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Chapter 24

The Replaced bride - Chapter 24

The Replaced bride

शादी की एक रस्म के मुताबिक तारा को अपने परिवार वालों का नाम बताना था। वहां सब को पता चला कि तारा अनाथ है। ध्रुव को उसके लिए बहुत बुरा लगा जबकि बाकी के घर वाले अजीब नजरों से उसकी तरफ देख रहे थे।

गायत्री देवी ने आंखों ही आंखों में रत्ना जी को कुछ ना कहने को कहा। लेकिन ध्रुव की मामी लक्ष्मी कहां चुप रहने वाली थी। ‌

वो अपने हाथ नचाते हुए बोली, “मुबारक हो जीजी..... नई बहू के तो खानदान का भी अता पता नहीं। पता नहीं कोई खानदान है भी या नहीं..... अक्सर वही औरते अपने बच्चों को हॉस्पिटल में छोड़ कर भाग जाया करती हैं, जो नाजायज हो या मजबूरी में पैदा हुआ हो। पता नहीं ये किसके पाप की निशानी है।”

मामी की बात पर सबको बुरी लगी। साक्षी ने उनकी बात का जवाब देते हुए कहा, “आपके अच्छे घर की लड़की को भी देख लिया हमने, सब को धोखा देकर चली गई ना..... और उनके अच्छे खानदान वाले आज हम पर केस करना चाहते हैं।”

“तारा भाभी ग्रीष्मा से तो लाभ गुना ज्यादा अच्छी है। साइंस कहता है हमारे अंदर जो गुण होते हैं, वो हमें हमारे पेरेंट्स से ही मिलते हैं। तारा भाभी का दिल देख कर लगता है, जरूर इनके मां पापा भी अच्छे ही होंगे।” साहित्य ने साक्षी की बात को आगे बढ़ाया।

“और जरूरी नहीं कि तारा के घर वालों ने उसे हॉस्पिटल में छोड़ दिया होगा। अक्सर हॉस्पिटल्स में बच्चों के चोरी होने की न्यूज़ भी आती है।” ध्रुव ने तारा के समर्थन में कहा।

“लो भाई हो गया बेड़ा गर्क..... आप इसे कुछ भी कहेगी, तो आपके तीनों बच्चे पहले ही इसकी पैरवी करने के लिए खड़े हो जाएंगे।” उनकी बातें सुनकर ध्रुव की मामी चिढ़कर बोली।

गायत्री देवी के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। “एक बात तो सही कही छोरे ने..... बच्चों के अंदर जो भी गुण होवे हैं, वो उनके मां-बाप से ही आते हैं। हमारे तीनों बच्चों के संस्कार ही देख लो। कभी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहते। चलो अब बात को यहीं खत्म करो।”

“लेकिन मां तारा के खानदान का नाम?” रत्ना ने बीच में पूछा।

“अब से इसका घर, खानदान, परिवार सब हम ही हैं। ऐसा करते हैं इसके नाम के नीचे भी मैं हमारे खानदान का नाम लिख देती हूं।” गायत्री देवी ने जैसे-तैसे बात को संभाला।

रस्म पूरी होने के बाद कोई तारा को कुछ ना कहे ये सोचकर गायत्री देवी ने ध्रुव को उसे कमरे में ले जाने को बोल दिया।

तारा ध्रुव के साथ ऊपर कमरे में थी। वो टाइम पास करने के लिए अपने फोन में गेम खेल रही थी। पहली बार ध्रुव उसकी तरफ प्यार से देख रहा था।

“तारा.....” उसकी बगल में बैठा ध्रुव बिल्कुल धीमी आवाज में बोला।

“हां क्या हुआ? कुछ काम है?” तारा ने उसकी तरफ देखे बिना जवाब दिया।

ध्रुव उसके हाथ से मोबाइल छीन लिया। “ये तुम क्या कर रही हो? मैं तुमसे बात करने की कोशिश कर रहा हूं और तुम हो कि इस सिली से गेम में लगी हो।”

