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Chapter 6

अमर साधना - Episode 6

अमर साधना

“दानव सेना का आगमन”

रात का आकाश लाल बिजली से चमक रहा था।

दूर पहाड़ों के बीच सैकड़ों लाल आँखें धीरे-धीरे जंगल की ओर बढ़ रही थीं।

हर कदम के साथ धरती काँप रही थी।

तारा भय से पीछे हट गई।

> “इतने सारे दानव…

हम उनका सामना कैसे करेंगे?”

विशाल पत्थर योद्धा अपनी तलवार जमीन में गाड़कर खड़ा हो गया।

उसकी भारी आवाज़ गूँजी—

> “स्वामी की रक्षा के लिए अंतिम क्षण तक युद्ध किया जाएगा।”

महागुरु अमरेश ने गंभीर नजरों से आरव को देखा।

> “अब तुम्हारे पास पीछे हटने का समय नहीं है।”

आरव ने अपनी नीली तलवार की ओर देखा।

उसकी धार से हल्की ऊर्जा निकल रही थी, मानो तलवार जीवित हो।

लेकिन आरव के मन में एक प्रश्न घूम रहा था—

> “क्या मैं सच में इस शक्ति के योग्य हूँ?”

तभी उसकी हथेली का चिन्ह फिर चमक उठा।

उसके सामने नीली रोशनी में नए शब्द उभरे—

> “प्रथम साधना कला प्राप्त —

दिव्य आकाश प्रहार।”

आरव की आँखों के सामने अचानक अनेक दृश्य आने लगे।

तलवार चलाने की मुद्राएँ…

ऊर्जा को नियंत्रित करने के तरीके…

और एक प्राचीन साधक, जो नीली बिजली से पूरे आकाश को चीर रहा था।

क्षणभर में सारी जानकारी आरव के मन में समा गई।

तारा हैरानी से बोली—

> “आरव… तुम्हारे चारों ओर ये चिन्ह क्या घूम रहे हैं?”

लेकिन आरव अब पूरी तरह शांत था।

उसी समय जंगल के किनारे से पहला दानव बाहर आया।

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उसका शरीर तीन मीटर ऊँचा था।

काली त्वचा…

लंबे नुकीले दाँत…

और हाथों में हड्डियों से बनी विशाल गदा।

उसके पीछे दर्जनों और दानव दिखाई देने लगे।

> “ग्ररररर!!”

उनकी गर्जना से पेड़ों की पत्तियाँ काँप उठीं।

महागुरु अमरेश ने अपना दंड उठाया।

> “तारा! रक्षा मंत्र तैयार करो!”

> “ज-जी!”

तारा ने काँपते हाथों से मंत्र पढ़ना शुरू किया।

सुनहरी ऊर्जा धीरे-धीरे उनके चारों ओर फैलने लगी।

लेकिन तभी—

पहला दानव बिजली की गति से आरव की ओर दौड़ा।

उसकी गदा हवा को चीरती हुई नीचे आई।

धड़ाम!!

जमीन फट गई।

लेकिन आरव वहाँ नहीं था।

तारा की आँखें फैल गईं।

> “वो… गायब हो गया?!”

अगले ही पल आरव दानव के पीछे दिखाई दिया।

उसकी तलवार नीली बिजली से चमक रही थी।

> “दिव्य आकाश प्रहार।”

स्विश्श!!

एक चमकदार नीली रेखा हवा में दौड़ी।

क्षणभर की शांति…

फिर—

धड़ाआआम!!

दानव का विशाल शरीर दो हिस्सों में बँट गया।

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नीली ऊर्जा का विस्फोट पूरे जंगल में फैल गया।

तारा स्तब्ध रह गई।

> “एक ही वार में…!”

लेकिन बाकी दानव और भी उग्र हो उठे।

सैकड़ों दानव एक साथ जंगल से बाहर निकल आए।

पूरा क्षेत्र अंधकार से भर गया।

महागुरु अमरेश की आवाज़ भारी हो गई।

> “ये केवल शुरुआत है…”

अचानक आसमान में फिर वही काली आँख प्रकट हुई।

इस बार उसकी मुस्कान और भी भयानक थी।

> “दिलचस्प…

उत्तराधिकारी पहले अनुमान से अधिक शक्तिशाली है।”

फिर उसकी लाल दृष्टि सीधे आरव पर पड़ी।

> “लेकिन देखते हैं…

तुम अपने प्रियजनों को कितनी देर बचा पाते हो।”

अचानक काली आँख से लाल प्रकाश निकला।

वह सीधे तारा की ओर बढ़ा।

तारा कुछ समझ पाती, उससे पहले—

उसका शरीर हवा में उठ गया।

> “आआआह्ह!!”

आरव चौंक उठा।

> “तारा!!”

लाल ऊर्जा तारा के चारों ओर जंजीरों की तरह लिपट गई।

महागुरु अमरेश का चेहरा भय से भर गया।

> “नहीं… वह उसकी आत्मा को खींच रहा है!”

आरव की आँखों में क्रोध चमक उठा।

उसकी नीली तलवार अचानक और अधिक तेज़ प्रकाश देने लगी।

और उसी क्षण…

उसके पीछे नीली ऊर्जा से बना एक विशाल दिव्य योद्धा प्रकट हुआ।

पूरा जंगल उसकी शक्ति से काँप उठा।

क्रमशः…

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