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Chapter 16

The Mysterious Locket ✅ - Episode 16

The Mysterious Locket ✅

रुद्रांश ने ठंडे स्वर में कहा—"अब खत्म!

उसने जमीन पर जोर से पैर पटका, तलवार को कसकर पकड़ा, और तिरछा वार किया।

चौथा बुजुर्ग ने अपना भाला कसकर पकड़ लिया।

उसका चेहरा गुस्से से विकृत हो गया।वह कई बार गरजा, और उसका भाला अजगर की तरह रुद्रांश की ओर दौड़ा।

रुद्रांश ने घूमकर अपनी दूसरी पकड़ मजबूत की और अचानक तलवार को नीचे दबाया।

धड़ाम!

एक गहरी आवाज गूंजी, आध्यात्मिक प्रकाश और तलवार ऊर्जा चारों ओर फैल गई।उसने तुरंत एक और प्रहार किया।

चौथा बुजुर्ग चिल्लाया—"कमबख्त!"

अब वह अपना भाला भी संभाल नहीं पाया।भाला उसके हाथ से छूटकर दूर उड़ गया।

रुद्रांश मुस्कराया और तिरस्कार से बोला—"लगता है प्रताप परिवार इतना खास भी नहीं है।"

अचानक…उसके शरीर से तलवार ऊर्जा तूफान की तरह फूटने लगी।चौथा बुजुर्ग सावधान नहीं था, और उसका चेहरा डर से बिगड़ गया।

वह कई दर्जन कदम पीछे फेंक दिया गया।

उसे यकीन नहीं हो रहा था—यह लड़का इतना शक्तिशाली कैसे हो सकता है?

रुद्रांश ने एक और वार किया।लाल तलवार ऊर्जा ने सब कुछ ढक लिया।आसपास की हवा जैसे टूटने लगी।

चौथा बुजुर्ग की आंखों में निराशा भर गई।

वह जोर से चिल्लाया—"हरामज़ादे! अमृता , तुम दुष्ट औरत!!!"

छपाक!

रुद्रांश का चेहरा ठंडा हो गया।एक ही वार में—चौथे बुजुर्ग का सिर उड़ गया।

खून चारों ओर फूट पड़ा।

रुद्रांश ठंडे स्वर में बोला—"मरने के बाद भी परेशानी कर रहा है।

कुछ क्षण बाद, उसने चौथे बुजुर्ग की कियानकुन अंगूठी उठा ली और तुरंत वहां से गायब हो गया।

इसी समय…प्रताप परिवार के आंगन में, जो रोशनी से भरा था—

धड़ाम! धड़ाम! धड़ाम।

एक-एक करके विशेषज्ञ बाहर निकल आए।उनके चेहरे बेहद बदसूरत हो गए थे।

"धिक्कार है!"

"किसने यह किया?"

एक व्यक्ति बोला—"हम्म… क्या यह रुद्रांश हो सकता है?जब उन्होंने चौथे बुजुर्ग और बाकी लोगों की लाशें देखीं, तो उनके चेहरे गंभीर हो गए।

उनकी आंखों में हत्या की इच्छा भर गई।

उन्हें शक हुआ—यह काम रुद्रांश का ही है।

क्योंकि मरने से पहले चौथे बुजुर्ग ने कहा था"अमृता , तुम दुष्ट औरत।" यह साफ संकेत था कि अमृता ने रुद्रांश को उकसाया था।

एक बुजुर्ग गरजा—"उसे खोजो! हर हालत में खोजो! वह इसी कबीले में है!"

एक मध्य-उम्र का आदमी, जिसकी आंखों में हत्या की चमक थी, बोला—"उसने मेरी बेटी सनाया को मार दिया… उसे छोड़ा नहीं जाएगा!"

"मैं उसे टुकड़े-टुकड़े कर दूंगा!"

वह कोई और नहीं—सनाया का पिता — महेश था।

वह भी नौवें स्तर का विशेषज्ञ था।

रुद्रांश अभी भाग ही रहा था कि उसे पकड़ लिया गया।

चारों ओर से प्रताप परिवार के विशेषज्ञ उतर आए।

उनकी आंखों में भयानक हत्या की चमक थी।

वे चिल्लाए—"छोटे चोर! हमारे प्रताप परिवार में घुसकर उपद्रव करने की हिम्मत कैसे हुई?"

