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Chapter 13

The Replaced bride - Chapter 13

The Replaced bride

साहित्य और साक्षी तारा के कमरे में बैठे थे। उन्होंने तारा को ग्रीष्मा के धोखा देने की बात बताई, जिसे सुनकर पहले तो तारा चौंक गई, फिर जोर-जोर से हँसने लगी।

“क्या हुआ, पार्टनर?” साक्षी ने हैरानी से पूछा।

“तुम दोनों के जोक को सुनकर हँसी आ रही है।” तारा ने अपनी हँसी दबाकर कहा और फिर से खिल-खिलाकर हँस पड़ी।

“हम कोई जोक नहीं सुना रहे। ग्रीष्मा सच में भाई को धोखा दे रही है।” साहित्य ने बताया।

“हम जब अभी आपके कमरे में आ रहे थे, तो हमने उन्हें किसी से फ़ोन पर बात करते सुना। उन्होंने बोला कि ध्रुव ने शादी प्रीपोन कर दी है। उन्हें अपना प्लान बदलना पड़ेगा। उनके पास अब ज़्यादा टाइम नहीं है।” साक्षी ने कहा।

साहित्य ने भी उसकी बात पर सहमति जताई। उनकी बात सुनकर तारा सोचने लगी।

“शायद वो अपने किसी फ़्रेंड से बात कर रही हो। एक्चुअली, जब मैं उनके कमरे में थी, तब उन्होंने मुझे बताया था कि ध्रुव सर ने शादी में बाहर के लोगों को आने से मना कर दिया, इस वजह से उन्हें बहुत दुख हुआ। उनके दोस्त इस शादी में शामिल होना चाहते थे, लेकिन अब वो इस शादी में नहीं आ पाएँगे। शायद वो अपने किसी दोस्त से इस बारे में बात कर रही हो।” तारा ने उन दोनों को समझाया। उसे अभी भी ग्रीष्मा पर बहुत विश्वास था।

“हो सकता है, लेकिन प्लान? वो किस प्लान की बात कर रही थी?” साक्षी ने कहा।

“मैं बताती हूँ कि मैं किस प्लान के बारे में बात कर रही थी।” यह ग्रीष्मा की आवाज़ थी। वो तारा के कमरे में आ रही थी। उसने उन लोगों की सारी बातें सुन ली थीं।

ग्रीष्मा को वहाँ देखकर साहित्य और साक्षी थोड़े असहज हो गए। वो उनके पास आकर बैठी और बोली, “घबराओ मत, मैं तुम्हारे भैया से कुछ नहीं कहूँगी। तारा बिल्कुल ठीक कह रही है। मैं अपने किसी फ़्रेंड से बात कर रही थी। एक्चुअली, हम सब लोगों ने शादी से पहले बहुत कुछ प्लान्स किए थे, लेकिन ध्रुव के डिसीजन ने सब कुछ बदल कर रख दिया। एक तो शादी का प्रीपोन होना, ऊपर से शादी में बाहर से किसी को भी ना आने देना। इन दो वजह से मेरे सारे प्लान्स पर पानी फिर गया।”

“आपने कौन से प्लान्स बनाए थे?” साक्षी ने उसे घूर कर देखा।

“मेरे फ़्रेंड्स ने शादी से पहले मेरे लिए एक पार्टी थ्रो करने का सोचा था। साथ ही वो लोग गिफ़्ट में मेरा और ध्रुव का प्री-वेडिंग शूट करवाना चाहते थे, लेकिन अब कुछ नहीं हो पाएगा।” ग्रीष्मा ने उदास होकर कहा।

“देखा, मैं कह रही थी ना कि इनके दोस्तों से जुड़े हुए उनके प्लान्स थे। शादी जल्दबाज़ी में होने की वजह से ये दोनों भी बिल्कुल खुश नहीं हैं।”

“तुम कवर मत करो, तारा, मैं अच्छे से जानती हूँ ये दोनों मुझे पसंद नहीं करते। इसका कारण भी मुझे पता है।” ग्रीष्मा ने कहा।

तारा को ग्रीष्मा की बात समझ नहीं आई। “और क्या कारण है इसका?”

