Unknown wife of billionaire - Chapter 21
Unknown wife Of Billionaireअगली सुबह इशिका उठी। आज उसके पास कुछ खास काम नहीं था। ऊपर से उसने यूनिवर्सिटी जाना भी छोड़ रखा था। वो बार-बार अभिमन्यु के सामने भी नहीं जा सकती थी तो इशिका ने बाहर घूमने का डिसीजन लिया।
ब्रेकफास्ट के बाद इशिका तैयार हुई। उसने नॉर्मल डेनिम पैंट्स के ऊपर पिंक ट्यूब टॉप पहना था और ऊपर व्हाइट शर्ट, जिसे उसने सामने से खुला कर रखा था।
इशिका वसुधा के पास आई और उनसे बोली, “दादी क्यों ना आज हम शॉपिंग करने के लिए चलें? मुझे आपके लिए ड्रेस खरीदनी है।”
“हां हां क्यों नहीं, मुझे भी नए कपड़ों का बहुत शौक है।” वसुधा ने मुस्कुरा कर जवाब दिया।
इशिका ने वसुधा को तैयार किया। वसुधा के सामान में उसने महसूस किया कि वसुधा के सारे कपड़े एक्सक्लूसिवली डिजाइन किए हुए किसी डिजाइनर के थे। इशिका ने उन दोनों के लिए कैब मंगवाई और फिर दोनों वहां से गोवा के सबसे बड़े मॉल में पहुंची। वहां डिजाइनर के बनाए हुए स्पेशल कपड़े मिलते थे।
वही उनसे कुछ पहले आयशा भी मिस्टर आदर्श सिंघानिया के साथ उसी स्टोर पर आई थी। उसने आदर्श से मासूमियत से मुस्कुरा कर कहा, “डैड आप इतना बिजी रहते हो। फिर क्या जरूरत है आपको मेरे साथ यहां आने की? मैं खुद ही शॉपिंग कर लेती।”
“हां बेटा मैं जानता हूं, तुम्हारी चॉइस काफी अच्छी है पर यहां कपड़े तुम्हारे लिए नहीं नक्ष की परदादी के लिए खरीदने हैं। आज शाम को हम उनके यहां डिनर के लिए जाने वाले हैं, इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम उन्हें एक अच्छी सी ड्रेस प्रेजेंट करो।” आदर्श ने मुस्कुरा कर काफी प्यार से जवाब दिया।
आयशा ने उनकी बात पर हां में सर हिला कर कहा, “अच्छा ठीक है। मैं पहले उनसे नहीं मिली हूं। कैसी है वो? कहीं कड़क मिजाज तो नहीं है ना? मुझे उन्हें इंप्रेस करना होगा क्या?”
“यस ऑफ कोर्स बेबी, तुम्हें उन्हें इंप्रेस करना होगा क्योंकि राजवंश एम्पायर के 20% शेयर्स उनके नाम है। वैसे ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि वो अल्जाइमर की मरीज है और उन्हें कुछ याद नहीं रहता। उनकी गुड बुक्स में आने के लिए मेहनत मत करना लेकिन उनकी हेटर्स की लिस्ट में भी मत आ जाना। बहुत जल्दी गुस्सा हो जाती है वह।” मिस्टर सिंघानिया ने अब तक वसुधा के बारे में जो भी सुना था, वो सब आयशा को बता दिया।
आयशा ने मुस्कुरा कर उनकी बात पर हामी भरी और फिर अपने मन में बोली, “20% शेयर्स उनके नाम है, तब तो इंप्रेस करना ही पड़ेगा। आखिर फ्यूचर का सवाल है।”
आयशा अपनी तरफ से बेस्ट ड्रेस सेलेक्ट करने लगी हुई थी तो वही इशिका भी वसुधा को अंदर लेकर गई। वो उनके लिए ड्रेस सेलेक्ट कर रही थी।
इशिका ने उनके लिए एक ड्रेस सेलेक्ट की और वसुधा के लगाते हुए कहा, “दादी आपको ये ड्रेस ट्राई करनी चाहिए। ये कलर आप पर बहुत सूट करेगा।”
“अगर तुम रहती हो तो पहन कर देख लेती हूं।” वसुधा ने मुस्कुरा कर कहा।
