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Chapter 25

The Replaced bride - Chapter 25

The Replaced bride

ध्रुव की मामी लक्ष्मी ने तारा को कहीं जाते हुए देखा तो वो उसका पीछा करने लगी। उन्हें तारा अभी भी कसूरवार लग रही थी और वो उसे रंगे हाथ पकड़ना चाहती थी।

इस बात से बेखबर तारा जीवन को ढूंढते हुए पैलेस में घूम रही थी; तभी उसे मिस्टर सिसोदिया मिले।

तारा उनके पास जाकर बोली, “प्रणाम अंकल जी.....”

“खुश रहो बेटा।” उन्होंने हल्की मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया। “उम्मीद है अंदर चीजें सही हो गई होगी।”

तारा ने उनकी बात पर हामी भरी। “माफी चाहती हूं मेरी वजह से यहां पुलिस आई।”

“कोई बात नहीं.....मैं हैंडल कर लूंगा। उम्मीद है तुम्हारे रिश्तो की गलतफहमियां दूर हो गई होगी। जो भी हुआ, वो सोच से परे था।”

“जी अंकल, कई बार जिंदगी में वो सब हो जाता है जिसके बारे में हम सोचते तक नहीं हैं। अच्छा, क्या मैं जीवन से मिल सकती हूं? मुझे उससे कुछ काम था?” बातों बातों में तारा ने पूछा।

“हां, वो तुम्हें पैलेस के राइट साइड बने स्टाफ चेंबर में मिल जाएगा।”

तारा ने उन्हें धन्यवाद कहा और उनकी बताई हुई जगह पर जाकर जीवन को ढूंढने लगी। ध्रुव की मामी भी उसके पीछे पीछे चल दी।

जैसे ही तारा को जीवन दिखाई दिया वो मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ी। “अच्छा हुआ तुम मिल गए। मैं तुम्हें कब से ढूंढ रही थी।”

“मुझे भी तुमसे बात करनी थी। उम्मीद है अंदर मामला सुलझ गया होगा।” जीवन ने गंभीर स्वर में पूछा। उसे तारा के लिए परवाह हो रही थी।

“हां, अब सब ठीक है।”

“अगर सब ठीक है तो शादी मुबारक..... किसने सोचा था, ध्रुव सिंघानिया से तुम्हारी शादी हो जाएगी। पहली बार मिलते ही तुम दोनों की अच्छी खासी लड़ाई हुई थी। यहां तक कि उन्होंने तुम्हें तुम्हारी जॉब से भी निकलवा दिया था... अब उन्हीं से तुम्हारी शादी हो गई।” बोलते वक्त जीवन के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट थी।

“हां शायद इसी को किस्मत कहते हैं।” तारा ने जवाब दिया। उसने इधर उधर देखा। वहां आसपास कोई मौजूद नहीं था तब उसने जीवन से कहा, “जीवन, मुझे तुमसे कुछ काम था।”

“हां बोलो, मैं तुम्हारे क्या काम आ सकता हूं?” जीवन ने पूछा।

उसी वक्त ध्रुव की मामी वहां पहुंची। उसने तारा और जीवन को एक साथ देखा। “ओह! ये है इस लड़की का आशिक, जिसके साथ मिलकर इसने इतने बड़े कारनामे को अंजाम दिया। आज मैं भी इन दोनों का पर्दाफाश करके रहूंगी।” ध्रुव की मामी बड़बड़ा कर बोली।

उनसे कुछ दूरी पर खड़ी तारा ने जीवन से कहा, “यहां जो भी हुआ है, वो तुम से छुपा नहीं है जीवन। मुझे कल रात की सीसीटीवी फुटेज देखनी है। मुझे देखना है, ग्रीष्मा यहां से गई थी, तब उसे यहां कोई लेने आया था या वो अकेले यहां से गई थी।”

“ठीक है मैं तुम्हें कंट्रोल रूम में लेकर चलता हूं।” जीवन ने बिना सोचे समझे तुरंत तारा की मदद करने के लिए हां कह दी। ध्रुव की मामी को दूर से उनकी बातें ठीक से सुनाई नहीं दे रही थी।

