कोई मिल गया ( koi mil gaya ) - Chapter 4
कोई मिल गया ( koi mil gaya )स्वेता इस वक्त घर पर ही मौजूद थी स्वेता दिवार पर लगी घड़ी को देखें जा रही थी उसके कदम कभी दरवाजे के पास जाते तो कभी वापस उस छोटे से हाॅल में आ जातें रूद्रज आराम से सोफे पर बैठा अपना फोन देख रहा था।
वही अंशिका भी परेशान नजर आ रही थी झलक अब तक घर पर नहीं आई थी तभी सुनिता भी खाना लेकर झलक के घर आ जाती है वो स्वेता को इतना परेशान देखकर कहती है " क्या झलक अब तक नहीं आई ' ।
स्वेता परेशानी से कहती है " नहीं, मुझे लगता है हमें वहाँ चलना चाहिए तभी बाहर से झलक अंदर की तरफ आती है उसके कमर तक आते बाल बिखरें हुए थे जिससे उसका चेहरा थोड़ा सा नजर आ रहा था उसकी आंखे खुन की तरह लाल हो रखी थी वो चिखे मार मार कर रोना चाहती थी पर रो भी नहीं पा रही थी इस वक्त उसके जहन में ऐसा ख्याल आ रहा था जैसे उसका इस दुनिया में उसके सिवा कोई है भी नहीं अगर वो रोई तो कोई चुप करवाने वाला भी उसको दुर दुर तक दिखाई नहीं दे रहा था।
झलक को देखकर स्वेता एक गहरी सांस लेती है वो झलक की तरफ आती है झलक अपने हाथ में पकड़ा कलश अपने अपने साथ लिए कमरे की तरफ बढ़ जाती है स्वेता उसको देखकर बोली " झलक आप, आप नहा लिजीए हम आपके लिए खाना लगाते हैं ' ।
झलक स्वेता को देखती है और फिर उसकी नजरें सुनिता पर चली जाती है वो धिरे से कहती है " मुझे खाने का मन नहीं है आप सब खा लिजीएगा, मुझे सोना है ' इतना कहकर वो वैसे ही गर्दन झुकाए अपने कमरे में चली जाती है ओर दरवाजा बंद कर लेती है रूद्रज सोफे पर बैठा तिरछी नजरों से झलक को देख रहा था।
स्वेता परेशानी से कहती है " इसने कल से कुछ नहीं खाया है, सुनिता भी उसके लिए परेशान नजर आ रही थी किसी का खाने का मन नहीं था रूद्रज को छोड़कर स्वेता और अंशिका एक कमरे में सौ जाती है जो रागिनी का था एक कमरा और बचा था जिसमें रूद्रज सोने वाला था रूद्रज थोडा़ सा खाना खाता है वैसे तो वो भी नहीं खाना चाहता था पर उसका खाना जरूरी था अगर वो खाना नहीं खाता तो उसकी तबियत खराब हो जाती थी इसलिए वो थोड़ा सा खाना खा लेता है।
वही झलक अपने रूम में थी उसने शावर नहीं लिया था वो अब भी अपने हाथ में रागिनी का अस्थी कलश लेकर बैठी थी उसकी आंखै वैसे ही लाल थी और वो एक बार भी उनको झपका नहीं रही थी उसको देखकर लग रहा था वो आंखे झपकाना ही नहीं चाहती हो दैर रात बैठे बैठे उसकी आंखे लग जाती है वो मुश्किल से एक घंटा ही सोती है कि उसकी आंखे वापस खुल जाती है।
उसकी आंखे बहुत बुरी तरह जल रही थी जिससे उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे झलक अपने हाथ में पकड़ा कलश देखती है फिर उसको अपने सिने से लगा लेती है और आंखे बंद कर लेती है अब जाकर उसकी सिसकियां निकलना शुरू होती है और वो फुट फुट कर रोने लग जाती है इतनी देर तक जो उसके दिल पर बिती थी उसको सिर्फ वही समझ सकती थी।
