N - Chapter 16
Superme Dragon Yoddhaसामने वाला चाहे जितना भी ताक़तवर हो—एक ही मुक्के में पराजय।
बाहरी प्रांगण का कोई भी शिष्य उस एक मुक्के की ताक़त झेल नहीं सका। वह मुक्का मानो एक ऐसी खाई था, जिसे कोई पार नहीं कर सकता था।
आख़िरकार, कुछ शिष्यों ने तो अविनाश का नाम सुनते ही बिना लड़े हार मान ली।
बुज़ुर्ग भी धीरे-धीरे सुन्न पड़ गए थे। उन्हें तो बस यही मन हो रहा था कि अविनाश के मंच पर आते ही सीधे परिणाम घोषित कर दें।
इसी माहौल में पहला चरण चुपचाप समाप्त हो गया।
पहले चरण के बाद, सबसे नीचे रहने वाले सौ शिष्य निराश होकर मैदान छोड़ गए।
अविनाश जानता था कि उन्हें उनके मूल कस्बों में वापस भेज दिया जाएगा, जहाँ उन्हें साधारण जीवन ही जीना पड़ेगा। लेकिन उसे उनके लिए ज़रा भी दया नहीं आई। क्योंकि जब वह सबसे नीचे था, तब इन्हीं लोगों ने उसका मज़ाक उड़ाया था।
अगर किसी को दूसरों को रौंदकर आगे बढ़ना है, तो उसे खुद रौंदे जाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
“अब मैं दूसरे चरण के नियम घोषित करता हूँ।” दूसरे बुज़ुर्ग फिर से मंच पर आए। “दूसरे चरण में, हम राजपूत परिवार के प्रत्येक सदस्य की साधना-प्रतिभा की जाँच करेंगे।”
यह कहते हुए, कुछ सेवक एक पत्थर का मंच लेकर आए। उस मंच पर एक पारदर्शी क्रिस्टल गेंद रखी हुई थी।
वह गेंद हल्की-हल्की चमक रही थी, मानो उसमें कोई रहस्यमय शक्ति छिपी हो। “यह हमारी राजपूत परिवार की विशेष स्पिरिट वेन क्रिस्टल बॉल है।”
“तुम में से हर कोई इसके सामने आएगा, अपनी सारी आध्यात्मिक शक्ति हथेली में इकट्ठा करेगा और फिर इस क्रिस्टल बॉल पर प्रहार करेगा। यह गेंद तुम्हारी आध्यात्मिक नसों की शक्ति के आधार पर परिणाम बताएगी।”
यह सुनते ही कई शिष्य उत्साहित हो गए। यहाँ तक कि अविनाश भी काफ़ी उत्सुक था। वह देखना चाहता था कि नाइन स्टार डिवाइन ड्रैगन तकनीक से बनी उसकी ड्रैगन वेन इस क्रिस्टल बॉल के सामने कैसा प्रदर्शन करेगी।
“इसलिए, मैं दूसरे चरण की प्रतियोगिता की घोषणा करता हूँ—शुरू होती है!”
“हाहा, मुझे नहीं लगा था कि यह परीक्षा इतनी आसान होगी!”
“आसान? मुझे तो ऐसा नहीं लगता! तुम पहली बार हिस्सा ले रहे हो, इसलिए नहीं जानते। मैंने पहले भी परिवार की बाहरी प्रांगण की परीक्षा में यह टेस्ट देखा है। यह स्पिरिचुअल वेन क्रिस्टल बॉल हर व्यक्ति की आध्यात्मिक नसों की शक्ति और उस पर नियंत्रण के स्तर के अनुसार अलग-अलग सितारे बनाती है। कम से कम छह सितारे बनाना ज़रूरी है, तभी पास माना जाता है।”
“पहले किसी का प्रदर्शन काफ़ी अच्छा था, लेकिन आख़िर में वह छह सितारे नहीं बना पाया। नतीजा यह हुआ कि बाद की चार परीक्षाओं में उसका कुल स्कोर बहुत खराब रहा और उसे बाहरी प्रांगण में ही रुकना पड़ा, अगली साल की परीक्षा का इंतज़ार करते हुए।”
यह बात एक युवक कह रहा था, जो साफ़ तौर पर वही राजपूत परिवार का शिष्य था, जो छह सितारे न बना पाने की वजह से बाहरी प्रांगण में ही रह गया था।
यह सुनकर सब एक-दूसरे को देखने लगे और माहौल अचानक शांत हो गया।
“मैं पहले जाता हूँ!उसी समय एक गठीला युवक आगे बढ़ा।
“यह मनीष है! मेरिडियन ओपनिंग रियल्म के सातवें स्तर का ताक़तवर विशेषज्ञ।”
“इस बार तो यह ज़रूर छह सितारे बना लेगा।”
मनीष को मंच पर जाते देखकर सभी को उससे बड़ी उम्मीदें थीं।
मनीष मंच पर चढ़ा और बिना झिझक अपनी हथेली में आध्यात्मिक ऊर्जा भरकर क्रिस्टल बॉल पर ज़ोर से वार किया।
“धम!” स्पिरिचुअल वेन क्रिस्टल बॉल से गूँजदार आवाज़ निकली।
अगले ही पल, क्रिस्टल बॉल से तेज़ रोशनी फूट पड़ी।
मनीष का चेहरा खुशी से चमक उठा, लेकिन अगले ही क्षण उसे ज़बरदस्त प्रतिक्षेप का एहसास हुआ, जो सीधे उस पर टूट पड़ा।
“प्फ़!”