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उन्होंने देखा तारा उस लड़के के साथ एक कमरे में जा रही है, तो वो सतर्क हो गई और जल्दी जल्दी उनके पीछे आने लगी।

थोड़ी ही देर में जीवन तारा के साथ कंट्रोल रूम में था। उसने वॉचमैन को बाहर भेज दिया। वही लक्ष्मी भी खिड़की से छुपकर फुटेज देख रही थी।

“क्या तुम बता सकती हो कि ये कितने बजे की बात है?” जीवन ने पूछा।

“उस वक्त रात के 11:30 बजे थे।” तारा ने बताया।

जीवन ने तारा के बताए समय के कुछ देर पहले की फुटेज निकाली। वहां सड़क पर कोई मौजूद नहीं था। अचानक वहां एक बड़ी काली मर्सिडीज आकर रुकी। वो काफी देर तक वहां खड़ी रही। लगभग 10 मिनट बाद ग्रीष्मा अंदर से बाहर निकल कर आई। उसने तारा का सूट पहन रखा था और अपने चेहरे को स्कार्फ से ढक रखा था।

उसके हाथ में एक बैग था, जिसे वो कसकर पकड़ रखी थी। सबसे छुपते छुपाते ग्रीष्मा उस गाड़ी के पास पहुंची। वहां पर बैठने से पहले उसने इधर उधर देखा और फिर जल्दी से गाड़ी के अंदर बैठ गई। अगले ही पल वो गाड़ी वहां से निकल चुकी थी।

वो फुटेज देखने के बाद तारा और जीवन एक दूसरे की तरफ हैरानी से देख रहे थे, तो वही बाहर खड़ी ध्रुव की मामी की आंखें भी हैरानी से फटी रह गई।

“इसका मतलब ये लड़की सही कह रही थी। ध्रुव की शादी जिस लड़की से होने वाली थी, वो धोखेबाज थी। मुझे इस बारे में जीजी को बताना होगा।” लक्ष्मी ने खुद से कहा और वहां से चली गई।

फुटेज देखने के बाद जीवन ने कहा, “ये देखकर इतना तो साफ है, ये सब उसने पहले से प्लान कर रखा था। इतने दिन तक वो सब के साथ गेम खेल रही थी। बड़ी शातिर निकली ये तो.....”

“और इतना भी तय है कि इस काम में वो अकेली नहीं है। जब उसे शादी नहीं करनी थी तो ये सब ड्रामा करने की क्या जरूरत थी? बेवजह मुझे इन में फंसा कर चली गई।”

“उसने तुम्हें भी काफी सोच समझकर चुना था तारा; तभी ध्रुव के जॉब निकालने के बावजूद उसने तुम्हें काम पर रखा... तुम से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश की; ताकि आगे चल चल कर तुम्हारा इस्तेमाल कर सके।” जीवन के चेहरे पर गुस्से के भाव थे।

“मेरी ही गलती है, जो आसानी से किसी से थोड़ा सा भी अपनापन मिले तो उसे अपना समझ लेती हूं; जबकि मुझे साहित्य और साक्षी ने समझाने की कोशिश की थी। मुझे उनसे बात करनी होगी। पता नहीं उन्हें क्यों लगता था कि ग्रीष्मा सब से झूठ बोल रही है। पहले मैं इस चीज को इतना सीरियसली नहीं लेती थी लेकिन अब जरूर कुछ ऐसा है, जो दोनों बच्चे जानते हैं।”

“आई विश कि तुम us फ्रॉड का पर्दाफाश कर सको। रुको, मैं तुम्हें इस फुटेज की एक कॉपी निकाल कर दे देता हूं; ताकि फ्यूचर में तुम्हारे काम आए।” बोलते हुए जीवन ने एक खाली सीडी निकाली और उस पर क्लिप कॉपी करने लगा। “इसके जरिए तुम ध्रुव के घरवालों और पुलिस के सामने अपनी सच्चाई साबित कर सकती हो। जिस हिसाब से ग्रीष्मा गाड़ी के पास रूकी और इधर उधर देखा उससे साफ था कि गाड़ी में बैठे इंसान को वो पहले से जानती थी।”

