The billionior student - Chapter 3
Millionaire Romantic Student"बचाओ!"
"भूत! भूत!"
"यह तो ज़िंदा हो गए! भागो सब लोग!"
जैसे ही सोहन लाल ने अपनी आँखें खोलीं, वहां भगदड़ मच गई।
सिंघानिया परिवार के लोग भी डर के मारे पीछे हट गए। आखिर एक मरा हुआ इंसान ज़िंदा कैसे हो सकता है?
उनके दिमाग में सबसे पहला ख्याल यही आया कि यह कोई पिशाच बन गया है!
सानिया, जो अभी एक पल पहले तक अपने दादाजी के ज़िंदा होने की उम्मीद कर रही थी, वह भी हक्की-बक्की रह गई। बाकी लोगों की हालत तो और भी खराब थी।
"अरे, यह कोई भूत-प्रेत नहीं हैं, यह सचमुच ज़िंदा हो गए हैं!"
आर्यन की आवाज़ बिजली की कड़क की तरह सबके कानों में गूंजी।
घबराए हुए लोग रुक गए और डरते-डरते सोहन लाल को घूरने लगे। भूत नहीं हैं?
क्या यह वाकई ज़िंदा हो गए?
क्रिस्टल के ताबूत में बैठे सोहन लाल खुद भी पूरी तरह उलझन में थे।
क्या वो मर नहीं गए थे? फिर वो इन सबको कैसे देख पा रहे हैं?
क्या वो ज़िंदा हैं? या फिर यह सारे लोग भी मर कर उनके साथ ऊपर आ गए हैं?
"मैंने आपको बचाया है। मैं हिमालय से, गुरुजी के पास से आया हूँ..."
आर्यन ने अपने हाथ में पकड़े उस पुराने विवाह अनुबंध को हवा में लहराते हुए कहा।
"अभी तो बहुत कुछ साबित करना बाकी है..."
"तुम... तुम आर्यन हो? उन महान गुरुजी के शिष्य?"
आर्यन अपनी बात पूरी कर पाता, उससे पहले ही सोहन लाल उत्साह से चिल्ला पड़े।
उन्हें यकीन हो गया कि वो सचमुच फिर से ज़िंदा हो गए हैं। और इसके पीछे सिर्फ एक ही वजह हो सकती थी—वो महान गुरुजी, जो यमराज के जबड़े से भी प्राण खींच लाने की ताकत रखते थे!
"जी हां, मैं गुरुजी के आदेश पर ही पहाड़ से नीचे आया हूँ..." आर्यन ने सिर हिलाया।
"मेरी जान बचाने के लिए शुक्रिया, छोटे गुरुजी!"
सोहन लाल का उत्साह सातवें आसमान पर था। उन्होंने क्रिस्टल के ताबूत के अंदर ही करवट ली और आर्यन के सामने घुटनों के बल बैठ गए।
उनकी बातें सुनकर वहां मौजूद लोगों को आखिरकार यकीन हो गया कि सोहन लाल कोई भूत बनकर नहीं लौटे, बल्कि सचमुच ज़िंदा हो गए हैं।
लेकिन इससे पहले कि वे राहत की सांस ले पाते, सोहन लाल की हरकत ने उन्हें फिर से चौंका दिया।
मुंबई का शेर, सिंघानिया परिवार का मुखिया, जिसके एक इशारे पर पूरा शहर हिल जाता था, वह एक कल के छोकरे के सामने घुटने टेक रहा था!
अब आर्यन की तरफ देखने का उनका नज़रिया पूरी तरह बदल चुका था।
कुछ मिनट पहले तक वे उसे पागल समझ रहे थे।
लेकिन अब...
सोहन लाल ज़िंदा थे, और आर्यन सचमुच मुर्दों में जान डाल सकता था!
यह कोई डॉक्टरी चमत्कार नहीं, बल्कि कोई ईश्वरीय शक्ति लग रही थी!
वहां मौजूद कई बड़े-बड़े बिजनेसमैन और नेता अब इस जादुई नौजवान से दोस्ती करने का मन बनाने लगे।
"पिताजी..."
"दादाजी..."
सिंघानिया परिवार के लोग जल्दी से आगे लपके ताकि सोहन लाल को ताबूत से बाहर निकाल सकें।
"रुक जाओ! जल्दी से, तुम सब घुटने टेको और इन छोटे गुरुजी को प्रणाम करो!"
सोहन लाल ने अपने परिवार पर दहाड़ लगाई।
"नहीं-नहीं, इसकी कोई ज़रूरत नहीं है।"
आर्यन ने सोहन लाल को रोका और वह विवाह अनुबंध उनके सामने कर दिया।
"मैंने आपको इसी वजह से बचाया है।"
"शादी का कागज? अरे हाँ, बिल्कुल... सानिया बेटी, इधर आओ!"
