कोई मिल गया ( koi mil gaya ) - Chapter 8
कोई मिल गया ( koi mil gaya )क्या तुम जितना जुबान चलाती हो उतना दिमाग भी चलाया करो ,
व्हाट रबीश में क्या यहा जानबूझकर आकर बैठी हु, और मैं अपनी जुबान तभी चलाती हु जब जरूरत हो वरना नहीं, !
व्हाट यू मीन, तुम मेरे कमरे में रह रही हो और मेरे साथ ऐसे कैसे बात कर सकती हो । रुद्रज जो वॉशरूम की तरफ जा रहा था झलक की बात सुनकर रुकते हुए कहता है, ।
झलक रूद्रज के सामने जाकर खड़ी हो जाती हैं और अपने दोनों हाथ आपस में बांधते हुए कहती है " ठीक है फिर नीचे चलिए और सब से कहिए कि हम दोनों को साथ में नहीं रहना हम दोनों अलग अलग कमरें में रहना चाहतें हैं हम दोनों एक रूम में नहीं रह सकते, और में तो बिल्कुल नहीं यह कहते हुए उसकी नजर वापस पोस्टर पर चली जाती है ।
तो तुम जाकर बोल दो, मुझे क्यों कह रही हो मुझे ना तुमसे कोई मतलब है ना इस शादी से में कोई मतलब है और ना ही एक कमरे में रहने से मतलब है, ।
इसका मतलब मैं क्या समझूं क्या तुम मेरे साथ एक कमरे में रहना चाहते हो ?
मैंने यह तो नहीं कहा, और यह अपना गटर जैसा मुंह है ना तुम बंद रखो मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी समझ आया, और रही नीचे जाकर बात कहने की तो चलो तुम्हारे मन की मुराद भी पूरी कर देते हैं, ।
इतना कहकर रूद्रज एक फेक स्माइल झलक को दिखाते हुए उसका हाथ पकड़ता है और उसे रूम से बाहर लेकर चला जाता है वह दोनों नीचे जाते हैं होल में इस वक्त सभी बैठे थे हर्ष भी ऑफिस से आ गए थे, रूद्रज उसका हाथ सबके सामने ले जाकर छोड़ देता है और हर्ष को देखकर कहता है " मैंने आपसे कुछ कहा था और आपने वादा भी किया था कि यही होगा तो हम एक कमरे में नहीं रह सकते हैं , इसको दुसरा कमरा दे दो ।
झलक रूद्रज की बात सुनकर उसकी तरफ देखने लगती है कितनी आसानी से वो बोल गया था सबके सामने उसे बोलने में दो घंटो लग जाते ।
रूद्रज ने यह बात साफ-साफ शब्दों में सीधे ही सबके सामने रख दी सभी बस उसका चेहरा ताकते रह जाते हैं झलक को भी है उम्मीद नहीं थी कि रूद्रज आते ही ऐसे बोल देगा , वह भी रूद्रज को देख रहीे थीे हालांकि दोनों के दिल में कुछ भी नहीं था और झलक भी यही चाहती थी कि वो दोनों फिलहाल अलग अलग कमरे में रहे। वह किसी की जिंदगी में जबरदस्ती शामिल नहीं होना चाहती थी, ।
इतना कहकर रूद्रज वहां से जाने को हुआ कि श्वेता उसको रोकते हुए कहतीे हैं " पर रूद्रज झलक आपकी पत्नी हैं और शादी के बाद पति पत्नी एक कमरे में रहते हैं।
रूद्रज के जाते कदम रुक जाते हैं वह रुकते हुए अपनी मां को देखते हुए कहता है तो जरूरी तो नहीं मां एक कमरे में ही रहो अलग अलग कमरे में रहकर भी शादी निभाई जा सकती है , और फिलहाल हम दोनों में कोई फिजिकल रिलेशन तो बनने वाले है नहीं ।
झलक की आंखे बड़ी हो जाती है, वही बाकी सब इधर उधर देखने लग जाते हैं रूद्रज इतना बेसरम भी हो सकता है यह देखकर तो झलक को लग रहा था कि उसको रूद्रज से दूर ही रहना चाहिए।
, स्वेता कुछ कहती उससे पहले ही रूद्रज बोल पड़ता है
अब मैने आपको सब कुछ बता दिया ना, तो इसको नया कमरा दे दो, हम दोनों एक कमरे में नहीं रहेंगे ओके,, इतना कह कर वह तेज कदमों से ऊपर चला जाता है और सब उसको जाते हुए देखते रह जाते हैं।
ऊपर आकर वह दरवाजा जोर से बंद करता है और एक धडाम की आवाज नीचे तक सुनाई देती है, झलक गर्दन झुकाए खडी़ थी उसको तो अब तक शर्म आ रही थी , वो गर्दन उठा ही नहीं पाती।
हर्ष झलक की तरफ देखते हुए कहतें है " झलक बेटा क्या रूद्र ने आपको धमकाया, अगर ऐसा है तो आप बिना किसी हिचक के हमें बता सकती है?