उसकी बात सुनकर तारा ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और अपने मन में कहा, “इस अनचाही शादी के बंधन से निकलने के लिए सिर्फ अपनी सच्चाई साबित करना ही काफी नहीं होगा। अब तो ध्रुव के साथ-साथ मुझे भी ग्रीष्मा को ढूंढना है। आखिर क्यों किया उसने ये सब? ध्रुव की फैमिली और ध्रुव से उसे इतना प्यार और अपनापन मिला, उसके बावजूद उसने ये सब किया। इन सब की क्या वजह हो सकती है।” फुटेज देखने के बाद तारा के मन में कई सवाल उठ रहे थे। उसने जीवन से उसकी कॉपी ली और उसे थैंक्स बोला।

“सच कहूं तो राजस्थान आने के बाद मेरे साथ कुछ भी अच्छा नहीं हुआ सिवाय तुमसे मिलने के..... यहां से वापस जाऊंगी तो तुमसे मिलकर जरूर जाऊंगी।” तारा ने भारी आवाज में कहा।

अपनी बात कह कर तारा वहां से जाने लगी, तभी जीवन ने उसे पीछे से आवाज लगाकर कहा, “रुको तारा.....” जीवन के रोकने पर तारा ने उसकी तरफ मुड़ कर देखा।

“तुमने अभी कहा, जब यहां से वापस जाऊंगी तो तुमसे मिलकर जरूर जाऊंगी लेकिन तुम यहां से वापस क्यों जाओगी? तुम्हारी तो ध्रुव सिंघानिया से शादी हो गई है ना? अब तो तुम्हें परमानेंटली राजस्थान में शिफ्ट होना पड़ेगा। ध्रुव की फैमिली ने तुम्हें एक्सेप्ट तो कर लिया है ना?” जीवन ने पूछा।

तारा ने मुस्कुराकर उसकी बात पर हां में सिर हिलाया। “यहां से जाने का मेरा मतलब, इस पैलेस से जाने से हैं।”

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“लेकिन पैलेस से भी तुम लोग कुछ ही देर में निकलने वाले हो। तुम लोगों के डिपार्चर की तैयारियां मुझे ही सौंपी गई है। हमें वापिस मिलने का मौका नहीं मिलेगा।”

“मुझे इस बारे में नहीं पता था। तुम मुझे अपना कांटेक्ट नंबर दे दो ताकि मुझे कभी तुम्हारी जरूरत पड़े तो तुमसे बात कर सकूं।” तारा ने नंबर मांगने के बहाने बात को टाल दिया।

जीवन और तारा ने एक दूसरे से नंबर एक्सचेंज किए और तारा वहां से चली गई। उसके जाने के बाद जीवन ने सोचा, “आई विश कि अब तुम्हारी लाइफ में कोई प्रॉब्लम ना आए। तुम बहुत मासूम हो तारा और अक्सर लोग मासूम लोगों का ज्यादा फायदा उठाते हैं। भले ही है ये शादी एक धोखा हो लेकिन ध्रुव सिंघानिया से तुम्हें एक पत्नी का प्यार और हक दोनों मिले।” जीवन ने मन ही मन तारा के लिए प्रार्थना की और फिर अपने कामों में लग गया।

____________

सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद ध्रुव की मामी लक्ष्मी जल्दी से रत्ना के कमरे में पहुंची। रत्ना जी और गायत्री देवी एक कमरे में मौजूद थी। रत्ना उनके सामान की पैकिंग कर रही थी।

वो जल्दी चल कर आने की वजह से हांफ रही थी। आते ही वो बेड पर बैठ गई और गहरी-गहरी सांसें लेने लगी।

“क्या हुआ आपको? आपकी तबीयत तो ठीक है भाभी? मैं डॉक्टर बुलवाऊं?” उसे इस हाल में देखकर रत्ना परेशान हो गई।

कुछ ही देर में लक्ष्मी रिलैक्स फील करने लगी। उन्होंने कहा, “कितनी बार कहा है जीजी छोटी-छोटी बातों पर टेंशन मत लिया करो। मैं बिल्कुल ठीक हूं।”