“आपको और मुझसे बात करनी है?” तारा ने हैरानी से कहा और फिर हंसने लगी। “आपको मुझसे बात नहीं करनी होगी। आपको मुझसे ये कहना होगा ग्रीष्मा को जल्द से जल्द ढूंढना...... या कोई नई बात बतानी होगी। वैसे मैं साफ कर दूं, इस बार मैंने आपके घर वालों को कुछ नहीं कहा।”

तारा बोले जा रही थी, तभी ध्रुव ने हल्के से उसके होठों पर उंगली लगाकर कहा, “शशशशशश्श्श्श्शश.....” उसने अपनी उंगली तारा के होठों से हटाई और बुदबुदाते हुए कहा, “स.....सॉरी।”

“क्या कह है आप? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।” तारा चिढ़कर बोली।

“कुछ नहीं। तारा तुमने बताया नही तुम ऑर्फेनेज में.....” तारा को बुरा ना लगे, इसलिए ध्रुव ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी।

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“इसमें बताने जैसा कुछ नही है। आपने मुझे जॉब पर नहीं रखा, वरना आपको पहले ही पता चल जाता।” तारा ने बिल्कुल सामान्य तरीके से जवाब दिया।

“ग्रीष्मा के मिलने के बाद तुम कहां जाओगी? शादी के बाद क्या अनाथ आश्रम वाले तुम्हें रख लेंगे?” ध्रुव के मन में कई सवाल चल रहे थे।

उसकी बात सुनकर तारा हल्के से मुस्कुराई और कहा, “तुम उनकी फिक्र मत करो। वो अनाथ आश्रम है, किसी बड़े आदमी की महल का नहीं, जहां किसी को आने नहीं दिया जाता। वहां अनाथ आश्रम से लेकर वृद्धाश्रम तक बना है..... वहां के लोग एक दूसरे को अपनाने में यकीन करते हैं, बेसहारा छोड़ने में नहीं।”

तारा की बातों ने ध्रुव को निरुत्तर कर दिया। उसे चुप देखकर तारा फिर अपने गेम में लग गई, कुछ देर बाद ध्रुव फिर बोला, “फिर तुम्हारा नाम किसने तारा रखा? ये नाम अक्सर उन लड़कियों का रखा जाता है, जो अपने मां-बाप की बहुत लाडली होती हैं।”

उसकी बात सुनकर तारा फिर हंसी। “मेरी कहानी जानने के बाद आपको सच में लगता है कि मैं किसी की लाडली रही होऊंगी? जो नर्स मुझे ऑर्फनेज में छोड़ कर गई थी, उसका नाम तारा था। अपना नाम मुझे चिपका कर चली गई।”

“इतना सब कुछ होने के बावजूद भी तुम इतना काम कैसे रह लेती हो?”

“अब इन सब की आदत हो गई है। हम लोग ऑर्फनेज में ही पढ़े लिखे हैं। अब हमारे स्कूल में तो ऐसा कोई होता नहीं था, जो हमें चिड़ाए..... कि तुम्हारे मॉम डैड नहीं है..... फैमिली नहीं है। हम सब ही एक दूसरे की फैमिली है। हमने एक-दूसरे को एक्सेप्ट किया..... बस इसी तरह जिंदगी चलती रहती हैं।”‌ तारा ने अपनी बात खत्म की और फिर से अपना ध्यान मोबाइल में लगा लिया।

तारा का सच जानने के बाद ध्रुव बेचैन हो गया था। उसने अपने मन में कहा, “पापा के जाने के बाद मैं हमेशा उस ऊपर वाले से शिकायत करता रहा कि उन्होंने मुझसे मेरे पापा को हमसे छीन लिया। तारा से मिलने के बाद ऐसे लग रहा है जैसे इसके दुख के आगे हमारा दुख कुछ भी नहीं।” वो एकटक तारा की तरफ देख रहा था।

