The Replaced bride - Chapter 4
The Replaced brideपैलेस के अंदर आने के बाद तारा इधर-उधर घूमकर उसे देखने लगी। वहीं, मिस्टर सिसोदिया और उनके साथ मौजूद उनके असिस्टेंट को लगा कि तारा ध्रुव की फ़िआंसे है।
“खाने की सारी तैयारियाँ हो गई हैं ना, जीवन?” मिस्टर सिसोदिया ने फुसफुसाकर पूछा।
“हाँ सर..... मैडम तो आ गई है, लेकिन मिस्टर सिंघानिया अभी तक बाहर हैं।” जीवन ने जवाब दिया।
मिस्टर सिसोदिया ने कहा, “वह भी आ जाएँगे। तब तक तुम ऐसा करो, इन्हें खाने की टेबल तक ले जाओ, मैं मिस्टर ध्रुव सिंघानिया का इंतज़ार कर लेता हूँ।”
मिस्टर सिसोदिया की बात मानकर उनका असिस्टेंट, जीवन, तारा के पास गया। “मैडम, जब तक सर नहीं आ जाते, तब तक आप मेरे साथ चलिए।” वह उसके पास जाकर बोला।
“सच में काफ़ी ख़ूबसूरत है यह राज-महल।” तारा ने इधर-उधर देखकर कहा। “वैसे आप मुझे कहाँ चलने को बोल रहे थे?”
“जी ऊपर, डिनर के लिए।” जीवन ने जवाब दिया।
तारा ने उसकी बात पर हामी भरी और जीवन के साथ सेकंड फ़्लोर पर गई। पैलेस के डाइनिंग हॉल में उनके डिनर की व्यवस्था की गई थी।
“मैम, खाने में ट्रेडिशनल राजस्थानी और गुजराती डिशेज़ सर्व की गई हैं। आई होप कि आपको सभी अरेंजमेंट्स पसंद आई होंगी।” जीवन ने किसी प्रोफ़ेशनल की तरह कहा।
“अरे वाह.....” तारा ने एक्साइटेड होकर कहा, “बिल्कुल सही सुना था, राजस्थान में ख़ातिरदारी की कमी नहीं रखी जाती। लगता है आपको पहले से पता था कि गुजरात से कोई ख़ास मेहमान आने वाला है।”
“यस मैम..... ध्रुव सर ने पहले ही बता दिया था कि उनकी मंगेतर गुजरात से है। सर आपको बहुत चाहते हैं। कब से आपके इंतज़ार में गार्डन में इधर से उधर चहलकदमी कर रहे थे।” जीवन तारा को सब बता रहा था।
उसकी बात सुनकर तारा समझ गई थी कि वह लोग उसे ग़लत समझ रहे हैं। उसके चेहरे की मुस्कान एक पल में उड़ गई, और उसने जवाब में कहा, “आई थिंक आपको कोई ग़लतफ़हमी हुई है। मैं वह लड़की नहीं हूँ, जिससे मिस्टर ध्रुव सिंघानिया की शादी होने वाली है। वह तो उनके साथ नीचे हैं।”
“फ़िर आप कौन हैं?” जीवन ने हैरानी से पूछा।
“मैं तारा हूँ। मुझे यहाँ शादी के अरेंजमेंट्स के लिए वेडिंग प्लानर ने भेजा है।” तारा ने अपना पूरा परिचय दिया।
“माफ़ कीजिएगा, हमने आपको ग़लत समझ लिया। यहाँ से चलते हैं और नीचे जाकर सर को सारी बात बताते हैं, कहीं वह ध्रुव सर के सामने कुछ ना कह दें।” जीवन ने घबराकर कहा।
तारा ने उसकी बात पर हामी भरी और उसके साथ चलने लगी। तभी उसने सोचा, “मैंने नीचे ध्रुव सिंघानिया का सरप्राइज़ ख़राब कर दिया था। उनके चेहरे से साफ़ नज़र आ रहा था कि उन्हें कितना बुरा लग रहा था।”
जीवन ने देखा कि तारा उसके साथ जाने के बजाय वहीं पर रुकी हुई थी। वह उसकी तरफ़ मुड़ा और कहा, “क्या हुआ मैम?”
