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Chapter 14

Meri shart tumhen manane hi hogi

Fanaa Teri Mohabbat mein

नैना को आरव की बातें बिल्कुल भी समझ नहीं आ रही थी। तभी आरव वहां आ गया और उसने कहा, "सर वो वकील साहब कब से आपका इंतजार कर रहे हैं।"

वकील का नाम सुनकर नैना ने तुरंत पूछा, "वकील लेकिन हम वकील के पास क्यों आए हैं? और तुम मुझे यहां पर क्यों लेकर आए हो? ये सब क्या चल रहा है क्या तुम मुझे बताओगे?"

आरव ने आरव को वहां से जाने का इशारा किया, उसके जाते ही आरव ने नैना की आंखों में आंखें डालकर बिना किसी एक्सप्रेशन के कहा।

"वकील साहब के सामने तुम्हें बिल्कुल ऐसे रिएक्ट करना है जैसे हमारी शादी हम दोनों की मर्जी से और खुशी से हुई है। अंदर जाकर ज्यादा कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं है।"

आरव की बात सुनकर ऐसे लग रहा था जैसे वो थोड़ा सा परेशान था और अंदर कुछ खास होने वाला था। नैना आरव को बहुत अच्छे से जानती थी इसलिए अगर वो अपने चेहरे पर घबराहट ना भी दिखता तो भी नैना उसकी बातों से ही उसकी हालत समझ सकती थी।

उसने मन ही मन सोचा, "मौका सही है इसके बाद पता नहीं मुझे आरव की कोई कमजोर कड़ी मिले या ना मिले, मुझे इस मौके का पूरा फायदा उठाना होगा।"

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आरव ने एक कदम आगे लिया ही था कि वो फिर रुक गया। नैना अपनी जगह से एक कदम भी नहीं हिली ये देख उसने कहा, "अब क्या तुम्हें इनविटेशन कार्ड चाहिए? चलो जल्दी अंदर।"

नैना ने अपने दोनों हाथ बांध लिए और एटीट्यूड के साथ आरव से कहा, "मैं अंदर सिर्फ एक शर्त पर जाऊंगी।"

नैना की बात सुन आरव मुस्कुराने लगा, "तुम्हें लगता है कि तुम मेरे सामने कोई शर्त रख सकती हो? फिलहाल तुम मेरी एक गुलाम से ज्यादा और कुछ भी नहीं हो, तुम्हें मेरी सारी बातें माननी है और उस कॉन्ट्रैक्ट में यही लिखा है।"

नैना ने भी आरव की बात का वैसे ही जवाब दिया जिस अंदाज़ में उसने नैना से बात की थी।

"कल तुमने ही मुझसे कहा था ना कि तुम एक बिजनेसमैन हो और किसी पर एहसान नहीं करते सिर्फ डील करते हो। तो मैं भी एक बिजनेसमैन की बेटी हूं। अगर तुम चाहते हो कि जैसा तुम कह रहे हो मैं वैसा ही करूं तो तुम्हें मेरी एक बात माननी ही होगी।"

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नैना बहुत अच्छे से जानती थी कि आरव उसकी इस शर्त को मान लेगा क्योंकि वो थोड़ा सा नर्वस था और जाहिर सी बात थी कि आज अंदर कुछ स्पेशल था इसलिए वो नैना से इस तरह का नाटक करने के लिए कह रहा था।

नैना की बात सुन आरव को काफी गुस्सा आने लगा था, उसने अपनी मुट्ठियां भींच ली और गुस्से में कार की साइड पर मारते हुए कहा, "कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारी ये शर्त तुम पर ही भारी पड़ जाए।"

"मुझे उसकी परवाह नहीं लेकिन तुम्हें मेरी ये शर्त माननी ही होगी।" नैना भी अपनी बात से पीछे नहीं हटी इसलिए आरव को उसकी बात माननी पड़ी।

"ठीक है बताओ।"

"मैं बस इतना चाहती हूं कि जब भी अदम्य को मेरी जरूरत होगी तुम मुझे उसके पास जाने दोगे। जैसे आज सुबह तुमने मुझे उसके पास नहीं जाने दिया, जानबूझकर मुझे लेट करवा दिया वैसे दोबारा तुम कभी नहीं करोगे और जब बात अदम्य की आएगी तो मैं तुम्हारी किसी भी बात को मानने के लिए मजबूर नहीं रहूँगी।"

इस वक्त भी नैना अपने बारे में नहीं अदम्य के बारे में सोच रही थी ये सुनकर कुछ पल के लिए आरव का दिल पिघल गया। उसकी आंखों में हल्की सी नरमाहट नजर आने लगी थी लेकिन अगले ही पल उसने फिर से खुद पर कंट्रोल किया और कहा, "ठीक है।"

जैसे ही आरव ने उसकी शर्त मान ली नैना उसके साथ खुशी खुशी अंदर चली गई।

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