“कुछ दिन पहले की बात है, दोनों ट्रिप पर जाना चाहते थे, लेकिन ध्रुव ने मना कर दिया। मैंने ही उसे ऐसा करने के लिए कहा था।” ग्रीष्मा ने बताया।

“पहले ध्रुव भैया हमें लेकर इतने स्ट्रिक्ट नहीं थे, लेकिन जब से आप आई हैं, वो हमें हर काम के लिए रोकते रहते हैं।” साक्षी ने कहा।

“मैं उसका कारण भी तुम लोगों को समझा सकती हूँ। तारा, हमें जो आदमी आज मिला था, उसके पहले भी धमकी भरे फ़ोन आते रहते थे। ध्रुव इन दोनों को लेकर बहुत इनसिक्योर रहता है। हम सब तो फिर भी बड़े हैं, लेकिन ये दोनों बच्चे हैं, इसलिए वो इन दोनों को कहीं अकेले नहीं भेजना चाहता था। प्लीज़, तुम दोनों मुझे गलत मत समझो। मैंने और ध्रुव ने वो डिसीजन तुम्हारी सेफ़्टी के लिए ही लिया था।” ग्रीष्मा उन्हें समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन साक्षी और साहित्य ने उसकी एक नहीं सुनी और उसकी बात को अनसुना करके वहाँ से बाहर जाने लगे।

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जाते वक्त साहित्य ने तारा से कहा,“तारा दीदी, हम आपसे सुबह बात करते हैं।”

तारा ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन दोनों वहाँ से चले गए। उनके इस बर्ताव की वजह से ग्रीष्मा के चेहरे पर उदासी थी।

“मैं पिछले दो महीनों से इनके साथ हूँ, उसके बावजूद ये दोनों मुझसे ठीक से बात तक नहीं करते। जबकि तुम्हें आए तो सिर्फ़ दो ही दिन हुए हैं। इतने कम वक़्त में तुमने इनसे दोस्ती कर ली।” ग्रीष्मा ने कहा।

“आप उदास मत होइए, ग्रीष्मा। मैं इन दोनों को समझा दूँगी। दोनों बच्चे हैं, समझ भी जाएँगे।” तारा ने उसके हाथ पर हाथ रखकर कहा।

“तुम बहुत कम समय में किसी को भी अपना बना लेती हो।” ग्रीष्मा ने मुस्कुराकर कहा।

“हाँ, शायद… अच्छा, इन सब को छोड़िए। आप इस वक़्त मेरे कमरे में कैसे आईं? कुछ काम था तो कॉल कर देतीं।”

“मैं ध्रुव से मिलकर आई थी। सोचा तुमसे भी पूछ लूँ, तुम दोनों की क्या बात हुई थी, लेकिन आते वक़्त साहित्य और साक्षी की बात सुनी। सच कहूँ तो मुझे बहुत बुरा लगा, लेकिन साथ ही इस बात का अच्छा भी लगा कि तुमने उन्हें कोई गलत एडवाइस देने के बजाय उन्हें सही बात समझाई।”

“मैं भले ही बहुत कम वक़्त से आपके साथ हूँ, लेकिन इतना तो जान गई कि आप बहुत अच्छी हैं। आपके बारे में कोई गलत कहे तो मैं कैसे सुन सकती हूँ।”

तारा की बात सुनकर ग्रीष्मा मुस्कुराई। उसे सोने का बोलकर वो अपने कमरे में चली गई। उसके जाने के बाद तारा भी सोने जा चुकी थी।

__________

अगली सुबह जल्दी ही सिंघानिया परिवार जोधपुर के लिए रवाना हो चुका था। ध्रुव ने पहले ही मिस्टर सिसोदिया को सब कुछ समझा दिया था। उन्होंने सिक्योरिटी का पुख्ता इंतज़ाम करवा दिया था।

सिंघानिया परिवार के साथ जब जीवन ने तारा को भी देखा तो उसे अच्छा लगा।

“तो आपने अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट और जॉब फिर से हासिल कर ही ली।” जीवन ने मुस्कुराकर तारा से कहा।

“जी, बिल्कुल… जॉब तो एक बार के लिए फिर भी जाने दे सकती हूँ, लेकिन सेल्फ रिस्पेक्ट बिल्कुल नहीं…”

एक छोटी सी मुलाक़ात के बाद तारा अंदर चली गई। कुछ देर आराम करने के बाद शाम को ध्रुव और ग्रीष्मा के हल्दी का फ़ंक्शन रखा गया।

वेडिंग प्लानर्स ने अरेंजमेंट काफ़ी अच्छे से किए थे। पूरे उम्मेद भवन पैलेस को मिस्टर सिसोदिया ने डेकोरेट करवा दिया था। हल्दी के फ़ंक्शन में जब रत्ना जी ने चंद लोगों को देखा तो उनके चेहरे पर मायूसी थी।

“सोचा था ध्रुव की शादी में हर एक फ़ंक्शन धूमधाम से करूँगी। लेकिन यहाँ तो हम गिने-चुने लोगों के अलावा और कोई मौजूद नहीं है।” रत्ना ने सरिता जी से कहा।