आंखों से बहते आंसुओं के साथ उसका मन कुछ हल्का हो रहा था वो चार से पांच घंटे तक रोती रहती है उसका रोना तब रूकता है जब उसके दरवाजे पर नोक की आवाज आती है वो अपने आंसू पोंछती है ओर कलश को टैबल पर रखती है और दरवाजे की तरफ जाती है।
दरवाजा खोलते ही उसकी नजर सामने स्वैता पर जाती है झलक की हालत देखकर स्वेता को उसके लिए बहुत बुरा लगता है वो झलक को देखकर आंखों में नमी लिए उसके चेहरे पर हाथ रखते हुए कहती है " झलक बच्चा हम जानते हैं माँ को खोने का दुख क्या होता है, पर बच्चा रागिनी जब आपको ऐसे देख रही होगी तो उसको बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा क्या हालत बना रखी है आपने और दो वक्त से आपने खाना तो क्या पानी का एक बुंद नहीं पिया है बच्चे ऐसा नहीं करते हैं।
रागिनी की बात सुनकर झलक खुद को रोक नहीं पाती है और वो रागिनी के गले लग जाती है उसकी आंखों से एक बार फिर आंसू वैसे ही गिरने लग जाते हैं स्वेता कि आंखों में भी आंसू आ जातें हैं उसको भी बहुत बुरा लग रहा था पर वो कहते हैं ना अपने सर पर जो जिम्मेदारी होती है उसको निभाने के लिए ना जाने कितने जज्बात हमें हमारे सिने में दफन करने पड़ते हैं और रागिनी के साथ भी वही था रागिनी स्वेता को झलक की जिम्मेदारी सौंप कर गयी थी वो अपने आंसू पोंछकर झलक को खुद से अलग करते हुए कहती है " बेटा इधर देखो देखो क्या हालत कर ली है आपने अपनी, रागिनी आपको ऐसे देखेगी तो उसको अच्छा लगेगा क्या !
झलक का गला रोने से बार बार रूक रहा था उसकी सांस ऊपर निचे हो रही थी उसको बोलने में कठिनाई हो रही थी पर वो फिर भी स्वेता से कहती है " उन्होंने कहा था वो मुझे छोड़कर नहीं जाएगी, ।
जाना ना जाना हमारे हाथ में नहीं है झलक अगर हमारे हाथ में हो तो हम किसी को ना जाने दे , भगवान् की जो मर्ज़ी होती है उसके आगे हमें झुकना पड़ता है बच्चे, और तुम्हारी लाइफ तो अभी शुरू हुई है तो तुम ऐसे खुद को टुटने नहीं दे सकती बच्चे संभालो खुद को चलो जाओ नहाकर आओ हम तुम्हारे लिए नाश्ता लगा रहें हैं जाओ, रागिनी झलक को वाशरूम के पास लेकर आते हुए कहती है झलक अंदर चली जाती है स्वेता एक गहरी सांस लेती है और उस कलश को देखने लग जाती है फिर से बाहर चली जाती है।
शाम कै वक्त झलक बाहर खडी़ अपने छोटे से घर को देख रही थी वो लोग मुंबई जा रहे थे बाहर दो गाडीयां उनका इंतजार कर रही थी झलक जी भर कर अपने घर को देखने के बाद सुनिता के गले लग जाती है सुनिता और राजेश उसके लिए उनकै परिवार के जैसे ही थे वो हमेशा उनके साथ खड़े रहते थे झलक सुनिता से अलग होकर उनको घर की चाबी देतें हुए कहती है " मेरे घर का ख्याल रखना आंटी ' सुनिता चाबी पकड़ हा में सर हिला कहती है " और आप अपना ख्याल रखना बच्चे ' ।
