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Chapter 5

The Mysterious Locket ✅ - Episode 5

The Mysterious Locket ✅

अचानक एक चाँदी जैसी चमक हवा को चीरती हुई उनकी ओर आई। उसकी आँखें सिकुड़ गईं—

"ये क्या था आखिर?

उसकी तो जैसे आत्मा ही शरीर से निकलने वाली थी। स्वाभाविक प्रतिक्रिया में उसने अपने दाएँ हाथ में ताकत इकट्ठी की और पूरी शक्ति से वार कर दिया।

प्फ्फ्ट!

जयेश की पुतलियाँ सिकुड़ गईं। एक ही पल में उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी भारी चीज़ ने उसके पूरे शरीर पर ज़ोरदार प्रहार किया हो। वह कई दर्जन कदम पीछे जा गिरा।

उसके शरीर पर एक भयानक, लंबा और टेढ़ा-मेढ़ा घाव उभर आया, जो किसी कनखजूरा जैसा दिख रहा था। उस घाव से तेज़ी से खून बहने लगा।

सभी लोगों की आँखें चौड़ी हो गईं।

"ये… ये क्या हुआ?" "जयेश घायल हो गया?"

जयेश का चेहरा डर और हैरानी से भर गया। उसने काँपती आवाज़ में पूछा—"मैं… मैं घायल कैसे हो गया?"

"हम्म…?"

उसने रुद्रांश की ओर देखा, और उसका चेहरा और भी गंभीर हो गया।

रुद्रांश के होंठों पर एक ठंडी मुस्कान उभर आई। उसके हाथ में एक पुरानी, टूटी-फूटी आध्यात्मिक तलवार थी, और उसकी नोक से अभी भी खून की बूंदें टपक रही थीं।

सभी लोगों के चेहरे का रंग बदल गया।"रुद्रांश ने सच में जयेश को घायल कर दिया?"

"तुम… तुम अब साधना कर सकते हो?"

जयेश ने भर्राई आवाज़ में पूछा। उसकी आँखें सदमे से फटी रह गई थीं।

रुद्रांश के हाथ में जो तलवार थी—वही तलवार थी जिसे उसने पहले बेकार समझकर फेंक दिया था।

पिछले बारह वर्षों से रुद्रांश इसी तलवार से अपनी तलवार कला का अभ्यास करता रहा था।

वह हमेशा उसका मज़ाक उड़ाता था—उसे लगता था कि बिना आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस किए तलवार साधना करना बेकार और हास्यास्पद है।

लेकिन अब…ये कैसे हो सकता था…?

आर्यजीत और अमृता के चेहरे सख्त पड़ गए।"रुद्रांश अब साधना कर सकता है?"

"ये कब हुआ?"

वह तो जन्म से ही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस नहीं कर सकता था, उसका आत्म सागर भी खराब था—फिर वह साधना कैसे कर सकता था?

रुद्रांश ने ठंडी आवाज़ में कहा—"क्या हुआ? निराश हो गए?"

जयेश का चेहरा बेहद बदसूरत हो गया। उसका शरीर काँप रहा था और चेहरा गुस्से से मरोड़ खा रहा था।

"हरामी!"

"रुद्रांश साधना कैसे कर सकता है?"

कुशवाहा परिवार के सभी सदस्य बेहद उदास और गुस्से में दिख रहे थे।

एक काले कपड़ों वाला आदमी ठंडी आवाज़ में बोला—

"तू नीच चीज़! अपने बड़ों का विरोध करने की हिम्मत करता है? तू मौत को बुला रहा है!"

धड़ाम!

रुद्रांश ने ज़मीन पर ज़ोर से पैर पटका। उसका शरीर हल्का सा झूला और अगले ही पल वह उस काले कपड़ों वाले आदमी के सामने पहुँच गया।

उस आदमी का चेहरा तुरंत बदल गया।

लेकिन रुद्रांश उससे भी तेज़ था। एक पल में तलवार उसकी माथे पर रख दी गई। वह वहीं जम गया।

रुद्रांश मुस्कुराते हुए बोला— "मौत को बुला रहा हूँ? तो आओ… मुझे मारकर दिखाओ। मैं तो खुद चाहता हूँ कि तुम मुझे मारो।"

क्लैंग!