“क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?” तारा ने हिचकिचाते हुए पूछा।
“मैं कुछ समझा नहीं।” जीवन ने हैरानी से कहा।
तारा ने उसे सब समझाते हुए कहा, “मैं जानती हूँ कि पैलेस बहुत ख़ूबसूरत है। इसका हर एक कोना अपने आप में ख़ास है, लेकिन मैंने ध्रुव सर की फ़िआंसे को देखा था। वह काफ़ी मॉडर्न है। क्या हम इन अरेंजमेंट्स को थोड़ा बदल सकते हैं? मुझे नहीं लगता उन्हें यह सब कुछ ख़ास पसंद आएगा।”
उसकी बात सुनकर जीवन ने कुछ पल सोचा और फिर पूछा, “क्या आपको लगता है कि यह सच में काम करेगा?”
तारा ने उसकी बात पर हामी भरी। मिस्टर सिसोदिया ने भी उसे यही इंस्ट्रक्शन दिए थे कि ध्रुव सिंघानिया की ख़ातिरदारी में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए, इसलिए उसने ज़्यादा सोचे-समझे बिना तुरंत हामी भर दी।
“हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं है। आप इतने वक़्त में कैसे?” जीवन ने पूछा।
“आप उसकी फ़िक्र मत कीजिए। आप अभी तारा को जानते नहीं हैं।” तारा ने कहा। उसने इधर-उधर देखा, वहाँ सजावट के लिए चारों तरफ़ कैंडल स्टिक लगाए हुए थे।
“अगर हम यहाँ लगी सारी मोमबत्तियों को जला दें, तो इस हॉल की ख़ूबसूरती और भी बढ़ सकती है। लेकिन इसमें तो बहुत टाइम लगेगा ना.....” तारा ने कहा।
“नो मैम, यह सब इलेक्ट्रॉनिक्स हैं, एक बटन के साथ सब की सब एक साथ जल जाएँगी।” जीवन ने जवाब दिया।
जीवन की बात सुनकर तारा के चेहरे पर चमक आ गई। फिर उसने ऊपर की तरफ़ देखा, तो एक बड़ा सा झूमर लगा हुआ था।
“ऐसा करो, बाकी की लाइट बंद कर दो और उन सभी कैंडल्स को जला दो..... और हाँ, साथ ही यह झूमर भी जलना चाहिए।” तारा जीवन को इंस्ट्रक्शन्स दे रही थी। इवेंट कंपनी में काम करते हुए वह काफ़ी कुछ सीख गई थी।
जीवन ने उसकी बात पर हामी भरी और कॉल करके वहाँ की लाइटिंग को सेटल करवाया। हॉल अब दिखने में और भी ज़्यादा ख़ूबसूरत लग रहा था। तारा ने जीवन की मदद से टेबल को झूमर के नीचे रखा।
“थैंक यू सो मच मैम..... सर अक्सर हर चीज़ को पारम्परिक तरीके से करने को ही बोलते हैं।” जीवन ने कहा।
तारा ने सब कुछ एक बार फिर देखते हुए कहा, “बाकी सब तो ठीक है, लेकिन किचन में जाकर कुछ और डिशेज़ बनवा दीजिए, जो अलग हों। अब ध्रुव सर अपने घर में रोज़ राजस्थानी खाना खाते होंगे और मैडम रोज़ गुजराती। आप कुछ और बनवा दीजिए, जो जल्दी बन सकें।”
जीवन वहाँ से दौड़कर किचन स्टाफ़ में गया और तारा के बताए हुए काम में लग गया। उसके जाने के बाद तारा बाकी की चीज़ों को और भी बेहतर बनाने में लग गई।