झलक चेहरा उठाकर उनको देख कहती है " नहीं, उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, वो हम दोनों की शादी जैसे हुई है, उस हालात में हमें भी नहीं लगता है हमे एक कमरे में रहना चाहिए, अभी तो हम दोनों एक दूसरे को जानते भी नहीं है तो,, हम भी दुसरे कमरे में रहना चाहते हैं।
कर्णसिंह झलक की बात सुनकर कहतें है " झलक आखिरी फैसला आपका होगा आप जो चाहती है वही होगा, अगर आप भी यही चाहती है तो जो कमरा आपको पसंद आए आप उसमें रह सकते हो , और वैसे भी कल सुबह आप दोनों को बनारस जाना है तो उसके बाद हम आपका फैसला जानेगै।
झलक कर्णसिंह के सामने कुछ कह नही पाती है वो हा में सर हिला देती है स्वेता उसका नया रूम तैयार करवा देती है जो अंशिका के रूम के पास ही था और रूद्रज के रूम के सामने, ।
वही रूद्रज अपने रूम वाशरूम में था उसके दोनों हाथ दिवार पर टिक्के थे और ऊपरी बाॅडी पर उसने कुछ नहीं पहन रखा था उसके शरीर पर शावर से पानी गिरता जा रहा था और वो आंखे बंद किए हुए खड़ा था वो कुछ वक्त में रूम से बाहर आता है तो सामने उसको झलक दिखाई देती है उसको देखकर उसकी आइब्रो ऊपर की तरफ उठ जाती है।
उसने ब्लैक टावल अपनी कमर पर लपेट रखा था वो कहता है " क्या हुआ अब वापस यहाँ क्यों आई हो इस गंदै कमरे में ' ।
झलक पिछे पलट कर उसकी तरफ देखती है फिर तुंरत चेहरा घुमा कर कहती है " शर्म करो कुछ , उन पोस्टर के जैसे बनकर तुम क्यों घुम रहें हो ' ।
रूद्रज पोस्टर पर नजर डालता है और कहता है " स्टोप इट तुम इतनी भी अनजान नही हो की इन पोस्टर में भी कपड़े पहनने हुए हैं देखो मैने कही भी नंगी तस्वीर नहीं लगा रखी और रही मेरी बात तो टावल है मेरे पास, पर तुम अब यहाँ क्या करने आई हो।
अपना समान लेने आई हु और वो लेकर जा रही हु '
बहुत अच्छा, जाओ जल्दी ।
झलक ने जो अब तक अपना समान बैग से नहीं निकाला था वो बैग उठाती है और कुछ समान एक दुसरी बैग में डालकर रूम के बाहर लेकर चली जाती है रूद्रज उसको जाते देखता रहता है उसका चेहरा एक्सप्रेशन लेस था।
झलक की मदद के लिए अंशिका बाहर ही थी वो जल्दी से उसके हाथ से एक बैग लेती है और उसको रूम में लेकर जाते हुए कहती है " क्या फिर से रूद्रज ने कुछ कहा आपसे, ।
झलक उसको देखकर रूक जाती है और गर्दन हिला कहती है " नहीं तो ' अच्छा दी मेरा कोलेज कब तक हो जाएगा।
बस दो दिन बाद बनारस से आते ही तुम काॅलेज शुरू कर सकती हो अपना ' झलक मुस्कुरा कर हा में सर हिला देती है दोनों मिलकर ऊसका रूम सेट करते हैं अंशिका के साथ उसकी अच्छी दोस्ती हो जाती है।
नेक्स्ट दिन झलक स्वेता स्वर्णा और अंशिका बाहर खड़े थे चारो रूद्रज का इंतजार कर रहे थे स्वेता घर कि तरफ देखते हुए कहती है " यह लड़का अब तक आया क्यों नहीं, ।
स्वर्णा कहती है " स्वेता क्यों हर वक़्त उस पर गुस्सा करती रहती हो बच्चा है वो अभी , कर रहा होगा कुछ आ जाएगा और कौनसा यह पैदल जा रहें हैं फ्लाइट से जाएंगे, ।
और दादी अभी यह दस मिनट में नहीं निकले तो फ्लाइट भी मिस हो जाएगी आपका लाडला पोता हमेशा की तरह लेट है नहीं जाना था तो बता देता एयरपोर्ट जाने के लिए रास्ता भी तय करना पड़ता है झलक उदासी से सबके चेहरों की तरफ देख रही थी।
वो सब पांच मिनट और इंतजार करते हैं जब रूद्रज नहीं आता है तो स्वेता अंदर की तरफ कदम बढाकर कहती है " मुझे खिंचकर ही इसको बाहर लाना होगा अब , यह लड़का पता नहीं समझता क्या है खुद को।
