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Chapter 2

अमर साधना - Episode 2

अमर साधना

“अंधकार का पहला दानव”

घना जंगल भयावह सन्नाटे में डूब गया था।

आरव अभी भी घुटनों के बल जमीन पर बैठा था। उसके हाथ पर बना चमकता हुआ चिन्ह नीली रोशनी छोड़ रहा था। उसके भीतर अजीब ऊर्जा उफान मार रही थी।

तारा घबराकर उसके पास आई।

“आरव! तुम्हें क्या हो रहा है?”

लेकिन आरव की आँखों के सामने अभी भी वे रहस्यमयी दृश्य घूम रहे थे—

आकाश में युद्ध, टूटते पर्वत और वह विशाल काला दैत्य।

तभी…

जंगल के अंधेरे में दो लाल आँखें फिर चमकीं।

“गुर्रररर…”

एक भयानक गर्जना पूरे जंगल में गूँज उठी।

पेड़ों के पीछे से धीरे-धीरे एक विशाल दानवीय प्राणी बाहर आया। उसका शरीर काले धुएँ से ढका था, पंजे तलवार जैसे नुकीले थे और उसकी आँखों से रक्त जैसा लाल प्रकाश निकल रहा था।

तारा भय से काँप उठी।

“ये… ये क्या है?”

महागुरु अमरेश का चेहरा गंभीर हो गया।

“छाया दानव…”

दानव ने क्रोध से दहाड़ लगाई और बिजली की गति से आरव की ओर झपटा।

“सावधान!”

तारा चिल्लाई।

लेकिन इससे पहले कि दानव आरव तक पहुँचता, गुरु अमरेश ने अपना दिव्य दंड आगे बढ़ाया।

“ॐ तेजस्वि रक्षाय नमः!”

दंड से सुनहरी ऊर्जा निकली और दानव हवा में ही रुक गया।

भयंकर विस्फोट हुआ।

दानव पीछे जा गिरा, लेकिन उसकी आँखों में और भी अधिक क्रोध भर गया।

“ये साधारण दानव नहीं है…”

गुरु अमरेश बोले,

“इसे किसी अंधकारमय शक्ति ने भेजा है।”

आरव धीरे-धीरे खड़ा हुआ।

उसके शरीर में अभी भी ऊर्जा बह रही थी।

“ये मुझे क्यों मारना चाहता है?”

गुरु ने उसकी ओर देखा।

“क्योंकि तुम्हारे भीतर ‘अमर साधना’ जाग चुकी है। और अंधकार की शक्तियाँ इससे डरती हैं।”

दानव फिर गरजा।

इस बार उसके शरीर से काला धुआँ निकलने लगा और वह कई परछाइयों में बँट गया।

पूरा जंगल उन दानवीय छायाओं से भर गया।

तारा डरकर पीछे हट गई।

“इतने सारे…!”

गुरु अमरेश ने गंभीर स्वर में कहा—

“आरव, ध्यान से सुनो। तुम्हारे भीतर जो शक्ति जागी है, उसे नियंत्रित करना सीखो। अपने मन को शांत करो।”

“लेकिन मुझे कुछ नहीं आता!”

आरव घबराया।

दानव की एक छाया उसकी ओर झपटी।

उसी क्षण आरव के हाथ पर बना चिन्ह तेज चमकने लगा।

अचानक उसके चारों ओर नीली ऊर्जा का चक्र बन गया।

“क्या…!”

ऊर्जा की लहर बाहर फूटी।

धड़ाम!!

सारी दानवीय छायाएँ दूर जा गिरीं।

तारा आश्चर्य से उसे देखने लगी।

“आरव… तुमने ये कैसे किया?”

स्वयं आरव भी स्तब्ध था।

लेकिन तभी असली दानव क्रोध से दहाड़ता हुआ हवा में उछला और सीधे गुरु अमरेश पर हमला कर दिया।

गुरु ने अपना दंड उठाया, पर इस बार दानव की शक्ति पहले से कहीं अधिक थी।

धमाक्क्क!!!

भयंकर टक्कर से जमीन फट गई।

गुरु कुछ कदम पीछे खिसक गए।

दानव की आँखों में अब अजीब चमक थी, मानो उसे किसी और शक्ति से आदेश मिल रहा हो।

फिर अचानक…

जंगल में एक रहस्यमयी आवाज़ गूँजी—

“उत्तराधिकारी को जीवित मत छोड़ो…”

पूरा वातावरण बर्फ जैसा ठंडा हो गया।

गुरु अमरेश की आँखें फैल गईं।

“नहीं… क्या वो फिर से लौट आया है?”

उसी क्षण दानव ने अपने शरीर से काली ऊर्जा का विशाल गोला बनाया और उसे आरव की ओर फेंक दिया।

आरव के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था…

क्रमशः…

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