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Chapter 18

Unknown wife of billionaire - Chapter 18

Unknown wife Of Billionaire

अभिमन्यु ने जब अपनी दादी से मिलने की इच्छा जताई, तो इशिका ने उसे अपना पूरा पता भेज दिया था। इशिका का पता मिलते ही अभिमन्यु के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

अगले ही पल उसे एहसास हुआ कि वो बार-बार इशिका से मिलने की बात कर रहा था। अभिमन्यु ने तुरंत टाइप करके लिखा, “दरअसल, दादी के डॉक्टर ने उनकी हेल्थ के लिए कुछ इंस्ट्रक्शंस दिए हैं और वो चेकअप करना चाहते हैं, इसलिए मैं मिलने का सोच रहा हूँ। उम्मीद है कि मेरे आने से आपको कोई परेशानी नहीं होगी।”

अभिमन्यु ने अपनी तरफ से बहाना बनाया, लेकिन इशिका ने उसके मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया। जब इशिका ने जवाब नहीं दिया, तो अभिमन्यु ने गहरी सांस लेते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “ये भी सही है, मैडम को फॉर्मलिटी पसंद नहीं है। आगे से ध्यान रखूंगा कि किसी चीज़ की सफाई नहीं दूंगा।”

कहीं न कहीं, अभिमन्यु को इशिका अच्छी लगने लगी थी। वो उसके बर्ताव और बात करने के तरीके को ध्यान से देखता और जब भी समय मिलता, सबसे पहले इशिका को मैसेज करता था।

इशिका से बात करते हुए अभिमन्यु के चेहरे पर मुस्कान थी, जिसे उसके आसपास के लोगों ने नोटिस कर लिया था। उनमें से एक आदमी ने कहा, “मिस्टर राजवंश, लगता है आप मिसेज़ राजवंश से बातें कर रहे हैं, तभी आपके चेहरे पर मुस्कान है।”

अभिमन्यु ने तुरंत अपने चेहरे के भावों को कंट्रोल किया और मोबाइल साइड में रख दिया। जब ये खबर बाहर निकली थी कि अभिमन्यु शादीशुदा है, हर कोई उसकी पत्नी को देखना चाहता था। आज तक वो अभिमन्यु के साथ कभी बाहर नहीं आई थी, इसलिए लोगों को शक था कि अभिमन्यु सच में शादीशुदा है या नहीं।

अभिमन्यु ने हाँ में सिर हिला दिया ताकि लोगों को शक न हो। उसके हाँ कहते ही दूसरा आदमी बोला, “वैसे मानना पड़ेगा, मिसेज़ राजवंश काफी लकी हैं। आप उनके लिए काफी लॉयल हैं। थोड़ी देर पहले जो लेडी शेफ आई थी, उसकी खूबसूरती देखने के बाद भी आपने उसकी बदतमीजी पर गुस्सा किया। हममें से कोई होता तो ये नहीं कर पाता।”

उस आदमी की बात खत्म होते ही तीसरा आदमी बोला, “हां, अब मिसेज़ राजवंश आपकी वाइफ हैं, तो वो खास तो होंगी ही, दिखने में भी खूबसूरत होंगी और ज़रूर वसुधा जी उन्हें पसंद करती होंगी।”

“हाँ, दादी को भी वो बहुत पसंद हैं।” अभिमन्यु ने ज़बरदस्ती मुस्कुराकर कहा। अभिमन्यु के अपने परिवार के साथ रिश्ते कैसे थे, इससे सब वाकिफ़ थे। ऐसे में उसकी दादी ही थीं, जो उसके सबसे करीब थीं। वसुधा जी की हाँ या ना, अभिमन्यु की जिंदगी में बहुत मायने रखती थी।

अभिमन्यु ने ज्यादा कुछ नहीं कहा और चुपचाप खाना खाने लगा। वो मन ही मन बोला, “लोगों के सवालों के जवाब देना इतना मुश्किल क्यों है? इन्हें क्या लेना-देना है कि मेरी वाइफ कौन है या उसे कोई पसंद करता है या नहीं?” अभिमन्यु को उन सबके बर्ताव से काफी चिढ़ हो रही थी, पर वो मजबूरी में वहां बैठा था।

वहीं बाहर खड़ी इशिका, अभिमन्यु के लंच पार्टी खत्म होने का इंतजार कर रही थी। इशिका की निगाहें दरवाजे पर टिकी हुई थीं, तभी उसे एक जानी-पहचानी आवाज सुनाई दी।

“इशिका...”

