Unknown wife of billionaire - Chapter 11
Unknown wife Of Billionaireइशिका अभिमन्यु राजवंश के ऑफिस में आई हुई थी। पहले तो वो अपनी शादी प्रूफ करने की बात कर रही थी लेकिन अगले ही पल इशिका ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ अभिमन्यु से डिवोर्स मांग लिया।
इशिका ने अपना पॉइंट रखते हुए कहा, “लिसन मिस्टर राजवंश, मैं इस शादी को निभाने में इंटरेस्टेड नहीं हूं, ना ही आपको फोर्स करूंगी। मुझे बस डिवोर्स चाहिए और कुछ नहीं।”
अभिमन्यु ने भौंहे उठाकर उसकी तरफ देखा और सख्त आवाज में बोला, “मुझे आपके साथ वो रिश्ता निभाने का कोई शौक नहीं है, जो कभी जुड़ा ही नहीं। कभी कोई रिश्ता था ही नहीं तो तोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता।”
वो अभी भी इस रिश्ते को मानने से इंकार कर रहा था। इशिका आगे कुछ बोलती उससे पहले अभिमन्यु ने जल्दी से उसके दिए हुए पेपर्स पर साइन किया और उसे देते हुए बोला, “मेरा पीछा करना बंद करो मिस सिंघानिया वरना अगली बार में नरमी से पेश नहीं आऊंगा। डॉन्ट हैरेस मी...अगर फिर से तुम मेरे पीछे आई तो मुझे कोई स्ट्रिक्ट एक्शन लेना होगा।”
अभिमन्यु की बात सुनकर अब इशिका को खुद के गुस्से पर कंट्रोल नहीं रहा। वो चिढ़ते हुए बोली, “ओ रियली मिस्टर राजवंश? कौन सा अब तक आप नरमी से या प्यार से पेश आ रहे थे? आपको जो करना था वो तो आप कर चुके हो।”
अभिमन्यु पूरी तरह अनजान था कि इशिका किस बारे में बात कर रही है। वो चौंकते हुए बोला, “और क्या कर दिया है मैंने मिस सिंघानिया?”
“आप ही ने मुझे मेरी यूनिवर्सिटी से बाहर निकलवाया है ना? क्या कहा था आपने कि आप मुझे इस पूरी सिटी तक में नहीं देखना चाहते हैं।” इशिका ने गुस्से में जवाब दिया। उसे आयशा की बात सच लग रही थी।
अभिमन्यु ने गहरी सांस ली और तुरंत ना में सिर हिला कर कहा, “अपनी इस गलतफहमी की दुनिया से बाहर निकलिए मिस सिंघानिया। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है। आप मेरे लिए इतनी भी इंपोर्टेंट नहीं है, जितनी इंपॉर्टेंस आप खुद को दे रही हैं।”
इशिका को उसकी बात का जवाब देने का मौका नहीं मिला क्योंकि अभिमन्यु के पास एक कॉल आ गया। ये कॉल उसकी दादी के मोबाइल से था तो अभिमन्यु ने तुरंत उसे रिसीव कर लिया।
सामने से अभिमन्यु की दादी वसुधा के केयरटेकर ने धीमी आवाज में कहा, “आई एम रियली सॉरी मिस्टर राजवंश लेकिन वसुधा जी फिर से कहीं चली गई है।”
वसुधा के गायब होने की बात सुनकर अभिमन्यु की गुस्से में मुट्ठियां कस गई। उसने कुछ रिएक्ट नहीं किया और जल्दी से कॉल कट करके केबिन के बाहर जाने लगा। इशिका वहां भी उसके पीछे जाना चाहती थी लेकिन पृथ्वी बीच में आ गया।
उसने अपना हाथ इशिका के आगे करके कहा, “आपका काम हो गया है मिस सिंघानिया, यू मे गो नाउ।”
इशिका ने आह भरी। उसके पास और कोई रास्ता भी नहीं था। वो तुरंत वहां से अपने घर जाने के लिए निकल पड़ी ताकि कुछ पल सुकून से अपने साथ बिता सके।
इशिका अपने घर के पास पहुंची ही थी कि तभी किसी ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया। उसने मुड़कर देखा तो वो वसुधा जी थी, जो उसी के आने का इंतजार कर रही थी।
उन्हें वापस वहां देखकर इशिका बुरी तरह चौक गई। इशिका कुछ बोलने को हुई कि तभी वसुधा ने उसका हाथ पकड़ा और उसे अंदर खींचते हुए बोली, “मेरी बहू... मेरे पोते की पत्नी, तुमने एक बार फिर से मुझे पीछे छोड़ दिया। मैंने तुम्हें कहा था ना मुझे छोड़कर मत जाना।”
इशिका ने कुछ नहीं कहा। वो चुपचाप उसे अपने घर पर ले गई, जो उसने किराए पर ले रखा था। शहर से दूर एक शांत और छोटी सुंदर जगह।
वहां आते ही इशिका ने वसुधा जी को डाइनिंग टेबल पर बिठाया और उन्हें पानी पिलाया। उन्होंने एक-एक करके तीन गिलास पानी के खाली कर दिए थे मानो उन्होंने काफी देर से पानी ना पिया हो।
जब इशिका को लगा कि वो थोड़ी शांत हो गई है, तब वो धीमी आवाज में बोली, “मैंने आपसे कहा था कि मैं आपकी बहू नहीं हूं दादी।”
“नही, तुम ही मेरी बहु हो।” वसुधा ने सख्ती से कहा।
वसुधा काफी जिद्दी थी। इशिका इतनी ही देर में समझ गई थी कि उन्हें अपनी बात समझ पाना नामुमकिन था। उसने कुछ नहीं कहा और अपने मोबाइल में वही नंबर निकाला, जो पिछली बार उन्होंने वसुधा के टैग से निकाल कर कॉल किया था ।
परेशानी में अभिमन्यु ने तुरंत बिना नंबर देखे उसका कॉल रिसीव कर लिया और बोला, “हेलो...।”
इशिका के लिए ये आवाज जानी पहचानी थी। वो आगे कुछ कहती उससे पहले वसुधा ने उसके हाथ से मोबाइल छीन कर अपने कान पर लगा लिया था।
अभिमन्यु इस वक्त एक पूरी टीम के साथ मौजूद था और वसुधा की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश कर रहा था। वसुधा के गायब होने पर वो काफी घबरा गया था। उसकी दादी की उम्र हो गई थी। उसे अल्जाइमर ही नहीं था, बल्कि इस उम्र में शरीर के बाकी बॉडी पार्ट्स भी ठीक से काम नहीं करते है। वो उनसे काफी प्यार भी करता था तो उनके इस तरह दूर जाने पर वो परेशान हो गया था।
“तुम बहुत शैतान हो, बचपन की तरह, मैं अपनी बहू के साथ हूं और मुझे यहां लेने के लिए मत आना।” वसुधा गुस्सा दिखाते हुए बोली।
“बहू?” अभिमन्यु ने हैरानी से कहा, “कौन सी बहू?”