झलक हा में सर हिला देती है और वापस एक बार अपने घर को देखती है जहाँ उसकी उसके माँ संग यादें मौजूद थी जो उसकी आंखों के सामने बारी बारी आए जा रही थी झलक की आंखे नम होने लगी थी पर जैसे तैसे वो खुद कौ संभालती है स्वेता और अंशिका दुसरी कार में बैठ गए थे झलक को रूद्रज के साथ कार में बैठना था रूद्रज कार के पास ही खड़ा था वो दरवाजा खोलता है झलक बिना उसको देखें कार में बैठ जाती है रूद्रज भी अब दुसरी तरफ जाकर बैठ जाता है और कार वहाँ से एयरपोर्ट के लिए निकल जाती है।
पुरे रास्ते ना रूद्रज ने झलक से बात करने की कोशिश की और ना ही झलक ने रूद्रज की तरफ देखना जरूरी समझा दोनों एक दूसरे के लिए बिल्कुल अंजान थे पर दोनों अब एक बंधन में बंध गए थे और शुरुआत कैसे होगी इनकी यह आगे की कहानी में पता चलेगा ' ।
मुंबई रात आठ बजे का वक्त
एक वाइट कलर का विला जो ज्यादा बड़ा भी नहीं था ज्यादा छोटा भी नहीं वो विला तिन मंजिला था चौहान खानदान एक नामी खानदान है इनका खुद का बिजनेस है जिसकी शुरुआत कर्णसिंह चौहान ने की थी और अब इस बिजनेस को इनके बेटे हर्ष वर्धन चौहान संभालते है पर जल्द ही यह अपने बडे़ बेटे तन्मय चौहान को बिजनेस हैंडओवर करने वाले है।
कर्णसिंह चौहान और इनकी वाइफ स्वर्णा चौहान इनके एक बेटा हर्ष वर्धन बेटी सुप्रिया
हर्षवर्धन चौहान वाइफ स्वेता चौहान
इनके दो बेटे और एक बेटी है
तन्मय चौहान बड़ा बेटा " जो चौहान ग्रुप का सिइओ और बिजनेस का धुरंधर , और सिंपल शांत स्वभाव वाला व्यक्तित्व !
अंशिका चौहान ' परिवार की सबसे लाड़ली और शांत चुलबुली स्वभाव वाली लड़की।
रूद्रज चौहान " इनका क्या कहे जितना शरीफ ये दिखाई दे रहे हैं उतने है नहीं आवारा, नशे पते में धुत रहने वाला एट्टीट्यूड का क्या ही कहे सब झुकने पर आ जाए पर मजाल है यह बंदा किसी की बात सुन ले शिवाय हर्षवर्धन चौहान के , जिनकी बात इनके लिए पत्थर लकीर है।
पर कभी कभी यह उनकी बात टालने में सकोंच नहीं करतें हैं।
आगे के किरदार आप आगे पढ़ते जाओगे।
चौहान विला के सामने कार आकर रूकती है जिसमें से स्वेता और अंशिका बाहर आते है दोनों जल्दी अंदर चले जाते हैं झलक का ग्रह प्रवेश जो करवाना था झलक और रूद्रज अभी तक पहुंचे नहीं थे कुछ वक्त में उनकी भी कार आकर विला के सामने रूक जाती है।
रूद्रज झलक की तरफ देखता है जो सो चुकी थी वो बिना कुछ कहे गाडी़ से निकल जाता है ड्राइवर रूद्रज को देखता है फिर झलक को जो अब भी सो रही थी रूद्रज ने उसे उठाने की कोशिश भी नहीं कि थी ' रूद्रज ड्राइवर को इशारा करता है जिसे समझकर ड्राइवर झलक को आवाज लगाते हुए कहता है " मैंम,, मैंम घर आ गया है ' झलक उसकी एक आवाज में ही उठ जाती है वो अपनी नजरें घुमाकर विला की तरफ देखती है और हा में सर हिला गाड़ी से उतरती है रूद्रज बाहर ही खड़ा था उसके हाथ में उसका फोन था जिसको स्क्रोल कर रहा था।