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इशिका ने पलट कर देखा तो नक्ष खड़ा था। उसे देखकर इशिका ने गहरी सांस ली, मानो उसे नक्ष का यहां आना पसंद न आया हो।

नक्ष नेवी ब्लू सूट में काफी हैंडसम लग रहा था। हर कोई जानता था कि उसका बर्ताव अभिमन्यु से काफी अलग था। वो अभिमन्यु की तरह रूड और एरोगेंट दिखने के बजाय अपनी इमेज काइंड और लविंग पर्सन के तौर पर बना कर रखता था।

नक्ष ने अपने कदम इशिका की तरफ बढ़ाए और उसे देखकर भौहें उठाकर कहा, “ तो तुम भी यहां पर हो।”

“तुम्हें कुछ चाहिए, नक्ष?” इशिका ने सख्त लहजे में कहा। जब से उसकी और आयशा की सगाई हुई थी, तब से इशिका नक्ष की शक्ल तक नहीं देखना चाहती थी।

इशिका का ये व्यवहार देखकर नक्ष कड़वाहट से मुस्कुराकर बोला, “अजीब बात है। पहले तो तुमने मुझसे ऐसा नहीं कहा कि मैं तुमसे बात करने के लिए क्यों आ रहा हूँ। याद है ना, इशिका, हम अच्छे दोस्त थे। असल में दोस्त से भी कुछ ज़्यादा था मेरे दिल में।”

“देखो नक्ष, मैं यहां कोई सीन क्रिएट नहीं करना चाहती। वो रिश्ता तुम्हारी तरफ से खत्म हुआ था। तुमने आयशा से शादी करने का फैसला लिया था, फिर अब मुझे क्यों ब्लेम कर रहे हो?” इशिका ने शांत लहजे में जवाब दिया।

अब तक नक्ष अपने गुस्से को कंट्रोल किए हुए था, लेकिन अब वो सख्त आवाज में बोला, “हाँ, क्योंकि तुमने मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया था। तुमने मुझसे सच छुपाया, इशिका। तुम आदर्श सिंघानिया की नाजायज औलाद हो। तुम्हारी मां ने उनके घर को बर्बाद किया है। मुझे अमीर आदमियों की मिस्ट्रेस और उनकी नाजायज औलादों से सख्त नफरत है।”

नक्ष की बातें सुनकर इशिका की मुट्ठियां बंध गईं। वो बोली, “अच्छा, तो इसलिए तुमने मुझसे रिश्ता तोड़ा था। जब रिश्ता तोड़ ही दिया है, तो अब यहां आकर मुझसे बात क्यों कर रहे हो?”

इशिका को नक्ष पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था।

यूनिवर्सिटी में नक्ष उसका सीनियर था, फिर भी उन दोनों के बीच दोस्ती हो गई। नक्ष की पढ़ाई पूरी होने के बाद भी वो अक्सर उससे मिलने आता था, किसी न किसी बहाने। नक्ष उसके आसपास ही रहता था और कॉलेज के बाद भी वे एक-दूसरे से मिलते रहे। उनका रिश्ता काफी अच्छा था। देखा जाए तो सिंघानिया परिवार छोड़ने के बाद, अगर इशिका ने किसी को दिल से दोस्त माना था, तो वो नक्ष था।

नक्ष इशिका की बात का जवाब देते हुए बोला, “हाँ, मैंने रिश्ता तोड़ दिया, क्योंकि आयशा ने मुझे तुम्हारी सच्चाई बताई थी। मैं ऐसी लड़की से शादी कैसे कर सकता हूँ, जिसकी माँ ने किसी और औरत की जिंदगी खराब की हो? तुम्हें पता है, मेरी माँ के साथ भी यही हुआ था। मेरी भी एक स्टेप सिस्टर है, इसलिए मैं नहीं चाहता कि मेरी फैमिली में एक और ऐसी लड़की शामिल हो, जिसकी माँ ने ऐसा किया हो।”

नक्ष की बातें इशिका को बहुत हर्ट कर रही थीं। उसने गहरी सांस ली और खुद को मजबूत किया। बिना कोई जवाब दिए, इशिका पलटने लगी, तभी नक्ष ने उसका हाथ पकड़ा और जोर से कहा, “तुम्हारे पास कोई एक्सप्लेनेशन है कि तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?”