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ध्रुव और ग्रीष्मा अभी तक नीचे ही थे। ध्रुव का मूड ऑफ़ होने की वजह से वह वहीं रुक गया। ग्रीष्मा उसका मूड सही करने की कोशिश कर रही थी।
“बस मुझे तुम्हारी यही बात नहीं पसंद आती। ज़रूरी नहीं ना कि चीज़ें हर बात हमारे प्लान के हिसाब से हों।” ग्रीष्मा ने उसके हाथ को सहलाकर कहा।
“लेकिन मैंने बहुत मेहनत से सब कुछ अरेंज करवाया था, और उसने एक पल में..... छोड़ो..... सबसे पहले मिस गुप्ता को कॉल करके दूसरी असिस्टेंट भेजने को कहूँगा।” ध्रुव ने बुझे मन से कहा।
“हे..... उससे जो भी गलती हुई, वह अनजाने में हुई। उसके लिए तुम उसे इतनी बड़ी सज़ा नहीं दे सकते। क्या पता बेचारी को इसके लिए उसके काम से भी निकाला जा सकता है।” ग्रीष्मा ने उसे समझाने की कोशिश की।
“ठीक है, मैं उन्हें बोल दूँगा कि उसे काम से ना निकाले, लेकिन मैं उस लड़की को अपने आसपास 1 मिनट भी बर्दाश्त नहीं कर सकता।” ध्रुव ने सख़्ती से जवाब दिया।
उसका मूड अभी भी उखड़ा हुआ था। ग्रीष्मा उसे समझाने की पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन ध्रुव का मूड इतनी आसानी से ठीक नहीं होता था।
ध्रुव अंदर नहीं गया। इस वजह से मिस्टर सिसोदिया उसे बुलाने के लिए बाहर आ गए।
ध्रुव के साथ ग्रीष्मा को देखकर उन्होंने हैरानी से पूछा, “यह कौन है?”
“यह कौन है से आपका मतलब मिस्टर सिसोदिया? मैंने आपको बताया तो था कि मेरी फ़िआंसे यहाँ आने वाली है। यह ग्रीष्मा है।” ध्रुव ने रूखे तरीके से जवाब दिया।
“अगर यह आपकी मंगेतर है, तो वह लड़की कौन थी, जो थोड़ी देर पहले ऊपर गई थी?” मिस्टर राम सिंह सिसोदिया अभी भी हैरान थे।
“शायद यह तारा की बात कर रहे हैं। वह भी हमारे साथ है।” ग्रीष्मा ने जवाब दिया।
“अच्छा अच्छा, आप ही के साथ है। चलिए फ़िर चलते हैं। रात का खाना समय पर खा लेना चाहिए।” मिस्टर सिसोदिया बोले।
ध्रुव मिस्टर सिसोदिया को ना कहने वाला था, लेकिन ग्रीष्मा ने पहले ही स्थिति को भाँप लिया, और उसने ध्रुव के बोलने से पहले ही जवाब में कहा, “जी आप चलिए, हम दोनों भी आपके पीछे-पीछे आते हैं।”
मिस्टर सिसोदिया वहाँ से अंदर जाने लगे। उनके जाते ही ध्रुव तुरंत बोला, “तुम जानती हो ना, एक बार मेरा मूड ख़राब होने के बाद जल्दी से ठीक नहीं होता। मेरा अंदर जाने का बिल्कुल मन नहीं है। हम यहाँ से वापस चलते हैं।”
“बिल्कुल नहीं, मिस्टर ध्रुव सिंघानिया.....” बोलते हुए उसने ध्रुव की नाक को हल्का सा खींचा, “आपका मूड ख़राब होगा, लेकिन मुझे बहुत भूख लगी है।”
ध्रुव की बात का इंतज़ार किए बिना ग्रीष्मा अंदर जाने लगी। मजबूरन ध्रुव को भी उसके पीछे-पीछे आना पड़ा।
