The Replaced bride - Chapter 22
The Replaced brideउम्मेद भवन पैलेस के हॉल में तारा के साथ ध्रुव और ग्रीष्मा का पूरा परिवार मौजूद था, जहां उन्हें ध्रुव और तारा की शादी होने की सच्चाई पता चली। जहां पहले साहित्य और साक्षी ने उसका साथ देने का वादा किया था वही दोनों पीछे हट चुके थे। दोनों इस तरह बर्ताव कर रहे थे मानो उन्हें इस बारे में कुछ पता ना हो।
उनके मुकरने के बाद तारा को दूसरा झटका तब लगा, जब ग्रीष्मा के पापा भावेश जी ने वहां पुलिस बुला ली।
तारा ने भावेश जी के आगे गिड़गिड़ा कर कहा, “अंकल आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? इन सब में तो मेरी कोई गलती भी नहीं है।”
“तुम ये मासूम बनने का नाटक बंद करो। पुलिस का नाम लिया तो आ गई ना तुम्हारी सच्चाई सामने.....” भावेश जी ने सख्त लहजे में कहा, “मैं कह रहा हूं अगर मेरी ग्रीष्मा को एक खरोंच भी आई ना, तो तुम्हारा वो हाल करूंगा कि जिंदगी भर यहां आने के लिए पछताओगी।”
उनकी बात सुनकर तारा घबरा गई। उसने एक नजर साहित्य और साक्षी की तरफ देखा, जो अभी तक उस से नजरे चुरा रहे थे। साक्षी ने बिल्कुल धीमी आवाज में साहित्य से कहा, “मुझे भाभी के लिए बहुत बुरा लग रहा है। उन्हें हमसे बहुत उम्मीदें थी। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था।”
“तो और क्या करते? अगर यहां तारा भाभी की सच्चाई प्रूफ हो जाती तो वो हमें छोड़ कर चली जाती।” साहित्य ने दबी आवाज में जवाब दिया।
“लेकिन घर वाले भी तो उनके साथ सही नहीं कर रहे। अगर पुलिस वालों ने तारा भाभी के साथ कुछ भी ऐसा वैसा करने की कोशिश की तो मैं चुप नहीं रहूंगी।” साक्षी की आवाज भर्राई हुई थी। तारा की हालत देख कर उसे रोना आ रहा था।
तारा ने आगे उनसे कुछ नहीं कहा। उसकी आंखें नम थी और मन ही मन वो भगवान से प्रार्थना कर रही थी। “आपने मेरी लाइफ में कम प्रॉब्लम्स डाली है क्या, जो अब ये एक नई मुसीबत सामने से चलकर मेरे पास आई है। पहले उस ध्रुव सिंघानिया से शादी करवा दी और अब ये लोग मेरा यकीन नहीं कर रहे। पुलिस यहां आ गई तो सबसे पहले मेरे परिवार के बारे में पूछेगी। क्या होगा जब अनाथ आश्रम में सबको पता चलेगा कि मेरे साथ यहां क्या कुछ नहीं हो गया..... समीधा आंटी, वो मेरे लिए बहुत परेशान होगी और तनीषा..... हे भगवान मैं कैसे सिचुएशन से निकलूं? प्लीज मेरी मदद कीजिए।”
तारा ने फिर उन्हें समझाने के बारे में सोचा। वो उनकी तरफ बढ़ रही थी तभी उसे बाहर से आते पुलिस की गाड़ी के सायरन की आवाज सुनाई दी। सायरन की आवाज सुनकर तारा के साथ-साथ साक्षी और साहित्य के दिलों की धड़कनें भी बढ़ चुकी थी।
“प्लीज ये सब मत कीजिए।” तारा ने कहा।
“मैं पुलिस को अभी इसी वक्त यहां से भेज दूंगा अगर तुम बता दो कि मेरी बेटी ग्रीष्मा कहां है? तुमने उसे किडनैप करके कहां रखा है?” भावेश जी ने कहा।
“मैं सच कह रही हूं। मुझे नहीं पता ग्रीष्मा कहां है।”
वहां चल रहे ड्रामे के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था। पुलिस को आता देख राम सिंह सिसोदिया को भी हैरानी हुई। वो जीवन को लेकर अंदर हॉल में पहुंचे।
“क्या आपके यहां कोई चोरी हो गई है, जो आप ने पुलिस को बुलाया है?” मिस्टर सिसोदिया ने हैरानी से पूछा।
“हां चोरी हुई है..... बहुत कीमती सामान चोरी हुआ है। मेरी बेटी यहां से गायब है और इस धोखेबाज लड़की ने उसकी जगह लेकर ध्रुव से शादी कर ली।” सरिता जी ने बताया।