“परेशान मत होइए। मैंने ध्रुव से कहा था। उसने कुछ रिश्तेदारों को बुलाने के लिए हाँ करवा दिया है। ज़्यादा तो नहीं, लेकिन शाम तक आपके मायके वाले और मेरे मायके वाले शादी में सम्मिलित होने के लिए आ जाएँगे।” सरिता की बात सुनकर रत्ना के चेहरे पर राहत के भाव थे।

“चलो, कुछ तो अच्छा सुनने को मिला। चलिए, हल्दी की रस्म को खुशी-खुशी पूरा करते हैं।”

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सरिता ने रत्ना की बात पर हामी भरी। दोनों ध्रुव और ग्रीष्मा के पास पहुँचीं। ध्रुव उस आदमी की वजह से परेशान था, तो वहीं शादी जल्दी होने की वजह से ग्रीष्मा के चेहरे पर भी वो खुशी दिखाई नहीं दे रही थी।

“मानती हूँ कि सब कुछ बहुत जल्दी में हो रहा है, लेकिन अगर आप लोग ऐसे ही मुँह बनाकर रखोगे तो शादी की फ़ोटो में बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगोगे।” तारा ने कहा।

“हाँ, ये छोरी बिल्कुल सही कह रही है। चलो, अब जल्दी से दोनों मुस्कुराओ।” गायत्री जी ने कहा।

उनकी बात सुनकर ग्रीष्मा और ध्रुव ने एक-दूसरे की तरफ़ देखा। ध्रुव ने उसे मुस्कुराने का इशारा किया। ग्रीष्मा के चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट थी, जिसे देखकर ध्रुव को भी अच्छा लग रहा था।

“इन लोगों ने हमारी पार्टनर को भी अपने पाले में ले लिया। अब तो ये शादी रोकने का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा।” साक्षी ने कहा। वो साहित्य के साथ उनसे थोड़ी दूरी पर खड़ी थी।

“आई विश कि कोई मैजिक हो जाए, जहाँ ये शादी कैंसिल हो सके।” साहित्य ने जवाब दिया।

दोनों आपस में फुसफुसाकर धीमी आवाज़ में बातें कर रहे थे। उन दोनों को अपने पास ना देखकर रत्ना ने उन्हें आवाज़ लगाकर बुलाया।

“डब्बू, चिंटू, चलो जल्दी से यहाँ आओ। तुम दोनों भी अपनी होने वाली भाभी और भाई को हल्दी लगा दो।” रत्ना जी की आवाज़ लगाने पर डब्बू और चिंटू मुँह बनाकर उनके पास आए।

“कम से कम यहाँ तो आप हम दोनों को हमारे नाम से बुला सकती हैं। माना रिश्तेदार मौजूद नहीं हैं, लेकिन यहाँ का स्टाफ़ तो है। देखो, सब कितनी अजीब नज़रों से हम लोगों की तरफ़ घूरकर देख रहे हैं।” साक्षी मुँह बनाकर बोली।

“कुछ नहीं होता। चलो, जो बोला है वो करो।” रत्ना जी ने हल्दी की थाली साक्षी की तरफ़ बढ़ाई।

हल्दी लगाते वक़्त वो तारा के पास आई और धीमी आवाज़ में बोली,“वेरी बैड पार्टनर, आपने टीम बदल दी।”

“बिल्कुल नहीं, मैं अभी भी तुम दोनों की टीम में ही हूँ।” तारा ने फुसफुसाकर जवाब दिया।

कुछ ही देर में उनकी हल्दी की रस्म ख़त्म हो चुकी थी। रस्म पूरी होने के बाद वो लोग फ़ोटोशूट करवा रहे थे।

तारा दूर से खड़ी उन लोगों की तरफ़ देख रही थी। उसकी आँखों में नमी थी।

“कितने खुश हैं ये लोग, और साथ में लकी भी… इनका अपना परिवार है… जिनसे ये अपना हर सुख-दुख बाँट सकते हैं। शिकायतें कर सकते हैं, रूठ सकते हैं, उन्हें मना सकते हैं… मैं बिल्कुल अपने नाम की तरह हूँ, जो आसमान में हज़ारों तारों की तरह मौजूद हूँ। कहने को हज़ारों हैं, लेकिन अपने आप में सब अकेले…” सोचते हुए तारा की आँखों से आँसू छलक पड़े।

ग्रीष्मा ने उसे इशारे से अपने पास बुलाया। तारा ने जल्दी से अपने आँसू पोछे और चेहरे पर मुस्कुराहट लिए उनके पास जाने लगी।

★★★★

हेलो, डियर रीडर्स…

क्या आपको भी साक्षी और साहित्य की तरह लगता है कि ग्रीष्मा में कोई गड़बड़ी है? ग्रीष्मा का करैक्टर आपको कैसा लगता है? कमेंट में ज़रूर बताइएगा।

कीप सपोर्टिंग ऑलवेज़

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