प्फ्फ्ट!

अगले ही पल उसका सिर शरीर से अलग होकर उड़ गया। खून फव्वारे की तरह फूट पड़ा। उसकी आँखें खुली रह गईं—उनमें असंतोष और डर साफ दिख रहा था।

रुद्रांश ने ठंडी हँसी के साथ कहा—"तुम जैसे कचरे मुझे उकसाओ मत। मैं तुम पर समय बर्बाद नहीं करना चाहता।"

उसकी घमंडी आवाज़ गूँज उठी।कुशवाहा परिवार के लोगों के चेहरे बदसूरत हो गए।

भीड़ में खड़े दर्शक भी दंग रह गए।

"क्या ये वही कुशवाहा परिवार का दामाद नहीं है?"

"जो हमेशा मज़ाक का पात्र था?" "हाँ, वही जो जन्म से साधना नहीं कर सकता था।"

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"लेकिन अब… वो न सिर्फ तलवार चलाता है, बल्कि उसने जयेश को बुरी तरह घायल कर दिया!"

सभी लोग हैरान रह गए।

अमृता का चेहरा गुस्से से भर गया। उसने जयेश की ओर देखते हुए चिल्लाकर कहा—"निकम्मे! हम तुम्हें कुशवाहा परिवार में क्यों रखते हैं?"

"तुम एक चींटी तक नहीं मार सकते—तो तुम्हें रखने का क्या फायदा?"

उसकी आवाज़ गुस्से और पागलपन से भरी थी।

उसकी नजर में रुद्रांश हमेशा कचरा था। लेकिन अब वही कचरा उनके लिए खतरा बन गया था।

जयेश गुस्से से रुद्रांश को घूरता रहा।असल में वह अमृता से पूछना चाहता था—"क्या तुमने कभी किसी अपंग को तलवार साधना करते देखा है?"

रुद्रांश ने अमृता की ओर देखते हुए मुस्कुराकर कहा—"चिंता मत करो… बहुत जल्द मैं तुम्हें भी तुम्हारे अंजाम तक पहुँचा दूँगा।"

उसकी मुस्कान देखकर अमृता का चेहरा बदल गया।

एक ठंडी सिहरन उसके पैरों से सिर तक दौड़ गई।

वह गुस्से से बोली—"घमंडी! सिर्फ तुम?"

रुद्रांश की आँखें ठंडी और निर्दयी थीं।अब वह समय बर्बाद नहीं करना चाहता था।

आज हत्या का समय आ गया था।

जयेश चिल्लाया—"मर जा, रुद्रांश !"

धम!

वह तुरंत आगे बढ़ा और हमला कर दिया।उसे हमेशा से नफरत थी कि रुद्रांश का रिश्ता अमायरा से तय था—जिसे वह बचपन से पसंद करता था।

इसी वजह से उसने रुद्रांश को अपंग बनाने की योजना में पूरी तरह साथ दिया था।

लेकिन आज…वह समझ नहीं पा रहा था कि वही अपंग अब इतना शक्तिशाली कैसे बन गया।

रुद्रांश ने शांत भाव से तलवार चलाई। उसकी तलवार ड्रैगन की तरह घूमती हुई आगे बढ़ी।

जयेश ने भाले से हमला किया—धम!

तलवार और भाला टकराए—चिंगारियाँ उड़ने लगीं।

जयेश चिल्लाया—"घोस्ट स्पीयर — स्वर्ग को तोड़ दो!"

उसने भाले से जोरदार वार किया। हवा तक मरोड़ खा गई।

लेकिन रुद्रांश ने तलवार से उस हमले को रोक लिया।

जयेश का चेहरा उतर गया—"मेरी प्रोफाउंड रैंक तकनीक भी रोक दी?"

अगले ही पल—छर्र!

