहा, "हम्म्... तुम्हें पता है युवराज के पापा कौन हैं? खन्ना ग्रुप के चेयरमैन, हज़ारों करोड़ की संपत्ति है उनकी! युवराज तुम्हें एक उँगली से मसलकर रख देगा!"

सुमन की धमकी सुनकर आयान की आँखों में एक अजीब सी रोशनी चमकी। वह कुछ कहने ही वाला था कि तभी स्टेज पर मौजूद टीचर ने डाँटा, "आयान, तुम सुमन के पास क्या कर रहे हो? जल्दी अपनी सीट पर जाओ।"

"सर, आयान मुझे परेशान कर रहा है!" सुमन ने फ़ौरन दुखी होने का नाटक करते हुए शिकायत कर दी।

यह सुनकर टीचर ने गुस्से में कहा, "आयान, मैं तो सोचता था कि तुम सिर्फ पढ़ाई में कमज़ोर हो, पर तुम्हारा कैरेक्टर भी इतना गिरा हुआ है, मुझे अंदाज़ा नहीं था! निकलो क्लास से बाहर!"

टीचर की तरफ पीठ करके सुमन ने आयान को एक विजेता वाली मुस्कान दी।

यह देखकर आयान ने कंधे उचकाए और बिना कुछ कहे क्लास से बाहर चला गया। लेकिन उसने मन ही मन कसम खाई:

सुमन, आज के इस अपमान का बदला मैं तुम्हें दस गुना लौटाऊँगा!

मैं अपनी ताक़त से साबित करूँगा कि असली अजगर कौन है!

क्लास से निकाले जाने के बाद आयान सीधे स्कूल के प्लेग्राउंड के एक शांत कोने में चला गया। अब कॉलेज एंट्रेंस एग्ज़ाम में सिर्फ सौ दिन बचे थे। अपनी इस हालत में अच्छे मार्क्स लाना नामुमकिन था।

आयान किसी अमीर बाप का बेटा नहीं था। उसकी माँ बचपन में ही गुज़र गई थीं और उसके पापा साल भर बाहर रहकर मेहनत-मजदूरी करते थे, ताकि आयान की पढ़ाई का खर्च उठा सकें।

कॉलेज का एंट्रेंस एग्ज़ाम ही उसकी किस्मत बदलने का इकलौता रास्ता था!

"बूम!"

तभी अचानक एक तेज़ आवाज़ हुई। आयान ने ऊपर देखा तो आसमान में एक लाल रंग की चीज़ किसी इंद्रधनुष की तरह तेज़ी से उसकी ओर बढ़ रही थी।

"यह... यह क्या है?!"

इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, वह लाल रोशनी सीधा आकर उसके माथे के बीच में समा गई।

अगले ही पल, आयान को लगा जैसे अनगिनत जानकारी का झरना उसके दिमाग में भर गया हो। उसकी आँखों के सामने अजीब-अजीब सीन घूमने लगे—

कोई विशालकाय दानव एक हथेली से पहाड़ तोड़ रहा है!

कोई नौ सिर वाला सुनहरा कौआ अपने पंख फड़फड़ाकर समुद्र में उबाल ला रहा है!

कोई तलवारबाज़ अपनी उँगलियों के इशारे से आसमान के तारे तोड़ रहा है!

"यह... यह क्या हो रहा है? क्या मुझे कोई सपना आ रहा है?"

आयान ने अपनी आँखें मलीं और सारे सीन गायब हो गए। लेकिन तभी उसके कानों में एक भारी और दमदार आवाज़ गूँजी:

"लड़के, तुम्हें कोई सपना नहीं आ रहा है। वह सब सच था!"

"कौन... कौन बोल रहा है?"

आयान ने घबराकर चारों ओर देखा, पर वहाँ कोई नहीं था। उसकी पीठ पर ठंडे पसीने की एक लकीर खिंच गई। कहीं उसे कोई भूत तो नहीं दिख गया?

तभी वह आवाज़ फिर से गूँजी: "लड़के, मैं बेइचेन का अमर दिव्य, वेई कियानशान हूँ! और तुमने मेरी तुलना एक भूत से की? मेरा अपमान है यह!"

"अमर दिव्य...? आप... आप कौन हैं?" आयान ने डरते-डरते पूछा।

"आसान भाषा में समझो, लड़के। मैं अपने दुश्मनों के जाल में फँस गया था। अपनी जान बचाने के लिए मेरी आत्मा मेरे शरीर से निकलकर इस धरती पर आ गई और सीधा तुमसे टकरा गई! तो... जब तक मैं अपनी शक्तियाँ वापस हासिल नहीं कर लेता, मुझे तुम्हारे शरीर में ही रहना होगा!"

यह सुनकर आयान सन्न रह गया। उसके दिमाग में एक ही शब्द आया—

कब्ज़ा!

अगर इस अमर दिव्य ने उसके शरीर पर कब्ज़ा कर लिया, तो यह तो मौत से भी बदतर होगा!

शायद उस आवाज़ ने आयान के विचार पढ़ लिए थे। वह फिर बोली:

"चिंता मत करो लड़के, मैं कोई दुष्ट आत्मा नहीं हूँ जो किसी के शरीर पर कब्ज़ा करूँ। मेरे तुम्हारे शरीर में रहने से तुम्हें बहुत फायदा होगा। तुम्हारी यह अजीब बीमारी ठीक करना और तुम्हें वापस स्कूल का जीनियस बनाना मेरे लिए बच्चों का खेल है!"

"आप... आपको मेरी बीमारी के बारे में कैसे पता?" आयान ने हैरानी से पूछा।

"हाहा... मैं बताना भूल गया! जब मेरी आत्मा तुम्हारे माथे में घुसी थी, मैंने तुम्हारी सारी यादें पढ़ ली थीं!"