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रुद्रांश हंसा—"प्रताप परिवार की याददाश्त सच में कमजोर है।"

"तुम लोगों ने ही मुझे मारने के लिए लोगों को भेजा और मेरा वांटेड नोटिस लगाया था।"

"क्या वह तुमने किया था… या तुम्हारे कुत्तों ने?"

भीड़ गुस्से से कांप उठी।उन्हें बेहद अपमान महसूस हुआ।

महेश गरजा—"दरिंदे! तुमने मेरी बेटी को मार दिया — अब मर जाओ!"

वह बिना रुके सीधे हमला कर बैठा।

लेकिन…रुद्रांश शांत था।

उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी।

उसने जोर से पैर पटका और पलक झपकते ही महेश के सामने पहुंच गया।

महेश की आंखें फैल गईं।उसकी पुतलियां सिकुड़ गईं।

छपाक!

एक तलवार वार—सीधा उसके माथे में घुस गया।

एक झटके में—उसका सिर उड़ गया।

खून फूट पड़ा।

एक बुजुर्ग चिल्लाया—"तुम मौत को बुला रहे हो!"

उसने तुरंत मुक्का मारा।रुद्रांश ने घूमकर तलवार नीचे दबाई।

ठनन्!

तलवार ऊर्जा नीचे गिरी।

धड़ाम!

मुख्य बुजुर्ग पीछे जा गिरा।

वह जोर से चिल्लाया"सब एक साथ हमला करो!"

"इसे जिंदा मत छोड़ो!"अगर यह बच गया, तो हमारे प्रताप परिवार के लिए विनाश बन जाएगा!"

तुरंत—सभी बुजुर्ग एक साथ हमला करने लगे।

उनकी आंखों में भयानक हत्या की आग थी।

रुद्रांश की आंखें ठंडी हो गईं।अब उसके मन में केवल एक ही विचार था मारना।

धड़ाम!

उसके चारों ओर लाल तलवार ऊर्जा घूमने लगी।वह रात में मृत्यु के देवता जैसा दिख रहा था।

उसकी आंखें खून जैसी लाल हो गई थीं।उसके शरीर से एक धीमी दहाड़ निकल रही थी।

उसके भीतर—क्रूरता और हत्या की इच्छा मिल चुकी थी।

एक के बाद एक तलवार वार होने लगे।

हर वार के साथ—एक सिर उड़ता गया।

हर हत्या के साथ—उसकी तलवार ऊर्जा और मजबूत होती गई।

जैसे उसका खून उबल रहा हो।हत्या उसे उत्तेजित कर रही थी।

उसकी तलवार—खून और हत्या से पैदा हुई तलवार थी।

इसी बीच—एक गहरी आवाज गूंजी।एक सफेद कपड़ों वाला बूढ़ा धीरे-धीरे नीचे उतरा।

उसका चेहरा बेहद गंभीर था।उसकी आभा बेहद डरावनी थी।

वह था—प्रताप परिवार का मुखिया — नरपति ।

उसने आंखें सिकोड़कर रुद्रांश को देखा—"तुम..."

उसी समय—रुद्रांश के होंठों पर एक खतरनाक मुस्कान आई।

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उसने जोर से पैर पटका—और तलवार खींच ली!

प्रताप परिवार के मुखिया नरपति की नजरें बेहद ठंडी थीं।

जैसे ही उसने रुद्रांश को आते देखा, उसके अंदर असीम क्रोध भर गया और उसकी आँखों में बर्फ जैसी ठंडक चमक उठी।

उसकी साधना स्पिरिट व्हील रियल्म में थी।

"यह लड़का सिर्फ शक्ति मूवमेंट रियलम में है, फिर भी मुझ जैसे स्पिरिट व्हील साधक को चुनौती देने की हिम्मत करता है?"

"क्या यह मौत को बुला रहा है?"