उनकी बात सुनकर जीवन ने एक नजर तारा की तरफ देखा, जिसकी आंखों में आंसू थे और वो सबके सामने अपनी सच्चाई प्रूफ करने की कोशिश कर रही थी।
तारा की हालत देखकर जीवन में सोचा, “हे भगवान..... इस बेचारी लड़की के साथ और क्या-क्या होना बाकी है? जब से आई है, इसके साथ कुछ ना कुछ हो ही रहा है। पहले ध्रुव सिंघानिया की वजह से इसकी नौकरी चली गई तो अब ये शादी.....” सोचते हुए जीवन ने मिस्टर सिसोदिया की तरफ देखा।
वो समझ गए थे कि जीवन क्या कहना चाह रहा है। उन्होंने आंखों ही आंखों में उसे चुप रहने का इशारा किया।
भावेश जी ने फोन पर पुलिस को सारी स्थिति समझा दी थी। एक सीनियर इंस्पेक्टर के साथ दो लेडी कॉन्स्टेबल भी मौजूद थी, जो तारा को खा जाने वाली नजरों से देख रही थी।
“तो ये वो लड़की है, जिसने आपकी बेटी को किडनैप करके पैसों के लिए ध्रुव सिंघानिया से शादी कर ली?” इंस्पेक्टर ने तारा की तरफ देखकर पूछा।
“जी इंस्पेक्टर साहब, इसे यहां से ले जाइए, जब तक ये मेरी बेटी का पता नहीं लगा देती इसे जाने यहां से जाने मत दीजिएगा।” भावेश जी गुस्से में बोले।
साक्षी और साहित्य बुरी तरह घबरा गए। अब साक्षी से रुका नहीं जा रहा था। वो तारा का साथ देने के लिए आगे आने लगी, तो वही लेडी कॉन्स्टेबल जैसे ही तारा की तरफ बढ़ने लगी, पीछे से एक कड़क आवाज आई।
“कोई मेरी वाइफ को हाथ लगाने के बारे में सोचेगा भी नहीं.....” पीछे जो आवाज आई थी वो ध्रुव की थी। वो चलकर उन तक आया। “सॉरी टू से इंस्पेक्टर, आपका टाइम वेस्ट हुआ। लगता है मेरे घर वालों को कोई गलतफहमी हो गई है।”
“तो क्या ग्रीष्मा मेहता लापता नहीं है?” इंस्पेक्टर ने हैरानी से पूछा।
“वो लापता जरूर है लेकिन इसमें मेरी वाइफ का कोई इंवॉल्वमेंट नहीं है।” बोलते हुए ध्रुव ने एक नजर घरवालों की तरफ डाली। वो उसकी तरफ हैरानी से देख रहे थे। “ग्रीष्मा के गायब होने में तारा का कोई हाथ नहीं है। अब आप यहां से जा सकते हैं।”
ध्रुव की बात सुनकर इंस्पेक्टर ने एक नजर भावेश जी की तरफ से देखा। भावेश जी ने गुस्से में कहा, “आपको यहां से जाने की कोई जरूरत नहीं है इंस्पेक्टर। भले ही इस लड़के को मेरी बेटी की फिक्र ना हो लेकिन हमें है। मुझे अच्छे से पता है कि जरूर इसी लड़की ने उसे गायब किया होगा। मैं इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाना चाहता हूं। और हां.....साथ में ध्रुव सिंघानिया का भी नाम लिखना। इनकी बातों से साफ जाहिर हो रहा है, ये इन दोनों की मिलीभगत है।”
“ये आप कैसी बातें कर रहे हैं भाई साहब..... मेरा ध्रुव ऐसा नहीं है।” रत्ना जी परेशान होकर बोली।
“आपका ध्रुव कैसा है, ये साफ दिखाई दे रहा है। मेरी बेटी विदेश में पली-बढ़ी होने के बावजूद एक अनजान शख्स के साथ शादी करने के लिए तैयार हो गई और इसने..... आज वो मेरी ग्रीष्मा के बारे में ना सोच कर इस लड़की का साथ दे रहा है।” सरिता जी रोते हुए बोली।
इंस्पेक्टर ने उन सब की बातों को गौर से सुना और फिर कहा, “ये आपका फैमिली मैटर है मिस्टर सिंघानिया। कोशिश कीजिए कि फैमिली में ही सॉल्व हो जाए और पुलिस को इंवॉल्व करने की जरूरत ना पड़े।”
“लेकिन मेरी बेटी का क्या? हमें तो पता तक नहीं कि वो कितनी देर से गायब है। अचानक सुबह पता चलता है कि इस लड़की ने उसकी जगह घुंघट निकाल कर हमारे होने वाले जमाई से शादी कर ली। प्लीज इंस्पेक्टर, आप इस लड़की को अरेस्ट कर लीजिए।” भावेश जी ने गुस्से में कहा।