इशिका और वसुधा आपस में बातें कर रहे थे, तभी कोई उन्हें अजीब नजरों से देख रहा था। वो आयशा थी। उसने गौर से वसुधा की तरफ देखा और फिर अपने मन में कहा, “ओह तो ये बूढी औरत इसके सड़कछाप पति की दादी है। मानना पड़ेगा कुछ ज्यादा ही हवा में उड़ने लगी है ये लड़की... इतने बड़े मॉल में आने की इसकी हिम्मत भी कैसे हो गई।”
आयशा खुद शॉपिंग करने के बजाए उन्हें देख रही थी। इशिका ने वसुधा को पहनने के लिए ड्रेस दी थी लेकिन कुछ देर उस ड्रेस को देखने के बाद वो बोली, “नहीं, मुझे ये अच्छी नहीं लग रही है। कुछ और ट्राई करते हैं।”
वसुधा की बात सुनकर आयशा सारकास्टिकली मुस्कुरा कर बोली, “अच्छी नहीं लग रही है या खरीदने की औकात नहीं है। पता नहीं इन जैसे लोगों को अंदर घुसने भी कौन देता है।”
आयशा ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाई। वो अपने कदम इशिका की तरफ बढ़ते हुए तेज आवाज में बोली, “इशिका, तो ये तुम्हारे पति की दादी है।” बोलते हुए आयशा ने वसुधा की तरफ देखकर तिरछा मुस्कुरा कर कहा, “नमस्ते दादी, मैं आपकी बहू की बहन हूं। वैसे आपने जो ड्रेस अपने हाथ में पकड़ी है, वो पूरे 2 लाख रुपए की है, जिसे खरीदना तो दूर की बात है ट्राई करने तक की आपकी हैसियत नहीं है। आप ऐसा कीजिए कि थोड़ी दूर जाने पर यहां ठेले पर कुछ लोग कपड़े बेच रहे होंगे, वहां से जाकर कुछ खरीद लीजिए। वहां से आपको पसंद भी आ जाएगा और वो आपके स्टैंडर्ड के हिसाब से आपको अच्छे भी लगेंगे।”
“अपना मुंह बंद रखो।” इशिका गुस्से में बोली। आयशा का इस तरह बीच में आकर इंटरप्ट करना उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।
“अच्छा ठीक है, चुप हो जाती हूं।” आयशा बोली, “वैसे मैंने एड्रेस सही बताया ना इशिका? तुम्हारे स्टैंडर्ड के हिसाब से कपड़े कहां मिलते हैं, ये तुम्हें पता है ना? तुम अपनी दादी सास को वही लेकर क्यों नहीं चली जाती, जहां से तुमने ये सस्ते सेल वाले कपड़े खरीदे हैं। देखने में किसी महंगे से ब्रांड के लग रहे हैं पर मुझे अच्छे से पता है कि ये उसकी फोर्थ फिफ्थ कॉपी भी नहीं होंगे।”
आयशा जिस लहजे में इशिका से बात कर रही थी, ये वसुधा को अच्छा नहीं लगा। वो गुस्से में आयशा से बोली, “कहना क्या चाहती हो लड़की तुम? हम क्या तुम्हें झोपड़ी में रहने वाले भिखारी दिखाई दे रहे हैं।”
“कोई शक है क्या उसमें?” आयशा ने तिरछा मुस्कुरा कर कहा।
वसुधा आगे और बहस करती उससे पहले इशिका ने उनका हाथ पकड़ लिया। गुस्से में वो एग्रेसिव हो सकती थी और अभिमन्यु के कहे मुताबिक गुस्सा उनकी हेल्थ के लिए अच्छा नहीं था।
इशिका वसुधा को वहां से ले जाती उससे पहले आदर्श वहां आ गए। जब उन्होंने इस तरह उन तीनों को बहस करते सुना तो वो देखने के लिए आए। सामने इशिका एक बूढी औरत के सामने खड़ी थी।
आदर्श ने वसुधा की तरफ कुछ पल गौर से देखा और फिर धीरे से कहा, “मिसेज वसुधा राजवंश?”