“वैसे लग तो नहीं रहा कि आप ठीक हैं।” गायत्री देवी ने जवाब दिया।

“मुझे क्या होगा समधन सा..... मैं बिल्कुल ठीक हूं, लेकिन मैं जो खबर लेकर आई हूं, वो कुछ ठीक नहीं है।” ध्रुव की मामी ने जवाब दिया।

“अब क्या हो गया? इतने सब तमाशा के बाद अब क्या और भी कुछ देखना बाकी रह गया। जल्दी बताइए भाभी, मेरा जी बैठा जा रहा है।” रत्ना फिर से घबरा गई।

गायत्री देवी ने उसे शांत कराते हुए कहा, “इनका पता नहीं लेकिन तुम अगर ऐसे ही छोटी-छोटी बातों पर परेशान होती रही तो तुम्हें जरूर डॉक्टर की जरूरत पड़ने लगेगी। आराम से यहां बैठो।” बोलते हुए उन्होंने ध्रुव की मामी की तरफ देख कर कहा, “हां, बोलिए आपको क्या कहना है।”

“समधन सा मैंने अभी- अभी नई बहू का पीछा किया। मुझे लगा उसके इस कारनामे में उसके साथ कोई आदमी मिला हुआ है... आप यकीन नहीं करेंगी समधन सा, मैंने एक वीडियो देखा जो महल के सिक्योरिटी कैमरे का था। मैंने खुद अपनी इतनी बड़ी बड़ी आंखों से देखा था.....वो लड़की ग्रीष्मा अपनी मर्जी से यहां से गई थी। उसे लेने के लिए एक बड़ी सी कार भी आई थी।” ध्रुव की मामी ने फुटेज में जो भी देखा था, वो उनके सामने रख दिया था।

उनकी बात सुनकर गायत्री देवी ने प्रतिक्रिया दी, “जानकर खुशी हुई कि आपने जो भी देखा, वो यहां पर आकर सच- सच बताया। मुझे लगा आप अभी भी तारा से चिढ़ी हुई है।”

“देखिए समधन सा, भले ही मेरी जुबान थोड़ी कड़वी होगी लेकिन मैं झूठ नहीं बोलती हूं। हां वो लड़की मुझे अभी भी नहीं पसंद है क्योंकि उसके घर खानदान मां बाप का कुछ पता नहीं है, लेकिन हमारी नई बहू झूठ नहीं बोल रही। जिस लड़की से ध्रुव की शादी होनी थी, वो तो एक नंबर की धोखेबाज है।” लक्ष्मी ग्रीष्मा को भला बुरा कहने लगी।

“भले ही तारा अनाथ हो लेकिन कम से कम मेरी ध्रुव की शादी ग्रीष्मा से नहीं हुई, इस बात की तसल्ली है अब मुझे..... अगर उसकी शादी उसके साथ हो जाती तो मेरे ध्रुव की जिंदगी बर्बाद हो जाती।” रत्ना के चेहरे पर सुकून के भाव थे। अब तक उनके मन में तारा के लिए जो भी कड़वाहट थी, वो सच जानने के बाद दूर हो चुकी थी।

“हां जो भी है, अब कोशिश करेंगे कि तारा को दिल से अपना सकें।” गायत्री देवी ने उनकी बात पर हामी भरी।

उन दोनों की बात सुनकर लक्ष्मी बोली, “मैं कह देती हूं जीजी, अभी भी मुझे आपकी नई बहू पसंद नहीं है। अभी तो कुछ नहीं बिगड़ा है, चाहे तो दोनों का तलाक करवा सकते हैं। मेरे पास हमारे ध्रुव के लिए एक से एक बढ़कर अच्छे रिश्ते हैं।”

उनकी बात सुनकर गायत्री देवी और रत्ना जी ने एक दूसरे की तरफ देखा और मुस्कुराई। वो दोनों इशारों ही इशारों में एक दूसरे से कह रही थी कि अब ध्रुव की मामी को कैसे टालना है।

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