वहां परिस्थितियां बिगड़ती जा रही थी। ध्रुव उन्हें संभालने की कोशिश कर रहा था लेकिन भावेश जी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं थे। इंस्पेक्टर ने भी उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वो बार-बार तारा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाने के बारे में कह रहे थे।
“ठीक है मिस्टर मेहता..... हम अपनी तरफ से ग्रीष्मा को ढूंढने की कोशिश करते हैं। अगर आपको मिस्टर सिंघानिया के खिलाफ लीगल एक्शन लेना है तो उसकी रिपोर्ट दर्ज करवाने पुलिस स्टेशन आना होगा।” इंस्पेक्टर ने कहा और वहां से कॉन्स्टेबल के साथ चले गए।
उनके जाने के बाद भावेश जी ने ध्रुव की तरफ गुस्से में देखा और कहा, “सच-सच बताओ, इस लड़की का और तुम्हारा पहले से चक्कर चल रहा था ना? अगर तुम्हें ग्रीष्मा से शादी नहीं करनी थी, तो क्या जरूरत थी ये सब ड्रामा करने की.....”
“जवाब दो ध्रुव..... तारा को तुम ही लेकर आए थे ना? तुमने ना केवल ग्रीष्मा के परिवार को बल्कि हम सब को भी चोट पहुंचाई है।” रत्ना जी ने गुस्से में जवाब दिया।
“मैं जानता हूं कि आप सब इस बात को लेकर हैरान है कि मैंने तारा का साथ क्यों दिया? यकीन मानिए मां, तारा के इन सब में कोई गलती नहीं है। साक्षी ने आपको बताया नहीं क्या? वो इस शादी के बारे में पहले से जानती थी?” ध्रुव के कहते ही सब फिर से साक्षी की तरफ देखने लगे। उसने अभी भी नजरें नीची कर रखी थी।
साक्षी ने बिल्कुल धीमी आवाज में कहा, “मुझे माफ कर दीजिए भैया, मैं इतने लोगों के सामने बोल नहीं पाई। शादी के वक्त फेरों में जाने से पहले मां ने मुझे तारा भाभी के साथ वॉशरूम के लिए भेजा था। वहां तारा भाभी ने मुझे सब सच बताया कि कैसे ग्रीष्मा वहां से चली गई थी। हमने ग्रीष्मा से फोन पर बात भी की थी, तब उन्होंने कहा था कि वो शादी होने से पहले आ जाएगी। तारा दीदी ने उन्हें फेरों में बैठने के लिए साफ मना कर दिया था लेकिन ग्रीष्मा ने उसे प्रॉमिस किया था कि वो आ आएंगी।”
साक्षी ने उन्हें सारी बातें सिरे से बता दी। वो सब सुनने के बाद भी भावेश जी और सरिता जी को उनकी बात पर यकीन नहीं हो रहा था।
भावेश जी चिल्लाकर बोले, “तुम सब लोग मुझे बेवकूफ बना रहे हो क्या? साक्षी तुम कैसे कह सकती हो कि फोन पर मेरी बेटी ग्रीष्मा ही थी। चलो एक बार के लिए मान लेता हूं कि वो ग्रीष्मा थी..... फिर भी उसे ये सब नाटक करने की क्या जरूरत थी? माना कि ग्रीष्मा वक्त पर नहीं पहुंच पाई तो क्या जरूरत थी इस लड़की को ध्रुव से शादी करने की? ये सबको सच्चाई भी तो बता सकती थी।”
“अंकल तारा भाभी सब को सच्चाई बताना चाहती थी लेकिन ग्रीष्मा ने उन्हें बताने नहीं दिया। तारा भाभी ने मुझे कहा भी था कि अगर ग्रीष्मा ना आए तो मैं इस शादी को रोक दूं। सब के डर से मै ये नहीं कर पाई।” साक्षी ने बताया।
“तुम सब के सब मिले हुए हो। एक एक को देख लूंगा। चलो सरिता यहां से और अपने रिश्तेदारों को भी बोल दो कि यहां से निकले..... याद रखना ध्रुव सिंघानिया..... तुम्हें अपनी किए की सजा भुगतनी पड़ेगी।” भावेश जी ने ध्रुव को गुस्से में कहा और सरिता जी को लेकर वहां से चले गए।
उनके जाने के बाद गायत्री देवी और रत्ना जी ध्रुव और साक्षी की तरफ गुस्से में देख रही थी। रत्ना जी ने साक्षी से कहा, “जब हम सब तुमसे पूछ रहे थे, तब तुम चुप क्यों थी?”
