The Mysterious Locket ✅ - Episode 4
The Mysterious Locket ✅चारों तरफ कुशवाहा परिवार के सैनिक खड़े थे,
जो उन्हें लगभग कैदियों की तरह घेरकर खड़े थे।
यह देखकर सूर्यप्रताप और मनीष बेहद नाराज़ थे।
आखिर उन्हें इस तरह पहले कभी नहीं बैठाया गया था।
यह कुशवाहा परिवार सच में बहुत घमंडी हो गया था।
सूर्यप्रताप ने सख्त आवाज़ में कहा—"क्या मैं पूछ सकता हूँ कि कुशवाहा परिवार के मुखिया ने हमें यहाँ किस काम से बुलाया है? आप सीधे बात कह सकते हैं!"
उसका चेहरा गंभीर था और आँखें ठंडी।
तभी आर्यजीत हल्की हँसी के साथ बोला—"अरे, सिटी लॉर्ड अभी बैठे हुए ज्यादा समय भी नहीं हुआ… और आप पहले ही अधीर हो गए?"
फिर उसने व्यंग्य भरे स्वर में कहा—"सिटी लॉर्ड को अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए। यहाँ तो कुशवाहा परिवार है, लेकिन अगर बाहर ऐसा व्यवहार किया… तो शायद आपकी लाश अलग-अलग जगह पर मिले।"
यह साफ-साफ धमकी थी।सूर्यप्रताप का चेहरा गुस्से से भर गया।
"तुम!"
वह बेहद नाराज़ हो गया।
उधर मनीष भी चुप था, लेकिन उसे महसूस हो रहा था कि कुछ बुरा होने वाला है।
पास खड़ी अमृता मुस्कराते हुए बोली—"सब लोग शांत रहें… पहले मेरे पति की बात सुन लें। आज झगड़ा करना ठीक नहीं होगा।"
उसके होंठों पर एक अजीब-सी मुस्कान थी।
चारों तरफ खड़े सैनिकों की शक्तिशाली उपस्थिति ने वहाँ बैठे सभी लोगों को और भी चिंतित कर दिया।
सबने सोचा—चलो, देखते हैं आगे क्या होता है।
आर्यजीत ने शांत स्वर में कहा—"आज मैं दो महत्वपूर्ण बातें घोषित करना चाहता हूँ!"
वह बोला—"पहली बात—मेरी बेटी, अमायरा , को कुछ दिन पहले ड्रैगन अकादमी के उप-प्रधानाचार्य ने अपना निजी शिष्य स्वीकार किया है!"
यह सुनते ही वहाँ मौजूद सभी लोगों की आँखें फैल गईं।
उनके चेहरों पर गहरा आश्चर्य दिखाई देने लगा।
कुछ लोगों की आँखों में तो ईर्ष्या भी झलक रही थी।
ड्रैगन अकादमी उत्तरी क्षेत्र की सबसे बड़ी और शक्तिशाली शिक्षा संस्था थी, जिसे साधकों के लिए पवित्र स्थान माना जाता था।
लोग जानते थे कि अमायरा प्रतिभाशाली है,
लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी ऊँचाई तक पहुँच जाएगी।
कोई भी इस खबर पर शक नहीं कर सकता था।
क्योंकि इतनी बड़ी संस्था का नाम लेकर झूठ बोलना, पूरे परिवार के विनाश का कारण बन सकता था।
अब सभी समझ गए—आर्यजीत इतना घमंडी क्यों हो गया है।
अब उसके पास बहुत मजबूत सहारा था।भविष्य में जब अमायरा इतनी बड़ी पहचान वाली बन जाएगी,तो कोई भी कुशवाहा परिवार को नुकसान पहुँचाने की हिम्मत नहीं करेगा।
यहाँ तक कि श्युआन देश का राजा भी उसके सामने झुक जाएगा।
सूर्यप्रताप का चेहरा गंभीर हो गया। वह कुर्सी पर ढीला पड़ गया और धीरे से बोला—"ऐसी बात सच में हो गई…"
आर्यजीत ने ऊँची आवाज़ में कहा—"दूसरी बात—रुद्रांश ने वेश्यालय में जाकर हमारे परिवार की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुँचाया है!"
"इसलिए आज से मेरी बेटी अमायरा और इस व्यक्ति रुद्रांश के बीच की सगाई समाप्त की जाती है!"
"आज के बाद, हमारा कुशवाहा परिवार इस नाम को सुनना भी नहीं चाहता। जो भी इसका विरोध करेगा, उसे परिणाम भुगतने होंगे!"
उसकी आवाज़ पूरे क्षेत्र में गूँज उठी।लोगों को यह बात सुनकर ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ।
सबको पहले से ही अंदाज़ा था।
आखिर—कीचड़ में रहने वाली छोटी मछली और आसमान में उड़ने वाला असली फीनिक्स—एक साथ कैसे रह सकते हैं?