खून फूट पड़ा।जयेश की बाँह कटकर हवा में उड़ गई, जैसे टोफू काट दिया गया हो।

"आह्ह्ह्ह!!!"

उसकी दर्द भरी चीख गूँज उठी। वह ज़मीन पर गिरकर तड़पने लगा।

रुद्रांश ने ठंडी आवाज़ में कहा—"तुमने मुझे वेश्याघर भेजा… और मेरा ऊर्जा केंद्र नष्ट किया!"

"आज मैं तुम्हें भी अपंग बना दूँगा!"

आर्यजीत चिल्लाया— "रुको!"

लेकिन रुद्रांश ने उसकी ओर देखा भी नहीं।

प्फ्फ्ट!

उसकी तलवार जयेश के ऊर्जा केंद्र पर गिरी।

एक पल में उसका ऊर्जा केंद्र टूट गया, और उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा ऐसे निकल गई जैसे फूटा हुआ गुब्बारा।

जयेश चीख पड़ा—"तुमने… मेरा ऊर्जा केंद्र नष्ट कर दिया?!"

उसकी आँखें खून जैसी लाल हो गईं।

रुद्रांश ठंडी मुस्कान के साथ बोला—"मैं बस तुम्हें वही दर्द महसूस करा रहा हूँ… जो तुमने मुझे दिया था।"

चारों ओर खड़े लोग स्तब्ध रह गए।"क्या ये वही रुद्रांश है?" "इतना निर्दयी… इतना क्रूर?"

तभी—धम!

एक नई शक्तिशाली आभा फूटी।

आर्यजीत ने हमला किया—लेकिन रुद्रांश की तलवार बिजली की तरह चमकी।

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धम!

आर्यजीत पीछे धकेल दिया गया।

सभी लोग दंग रह गए—"कुशवाहा परिवार का मुखिया भी पीछे हट गया?!"

आर्यजीत ने गहरी आवाज़ में कहा—"रुद्रांश … क्या हम बात कर सकते हैं?"

रुद्रांश ने शांत स्वर में जवाब दिया—"ज़रूर… लेकिन पहले मैं अमृता को मार दूँ, फिर बात करेंगे।"

अमृता का चेहरा डर और गुस्से से भर गया।लेकिन रुद्रांश की आँखों में सिर्फ ठंडी हत्या की भावना थी।

और इसी के साथ—लड़ाई और भी भयानक रूप लेने लगी… कुशवाहा परिवार के सभी लोग अब समझ चुके थे—

आज का रुद्रांश पहले वाला अपंग नहीं रहा।

"ये कैसे संभव है?!"

अमृता के लिए इस बात पर यकीन करना और भी मुश्किल हो गया। उसका चेहरा गुस्से और हैरानी से टेढ़ा-मेढ़ा हो गया था, और उसकी आँखें दुर्भावना से भरी हुई थीं। रुद्रांश का आत्म सागर तो पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था, फिर यह आदमी साधना कैसे कर सकता था?

उसके ज़िंदा बच जाने को ही पहले एक चमत्कार माना जा रहा था। आखिर उसके साथ ऐसा क्या हुआ था?

पास खड़े दर्शक भी दंग रह गए और अनायास ही गहरी साँस खींचते हुए बोले—"क्या ये अभी भी वही कुशवाहा परिवार का निकम्मा दामाद है?"

निकम्मा?

क्या ऐसा आदमी अब भी निकम्मा कहलाएगा?

बॉडी टेम्परिंग रियल्म के नौवें स्तर का एक उस्ताद—वह भी घायल हो गया?

उन्होंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार ऐसा दृश्य देखा था। क्या ऐसा हो सकता है कि रुद्रांश हमेशा से अपनी असली ताकत छिपाकर रखे हुए था?

अगर सच में ऐसा था, तो यह युवक सच में बेहद डरावना और खतरनाक था!

"दिव्य तलवार!

