MiniFM
Previous
Next
Chapter 9

कोई मिल गया ( koi mil gaya ) - Chapter 9

कोई मिल गया ( koi mil gaya )

झलक बाहर की तरफ देख रही थी उसके बाल जो उसने जुड़े में लपेटकर बांध कर रखे थे उनमें से कुछ बाल निकल कर बाहर आ रहे थे झलक बार बार उनको अपने हाथों से पिछे कर रही थी और रूद्रज तिरछी नजरों से उसको देख रहा था, ।

आखिर में झलक जब पुरी तरह इरिटेट हो जाती है तो रूद्रज को देखकर कहती है " क्या तुम ग्लास बंद करोगे प्लीज, ।

बट् वाय मुझे ऐसे ड्राइव करना पसंद है तुमसे तो कुछ कहना ही गलत है में ही हु जो भुल जाती हु।

याद रखा करो और याद ना रहे तो आमण्ड खाया करो जिससे तुम्हारा दिमाग़ तेज हो सके ' ,,,, ।

झलक घुरकर रूद्रज को देखती है और बनावटी हंसी चेहरे पर बिखेरते हुए बोली " नो थैंक्स अपनी एडवाइज अपने पास रखो मुझे इसकी कोई जरूरत नहीं है ।

रूद्रज आइब्रो उचकाते हुए बोला " मैंने तो दिमाग तेज करने का तरीका बताया था अब तुम्हे अपने दिमाग की हालत नही सुधारनी तो क्या कर सकतें है।

झलक जो गुस्से में बाहर देख रही थी रूद्रज की बात सुनकर गुस्से से उसकी तरफ पलटते हुए बोली " ओहहहह हैलो मिस्टर मतलब क्या है तुम्हारा, हम तुम्हें कोई जहनी मरीज लगते हैं जो हमारे दिमाग़ की हालत बिगडी़ हुई है और तुम्हारे इस टोटके से सही हो जाती जाएगी।

क्या हो गया भाई ऐसे चिल्ला क्यों रही हो और मुझे ऐसे चिल्लाने वाले लोग बिल्कुल पसंद नहीं है ? रूद्रज एक हाथ से अपना कान छुपाते हुए कहता है जैसे झलक की तेज आवाज सुनकर उसके कान में दर्द होने लगा हो।

उसकी यह हरकत देखकर झलक और ज्यादा चिढ़ जाती है वो गुस्से में दांत भिचते हुए सिधा बैठते हुए कहती है " पसंद आना भी कौन चाहता है ' ।

कुछ ही वक्त बाद शाम का वक्त होने को आया था झलक को भुख लग गयी थी भुख तो उसे बहुत वक्त से लगी थी पर रास्ते में ऐसी कोई जगह नहीं दिखाई दी जहाँ पर वो कुछ खा सके अब भुख के मारै उसको रूद्रज पर और ज्यादा गुस्सा आ रहा था वो आंखे बंद कर अपना सर हैड रेस्ट पर रखते हुए मन में बोली " इससे अच्छा था हम अकेले चले जाते कम से कम आराम से जाते, कुछ खाने को तो नसीब होता पर इस अकल के अंधे इन्सान के साथ यह भी नसीब नहीं होने वाला।

तभी उसको महसूस होता है गाड़ी रूक गयी है वो झट से अपनी आंखे खोलती है रात का वक्त था चारों तरफ अंधेरा फैला था और गाड़ी सुनसान सड़क पर एक साइड रूकी थी आस पास गहरा काला जंगल जहाँ गाड़ी की हैडलाइट रोशनी में कुछ पैड दिखाई दे रहे थे।

झलक रूद्रज की तरफ देखती है तो पास में रूद्रज दिखाई नहीं देता है उसकी आंखे बड़ी हो जाती है वो जल्दी से इधर उधर देखते हुए बोली " अब यह कहा गया कही मुझे यहाँ अकेला छोड़कर भाग तो नहीं गया,, नहीं नहीं ऐसा तो नहीं हो सकता वो ऐसे मुझे छोड़कर नहीं जा सकता शायद उसको वाशरूम आई होगी तो वो गया होगा।

हमें इतंजार करना चाहिए ' ।

कुछ मिनट बित जाने के बाद भी जब रूद्रज वापस नहीं आता तो झलक की घबराहट बढ़ जाती है उसके चेहरे पर पसीना झलकने लगता है " यह अब तक वापस क्यों नहीं है

खट् खट्,,,,

झलक अचानक डर जाती है यह आवाज गाड़ी के पिछे से आ रही थी " है श्याम जी यह यह आवाज कैसी कही कोई भु,,,,,, भुत तो नहीं आ गया है यह रूद्रज कहा चला गया कम से कम बताकर तो जाता अब हम क्या करे।

झलक का चेहरा रोने जैसा हो गया था ऐसा लग रहा था वो कभी भी रो देगी अचानक उसकी नजर साइड मिरर पर पड़ती है जहाँ पर उसको हल्की रोशनी में रूद्रज खड़ा दिखाई देता है जिसके हाथ में अपना फोन था झलक आव देखती ना ताव गाड़ी से निकल दौड़कर रूद्रज के पास जाती है और झटके से उसके गले लग जाती है।

रूद्रज के हाथ ऊपर की तरफ उठ जाता है उसकी नजरे झलक पर जाती है जो डरी सहमी उसके गले लगकर खडी़ थी रूद्रज के दिल की धड़कन बढ़ जाती है वो अपने होठों को अंदर की तरफ दबाता है और आंखे कसकर बंद कर लेता है।

और दोनों हाथों से झलक के कंधे पकड़ कर उसे खुद से दूर करते हुए कहता है " क्या हो गया है तुम्हें ऐसे क्यों रिएक्ट कर रही हो ?