अचानक—एक ठंडी और खतरनाक आवाज़ गूँजी—
"आर्यजीत … तुम बूढ़े कुत्ते… चुप रहो!यह सुनते ही वहाँ मौजूद सभी लोग चौंक गए।
"बूढ़ा कुत्ता ?"
सबकी नज़रें तुरंत पीछे खड़े एक युवक पर टिक गईं।
उनकी आँखें फैल गईं।
"रुद्रांश !"
उसे देखकर सब हैरान रह गए।
वह वही दामाद रुद्रांश था—जिसे सनसिटी शहर का सबसे बेकार व्यक्ति माना जाता था।
लेकिन आज—उसी रुद्रांश ने सीधे आर्यजीत को "बूढ़ा कुत्ता" कह दिया!
यह देखकर सब स्तब्ध रह गए।इतनी हिम्मत उसमें कहाँ से आ गई?
क्या इसलिए कि उसकी शादी नहीं हुई… और वह पागल हो गया?
कुशवाहा परिवार के लोग गुस्से से भर गए।
उनमें से एक ने चिल्लाकर कहा—"हरामज़ादे! यह लड़का अभी तक मरा नहीं?"
"इतना ही नहीं, यह हमारे कुशवाहा परिवार में आकर हंगामा करने की हिम्मत भी कर रहा है! यह तो हद हो गई!"
कुशवाहा परिवार के सभी लोगों के चेहरे गुस्से से लाल हो गए।
उनकी आँखों में ठंडा और खतरनाक भाव दिखाई दे रहा था।
"हम्म?”
आर्यजीत का चेहरा बेहद ठंडा और क्रूर हो गया।
उसने गुस्से से भरी आवाज़ में कहा—"क्या मैंने यह नहीं कहा था कि अब तुम्हारा अमायरा से कोई संबंध नहीं है?"
"या फिर अब भी तुम्हारे मन में अमायरा के लिए कोई लालसा बाकी है?"
आज का दिन कुशवाहा परिवार के लिए खुशी का अवसर था, लेकिन यह लड़का यहाँ आकर हंगामा करने चला आया था। इससे आर्यजीत के मन में गहरा क्रोध और बेचैनी भर गई थी।
उधर अमृता का चेहरा भी बेहद खतरनाक और कठोर हो गया। उसने गुस्से से जयेश की ओर देखते हुए कहा—"क्या तुमने इसे देव पर्वत में नहीं फिंकवाया था?"
"तो फिर यह वापस कैसे आ गया?उसकी आवाज़ तेज़ और ठंडी थी। उसकी नज़र में रुद्रांश का यहाँ ज़िंदा खड़ा होना, उसके लिए सीधा अपमान था।
जयेश का चेहरा भी बेहद गंभीर और काला पड़ गया।
उसने भारी और खतरनाक आवाज़ में कहा—"हाँ, मैंने ही इसे देव पर्वत में छोड़ा था।"
"लेकिन यह लड़का नीचे वापस कैसे आ गया?"
"उस इलाके में तो बहुत सारे खतरनाक राक्षसी जानवर हैं… उसे तो निश्चित रूप से मर जाना चाहिए था!"
उसने दाँत भींचते हुए गुस्से से कहा—"धत्तेरे की! मुझे उसी समय इसे सीधे मार देना चाहिए था!"
उसकी आँखों में ठंडा क्रोध और हत्या की भावना साफ दिखाई दे रही थी।
तभी रुद्रांश ने ठंडी और तिरस्कार भरी आवाज़ में कहा—"लालसा? हँह!"
"भले ही वह घटिया औरत अमायरा खुद मेरे बिस्तर पर आकर लेट जाए… तब भी मुझे वह सिर्फ आँखों में चुभने वाली और गंदी ही लगेगी!"
रुद्रांश की यह बात सुनकर वहाँ मौजूद सभी लोगों के चेहरे अचानक बदल गए।
"यह… यह क्या सच में वही दामाद है?"ऐसा लग रहा है जैसे यह पूरी तरह कोई और इंसान बन गया हो!"
"यह तो हद से ज्यादा साहसी हो गया है! कुशवाहा परिवार को इस तरह उकसाने की हिम्मत कैसे कर सकता है?"
"क्या इसे अपनी जान की परवाह नहीं है?सबके दिलों में गहरा झटका लगा। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि रुद्रांश इतना पागल, घमंडी और बेलगाम हो जाएगा।
कुछ लोगों ने मन ही मन सोचा—"शायद यह पागल हो गया है… "बहुत संभव है कि अमायरा से शादी न होने के कारण इसका दिमाग खराब हो गया हो।"
ऐसा सोचते हुए कुछ लोगों की नज़र में रुद्रांश के लिए तिरस्कार और भी बढ़ गया।
आखिर—अमायरा तो स्वर्ग की दुलारी बेटी जैसी थी। वह उससे कैसे शादी कर सकती थी?यह सुनकर आर्यजीत और बाकी लोगों के चेहरे बेहद भयानक हो गए।
"क्या कहा तुमने? इतनी हिम्मत!उनके चेहरे गुस्से से काले पड़ गए।
"क्या तुम जीने से ऊब चुके हो?"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अमायरा का अपमान करने की!"