सोहन लाल ने कागज देखा और खुशी से कांपने लगे।
मौत के डर में वह भूल ही गए थे कि आर्यन की सगाई उनकी पोती से तय थी!
"दादाजी, आप..."
सानिया आगे बढ़ी। अपने दादाजी को सही-सलामत देखकर उसकी आँखों में फिर से आंसू आ गए। उसे लगा जैसे वह कोई सपना देख रही है।
"शुभ काम में देरी कैसी? तुम दोनों आज और अभी शादी कर लो!"
सोहन लाल ने अपनी पोती का हाथ पकड़ा और आर्यन की तरफ बढ़ा दिया।
"हैं?"
सानिया सन्न रह गई। शादी?
तो क्या वह शादी का कागज असली था?
हालाँकि उसने गुस्से में कह दिया था कि अगर आर्यन दादाजी को बचा लेगा तो वह शादी कर लेगी, लेकिन वह तो बस एक जज्बाती बात थी।
लेकिन आज ही शादी? क्या यह बहुत जल्दबाजी नहीं है?
"रमेश, तुम वहाँ मूर्तियों की तरह क्यों खड़े हो? जल्दी करो, ये सारे सफ़ेद फूलों की मालाएं और शोक के बैनर हटाओ। इनकी जगह लाल फूल और सजावट लगाओ। इसी हॉल को शादी के मंडप में बदलो..."
सोहन लाल को लगा कि यह मौका हाथ से नहीं जाना चाहिए। ऐसे चमत्कारी दामाद को वह खो नहीं सकते थे।
जल्दी से शादी हो जाए, फिर घर में एक नन्हा वारिस आ जाए—जो आधा सिंघानिया होगा और आधा उस महान गुरु का वंशज!
सिर्फ रमेश ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद हर शख्स का मुंह खुला का खुला रह गया।
एक अंतिम संस्कार को शादी में बदला जा रहा है?
क्या मौत से वापस आने के बाद बुज़ुर्ग का दिमाग हिल गया है?
सिर्फ कुछ समझदार लोग ही इशारा समझ पाए—यह लड़का उनकी सोच से भी ज्यादा खास है, वरना सोहन लाल जैसा घाघ आदमी अपनी लाड़ली पोती को ऐसे नहीं सौंपता।
"दादाजी..."
सानिया घबरा गई; वह इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी!
"मेरी प्यारी बिटिया, चिंता मत करो। हालांकि यह थोड़ी जल्दबाजी है, लेकिन दादाजी तुम्हें खाली हाथ नहीं भेजेंगे... रमेश, जाओ और सानिया के लिए दहेज में दो सौ करोड़ रुपये नकद तैयार करो।"
सोहन लाल अभी भी ताबूत में बैठे-बैठे ही आर्डर दे रहे थे।
"और हां, वो आठ सौ करोड़ वाला समंदर किनारे वाला बंगला अभी बिका तो नहीं है न? उसे भी खरीद लो, वह भी मेरी पोती का ही होगा।"
"दो सौ करोड़ नकद?"
"आठ सौ करोड़ का बंगला?"
पूरा हॉल सन्न रह गया। यह तो हद हो गई!
जिन रिश्तेदारों ने अभी कुछ देर पहले सानिया को ताने मारे थे, अब उनकी छाती पर सांप लोटने लगे। जलन के मारे उनका बुरा हाल था।
एक झटके में एक हजार करोड़ रुपये सानिया के नाम? बुड्ढा बहुत पक्षपाती है!
लेकिन सानिया खुश नहीं थी। वह किसी सौदे की तरह शादी नहीं करना चाहती थी।
पर सिंघानिया परिवार में सोहन लाल का शब्द ही कानून था। कोई उसे नहीं काट सकता था।
वह खुद भी नहीं!
जब उसने सिर उठाया, तो देखा कि आर्यन उसे एक अजीब सी, चिढ़ाने वाली मुस्कान के साथ देख रहा है। उसका खून खौल गया। क्या यह आदमी उसका तमाशा देख रहा है?
"क्यों? अब तो यकीन हो गया न कि शादी का कागज असली है? अब तो नहीं लग रहा कि मैंने धोखा दिया?"
आर्यन ने मुस्कुराते हुए मजे लिए।
"प्लीज़... मैं तुमसे विनती करती हूँ, दादाजी को रोको!"
"मैं..."
सानिया उसे खरी-खोटी सुनाना चाहती थी, लेकिन इस आदमी का चेहरा ऐसा था कि मन कर रहा था एक मुक्का मार दे।
"जल्दी फैसला करो, वरना तुम्हारे दादाजी यहीं सुहागरात का इंतज़ाम भी कर देंगे।"
आर्यन ने शरारत से कहा।
"तुम... बेशरम!"