“मां प्लीज, इसे मत डांटिए। जो होना था सो हो गया।” ध्रुव ने उन्हें शांत करने की कोशिश की।
“तुम भी कुछ कम नहीं हो। तुम्हें रात को ही पता चल गया था ना कि तुम्हारी शादी ग्रीष्मा से नहीं तारा से हुई है। फिर तुमने हमें आकर बताया क्यों नहीं? क्या जरूरत थी तारा का साथ देने की? हो गए ना सब नाराज?” रत्ना जी रोते हुए बोली।
“मां, आप गुस्सा मत कीजिए। आपकी तबीयत खराब हो जाएगी।”
“क्या फर्क पड़ता है किसी को मेरी तबीयत खराब होने से..... तुम्हारे पापा का सपना था कि ग्रीष्मा इस घर की बहू बनकर आए। तुमने उस लड़की का साथ देकर उनके सबसे अच्छे दोस्त को नाराज कर दिया।”
रत्ना जी परेशान होकर वहां लगे काउच पर बैठ गई। गायत्री देवी उन्हें शांत करने की कोशिश कर रही थी। “पता नहीं रिश्तेदारों को क्या जवाब देंगे। पहले उन्हें शादी में नहीं बुलाया। अब जब रिसेप्शन में मुंह दिखाई होगी, तब सबसे क्या कहेंगे कि दुल्हन बदल गई?” गायत्री देवी ने परेशान होकर कहा।
“और मेरी लाइफ का क्या? आपको अभी भी रिश्तेदारों की लगी है? उन्हें जो कहना है, कहने दीजिए..... फिलहाल कुछ देर के लिए मुझे अकेला छोड़ दीजिए।” ध्रुव ने कहा और वहां से ऊपर कमरे में चला गया।
तारा अभी भी वहीं पर चुपचाप खड़ी थी गायत्री देवी और रत्ना जी उसे नफरत भरी निगाहों से देख रही थी।
साक्षी और साहित्य भी उनके डर से अपने कमरे में चले गए।
“सब बर्बाद हो गया मां सा..... पता नहीं ये लड़की कौन है..... कहां से आई है.....हम तो इसके मां-बाप को भी नहीं जानते।” रत्ना देवी रोते हुए बोली।
उनकी बात सुनकर तारा जल्दी से वहां से ऊपर चली गई। वो कमरे में गई तो ध्रुव सिर पकड़ कर बैठा था।
तारा उसके पास गई और कहा, “थैंक यू सो मच..... आज आपने मेरा साथ दिया। अगर आज आप वहां नहीं आते तो मैं पुलिस स्टेशन में होती।”
“ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। मैंने तुम्हारा साथ इसलिए नहीं दिया कि मुझे तुम पर यकीन है या कोई हमदर्दी हैं..... बल्कि इसलिए दिया है ताकि ग्रीष्मा के आने के बाद मैं खुद तुम्हें पुलिस स्टेशन तक छोड़ कर आऊं। मैं नहीं जानता तुम ये कैसे करोगी लेकिन तुम्हें ग्रीष्मा को ढूंढ कर लाना ही होगा।”
ध्रुव की बात सुनकर तारा उसकी तरफ हैरानी से देख रही थी। “लेकिन मुझे नहीं पता वो कहां गई है?”
“पता नहीं है तो पता लगाओ..... जब तक ग्रीष्मा यहां नहीं आ जाती, मैं तुम्हें यहां से जाने नहीं दूंगा। तुम अगर ये सोच कर खुश हो रही हो कि तुम्हारी मुझसे शादी हो गई और मैं तुम्हें एक्सेप्ट कर लूंगा तो इस गलतफहमी में मत रहना तारा..... तुमने मेरे साथ जो धोखा दिया है, उसकी कीमत तुम्हें हर पल चुकानी होगी।”
ध्रुव की आंखों में तारा के लिए नफरत थी। तारा ना चाहते हुए भी एक ऐसे रिश्ते में बंध गई थी, जहां से आजादी का कोई रास्ता नहीं था। उसे ध्रुव को लेकर थोड़ी बहुत जो उम्मीदें थी, उसकी बातें सुनने के बाद वो उम्मीदें टूट कर चकनाचूर हो गई।
★★★★
पार्ट पढ़कर समीक्षा जरूर कीजिएगा...