तभी रुद्रांश ने ठंडी आवाज़ में कहा—"हूँह!"
फिर उसने जोर से कहा—"बारह साल पहले, अगर मेरी मौसी ने तुम्हारे कुशवाहा परिवार को नहीं बचाया होता…"
"तो क्या तुम्हारा कुशवाहा परिवार आज इस दुनिया में ज़िंदा भी होता?यह सुनते ही आर्यजीत का चेहरा और ठंडा हो गया।
रुद्रांश ने आगे बढ़ते हुए ऊँची आवाज़ में कहा—
"तुम लोगों ने मुझे ज़हर दिया…""मुझे वेश्यालय में फिंकवाया…"
"साज़िश करके मेरा आत्म केन्द्र नष्ट कर दिया…"
"मेरा ड्रैगन सार-रक्त हड़प लिया…""और मुझे बेहोशी की हालत में देव पर्वत में मरने के लिए छोड़ दिया!"
उसकी आवाज़ पूरे चौक में गूँज रही थी।
फिर उसने बेहद ठंडे स्वर में कहा—"अकृतज्ञ… पागल… और निर्दयी…"
"ये शब्द तुम्हारे कुशवाहा परिवार के लिए बिल्कुल सही हैं!"
रुद्रांश एक कदम आगे बढ़ा।उसकी खतरनाक आवाज़ पूरे मैदान में गूँज उठी—"सौभाग्य से… भगवान ने मेरी जान नहीं ली…"
"लेकिन अगर मैं इस दुश्मनी का बदला नहीं लूँगा…"
"तो मेरे दिल को कभी शांति नहीं मिलेगी!!!"उसकी आँखों में भयानक ठंडक और हत्या की भावना चमक रही थी।
यह सुनते ही वहाँ मौजूद सभी लोगों के चेहरे बदल गए।
वे सब स्तब्ध रह गए।"यह क्या हो रहा है?"
"क्या सच में कुशवाहा परिवार ने अपने ही दामाद रुद्रांश के खिलाफ साज़िश की?"
"क्या सिर्फ इसलिए कि वह अमायरा से सगाई तोड़ सके?"
कुछ लोगों ने धीरे से कहा—"शायद ऐसा ही हुआ होगा…"
दूसरा बोला—"अगर सच में कुशवाहा परिवार ने ऐसा किया है… तो यह बहुत बड़ा अहसान-फ़रामोशी का काम है।"
चारों तरफ लोगों की फुसफुसाहट बढ़ने लगी।यह सुनकर आर्यजीत का चेहरा बेहद काला पड़ गया।
वह गुस्से से दहाड़ा—"बकवास बंद करो! यूँ ही भौंकना बंद करो!"
"धत्तेरे की!
कुशवाहा परिवार के बाकी लोगों के चेहरे भी गुस्से से भरे हुए थे।
उन्होंने गुस्से से कहा—"कुशवाहा परिवार ने तुम्हें पाला-पोसा…"
"और तुम ही अब हमें काटने लगे?"यह तो हद हो गई!"
तभी अमृता चीखते हुए बोली—"हरामज़ादे! तू एहसान-फ़रामोश!"
"कुशवाहा परिवार ने तुझ पर इतना उपकार किया… और तू हमारे परिवार की प्रतिष्ठा खराब कर रहा है!"
फिर उसने गुस्से में आदेश दिया—"जाओ! इस कमीने को अभी मार डालो!"
उसकी आँखों में ज़हर भरा हुआ था।
उसके मन में साफ था—यह लड़का अब मरने वाला है!
उधर जयेश का चेहरा भी बेहद डरावना हो गया।
उसने क्रूर आवाज़ में कहा—"जानवर! तू हमारे कुशवाहा परिवार पर झूठा आरोप लगाने की हिम्मत करता है?"
"तू खुद मौत को बुला रहा है!"
स्स्स्स!
अचानक—वह एक तेंदुए की तरह तेज़ी से रुद्रांश की ओर झपटा।उसकी आँखों में हत्या की भावना भरी हुई थी।
उधर रुद्रांश की आँखों में हल्की-सी ठंडी मुस्कान उभरी।
उसने शांत स्वर में कहा—"ठीक है… पहले तुमसे थोड़ा ब्याज ही वसूल कर लेता हूँ!"
उसकी नज़र अचानक बेहद तेज़ और ठंडी हो गई—
जैसे कोई तेज़ तलवार चमक उठी हो।अचानक—
चाँदी जैसी एक चमक दिखाई दी।
आर्यजीत गुस्से से पागल होकर हमला कर बैठा।
जयेश की आँखों में एक गहरी काली चमक उभरी—आज रुद्रांश को हर हाल में मरना ही था।