कोई मिल गया ( koi mil gaya ) - Chapter 5
कोई मिल गया ( koi mil gaya )चलो भाभी आपको मैं घर दिखाती हु ' अंशिका महक को देखकर कहती है महक स्वेता की तरफ देखती है तो स्वेता हा में सर हिला देती है महक उठकर खडी़ हो जाती है और अंशिका के साथ चली जाती है।
उनके जाने के बाद स्वेता स्वर्णा को देखकर कहती है " माँ रूद्रज ने शादी कै लिए कंडीशन रखी थी में आपको बताना भूल गयी '
यह तो हमें ही लग रहा था कि यह लड़का इतनी आसानी से शादी के लिए मान कैसे गया खैर क्या शर्त रखी है इसने? कर्णसिंह कहते हैं
हम झलक कि शादी तन्मय से करवाना चाहते थे आपको पता भी है यह जिसके लिए हम वहाँ गये थे, पर जाते ही रागिनी की कंडिशन और उसने जो हमसे कहा तो हम शादी के लिए मान गए अगर तन्मय यहाँ होते तो हम रूद्रज से झलक की शादी ना करवाते जब हमने रूद्रज को कहा तो उन्होंने मना कर दिया था पर जब हर्षवर्धन ने कहा तो उन्होंने शर्त रखी कि " वो यह शादी कंटिन्यु नहीं करेंगे अगर यह किसी की आखिरी इच्छा है तो वो उसका मान रख सकते हैं पर वो यह शादी कंटिन्यु नहीं रखेगें एक महिने बाद जब तन्मय वापस आ जाए तो झलक और तन्मय की शादी करवा दी जाए।
यह लड़का पागल हो गया है क्या ? कर्णसिंह स्वेता की बात सुनकर कहते हैं हम जबरदस्ती तो नहीं कर सकते ना पापा उनके साथ आप भी जानतें हो वो उस लड़की से प्यार करते हैं तो हमने भी हा कह दिया उनको ' ।
पर झलक का क्या बेटा जब उनको पता चलेगा तब पहले उनकी माँ और अब रूद्रज भी उनके साथ,,, हर्षवर्धन कहते हैं यह बात स्वेता को भी परेशान कर रही पर उस वक्त वह कुछ कह भी नहीं सकती थी अगर तन्मय को वो बुलाते तो वो एक दिन बाद आता और रागिनी के पास इतना वक्त नही बचा था।
वही अंशिका झलक को घर दिखा रही थी इस वक्त दोनों उसके रूम में थे अंशिका रूम बहुत खुबसूरत था उसने जगह जगह पैंटिग बनाकर रखी हुई थी जिससे पता चल रहा था उसको पैंटिग बनाने का कितना शौक है
आपको मेरा कमरा कैसा लगा ' अंशिका कहती है झलक जो उसके कमरे को देखने में खोई हुई थी उसकी आवाज सुनकर उसकी तरफ पलटती है और धिरै से कहती है " अच्छा है ' ।
अंशिका इतने में खुश हो जाती है पर फिर तुंरत मुंह बनाते हुए कहती है " पर मुझे ज्यादा पसंद मुझे ना रूद्र का कमरा पसंद है पर वो इतना जिद्दी हैं कि ना तो उसने मुझे वो कमरा लेने दिया और ना ही कभी अपने कमरे में किसी को जाने देता है में तो हमेशा सोचती थी कि शादी के बाद वो अपनी वाइफ को कमरे में घुसने देगा कि नहीं, पर लगता नहीं वो आपको मना करेगा !
झलक उसकी बात बहुत अच्छे से सुन रही थी पर कहती कुछ नहीं है वो वापस कमरे को देखने लग जाती है कुछ वक्त बाद हर्षवर्धन भी घर आ गए थे स्वेता किचन में सबके लिए खाना बना रही थी वो अंशिका और झलक दोनों को खाना खाने के लिए बुलाती है उनके घर पर दो सर्वेंट थे वो भी साफ सफाई के लिए खाना स्वेता खुद बनाती थी उसको नहीं पसंद था कोई और उसके परिवार के लिए खाना बनाए और वो बैठी रहें।
झलक अंशिका के साथ आती है वो देखती है स्वेता अकेले ही डायनिंग टैबल पर खाना रख रही थी तो वो उसकी हैल्प करने के लिए किचन में जाती हैं स्वेता झलक को किचन में देखकर कहती है " झलक क्या हुआ कुछ चाहिए आपको ?