इतना कहकर अभिमन्यु ने नंबर चेक किया। उसे याद आया ये उसी लड़की का नंबर था, जिसके पास पिछली बार उसकी दादी चली गई थी।
अभिमन्यु के चेहरे के भाव सख्त हो गए थे। उसने खुद का गुस्सा कंट्रोल करके पूछा, “इस वक्त कहां है आप?”
“कहा ना मैं अपनी बहू के साथ हूं और अपना एड्रेस नहीं बताने वाली हूं।” वसुधा ने सख्त आवाज में कहा।
“और आपको क्या लगता है मैं आपको ढूंढ नहीं पाऊंगा?” अभिमन्यु ने भौहें उठाकर पूछा।
“तुम ढूंढ सकते हो लेकिन मैं तुम्हें वार्निंग दे रही हूं कि तुम मुझे यहां लेने के लिए नहीं आओगे और ना ही किसी और को भेजोगे।” वसुधा ने जवाब दिया।
वसुधा को जिद करते देखकर अभिमन्यु ने अपना सिर पकड़ लिया। कुछ पल सोचने के बाद उसने अपने पास बैठे वसुधा के पर्सनल डॉक्टर से पूछा, “क्या हम दादी को फोर्सफुली यहां पर ला सकते हैं?”
“ऐसा करना सही नहीं होगा। उन्हें स्ट्रेस से दूर रखना है और खुश भी रखना है। अगर हम उनके साथ जबरदस्ती करेंगे तो उन्हें फिर से पैनिक अटैक आने लग जाएगा। ये उनकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है। कुछ दिन उन्हें इस लड़की के साथ रहने दीजिए। वो लड़की मुझे बुरी नहीं लगी।” डॉक्टर माथुर ने अपनी राय रखते हुए कहा।
अभिमन्यु ने कॉल पर कहा, “ठीक है फिर मैं आपकी दवाइयां लेकर आता हूं।”
“कोई जरूरत नहीं है आने की। मैं अब सारा सामान अपने साथ लेकर आई थी।” वसुधा ने तिरछा मुस्कुराते हुए कहा।
अभिमन्यु आगे कुछ कहता उससे पहले वसुधा ने कॉल कट कर दिया। उसने फिर मुस्कुराते हुए इशिका को मोबाइल देकर कहा, “हो गया।”
इशिका को गुस्सा आ रहा था कि उस दादी की फैमिली कितनी ईरिस्पांसिबल है। उनकी बीमारी में उनका ख्याल नहीं रख रही, ऊपर से वो बार-बार एक अनजान लड़की के घर चली आती है। इशिका वापस उस नंबर पर कॉल करने को हुई तभी उसे एक व्हाट्सएप मैसेज दिखाई दिया।
“मैं उस ओल्ड लेडी का पोता हूं।” मैसेज अभिमन्यु ने भेजा था।
इशिका ने तुरंत उसका नंबर सेव कर लिया। उसने अभिमन्यु का नंबर “अनजान दादी का इरिस्पांसिबल पोता" के नाम से सेव किया था।
अभिमन्यु का तुरंत दूसरा मैसेज आया। उसने लिखा, “क्या आप थोड़े दिन के लिए मेरी दादी की केयर कर सकती है? वो ठीक नहीं है और मैं उनके साथ जबरदस्ती करके उन्हें स्ट्रेस नहीं देना चाहता।”
इशिका को काफी गुस्सा आ रहा था। उसने काफी रूडली टाइप किया, “नहीं, मैं ऐसा नहीं करने वाली हूं। मैंने कोई चैरिटी नहीं खोल रखी है। आप आइए और अपनी दादी को लेकर जाइए।”
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क्या अभिमन्यु इशिका का ऐसा जवाब सुनकर गुस्सा करेगा और अपनी दादी को लेने आएगा? अगर ऐसा होगा तो इशिका और अभिमन्यु की एक और मुलाकात होगी। कहानी के साथ बने रहिए और पढ़कर समीक्षा कर दीजिएगा।