दोनों अपने में ही लगे थे, तभी साक्षी वहां आई। उसने दरवाजा खटखटाया। इस बार अंदर आने के बजाय वो बाहर से ही बोली, “भैया भाभी..... मम्मी ने कहा है आप दोनों पैकिंग कर लीजिए। हम वापस जयपुर के लिए निकल रहे हैं।” उसके चेहरे से उदासी झलक रही थी। तारा की नाराजगी उसे परेशान कर रही थी।

तारा ने अभी भी उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। ध्रुव ने उसे इशारे से साक्षी को अंदर बुलाने को कहा।

साक्षी वहां से जाने को हुई तभी तारा ने आवाज लगाकर कहा, “तुम वहां क्यों खड़ी हो साक्षी? अंदर आओ ना?”

तारा के अंदर बुलाने पर साक्षी के चेहरे पर चमक आ गई। वो जल्दी से अंदर आई और तारा को गले लगा लिया। “आई एम सो सॉरी भाभी। मैंने सबके सामने झूठ बोला। मेरी वजह से आपको इतना शर्मिंदा होना पड़ा। हम आपका दिल नहीं दुखाना चाहते थे लेकिन आपने कहा कि आप की सच्चाई प्रूफ होते ही आप यहां से चली जाएंगी। हम नहीं चाहते कि आप यहां से जाए, बस इसीलिए हमने.....” साक्षी ने एक सांस में सारी बातें बता दी। फिर वो रोने लगी।

तारा ने उसे सहलाते हुए कहा, “तुम दोनों भी पागल हो। मैं दुनिया के किसी भी कोने में चली जाऊं लेकिन तुम दोनों को कभी नहीं भूलूंगी।”

“आई प्रॉमिस आगे से हम हर चीज में आपका साथ देंगे। आपके लिए हमें ध्रुव भैया के खिलाफ भी खड़ा होना पड़े, तब भी हम नहीं डरेंगे।” साक्षी के कहते ही ध्रुव बोला, “अच्छा जी, मैने ही तुम दोनों के बीच सुलह करवाई है और तुम दोनों मेरे ही खिलाफ खड़े होने का सोच रही हो।”

साक्षी तारा से अलग हुई और कहा, “अगर आप हमसे हमारी तारा दीदी को अलग करने की कोशिश करोगे तो हम आप के भी खिलाफ चले जाएंगे भैया।”

“वो तो ठीक है, लेकिन डिसाइड कर लो मुझे भैया कहना है या इसे दीदी?” ध्रुव साक्षी का मूड सही करने की कोशिश कर रहा था।

साक्षी ने अपने सिर पर हल्की सी चपत मारी और कहा, “ओ सॉरी भाभी.....”

“अच्छा अगर तुम लोगों की बातें हो गई हो तो मैं पैकिंग कर लूं?” तारा ने कहा।

“हां हम 2 घंटे बाद निकलने वाले हैं, तो आप जल्दी से ये सब निपटा लीजिए। अगर आपको मेरी हेल्प की जरूरत हो तो.....”

“अरे मैं सब कर लूंगी। वैसे भी मैं अकेली कहां हूं? तुम्हारे भैया भी तो है मेरे साथ..... वो मेरी हेल्प कर देंगे।” तारा ने उसकी बात बीच में काट कर कहा।

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साक्षी वहां से चली गई। उसके जाते ही तारा ने कमरे का दरवाजा बंद किया और जल्दी से ध्रुव के पास आकर कहा, “हम लोग यहां से जा क्यों रहे हैं? ग्रीष्मा यहीं से गायब हुई है। हमें उसके बारे में यहीं से पता चल सकता है।”