झलक ना में सर हिला बोली " नहीं वो में आपकी मदद कर दु ' स्वेता अपने हाथ में पकड़े बर्तन को देखकर कहती है " नहीं यह लास्ट है अब हो गया है चलो आओ तुम खाना खाने कै लिए बैठो '
झलक स्वेता के साथ चली जाती है स्वेता उसको चैयर पर बिठाती है और खाना परोसती है सभी खाना खाने लग जातें हैं झलक सबको बारी बारी देखै जा रही थी उसने बहुत कम खाना खाया था जिस वजह से उसको स्वेता से डांट भी पड़ती है " झलक यह क्या है तुम खाना सही से क्यों नहीं खा रही हो क्या तुम चाहती हो तुम बिमार पड़ जाओ ' ।
झलक स्वेता को देखने लग जाती है रागिनी भी उसको ऐसे ही डांटती थी झलक गर्दन झुका कहती है " नहीं आंटी ऐसा कुछ नहीं है वो बस भुख नहीं थी ' ।
आंटी नहीं मां मम्मा जो भी तुम्हे अच्छा लगे वो कहो अब तुम मेरी बहु हो बेटा ' झलक हा में सर हिला देती है ' ।
कुछ वक्त बाद जब सबका खाना हो जाता है तो स्वेता अंशिका को देखकर कहती है " झलक आपको रूद्र का कमरा पता है ना ' झलक बस उनको देखती रह जाती है वो कुछ जवाब नहीं देती है स्वेता अंशिका को देखकर कहती है " कोई बात नहीं अंशिका के साथ चली जाना वो बता देगी ' और हम कल शोपिंग के लिए चलेंगे अभी रात बहुत हो गया है आप जाओ आराम करो ' ।
यह कहकर स्वेता वहाँ से जाने को हुई की झलक धिरै से कहती है " आंटी आई मिन माँ,, वो मम्मा जान की अस्थियाँ हम कब प्रवाहित करेंगे ' ।
स्वेता पलटकर झलक को देखती है " दो दिन बाद आप बनारस चले जाना रूद्रज के साथ में उससे बात कर लुंगी ' झलक हा में सर हिला देती है और अंशिका के साथ चली जाती है।
और आप रूद्रज को कैसे भेजेगी ? उसने पहले ही मना कर दिया है ना और तो और आपने झलक को भी उसके कमरे में भेज दिया ? हर्षवर्धन जो स्टडी रूम से निकल कर बाहर आए थे वो कहते हैं स्वेता उनको देखकर कहती है " मैने रागिनी से वादा किया था उसकी बेटी को कोई तकलीफ नही होने दुंगी, और रूद्रज को यह बात समझनी होगी, और उसको यह बात आप समझाओगे ' ।
में पर कैसे, आपके कहने पर मैने उसको शादी के लिए कितनी मुश्किल से मनाया था पता है और उस पर जो कंट्रोल मैने लगाया था उस वजह से वो भी चला गया !
मतलब स्वेता हर्षवर्धन की बात सुनकर कहती है।
हर्षवर्धन निराशा से कहते हैं " उसकी दो शर्त थी एक के बारे में आप जानती है और दुसरीे थी कि वो घर कभी भी आए कभी भी जाए में उसको रोकु नहीं ' ।
और आपने उसको हा कह दिया ' स्वेता थोड़ा तेज कहती है क्योंकि इषका साफ मतलब था रूद्र का वापस से लापरवाह होना, ना वक्त पर खाना ना पिना ना सोंना वो पुरे दिन घर से बाहर रहेगा जब उसकी मर्जी आएगा वरना महिनों के लिए गायब भी हो सकता है, ।
तो मैं क्या करता उस वक्त आपको कुछ और दिखाई दे रहा था क्या आप ही बताओं, स्वेता अपने सर पर हाथ रखकर अपने कमरे की तरफ चली जाती है जितना उसको अंशिका तन्मय ने परेशान नहीं किया था उससे ज्यादा तो इस लड़कै ने उनकौ किया था ।
वही झलक रूद्रज के रूम के बाहर खडी़ थी वो दरवाजा खोलकर अंदर जाती है तो रूम में पुरा अंधेरा अंधेरा हो रखा था झलक सबसे पहले लाइट का स्वीच ओन ढुंढती है और लाइट जलाती है और रूम में नजर दौडाती है रूम को देखकर ही उसकी आंखे बड़ी हो जाती है और वो जल्दी से लाइट ओफ करती है अब उसको ऐसा लग रहा था उसने लाइट जलाई ही क्यों।
उसको खुद से ही शर्म आ रही थी पर लाइट ओफ भी तो वो रख नहीं सकती थी वो दोबारा लाइट जलाती है अब उसकी नजर सामने की दिवार पर फिर से जाती है और वो तुंरत दुसरी तरफ नजरै कर लेती है क्योंकि दिवार पर बहुत सारी लड़कियों की पिक्चर लगीं थी जिन्होने बिकनी पहन रखी थी और वो अलग अलग पोज में खडी़ थी झलक कौ तो देखकर ही शर्म आ रही थी अब उसको समझ आता है रूद्रज अपने रूम में किसी को क्यों नहीं आने देता है और खुद ही वो अपने रूम की सफाई क्यों करता है।