इशिका ने उसका हाथ झटका और उसकी आँखों में देखते हुए बोली, “नहीं, मेरे पास कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है और ना ही मुझे तुम्हें कुछ एक्सप्लेन करना है। मैं किस बात की सफाई दूं? क्या इस बात की कि मैंने अपनी किस्मत खुद लिखी थी? मेरी माँ ने किसी का घर बर्बाद किया और मुझे जन्म दिया, इसमें मेरी कोई गलती नहीं है, नक्ष राजवंश। इसलिए मुझसे किसी सफाई की उम्मीद मत करो।”

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इशिका जाने के लिए मुड़ी, लेकिन उसे अचानक कुछ याद आया। वो नक्ष की ओर मुड़ी और बोली, “अगर तुम्हारी सोच इतनी घटिया है, नक्ष राजवंश, तो मुझे अफसोस है कि हम कभी दोस्त थे। अब हमारे रास्ते अलग हैं, तो जाकर उस हाई क्लास की लड़की से शादी कर लो। किसी की नाजायज औलाद से रिश्ता रखने के लिए तुम्हें कोई नहीं कह रहा है।”

इशिका की बातों ने नक्ष के गुस्से को और बढ़ा दिया। वो वैसे भी इस बात से खफा था कि उसका प्यार उसे नहीं मिल रहा था।

इशिका ने वहां से चले जाने में ही भलाई समझी, लेकिन नक्ष उसके सामने आ गया। उसने दोनों हाथों से इशिका को पकड़ कर उसकी आँखों में देखा और कहा, “तुम इस तरह नहीं जा सकती हो।”

“तो कैसे जाना है, तुम ही बता दो।” इशिका ने सख्त आवाज में जवाब दिया। वो नक्ष से दूर होने की कोशिश कर रही थी, पर नक्ष ने उसे कसकर पकड़ रखा था।

जैसे-तैसे, इशिका ने खुद को नक्ष से अलग किया और आखिरी चेतावनी देते हुए बोली, “मुझे छोड़ने का फैसला तुम्हारा था, नक्ष। ऐसे बर्ताव मत करो, जैसे मैंने तुम्हें छोड़ा हो। डॉन्ट प्ले द विक्टिम कार्ड।”

इशिका की बातों के बाद, नक्ष के पास कहने को कुछ नहीं बचा। उसने गौर से देखा कि इशिका ने वहां की स्टाफ यूनिफॉर्म पहन रख़ी थी। उसने उससे कहा, “तुम अब भी यहां काम कर रही हो, इसका मतलब है तुम्हें अभी तक कोई परमानेंट जॉब नहीं मिली। ऐसा करो, मेरी कंपनी जॉइन कर लो। तुमने पहले भी मेरी मदद की है।”

“मुझे नहीं लगता कि मैं ये कर पाऊंगी और न ही मैं करना चाहती हूँ। थैंक यू सो मच, जो तुमने मुझे जॉब ऑफर की, पर आई एम नॉट इंटरेस्टेड।” इशिका ने साफ-साफ मना कर दिया।

नक्ष किसी भी तरह इशिका को अपने पास रखना चाहता था। उसने कहा, “तुम्हें कुछ नहीं करना होगा। ऑफिस के पास मेरा अपार्टमेंट है, वहां आकर रह लो। बस मेरा ख्याल रखना। मैं वादा करता हूँ कि तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं होगी, इशिका।” बोलते हुए नक्ष की आवाज थोड़ी इमोशनल हो गई, वो प्यार में पागल एक आशिक लग रहा था।

इशिका उसकी बातों का मतलब समझ गई थी। उसने सिर हिलाया और गंभीर आवाज में कहा, “तो तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारी मिस्ट्रेस बन जाऊं, तुम्हारी फिजिकल नीड्स पूरी करूं और बदले में तुम मुझे पैसे दो? यानी तुम मुझे खुद को बेचने के लिए कह रहे हो?”

“हाँ, तो इसमें गलत क्या है? तुम्हारी माँ भी तो यही करती थी, उन्होंने तुम्हें बहुत कुछ सिखाया होगा। मुझे यकीन है कि तुम इसे प्रोफेशनली करोगी और तुम्हारी जिंदगी...”

नक्ष बोल ही रहा था कि इशिका ने उसे जोरदार थप्पड़ मार दिया। अब वो उसकी बातें और नहीं झेल सकती थी।

इशिका गुस्से में गहरी सांसें ले रही थी। तभी उसने देखा कि पीछे अभिमन्यु और पृथ्वी खड़े थे, जो उन्हें अजीब नजरों से देख रहे थे। इशिका को खुद पर शर्म आ रही थी, क्योंकि अभिमन्यु के चेहरे के भाव बता रहे थे कि उन्होंने नक्ष और उसकी सारी बातें सुन ली थीं। थोड़ी देर पहले नक्ष ने उसे जो ऑफर किया था, वो भी उन्होंने सुन लिया था।

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अब देखते हैं कि अभिमन्यु क्या कदम उठाता है। पार्ट पढ़कर समीक्षा कर दीजिएगा। अगले पार्ट पर मिलते है।

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