Advertisement

झलक आंखों में नमी लिए हुए रूद्रज को देखकर उसके कंधे पर हाथ से मारते हुए बोली " कहा चले गए थे हमें छोड़कर पता है हम कितना डर गए थे ' ।

ओहह तो तुमको लगा में तुम्हें इस सुनसान जगह पर अकेले छोड़कर चला गया हु ' ।

हा हम पिछले आधे घंटे से तुम्हारे आने का वैट कर रहे थे और तुम आए नहीं तो हमने सोचा ' झलक अपने हाथों को आपस में उलझाते हुए कहती है।

रूद्रज को उसकी डरी शक्ल देखकर बड़ा मजा आता है उसके होठों के किनारे मुड जाते हैं " वैसे आईडिया बुरा नहीं था मुझे चले जाना चाहिए था, ।

ओहह तो तुम हमसे ऐसे पिछा छुडवाना चाहते हो, तो सोचते रहो हम तुम्हारा पिछा नहीं छोड़ने वालै " वैसे तुम यहाँ कर,,,, ।

यह कहते हुए झलक इधर उधर देखती है तो उसकी नजर गाड़ी की डिग्गी में रखे एक छोटे से लाइट वाले चुल्हे पर जाती है जिस पर नुडल्स बन रहे थे झलक अपने होठों पर जिभ घुमाते हुए कहती है " ओहह तो तुम खाने का सामान साथ लेकर चलते हो " ।

हमम क्योकि में जब घर से निकलता हु तो कुछ दिनों तक घर नहीं आता

औए तुम सैर सपाटे पर ऐसे ही निकल जाते हो जब मन चाहे तब ?

हा तो इसमें कौनसी बुराई है खुद की जिन्दगी जिने कै लिए सबकी इज्जात की जरूरत है क्या,,, अगर हैं भी तो रूद्रज चौहान नहीं लेता,, उसका जब मन चाहे तब वो जा सकता है।

रूद्रज बोल रहा था वही झलक उसकी बनाई नुडल को अपनी प्लेट में डाल कर एक तरफ रूद्रज की लाई हुई चैयर पर बैठ जाती है जिनको रूद्रज अपनी कार में हमेशा फोल्ड करके रखता था,,, ।

झलक नुडलस बडे़ चाव से खाने लगती है रूद्रज उसकी कोई आवाज़ ना सुनकर पिछे पलटकर देखता है झलक को देखकर उसकी आंखे छोटी हो जाती है " तुमने किसको पुछकर नुडलस लिए मैने बनाए थे ' ।

तो ?

तुम्हारा नाम तो नुडलस पर कही नही लिखा है कि यह नुडलस रूद्रज चौहान के है और मुझे भुख लगी है इसके लिए मैने लिए,,,,,

तो मुझे कौनसा गोली लगी है भुख ही मुझे लगी है और मेरे पास एक ही प्लेट और एक ही चम्मच था और वो भी तुमने जुंठा कर दिया,,, झलक आंखे तरेरत हुए रूद्रज को देखकर कहती है।

ओहह मिस्टर भुलो मत तुम मुझे अपने साथ लेकर आए हो,,, हम फ्लाइट से जा रहे थे अब क्यों नखरे कर रहे हो ' ।

रूद्रज जल्दी से झलक के हाथ से प्लेट ले लेता है और खुद नुडलस खाने लगता है झलक हैरानी से अपने हाथों को देखते हुए कहती " तुम सच में बहुत खराब इंसान हो किसी के हाथ से ऐसे खाना कौन छिनता है भला।

रूद्रज नुडलस मुह में डालते हुए बोला " रूद्रज चौहान,,

झलक मुह बनाकर उसको देखने लग जाती है कुछ वक्त बाद जब रूद्रज का खाना हो जाता है तो झलक बाकी बचे नुडलस से अपना पैट भरती है।

उसके बाद रूद्रज दोनों के लिए काॅफी बना देता है और कुछ वक्त के रेस्ट के बाद वो वापस जाने के लिए तैयार थे ।

Advertisement

अगली सुबह

दस बजे के करीब रूद्रज की कार बनारस आकर रूकती है वो झलक को देखता है जो अब भी सो रही थी उसका चेहरा रूद्रज के कंधे पर था रूद्रज उसके चेहरे को कुछ वक्त देखता है फिर अपना सिट बेल्ट खोल बाहर निकल जाता है उसके ऐसे निकलने से झलक को झटका लगता है और उसकी आंखे खुल जाती है वो निंद भरी आंखो से रूद्रज को देखती है।

रूद्रज उसको देखकर बोला " हम पहुंच गए हैं तो बाहर निकलो,,, ।

तुम सही से नहीं उठा सकते थे मेरी गर्दन टुट जाती तो !