मिस्टर राम सिंह सिसोदिया ने उन्हें एक साथ ऊपर के फ़्लोर पर भेजा। उन्हें आने में थोड़ा टाइम लग गया था, इस बीच जीवन और तारा ने ऊपर अच्छी-खासी तैयारियाँ कर ली थीं।
सीढ़ियों पर किसी के आने की आहट सुनकर जीवन ने कहा, “तारा जी, लगता है वह आ गए।”
“चलिए फ़िर जल्दी से बाहर चलते हैं।” तारा ने कहा और जीवन के साथ हॉल से बाहर आ गई।
तारा जीवन के साथ पूरा पैलेस घूमने चली गई। पीछे से ध्रुव और ग्रीष्मा जब हॉल में गए, तो वहाँ की अरेंजमेंट देखकर दोनों काफ़ी इम्प्रेस हुए।
“इसे देखने के बाद काफ़ी बेहतर महसूस हो रहा है। वरना उस लड़की ने चीज़ें ख़राब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।” ध्रुव ने अंदर आते ही कहा।
“अब उसे भूल जाओ। अभी जो मोमेंट मिला है, हमें उसे एन्जॉय करना चाहिए। यह बिल्कुल किसी सपने की तरह है।” ग्रीष्मा ने खोई हुई आवाज़ में कहा।
दोनों टेबल पर देख चुके थे। वहाँ लगे खाने ने भी दोनों को काफ़ी इम्प्रेस किया।
“सच कहूँ तो मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था कि मिस्टर सिसोदिया इतनी अच्छी अरेंजमेंट कर सकते हैं। मुझे पहले पता होता, तो मैं वेडिंग प्लानर बिल्कुल हायर नहीं करता।” ध्रुव ने कहा।
“हाँ, यहाँ इस हॉल में हर एक चीज़ परफ़ेक्ट देखकर तो यही लग रहा है।” ग्रीष्मा भी उसे देखकर काफ़ी इम्प्रेस हुई।
खाना खाने के बाद दोनों ने हल्की-फुल्की बातें कीं। साथ वक़्त बिताने की वजह से ध्रुव का मूड अब थोड़ा बेहतर हो चुका था।
“रात बहुत हो गई है, ध्रुव, अब हमें सोने जाना चाहिए।” ग्रीष्मा ने अपने मोबाइल स्क्रीन में टाइम देखा, तो रात के 11:00 बज रहे थे।
“हाँ, ठीक है। मैंने यहाँ पर हम दोनों के रुकने का अरेंजमेंट करवा दिया था। सुबह मिलते हैं।” ध्रुव ने ग्रीष्मा के माथे पर हल्के से किस किया। “डोंट वरी, मैं तुम्हारे लिए और भी सरप्राइज़ इस तरह तैयार कर लूँगा, और उन्हें ख़राब करने वाला कोई नहीं होगा।”
“मुझे इंतज़ार रहेगा।” ग्रीष्मा ने मुस्कुराकर कहा।
एक-दूसरे को गुड नाइट बोलने के बाद दोनों सोने जा चुके थे। अपने कमरे में आते ही ध्रुव ने वेडिंग प्लानर को कॉल किया।
“हेलो मिस गुप्ता..... मुझे आपकी भेजी हुई असिस्टेंट बिल्कुल पसंद नहीं आई। मैं नहीं चाहता कि आप उसे नौकरी से निकाले, लेकिन वह लड़की मेरे साथ बिल्कुल नहीं रहेगी। आप उसे वापस बुलवा लीजिए।” अपनी बात कहकर ध्रुव ने कॉल कट कर दिया।
“अच्छा हुआ, जो तुमसे पीछा छूट गया। आई विश कि अब कभी तुम्हारा चेहरा देखने को ना मिले।” ध्रुव ने खुद से कहा और लाइट बंद करके सोने चला गया।
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