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Chapter 10

Fanaa Teri Mohabbat mein - Chapter 11

Fanaa Teri Mohabbat mein

आरव फिर भी दरवाजे से नहीं हटा। आरव की इस हरकत पर नैना को बहुत गुस्सा आया उसने आरव को धक्का देते हुए कहा तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है तुमने जो कहा वह मैंने मान लिया ना अब तो उस ठेकेदार साइन भी कर दिया जो तुम कहोगे मैं वही करूंगी लेकिन बस एक बार मुझे अपने भाई से मिलने तो दो। तुम मुझे यहां इस तरह कैद करके नहीं रख सकते।

आरव को बहुत गुस्सा आ रहा था उसने आंख बंद करके अपना गुस्सा कंट्रोल करने की कोशिश की और फिर नैना के दोनों हाथ पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ करते हुए कहा बच्चे वह क्या है ना उसे कॉन्ट्रैक्ट में साफ-साफ लिखा है कि तुम्हें मेरी एक-एक बात माननी होगी तो चाहे मैं तुम्हें कैद करके रखो या आजाद कर दो यह मेरी मर्जी है अगले 1 साल तक मेरी मर्जी के बिना तुम सांस पर नहीं ले सकती? इसलिए मैं क्या कर सकता हूं और क्या नहीं इस बात का ज्ञान मुझे मत दो?

नैना अदम्य से मिलना चाहती थी उसे उसकी बहुत चिंता हो रही थी इसलिए वह फिलहाल यहां से निकलना चाहती थी लेकिन आरव को देखकर लग नहीं रहा था कि वह उसे जान देने वाला था। नैना का चेहरा उदास हो गया और उसकी आंखों में हल्के से आंसू भर आए यह देख आरव एक कदम पीछे हट गया और नैना के हाथ छोड़कर बोला।

ठीक है अगर तुम अपने भाई से हॉस्पिटल मिलने जाना चाहती हो तो मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं लेकिन जाने से पहले अपना पत्नी धर्म तो पूरा करो। आज तो शादी के बाद तुम्हारा पहला दिन है अपने पति को ऐसे ही छोड़ कर चली जाओगी। एक काम करो पहले जो और मेरे लिए अच्छा सा नाश्ता बनाओ। नाश्ते में आज मैं आलू के पराठे दही भल्ले और आलू पूरी खाऊंगा इतना कुछ बनाने के बाद तुम हॉस्पिटल जा सकती हो।

आरव की डिमांड सुनकर नैना चौक गई। इतना सब कुछ लेकिन तुम तो अकेले हो। और दही भले तो तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं है ना?

आरव ने नैना का हाथ जोड़ से मरोड़ कर उसकी कमर पर के पीछे करते हुए कहा। मेरी पसंद ना पसंद बदल चुकी है पहले ऐसा बहुत कुछ था जो मुझे बहुत पसंद था लेकिन अब मुझे एक छोटी आंख नहीं भाता तो मेरी पसंद ना पसंद का ख्याल छोड़ो और जाकर जो कहा है वह करो।

नैना के पास कोई और चारा नहीं था अब उसे वही करना था जो आरव से करने के लिए कह रहा था। प्रिया तुरंत किचेन में चली गई और उसने वह सारा खाना बनाना शुरू कर दिया जो आरव ने उससे कहा था। यह सारा खाना बनाते बनाते करीब शिवन्या को एक डेढ़ घंटा लग गया।

खाना बनाने के बाद जब नैना हॉस्पिटल जाने के लिए निकल रही थी तब फिर से आरव ने उसका रास्ता रोक लिया और कहा। खाना सिर्फ बनाना ही नहीं होता सर्वे करना होता है। 1 मिनट कहीं तुम अपने आप को इस घर की मालिक तो नहीं समझने लगी। तुम सिर्फ मेरी गुलाम हो एक ऐसी गुलाम जो मेरा हर एक हुक्म मानेगी। चलो अब एक अच्छे नौकर की तरह मुझे खाना सर्व करो मेरे साथ बैठकर खाना खाओ और फिर तुम जहां जाना चाहे जा सकती हो।

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