झलक उसके पास जाकर खडी़ हो जाती है रूद्रज उसको एक नज़र देखता है पर झलक अब भी उसकी तरफ नहीं देखती जिसे देखकर रूद्रज मुठ्ठी कस लेता है और आगे बढ़ जाता है झलक उसके पिछे चली जाती है वो दरवाजे पर पहुंचती है कि एक आवाज उनके कानों में आती है " रूकजा छोरे,, बहु की आरती करनी है ' ।
तो मैं कौनसा आपको बहु नज़र आ रहा हू मुझे क्यों रोक रही है आप ' रूद्रज सामने बैठी अपनी दादी को देखता है जो उनको देखकर सोफे से उठ गयी थी स्वर्णा का मुह बन जाता है " छोरे कभी तो सिधे मुह बात कर लिया कर ' ।
मैने सिधे मुह ही जवाब दिया है दादी आपको इसकी आरती उतारनी है आप उतारो मुझे कपड़े चेंज करके बाहर जाना है ' तभी स्वेता अपने हाथ में आरती का थाल लेकर आ जाती है वो रूद्रज को आंखे दिखाते हुए कहती है " चुपचाप यही खड़े रहो तुम ' रूद्रज अब कुछ नहीं कहता है।
स्वेता झलक की आरती उतारती है और उसका ग्रह प्रवेश करवाती है उनके अंदर जाते ही रूद्रज तुंरत ऊपर की तरफ चला जाता है झलक स्वर्णा के पैर छुती है स्वर्णा उसको आशिर्वाद देते हुए कहती है " सदा खुश रहो बच्चे ' ।
आप तो पहले से बहुत ज्यादा खुबसूरत हो गई हो ' झलक हल्का सा मुस्कुरा देती है तभी वहाँ पर हर्षवर्धन भी आ जाते हैं और झलक को देखकर वो मुस्कुराते हुए कहते हैं " झलक आ गयी आप ' झलक पलटकर उनको देखती है और हर्षवर्धन के पैर छुती है हर्षवर्धन उसको आशिर्वाद देते हैं और झलक का सर सहलाते हुए कहते हैं " हमें रागिनी के बारे में पता चला, बहुत दुख हुआ सुनकर पर आप कभी खुद को अकेला मत समझना अब यह परिवार आपका भी उतना है जितना बाकी बच्चो का है।
झलक का सर झुक जाता है और आंखों में नमी छा जाती है कुछ वक्त बाद रूद्रज ब्लैक पैंट और ब्लैक टिर्शट पहनने बाहर आता है उसके कान से उसका फोन सटा हुआ था और वो बात करते हुए जा रहा था जब उसकी नजर झलक पर जाती है तो उसके कदम धिरे हो जाते हैं अब भी सब उसकी तरफ देख रहे थे पर झलक ने अपनी नजरें तक नहीं उठाई थी जिसे देखकर रूद्रज गुस्से में वापस मुठ्ठी कस लेता है।
तभी हर्षवर्धन कहते हैं " रूद्रज आप आज भी बाहर जा रहे हो आपकी शादी हो गयी है अब '
रूद्रज कान से फोन हटाता है ओर कट कर पोकेट में डालते हुए कहता है " फिर क्या कर्ण सिंह शादी होने के बाद घर पर रहना जरूरी तो नहीं है ना और है भी तो मैं यह नहीं मानने वाला मेरे दोस्त का बर्थडे है में वहा जा रहा हु ' इतना कहकर रूद्रज बाहर चला जाता है।
उसके जाने के बाद झलक अपना चेहरा ऊपर उठाती है कर्णसिंह दरवाजे को देखते हुए कहते हैं " कभी कभी तो लगता है यह लड़का हमारा है ही नहीं हमारे घर के बाकी बच्चे कभी किसी बात से मना नही करते पर यह लड़का इसको बात सुनना नहीं अपना करना है हमेशा ' ।
आप क्यों उसके पिछे पड़तै हो बच्चा है अभी वो इस उम्र में पार्टी ना करे तो कब करेगा ?
तुम रहने ही दो यह बिगडा़ ही इस वजह से है पार्टी के बिना क्या इसको खाना हजम नही होता है , और बच्चा नहीं है वो बच्चे का बाप बनने की उम्र आ गयी है उसकी अब ' ।