वो उस औरत को गौर से देख कर पहचानने की कोशिश कर रहे थे। आखिरी बार जब वो वसुधा से मिले थे, तब वो सो रही थी उनकी आंखों के नीचे गहरे काले गड्ढे थे और वो बीमार थी, जबकि सामने मौजूद औरत बुजुर्ग जरूर थी लेकिन वो बीमार नहीं लग रही थी और ना ही उनकी आंखों के नीचे कोई काले गड्ढे थे।
“लगता है मुझे ही गलतफहमी हो गई कि ये मिसेज राजवंश है। यहां इस छोटे से स्टोर में क्या करेगी वो... वो भी इशिका के साथ?” आदर्श ने मन ही मन कहा। तुरंत ही उनके हिसाब से उनकी कंफ्यूजन दूर हो गई थी।
आयशा ने चालाकी से मासूम बनते हुए कहा, “देखिए ना डैड, ये बेवजह तमाशा कर रही है। ये बूढी औरत इसकी दादी सास है। मैंने तो इसे इतना ही कहा कि ये यहां पर कपड़े ना खरीदे। वो इतने महंगे कपड़े के अफोर्ड नहीं कर सकती हैं।”
“हां तो क्या गलत कह रही हो तुम?” आदर्श ने इशिका को देखकर कहा, “तुम्हारी बहन तुम्हें बिल्कुल सही एडवाइस दे रही है। यहां बिल भरने के टाइम पर तुम्हारी बहुत इंसल्ट होगी। बेहतर होगा अभी यहां से चली जाओ।”
इशिका मिस्टर सिंघानिया से बात नहीं करती थी इसलिए उसने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। इशिका वहां से जाने के लिए पलटी तभी वसुधा ने उसका हाथ पकड़ कर पूछा, “बहु ये क्या तुम्हारे पापा हैं?”
पापा शब्द सुनकर इशिका की आंखें नम होने लगी। उसने कभी इस शब्द का मतलब ही नहीं समझा था। आदर्श सिंघानिया ने कभी उसे पिता का प्यार नहीं दिया। बचपन में जब मालविका उसे खाना नहीं देती थी और उसे मारती पीटती रहती थी, तब भी आदर्श ने कुछ नहीं कहा। वो यही कहते थे कि इशिका को मालविका की हर बात माननी चाहिए, चाहे वो गलत हो या सही। अगर सिंघानिया फैमिली में किसी के दिल में थोड़ी बहुत भी इशिका के लिए फीलिंग थी, तो वो राधिका मरचेंट थी।
इशिका बात को बढ़ाना नहीं चाहती थी इसलिए बिना उसने कुछ बोले वसुधा की सिलेक्ट की हुई एक ड्रेस उठाई और पे करने के लिए काउंटर की तरफ जाने लगी।
आदर्श नहीं चाहते थे कि पैसे नहीं होने की वजह से इशिका की इंसल्ट हो। वो उसे प्यार ना करते हो लेकिन उसके नाम के पीछे आदर्श का नाम लगा हुआ था।
आदर्श तुरंत इशिका के पीछे गए और बोले, “ये काफी महंगी है। मैं इसकी पेमेंट कर देता हूं लेकिन आगे से तुम इस तरह की किसी जगह पर नहीं जाओगी।”
“उसकी जरूरत नहीं है। मैं खुद देख लूंगी मिस्टर सिंघानिया।” इशिका ने काफी पॉलाइटली जवाब दिया।
आदर्श कुछ कहता उससे पहले आयशा जल्दी से आई और इशिका के हाथ की तरफ इशारा करके बोली, “डैड वो ड्रेस परफेक्ट है। अभी-अभी मेरी डिजाइनर से बात हुई तो उन्होंने बताया है कि ये अभी नया डिजाइन होकर आया है। इस पर हैंड एंब्रॉयडरी की हुई है। ये मिसेज वसुधा राजवंश के लिए परफेक्ट गिफ्ट होगा।”
जैसे ही आयशा ने वसुधा राजवंश का नाम लिया, वसुधा जी के चेहरे के भाव गंभीर हो गए। वो मन ही मन बोली, “ये नाम मुझे इतना सुना हुआ क्यों लग रहा है? क्या मैं उस औरत को जानती हूं, जिसके लिए ये कपड़े लेकर जाना चाहती हैं।”
अल्जाइमर होने की वजह से वसुधा अपना नाम तक याद नहीं रख पाती थी। वो खोई हुई थी।
आयशा ने अपनी तरफ से ड्रेस सेलेक्ट कर ली थी तो आदर्श ने इशिका से कहा, “इशिका तुम कोई और ड्रेस सेलेक्ट कर लो। ये आयशा को दे दो। आज उसके लिए काफी खास दिन है। वो अपने ससुराल जा रही है और नक्ष की पर दादी के लिए इससे परफेक्ट गिफ्ट नहीं हो सकता।”