वो धिरे से कहती है " ये कितना घटिया है मम्मा आपने किससे शादी करवाई है मेरी इससे तो अच्छा था आप मुझे अपने साथ ही लेकर चली जाती है।
अब वो दुसरी तरफ देखती है तो एक सेल्फ शराब की बोतलों से भरी थी जिसको देखकर उसकी आंखे बाहर आने को ही हो गई थी इसका मतलब यह शराब भी पीता है, मेरी शादी एक शराबी से हुई है ' ।
झलक आगे बढ़ जाती है वो बालकनी की तरफ जाती है बालकनी के बाहर का नजारा बहुत खुबसूरत था वो बालकनी विला के पिछे गार्डन में खुलती थी बालकनी से ही गार्डन में जाने के लिए सिढिया भी लगाई हुई थी। झलक बहुत देर तक वहाँ खडी़ आसमान को देखती रहती है जो चीज उसको सबसे ज्यादा पसंद थी स्टार्स देखना और उन्ही को देखकर उसके चेहरे पर स्माइल आई थी कुछ वक्त बाद झलक वापस कमरे में आती है और फिर से उसकी नजर उस दिवार पर चली जाती है झलक कसकर आंखे बंद करते हुए कहती है " यह इंसान ऐसी चिजे भी देखता है आई डोंट बिलिव दिस, नहीं पता में इसके साथ कैसे रह पाऊंगी वो बैड से ब्लैकेट उठाती है और काउच पर रखती है।
लाइट बंद कर वो काउच पर लेट जाती उसकी आंखों में निंद नहीं थी पर फिर भी वो सोने की कोशिश करने लग जाती है कुछ वक्त जैसे तैसे उसको निंद आती है।
उसके सोने के बाद रूम बालकनी से एक साया अंदर आता है जिसके कदम लड़खडा रहें थे वो बहुत कोशिश कर रहा था सिधा चलने की पर पैर थे उसका साथ दे ही नहीं रहे थे रूद्र अपने पैरों को देखकर बोला " कभी तो सिधे चल लो अब तुमको सिधे सिधे बैड तक जाना है नो हिलना नो डुलना ओके, इतना कहकर वो आगे बढ़ जाता है लड़खडा तो वो अब भी रहा था पर उसको खुद को ऐसे लग रहा था जैसे उसके पैरो ने उसकी बात मान ली है और वो सिधे चल रहै है वो बैड पर जाकर गिर जाता है और वैसे ही सो जाता है।
झलक जो गहरी नींद में जा चुकी थी उसको कुछ पता भी नहीं चलता है ' ।
अगली सुबह :-
दस बजे रूद्रज की आंखे उसकी आंखों पर रोशनी पड़ने की वजह से खुलती है वो पहले तो अपने चेहरे को धुप से छुपाने के लिए करवट बदलता है पर चुडियों की आवाज से उसकी निंद डिस्टर्ब हो जाती है वो गुस्से में अपनी आंखे खोलता है उसको अपनी निंद में खलल बिल्कुल नहीं पसंद था? सामने का नजारा देख कर उसकी आंखे फैल जाती है वो गुस्से में बोला " एएएए पागल हो क्या ये क्या कर रही हो तुम ' और मेरे कमरें में क्या कर रही हो !
झलक कै हाथ रूक जाते हैं वो जो दिवारों से फोटोज उतारने का काम कर रही थी जिसे देख कर रूद्रज ने उससे कहा था अब वो जल्दी से उठता है और झलक के पास आकर उसके हाथ से वो सभी पोस्टर लेते हुए फिर से बोला " इसे वापस दो, और यहाँ से हटाने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी ' ।
झलक जो अब भी रूद्रज की तरफ देख नहीं रही थी वो बिना उसको देखकर कहती है " यह हमारा भी कमरा है और यह सब हमें पसंद नहीं ' ।
तो अब वो होगा जो तुमको पसंद हो, अगर यह सोच रही हो तो सोचना बंद करो रूद्रज चौहान की चिजे उसकी जगह से नहीं हटेगी '
आपको शर्म नहीं आती है इस बार झलक रूद्रज की तरफ देखती है उसकी काली बड़ी आंखो को देखकर रूद्रज जो कहने वाला था वो शब्द उसकी गले में ही रह जाते हैं और झलक को भी कुछ ऐसा ही एहसास हुआ दोनों की आंखे दोनों को एक दूसरे की तरफ खिंच रही थी।
रूद्रज जो झलक का चेहरा देख चुका था पर आंखे उसने अब भी नहीं देखी थी वो उसकी आंखो मे डुबता जा रहा था पर अचानक वो अपनी नजरें उससे हटा उन पोस्टर को वापस लगाते हुए कहता है " तुमको शर्म आती है तो आंखे बंद करके रख लो, मुझ में शर्म है नहीं तो यह यहाँ रहैगें ' ।
वो पोस्टर लगाकर दुसरी तरफ देखता है तो गुस्से से उसका जबड़ा कस जाता है और वो घुरकर झलक को देखते हुए कहता है " मेरा वाइन का कलैक्शन कहा है ' ।
झलक वहाँ से दुसरी तरफ जाते हुए कहती है " मैने वाशरूम में पानी के साथ बहा दी ' ।
What rubbish ?