रूद्रज एक हाथ गाड़ी की छत पर रखकर आगे की तरफ झुकते हुए कहता है " ऐसा होता तो तुम्हारा अस्थि विसर्जन भी साथ में हो जाता, । एंड जो हुआ ही नहीं उसके बारे में सोचना बेफिजूली है तो जल्दी बाहर निकलो ' ।

आ हहहह,, ये में किस आदमी के साथ फस गयी हु,, मम्मी जान सच बता रही हु आप जाते जाते मेरे साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी करके गयी मुझे इस पागल इंसान के साथ बांध कर चली गई,,,, ओफ्फफफ जाहिल नकारा इंसान।

रूद्रज और झलक एक होटल में आते है दोनों ने अलग अलग कमरें लिए थे झलक अपने कमरे में जाती है सबसे पहले वो फ्रेश होती है और नहाकर कपड़े बदलकर बाहर आती है इस वक्त उसने वाइट कलर का अनारकली सुट पहना था फुल स्लीवलेस बालों का उसने जुड़ा बनाया था जिससे उसकी गौरी सुंदर गर्दन साफ दिखाई पड़ रही थी।

झलक अब मैज पर रखे कलश को अपने हाथ में उठाती है और कुछ वक्त तक उसको खाली आंखों से देखती है जैसे वो नहीं चाहती थी कि वो उस कलश को खुद से दूर करे पर यह करना जरूरी था।

वो कलश उठाकर बाहर आ जाती है और अपने पास वाले रूम का दरवाजा खटखटाती है,,, अंदर से एक लड़की बाहर आती है जो झलक को देखकर मुस्कुरा देती है उसके पिछे ही रूद्रज बाहर निकलता है।

अरना आंखे बड़ी करके उस लड़की को देखती है जो वही होटल की एक इंम्पलोई थी वो वहां से जा रही थी झलक रूद्रज को हैरानी से देखते हुए मन में बोली " यह लड़का,,, छी छी कितना गंदा है ये यहाँ आते ही इसने एक लड़की पटा भी ली हमें आए एक घंटा हुआ है और यह,,,, ।

ओहह हैलो मैडम कहा खो गयी हो चलना है कि नहीं,, !

झलक मुंह बनाते हुए बोली " चल ही रही हु ' ।

रूद्रज आगे बढ़ जाता और अरना उसके पिछे पिछे चली जाती है कुछ वक्त बाद दोनों बनारस घाट पर थे जहाँ पर अरना सबसे पहले रागिनी के लिए पुजा करवाती है रूद्रज उसके पास नहीं बैठा था वो वहां से कुछ दुरी पर बैठा था जहाँ पर धुप नहीं थी और अरना जहाँ पर थी वहां इस वक्त धुप थी।

रूद्रज की नजरे अरना पर ही थी वो बहुत ध्यान से उसको देखे जा रहा था कुछ वक्त में पुजा स्माप्त हो जाती है और अरना कलश को उठाकर गंगा में बहाने के लिए सिढियो से होते हुए निचे उतरने लगती है रूद्रज की नजरे अब भी अरना पर थी वो अब भी उठकर उसके पास नहीं आया था।

वो‌ वैसे ही बैठा रहा था अरना वहां पर लगी कड़ी पकड़ते हुए पानी में उतरती है पानी उसकी कमर तक आ रहा था पानी का बहाव तैज था अरना अपने पैरो को जमीन पर जमाते हुए उस कड़ी को छोड़ देती है और कलश में रखी अस्थियों को पानी में बहाने लगती है उसकी आंखों से आंसू निकलते हुए पानी में गिरते जा रहें थे।

अरना आखिर में कलश को भी पानी में रख देती है और कलश भी पानी के साथ बहने लगता है वो हाथ जोड़कर भगवान् से प्रै करती है और वापस मुड़कर एक पैर उठाया ही था कि सिढियो पर फिसलन की वजह से उसका ब्लैंस बिगड़ता है और वो सिधे पानी में जाकर गिरती है।

रूद्रज ने अरना को पानी में गिरते देख लिया था पर फिर भी वो उठकर नहीं गया अरना हाथ मारते हुए पानी से बाहर निकलती है उसकी सांसे फुल गयी थी और वो जोर से सांस लेती है उसको तैरना नहीं आता था अरना वापस डुबने लगती है ऐसे वो दो तिन बार कभी ऊपर आती है कभी अंदर जाती है।

रूद्रज अपनी जगह पर बैठा अरना को सट्रगल करते देख रहा था अचानक पानी शांत हो जाता है और इस बार अरना बाहर नहीं आती है तब जाकर रूद्रज खड़ा होता है और नदी की तरफ बढ़ जाता है।

और भागते हुए पानी जिस तरफ बह रहा था उस तरफ भागने लगता है और एक पोइंट पर आकर वो पानी में कुद जाता है।

I hope you like my story🙏

Was this chapter good?