“मुझे ये पसंद है और मैं ले रही हूं। इतना बड़ा स्टोर है आप कोई भी ड्रेस सेलेक्ट कर लीजिए।” इशिका ने पूरी सख्ती से कहा। अब वक्त बदल गया था, वो आयशा की मनमानियां को नहीं सहने वाली थी।
“क्या तुम मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती हो? एक ड्रेस ही तो मांगा है। इतनी सी बात पर तुम ऐसे क्यों रिएक्ट कर रही हो। तमाशा लगाने की आदत क्यों हो गई है तुम्हें?” आयशा गुस्से में बोली।
इशिका और आयशा के बीच कोई बहस ना हो जाए इसलिए आदर्श ने काफी शांति से कहा, “अच्छा ठीक है इशिका, तुम ये ड्रेस आयशा को दे दो। मैं इसकी 5 गुना कीमत तुम्हें देने के लिए तैयार हूं। पैसे तुम्हारे काम आएंगे। तुम और तुम्हारा पति एक छोटा-मोटा बिजनेस शुरू कर सकते हो।”
“मुझे किसी के भी एहसान की जरूरत नहीं है। आप कोई दूसरी ड्रेस सेलेक्ट कर लीजिए, ये तो दादी ही पहनेगी।” इशिका ने जवाब दिया और पेमेंट करने के लिए अपना कार्ड निकालने लगी तभी वसुधा ने उसका हाथ पकड़ कर कहा, “ये ड्रेस इसे दे दो। मुझे ये अच्छी नहीं लगी है।”
“लेकिन आपने जो ड्रेस सेलेक्ट की थी, उसमें यही सबसे अच्छी ड्रेस थी। हमें फिर से नई ड्रेस देखने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी।” इशिका लाचारी से बोली। वो ज्यादा टाइम इन सब में वेस्ट नहीं करना चाहती थी
“ठीक है तो फिर हम शॉपिंग नहीं करते हैं। मुझे ये ड्रेस नहीं चाहिए।” वसुधा जी ने कहा और इशिका के हाथ से ड्रेस छीनकर आयशा के हाथ में पकड़ा दी।
इशिका को गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर उसने कुछ नहीं कहा और ड्रेस वहीं पर छोड़ दी। वो वसुधा को लेकर वहां से निकाल दी। वो पूरे रास्ते में बिल्कुल चुप थी।
कुछ ही देर में इशिका वसुधा को लेकर पास ही के कैफे में पहुंच चुकी थी। वो उनके लिए कॉफी लेने गई थी तभी वसुधा के मोबाइल पर एक कॉल आया।
सामने से एक आवाज आई, “मॉम आप कहां पर हैं? जहां भी है, घर आ जाएगा क्योंकि आज सिंघानिया फैमिली हमारे घर खास आपसे मिलने के लिए आने वाली है।” सामने से प्रशांत राजवंश बोल रहा था, जो नक्ष का दादा और अभिमन्यु के डैड थे।
“ठीक है मैं आ जाऊंगी।” वसुधा ने इतना ही कहा और फिर कॉल कट कर दिया।
उन्होंने दिमाग पर थोड़ा जोर दिया और उनके चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई। वो बोली, “इसका मतलब वो लड़की मुझसे मिलने के लिए आने वाली थी और मैं ही वसुधा राजवंश हूं। क्या वो ड्रेस उसने मेरे लिए सिलेक्ट की थी?”
वसुधा को सब याद आ गया था। उन्होंने तुरंत अभिमन्यु को वॉयस मैसेज लिखते हुए कहा, “अभी कुछ देर पहले किसी ने मेरे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया था और मेरी बहू के साथ भी। मुझे तुम्हारी जरूरत है। तुम घर आ जाओ। तुम मेरे लिए स्टैंड लो क्योंकि सिर्फ तुम ही हो, जो मुझसे प्यार करते हो और मेरे लिए खड़े हो सकते हो।”
“मैं आता हूं दादी।” अभिमन्यु ने जवाब दिया और तुरंत अपने काम छोड़कर घर जाने लगा।
वही इशिका कॉफी लेकर वसुधा के पास पहुंच चुकी थी। उसने देखा वसुधा के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। इशिका सवालिया नजरों से उसकी तरफ देख रही थी, तभी वसुधा ने कहा, “बहु मुझे मेरे पोते का नाम याद आ गया है और ये भी कि मैं कौन हूं।”
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मिसेज राजवंश जितना सीधा दिखती है, उतनी है नहीं। बाकी आपको पता चल जाएगा। कहानी के साथ बने रहने के लिए थैंक यू सो मच... पार्ट पढ़कर समीक्षा कर दीजिएगा। अगले पार्ट पर मिलते हैं।