तभी उनकी नजर सामने आ रहें रूद्रज पर जाती है जो ब्लैक डैनिम जिंस और ब्लैक स्लीवलेस टिशर्ट के ऊपर वाइट कलर की शर्ट पहनने था आंखो पर ब्लैक सनगलासेस, कानों में इयरबडस और एक हाथ में वाॅच दुसरे में कडा और मोली का धागा ।
यह क्या है रूद्रज तुम किसी फैशन शो में जा रहे हो क्या, रूद्रज के कदम ठहर जाते हैं वो कान से इयरबडस निकाल पाॅकेट में डालते हुए कहता है " क्या आप चाहती है में ना जाऊ ' ।
मैने यह कब कहा रूद्रज ? आपने नहीं कहा तो फिर ठीक है हमें चलना चाहिए ' यह कहकर वो आगे बढ़ जाता है स्वेता मुह बनाकर उसको देखती रह जाती है रूद्रज झलक को देखता है जो उसको नहीं देख रही थी वो गाड़ी में जाकर ड्राइविंग सिट पर बैठ जाता है।
स्वेता झलक के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहती है " आराम से जाना बेटा और रूद्रज की बातों का बुरा मत मानना वो मुह फट्टू है कभी भी कुछ भी बोल सकता है ' झलक हा में सर हिला देती है स्वेता रागिनी के अस्थी कलश पर एक बार हाथ फिराती है उसकी आंखे नम थी ।
झलक अब गाडी में रूद्रज की बगल वाली सिट पर बैठ जाती है और उसके बैठते ही गाडी वहाँ से निकल जाती है स्वेता मन में कहती है " रागिनी हमें नहीं समझ आ रहा हम क्या करें क्या कही हमने झलक और रूद्रज दोनों के साथ गलत तो नहीं कर दिया ' ।
वही दूसरी तरफ झलक बाहर की तरफ देख रही थी और रूद्रज आराम से गाडी चला रहा था उसकी गाडी की स्पीड देखकर झलक टाइम देखती है अगर दस मिनट में वो एयरपोर्ट नहीं पहुंचते तो वो फ्लाइट मिस होने वाली थी झलक रूद्रज को देखकर कहती है " क्या आप स्पीड बढा़ सकते हैं हमारे पास दस मिनट है एयरपोर्ट पहुंचने के लिए ' ।
रूद्रज झलक को बिना देखे कहता है " हम फ्लाइट से नहीं जा रहे हैं हम सड़क से ही जाएगें,
आर यु मैड ?
कोई शक, ।
रूद्रज पलट कर तुंरत जवाब देता है मैड तो वो था उसको अजीब हरकते करने में बडा़ मजा आता था और एडवेंचर का लुफ्त उठाने में तो बहुत ज्यादा, झलक कुछ बोल भी नहीं पाती वो तो यह सोच रही थी कि रूद्रज एक दिन पुरे दिन कार कैसे चला पाएगा।
वो गहरी सांस लेकर कहती है " देखो तुमको जो करना है वो करते रहो मुझे एयरपोर्ट पहुंचा दो में वहाँ से चली जाउंगी, तुमको सड़क से जाना हो या पैदल मुझे उससे कोई मतलब नहीं ' ।
सैम थोट मेरे है, यह तो मेरे साथ कार में बैठने से पहले सोचना चाहिए था , और वैसे भी हम अपोजिट डायरेक्शन में है अब यहाँ से तुम जाओगी तो भी तुम एक घंटे से पहले नहीं पहुंचने वाली, और यह फ्लाइट जाने कै बाद कल ही तुम जा पाओगी।
झलक को रूद्रज पर गुस्सा आ रहा था पर जैसे तैसे वो गुस्से के घुंट पी लेती है और चुप होकर बैठ जाती है रूद्रज ने अब स्पीड फास्ट कर दी थी उनकी गाडी स्पीड से चलती जा रही थी झलक को बोरियत महसूस हो रही थी तो वो गाने स्टार्ट कर देती है।
और जो गाना शुरू होता है उसे सुनकर दोनों की नजर एक दूसरे पर चली जाती है
हम तुम, एक कमरे में बन्द हों
और चाभी खो जाये हम तुम,
एक कमरे में बन्द हों और
चाभी खो जाये
तेरे नैनों के भूल भुलैय्या में
बॅबी खो जाये हम तुम,
एक कमरे में बन्द हों
और चाभी खो जाये
हम तुम, एक कमरे में बन्द हों
और चाभी खो जाये हम तुम,
झलक तुंरत गाना बंद कर सिधी होकर बैठ जाती है और रूद्रज के फैस पर तिरछी स्माइल आ जाती है।