भयानक ताक़त के कारण मनीष का चेहरा सफ़ेद पड़ गया, और उसने मुँह से खून उगल दिया। वह मंच से उड़कर नीचे जा गिरा।
“कमबख़्त!”
मनीष ग़ुस्से से गरजा। उसे अब समझ आ गया था कि इस क्रिस्टल बॉल में ज़बरदस्त प्रतिघात शक्ति छिपी है, और उसकी एक छोटी-सी लापरवाही ने उसे बाहर कर दिया।
“स्स्स…”
यह दृश्य देखकर सभी गंभीर हो गए। साफ़ था कि यह परीक्षा उतनी आसान नहीं थी, जितनी उन्होंने सोची थी।
“अगला!” दूसरे बुज़ुर्ग की आवाज़ फिर गूँजी, और एक साँवला युवक मंच पर चढ़ा। “यह निरंजन है, बाहरी प्रांगण में छठे स्थान पर रहने वाला। पता नहीं यह पास हो पाएगा या नहीं।”
राजपूत परिवार के शिष्य चिंतित दिखे, आख़िर थोड़ी देर पहले ही मनीष बाहर हुआ था। मंच पर खड़े निरंजन की हथेली से नीली-सी आध्यात्मिक ऊर्जा निकलने लगी, और उसने क्रिस्टल बॉल पर वार किया।
एक भारी आवाज़ पूरे मैदान में गूँज गई, और फिर वही शक्तिशाली प्रतिक्षेप उस पर टूटा।
लेकिन पिछले अनुभव से सीख लेकर निरंजन पहले से तैयार था। उसका शरीर चमक उठा और उसने उस ताक़त को संभाल लिया। इसके बाद उसके सिर के ऊपर सितारे तेज़ी से बनने लगे।
एक… दो… छह… आख़िरकार, जब छह सितारे बन गए, तो रोशनी धीरे-धीरे शांत हो गई।
“वाह!”
“जैसा कि उम्मीद थी, बाहरी परिवार में छठे स्थान वाला है। आम आदमी तो एक हथेली से छह सितारे बना ही नहीं सकता।”
“हाँ, सही कहा! निरंजन की हवा तत्व पर पकड़ लगातार मज़बूत होती जा रही है। सच में कमाल है! पूरे राजपूत परिवार में हवा तत्व पर उससे बेहतर नियंत्रण शायद ही किसी का हो।”
निरंजन की सफलता देखकर, जो लोग हमेशा से उसकी प्रशंसा करते थे, खुलकर तारीफ़ करने लगे।
“अविनाश , तुम्हारा क्या कहना है?”
अचानक किसी ने अविनाश की ओर देखकर पूछा। हाल के दिनों में उसकी प्रतिष्ठा तेज़ी से बढ़ी थी, और कई शिष्य उससे दोस्ती करना चाहते थे।
साधना में लीन अविनाश ने आँखें खोलीं, दूर खड़े निरंजन को देखा और उदासीन स्वर में बोला— “प्रतिभा तो ठीक है, लेकिन हवा तत्व पर पकड़ अभी कमज़ोर है। ताक़त भी काफ़ी हल्की है।”
सब पलकें झपकाते रह गए, कुछ समझ नहीं आया। निरंजन को तो हमेशा हवा तत्व में माहिर माना जाता था, लेकिन अविनाश की नज़र में वह “कमज़ोर” था।
थोड़ी दूर खड़ी लड़की ने यह सुना तो नाक सिकोड़कर हँस दी।
“मैं समझती थी कि अविनाश में बस साधना की कमी है, लेकिन अब लगता है कि उसे अपनी औक़ात का भी कोई अंदाज़ा नहीं है।”
उसके पास खड़े राघव ने सिर हिलाया और बोला— “कुछ लोगों को बस दूसरों के सामने दिखावा करना अच्छा लगता है, चाहे उन्हें अपनी सीमाओं का एहसास हो या नहीं।”
“मुझे तो उस पल का इंतज़ार है, जब यह खुद मंच पर चढ़ेगा।”
उसकी आवाज़ धीमी नहीं थी। आसपास के कई लोगों ने सुना, जिनमें अविनाश भी शामिल था। उसने सिर उठाकर राघव की ओर देखा और ठंडे स्वर में सिर्फ़ दो शब्द बोले—“मूर्ख!”
“तू…!” राघव का चेहरा ग़ुस्से से स्याह पड़ गया।
“देखते हैं, तू कब तक इतना घमंडी बना रहता है!”