“तुम्हारी बात भी ठीक है लेकिन मैं नहीं चाहता घर वालों को इस बारे में पता चले कि मैंने तुम्हें ग्रीष्मा को ढूंढने का काम दिया है। तुम ऐसे करो पैकिंग निपटा लो, तब तक मैं कैसे भी करके यहां से फुटेज निकलवाने की कोशिश करता हूं। पता तो चले ग्रीष्मा गई कैसे हैं।”

तारा ने ध्रुव की बात पर हामी भरी। फिर वो कुछ सोचकर बोली, “ऐसा कीजिए आप पैकिंग कीजिए। मैं फुटेज निकलवाने का इंतजाम करती हूं।”

“लेकिन तुम कैसे?” ध्रुव ने हैरानी से पूछा।

“यहां के स्टाफ मेंबर जीवन से मेरी अच्छी खासी जान पहचान हो गई है। वो मिस्टर सिसोदिया का असिस्टेंट है। वो इस काम में हमारी हेल्प कर सकता है।”

“ठीक है लेकिन मैं पैकिंग नहीं करूंगा।” ध्रुव ने कंधे उचका कर जवाब दिया।

“दोनों में से एक काम तो आपको करना पड़ेगा।”

“लेकिन मुझे खुद के काम करने की आदत नहीं है। तुम्हारी जगह आज ग्रीष्मा होती तो.....” बोलते हुए ध्रुव रुक गया। उसके चेहरे पर उदासी के भाव थे।

“लेकिन मैं ग्रीष्मा नहीं हूं। पैकिंग तो आपको करनी पड़ेगी ध्रुव.....” तारा ने उसे परेशान करने के लिए कहा।

“जानता हूं तुम ग्रीष्मा नहीं हो। मेरे हर काम वही करती थी। अब ये मत कहना कि मैंने उसे अपना पर्सनल हेल्पर बना रखा था। उसे मेरे लिए सब कुछ करना अच्छा लगता था।”

“मेरे पास इससे भी बैटर आईडिया है। आप ऐसा कीजिए। कुछ दिनों तक इसी होटल रूम में रुकिए, तब तक मैं आपकी ग्रीष्मा को ढूंढ कर ले आऊंगी। फिर वो आपकी पैकिंग भी कर देगी और आपके बाकी काम भी.....” तारा ने मुंह बना कर जवाब दिया। उसे ध्रुव के मुंह से ग्रीष्मा का नाम लेना अच्छा नहीं लग रहा था।

“अच्छा ठीक है, बहस मत करो। जो बोला है, जल्दी करो।”

“और पैकिंग?”

“वो मैं कर लूंगा।” जैसे ही ध्रुव ने पैकिंग करने के लिए हामी भरी, तारा उसके पास आई और उसके दोनों गाल पकड़ कर खींच कर बोली, “आवववव..... आप कितने अच्छे हैं।”

उसके ऐसा करने पर ध्रुव उसकी तरफ घूर कर देख रहा था तारा ने जल्दी से अपने हाथ उसके गाल से हटाए और तेज कदमों से चलती हुई बाहर जाने लगी। उसके ऐसा करने पर ध्रुव उसे घूर कर देख रहा था।

“इससे पहले कि ये मुझे इसके गाल खींचने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई। मुझे यहां से निकल जाना चाहिए।” तारा धीरे से बड़बड़ाई।

तारा जल्दी से वहां से चली गई। भले ही ध्रुव तारा से गुस्सा होने का दिखावा कर रहा था लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी।

“पागल लड़की.....” उसने मुस्कुराकर कहा और सामान निकालकर पैकिंग करने में जुट गया।

वही तारा कमरे से निकलकर जीवन को ढूंढ रही थी। उसे इधर-उधर घूमता देख ध्रुव की मामी ने देख लिया था।

“ये फुलझड़ी कहां जा रही है? जरूर किसी के साथ मिली हुई है और हमारे पैसे हड़पने की फिराक में है। इसे तो मैं खुलेआम पकड़कर रहूंगी।” ध्रुव की मामी ने सोचा और तारा के पीछे धीमे कदमों से चल दी।

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