सानिया ने दांत पीसते हुए कहा।
आर्यन को बड़ा मज़ा आ रहा था। मन ही मन सोचा, 'क्यों छोटी बच्ची, लगा न कि मैं तुम्हें नहीं संभाल सकता?'
"अरे छोटे गुरुजी, क्यों न सुहागरात का इंतज़ाम हम अपने पुराने वाले बंगले में ही कर दें? वहां प्राइवेसी अच्छी रहेगी।"
सोहन लाल ने मुड़कर बत्तीसी दिखाते हुए सुझाव दिया।
सानिया शर्म से पानी-पानी हो गई। क्या ये लोग सचमुच सुहागरात पर चर्चा कर रहे हैं?
"रुको, मिस्टर सोहन लाल, आप गलत समझ रहे हैं। मैं यहाँ शादी करने नहीं..."
"...मैं यहाँ सगाई तोड़ने आया हूँ।" आर्यन ने शांति से बम फोड़ा। अब उसके तेवर दिखाने का समय आ गया था!
"क्या? सगाई तोड़ने?"
सोहन लाल की बोलती बंद हो गई।
पूरे हॉल में एकदम सन्नाटा छा गया।
सबकी नज़रें आर्यन पर गड़ गईं।
क्या यह पागल हो गया है?!
अरबों रुपये की दौलत को लात मार रहा है? और सानिया को देखो—वह मुंबई की सबसे खूबसूरत लड़की है!
हजारों लड़के उसके लिए जान देने को तैयार हैं!
यहाँ हॉल में ही दर्जनों ऐसे थे जो सानिया से शादी करने के लिए अपना सब कुछ लुटा देते।
पहले जब आर्यन ने सगाई तोड़ने की बात कही थी, तो किसी ने ध्यान नहीं दिया क्योंकि उन्हें लगा था कि यह झूठ बोल रहा है।
लेकिन अब, जब सोहन लाल खुद अपनी पोती और खजाना उसकी झोली में डाल रहे हैं... तब यह मना कर रहा है?
कौन सा मर्द ऐसे ऑफर को ठुकरा सकता है?
वहां मौजूद कोई भी आदमी ऐसा नहीं करता!
बगल में खड़ी सानिया का चेहरा शर्म और गुस्से से लाल हो गया। क्या यह उसकी बेइज्जती नहीं है?
क्या वह इसके लायक नहीं है?
वह खुद शादी से मना कर सकती थी, लेकिन आर्यन का सबके सामने उसे रिजेक्ट करना? यह उसे बर्दाश्त नहीं था।
अगर यह बात बाहर गई, तो वह लोगों को क्या मुंह दिखाएगी?
"तुम... तुम मुझसे शादी नहीं करना चाहते?"
सानिया ने आर्यन को घूरा।
"बिल्कुल नहीं।"
आर्यन अपनी बात पर अड़ा रहा।
"तुम... ठीक है! अगर तुम नहीं करना चाहते, तो अब मैं तुमसे शादी करने की ज़िद करती हूँ! अब क्या करोगे?"
सानिया का अहंकार जाग गया था।
"तब भी मैं तुमसे शादी नहीं करूँगा!"
आर्यन ने लापरवाही से सिर हिलाया। 'अरे मैडम, तुम्हारी इज्जत की कोई कीमत नहीं है क्या? अभी थोड़ी देर पहले तुमने मुझे धोखेबाज कहा था, और मेरी भी तो कोई इज्जत है यार!'
सानिया ने गुस्से में अपनी मुट्ठियां भींच लीं। यह आदमी हद पार कर रहा है!
वहां खड़े लोग और भी उलझन में पड़ गए। बात यहाँ तक कैसे पहुँच गई कि लड़का शादी से मना कर रहा है और लड़की जबरदस्ती शादी करने पर अड़ी है?
"अच्छा, छोटे गुरुजी, शांत हो जाइए। यह रिश्ता तो मेरे और आपके गुरुजी के बीच तय हुआ था..."
सोहन लाल ने जल्दी से मामला संभालने की कोशिश की।
"मेरी पोती बहुत होनहार है। वो न सिर्फ खूबसूरत है, बल्कि बिजनेस में भी बहुत तेज है..."
"हम्म, होनहार तो है... इतनी कि गुस्से में उसकी शर्ट के बटन टूटने वाले हैं।"
आर्यन ने मन ही मन सोचा। उसने सानिया की तरफ देखा, जो गुस्से से हांफ रही थी और उसका हुलिया थोड़ा अस्त-व्यस्त हो गया था। आर्यन का दिल थोड़ा पिघल गया।
'खैर, एक बच्ची से बहस करके क्या मिलेगा?'
"मिस्टर सोहन लाल, सानिया और मेरे रिश्ते की बात बाद में करते हैं..."
आर्यन की आँखों में अब गंभीरता आ गई।
"...पहले उस कातिल को ढूँढ़ते हैं जिसने आपको मारा था।"