नरपति ने कभी सोचा भी नहीं था कि यह छोटा सा लड़का उनके प्रताप परिवार पर रात में हमला कर देगा।

"इसे इतनी हिम्मत किसने दी?"मारो!

उसके दिल में हत्या की इच्छा लगातार बढ़ती जा रही थी।यही लड़का था जिसने प्रताप परिवार को श्वेत राज्य में मजाक बना दिया था।

धड़ाम!

नरपति ने तुरंत अपनी भुजाएँ फैलाईं। वे दो भयानक तलवारों जैसी लग रही थीं।उसने जोर से मुक्का मारा और जन्मजात आध्यात्मिक ऊर्जा छोड़ दी।

"अत्यंत शक्तिशाली युद्ध मुक्का!उसके मुक्के के गुजरते ही हवा फटने लगी। उसकी ताकत इतनी भयावह थी कि अभी तक सभी बुजुर्गों के संयुक्त हमले से भी ज्यादा शक्तिशाली थी।

"अच्छा समय है!"

रुद्रांश बिल्कुल नहीं डरा।उसकी आँखों में उग्र उत्साह चमका, और उसके शरीर से जबरदस्त तलवार ऊर्जा फूट पड़ी।

धड़ाम!

टकराव की आवाज इतनी तेज थी कि कान गूंज उठे।

आध्यात्मिक ऊर्जा और तलवार ऊर्जा टकराकर टूट गई।

"क्या? मेरी आध्यात्मिक ऊर्जा टूट गई?" नरपति की आँखें सिकुड़ गईं, जैसे जहरीले साँप की हों।

एक साधारण चींटी ने उसकी ऊर्जा तोड़ दी थी।

असल में, स्पिरिट व्हील रियल्म के साधक की ऊर्जा से दिव्य गैंग नाम की एक ढाल बनती है, जो रक्षा करती है।

लेकिन रुद्रांश की तलवार साधना और शक्ति मिलकर उसे लगभग स्पिरिट व्हील रियल्म के बराबर बना रही थी।

"धत्त!"

"यह लड़का आखिर कितना ताकतवर है?!प्रताप परिवार के लोगों के चेहरे ऐसे थे जैसे वे किसी अंतिम संस्कार में आए हों — बेहद उदास और डर से भरे।

लेकिन रुद्रांश रुका नहीं।

उसने जोर से जमीन पर पैर पटका, और उसका शरीर तुरंत आगे बढ़ा।तलवार ऊर्जा दबाव बनाते हुए नीचे गिरी।

छन्न!

एक तेज रोशनी चमकी — जैसे सुबह की पहली किरण।

नरपति पीछे हट गया।उसकी आँखों में हत्या की चमक और बढ़ गई।

उसके शरीर पर एक तलवार का घाव बन गया।

"हरामी! तूने मुझे घायल करने की हिम्मत कैसे की? मैं तुझे मार डालूँगा!"

वह गुस्से से चिल्लाया।रुद्रांश ने ठंडी नजर से उसे देखा और पागलों की तरह हमला जारी रखा।

"बूढ़े आदमी, उम्मीद है यह लड़ाई जल्दी खत्म न हो!"

"क्या? नरपति का चेहरा बदसूरत हो गया।

"घमंडी!"धड़ाम! धड़ाम! धड़ाम!

दोनों के बीच भयंकर लड़ाई शुरू हो गई।तलवार ऊर्जा खून के समुद्र जैसी बन गई।

रुद्रांश ने तलवार नीचे की ओर घोंप दी। नरपति मुश्किल से पीछे हटकर बच पाया।

तभी रुद्रांश ने बाएँ हाथ से मुक्का मारा।धड़ाम!

तेज धमाका हुआ। नरपति कई फीट पीछे उड़ गया।

उसकी मुट्ठियों में तेज दर्द होने लगा।

वह पूरी तरह हैरान था।"इसके मुक्के इतने सख्त कैसे हैं? क्या इसने शरीर साधना भी की है?"

उसकी आँखें फैल गईं।"यह आखिर किस तरह का राक्षस है?"

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