रुद्रांश की आँखें गहरी और गंभीर हो गईं। उसने अपनी तलवार को मज़बूती से पकड़ा। उसने ज़ोर से पैर पटका और एक भयंकर बाघ की तरह आगे झपट पड़ा। उसने आर्यजीत को आराम करने का ज़रा भी मौका नहीं दिया। लड़ाई के दौरान वह बेकार की बातें करने में समय बर्बाद नहीं करना चाहता था।

दिव्य तलवार वह तकनीक थी, जो उसे पहले उसकी बुआ ने अभ्यास करने के लिए दी थी।

भले ही वह आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस नहीं कर सकता था, लेकिन पिछले बारह वर्षों से वह लगातार दिव्य तलवार का अभ्यास करता रहा था।

तलवार की ऊर्जा और ऊर्जा शक्ति का मेल बेहद भयानक और शक्तिशाली तलवार की ताकत पैदा कर सकता था।

"धत्त तेरे की!!!"

आर्यजीत का चेहरा गुस्से से भर गया। उसने दाँत पीसते हुए कहा—"मैं तुमसे कैसे हार सकता हूँ?!"

उसने अपने ऊर्जा केंद्र में आध्यात्मिक ऊर्जा इकट्ठी की। उसकी हड्डियाँ काँपने लगीं, और उसके शरीर से गरजते हुए बादलों जैसी आवाज़ें आने लगीं। उसने पूरी ताकत के साथ एक बेहद शक्तिशाली मुक्का छोड़ा।

नौवें स्तर की आध्यात्मिक ऊर्जा चारों ओर फैल गई और दबाव बनाने लगी। उधर रुद्रांश की तलवार की चमक ज़ोर से फूटी और तेज़ी से फैलने लगी।

धम!!!

दोनों की बेहद शक्तिशाली ताकतें आपस में टकराईं। आध्यात्मिक ऊर्जा चारों ओर फैल गई, जैसे दोनों की शक्तियाँ एक-दूसरे को निगलने की कोशिश कर रही हों।

लेकिन रुद्रांश की उफनती हुई तलवार ऊर्जा और भी ज़्यादा ताकतवर थी। उसने धीरे-धीरे आर्यजीत के हमले को निगल लिया और उसे खत्म कर दिया।

प्फ्फ्ट!

आर्यजीत का चेहरा पीला पड़ गया। उसने मुँह से खून की एक तेज़ धार उगली और पीछे की ओर उड़ता चला गया।

धम!

रुद्रांश मुस्कुराया। उसने ज़ोर से पैर पटका और आगे की ओर झपटा। उसी समय उसने अपने बाएँ हाथ से एक ज़ोरदार मुक्का मारा।

आर्यजीत की आँखें ठंडी हो गईं। उसने पीछे की ओर हाथ घुमाकर उस वार को रोकने की कोशिश की।

धम!

खून फिर से बाहर उछल पड़ा।आर्यजीत एक बार फिर दर्द से चीख उठा और कई दर्जन कदम पीछे हट गया।

उसकी पूरी बाँह काँप रही थी, और उसका चेहरा अविश्वास से भरा हुआ था।

"उसका शारीरिक शरीर इतना मजबूत कैसे हो सकता है?वह मन ही मन यही सोच रहा था।

"पितामह ।

कुशवाहा परिवार के लोग जोर से चिल्ला उठे। इसके बाद उनके चेहरे गुस्से से भयानक हो गए और वे चिल्लाने लगे—"दरिंदे! तुम मौत को बुला रहे हो!”

कुशवाहा परिवार के सभी सदस्य गुस्से से पागल हो गए और तुरंत हमला करने के लिए आगे बढ़ गए। उनकी नजर में रुद्रांश तो बस उनके कुशवाहा परिवार का एक बेकार दामाद था।

फिर वह इतना घमंडी कैसे हो सकता था?

रुद्रांश ने उन्हें देखते हुए ठंडी आवाज़ में कहा—

"जब तुम लोग मेरा मज़ाक उड़ाते थे और मुझे बेइज्जत करते थे… तब बहुत खुश होते थे, है ना?"

यह कहते हुए उसका पूरा चेहरा विकृत हो गया। उसने एक डरावनी मुस्कान के साथ कहा—"अच्छा… तो अब सबको मारने का समय आ गया है!"

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