यह सब इतना अविश्वसनीय था कि आयान को यकीन नहीं हो रहा था। वह कुछ और पूछना चाहता था, तभी दूर से एक मज़ाक उड़ाती हुई आवाज़ आई:

"ओह... तो तू यहाँ छिपा बैठा है, बदबूदार कीड़े! इस रॉकी भाई को ढूंढने में कितनी मेहनत करनी पड़ी!"

आयान ने आवाज़ की दिशा में देखा। कुछ लड़के गुस्से में उसकी तरफ बढ़ रहे थे। उनका लीडर लगभग 6 फुट 3 इंच लंबा था और उसकी मांसपेशियाँ किसी बॉडीबिल्डर जैसी थीं। वह स्कूल का सबसे बड़ा गुंडा था—रॉकी भाई!

रॉकी भाई यूथ बॉक्सिंग टीम का प्लेयर था और स्कूल में लड़ाई-झगड़े के लिए बदनाम था। आम स्टूडेंट्स उसे देखकर रास्ता बदल लेते थे।

आयान को समझ नहीं आया कि रॉकी भाई उसके पास क्यों आया है।

तभी रॉकी भाई और उसके साथियों ने आयान को घेर लिया। वह मुस्कुराते हुए बोला:

"सुन बे लड़के, युवराज खन्ना मेरा भाई है। सुना है आज तूने क्लास में उसकी बंदी सुमन से छेड़खानी की? ज़्यादा जीने का शौक नहीं है क्या?"

यह कहते हुए रॉकी भाई ने अपनी उँगलियाँ चटखाईं, जिससे कड़क-कड़क की आवाज़ आई। यह सुनकर आयान का चेहरा उतर गया। उसे यकीन नहीं हुआ कि सुमन इतनी जल्दी युवराज से शिकायत कर देगी।

"इज्ज़त से मार खा ले, समझा? अगर हाथ उठाने की कोशिश की, तो अंजाम बहुत बुरा होगा!" रॉकी भाई आयान के करीब आते हुए बोला।

अगर यह पहले वाला आयान होता, तो वह चुपचाप अपना गुस्सा पीकर मार खा लेता।

लेकिन ठीक उसी पल, वेई कियानशान की आवाज़ उसके कानों में फिर गूँजी: "छोटे आयान, अभी भी मेरी ताक़त पर शक है? रुको, मैं तुम्हें अपनी शक्ति का दस लाखवाँ हिस्सा उधार देता हूँ ताकि तुम इस छोटी सी मुसीबत से निपट सको।"

"शक्ति का... दस लाखवाँ हिस्सा? क्या यह काफी होगा?"

आयान ने मन में सोचा ही था कि अगले ही पल, उसे अपने पेट के ठीक नीचे से एक गर्म लहर उठती महसूस हुई, जो बिजली की तरह उसके पूरे शरीर में दौड़ गई। उसकी हर मांसपेशी में जैसे फौलाद भर गया हो।

ताक़त में आए इस अचानक बदलाव ने उसे एक पल के लिए यह यकीन दिला दिया कि वह एक ही मुक्के में लोहे की प्लेट तोड़ सकता है।

इस बदलाव से आयान हैरान भी था और खुश भी। उसने रॉकी भाई की तरफ उँगली उठाई और मुस्कुराते हुए कहा, "चल बे, देखते हैं कौन किसको मारता है!"

"हरामज़ादे, तू मौत को बुला रहा है!"

रॉकी भाई ने कभी नहीं सोचा था कि आयान डरेगा नहीं, बल्कि उसे ही चुनौती देगा। वह गुस्से से उछल पड़ा, अपनी मुट्ठी उठाई और सीधा आयान के चेहरे पर दे मारी।

यह मुक्का इतना ताक़तवर था कि हवा में एक तेज़ आवाज़ पैदा हुई। रॉकी भाई को पूरा यकीन था कि इस एक मुक्के से वह आयान की हड्डियाँ तोड़ देगा।

अगले ही पल, आयान ने भी हल्के से अपनी मुट्ठी आगे बढ़ाई।

"धम्म!"

दोनों की मुट्ठियाँ हवा में टकराईं। लेकिन जो हुआ, उस पर किसी को यकीन नहीं हुआ। रॉकी भाई का विशाल शरीर किसी टूटी पतंग की तरह सात-आठ मीटर दूर हवा में उड़ता हुआ ज़मीन पर जा गिरा।

दूर से देखने पर, उसकी दाहिनी मुट्ठी फट चुकी थी और हड्डी बाहर निकल आई थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसका पूरा हाथ टूट गया हो।

"श्श्श्श!"

यह सीन देखकर रॉकी भाई के साथ आए लड़कों की साँसें अटक गईं। वे जहाँ थे, वहीं पत्थर बन गए।

रॉकी भाई तो यूथ बॉक्सिंग टीम का चैंपियन था!

और आज वह एक ऐसे लड़के से हार गया, जिसे सब कमज़ोर समझते थे। क्या उनके सामने खड़ा यह आयान कोई छुपा हुआ मास्टर है जो अब तक कमज़ोर होने का नाटक कर रहा था?

तो क्या होगा कहानी में आगे?

* आयान के अंदर आई यह रहस्यमयी शक्ति उसे कहाँ ले जाएगी?

* क्या वह सुमन और युवराज से अपना अपमान का बदला ले पाएगा?

* और कौन है वह आवाज़, जो खुद को एक 'अमर दिव्य' बता रही है और उसका असली मकसद क्या है?

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