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Chapter 16

The Replaced bride - Chapter 16

The Replaced bride

अगले दिन शाम के वक्त, उम्मेद भवन पैलेस में रौनक छाई हुई थी। उसे बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया था। कुछ ही देर में ध्रुव और ग्रीष्मा की शादी होने वाली थी।

सिक्योरिटी के चलते, ध्रुव ने शादी में ज़्यादा लोगों को आने की परमिशन नहीं दी थी। ग्रीष्मा के बार-बार ज़िद करने के बावजूद, उसने तारा को भी आने की इजाज़त नहीं दी थी।

घर के सभी लोग शादी की रस्मों की भागदौड़ में लगे हुए थे। ध्रुव अपने कमरे में तैयार हो रहा था। उसके साथ साक्षी और साहित्य भी मौजूद थे। साक्षी, बहन होने के नाते, कुछ रस्में निभा रही थी।

उन दोनों के बने मुँह देखकर ध्रुव बोला, “मैं कब से नोटिस कर रहा हूँ कि तुम दोनों शादी के किसी भी फंक्शन में ठीक से इंवॉल्व नहीं हो रहे? आई नो, मैंने तुम दोनों के फ्रेंड्स को आने की इजाज़त नहीं दी, लेकिन तुम उन्हें रिसेप्शन पार्टी में बुला सकते हो। चलो अब बताओ, शादी के गिफ्ट में क्या चाहिए?”

“बोल तो ऐसे रहे हो जैसे हम मांगेंगे और आप हमें झट से दे देंगे?” साक्षी मुँह बनाकर बोली।

“हाँ, हर बार की तरह। करना तो इन्हें ना ही है। फिर हम कुछ मांगकर क्यों अपनी इंसल्ट करवाएँ?” साहित्य ने उसकी हाँ में हाँ मिलाई।

“तुम दोनों इतने बड़े कब से हो गए जो मेरे ना कहने पर तुम्हारी इंसल्ट हो जाएगी? अच्छा, डब्बू, बताओ तुम्हें कौन से कॉलेज में एडमिशन चाहिए… और चिंटू तुम, पिछली बार मैंने तुमसे तुम्हारा कैमरा छीन लिया था, लेकिन इस बार मैंने तुम्हारे लिए एक बेस्ट कैमरा और अच्छे-अच्छे लैंसेज़ ऑर्डर किए हैं।”

“कहीं हम कोई सपना तो नहीं देख रहे?” साहित्य ने साक्षी से पूछा, “आज हमारे खडूस बड़े भैया ना केवल हमसे अच्छे से बात कर रहे हैं, बल्कि हमारी डिमांड्स भी पूरी करने का बोल रहे हैं।”

“ज़रूर, ये सपना ही होगा।” साक्षी ने जवाब दिया।

उनकी बात सुनकर ध्रुव हल्का सा मुस्कुराया और साहित्य के सिर पर हल्के से मारकर बोला, “मैं पिछले 2 महीने से बिज़ी था, इस वजह से तुम दोनों से बात नहीं कर पाया। इतनी सी बात के लिए तुम दोनों मुँह फुलाकर बैठ गए।”

“मुँह फुलाकर नहीं बैठे हैं भाई…” साक्षी ने जवाब में कहा, “पिछले 2 महीने में आप जितनी रिस्ट्रिक्शन्स हमारे ऊपर लगा सकते थे, वो आपने लगाई। आपकी होने वाली प्यारी वाइफ की वजह से हमें ठीक से शॉपिंग करने तक को नहीं मिली।”

“अच्छा बाबा, ठीक है। मैं तुम दोनों की नाराज़गी समझता हूँ, लेकिन एक बार शादी हो जाने दो, फिर मैं तुम दोनों की सारी शिकायतें मिटा दूँगा।” ध्रुव ने साक्षी को गले लगाकर कहा। साहित्य और साक्षी उससे उम्र में काफी छोटे थे, इस वजह से वह उनकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करता था।

“हाँ, वो भी पता चल जाएगा। देखते हैं, शादी के बाद आप कितना टाइम ग्रीष्मा भाभी के साथ बिताते हैं और कितना हमारे साथ…” साहित्य ने जवाब दिया।

ध्रुव ने मुस्कुराकर उन दोनों की बात पर हामी भरी। उससे बात करके उन दोनों के चेहरे पर भी मुस्कुराहट थी।

वहीं दूसरी तरफ़, तारा ग्रीष्मा के साथ मौजूद थी। ग्रीष्मा लाल जोड़े में सजकर, दुल्हन के रूप में तैयार हो चुकी थी और बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।

“आई एम सो सॉरी तारा, मैं ध्रुव को नहीं मना पाई। मैं चाहती थी कि तुम मेरी शादी अटेंड करो, लेकिन ध्रुव की ज़िद के आगे…” बोलते हुए ग्रीष्मा चुप हो गई। वह उदास लग रही थी।

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“आप मेरी वजह से क्यों परेशान हो रही हैं? डोंट वरी, मैं जीवन के साथ बाहर जोधपुर घूमने चली जाऊँगी।”

“कौन जीवन?”

“वो यहीं पैलेस में काम करता है। पिछली बार हम दोनों ने मिलकर आपके लिए डेट अरेंज की थी और इस बार भी छत पर डेट अरेंज करने में उसने मेरी मदद की थी।” तारा ने बताया।

“ठीक है।” इतना कहकर ग्रीष्मा चुप हो गई। तारा ने देखा कि ग्रीष्मा काफी परेशान लग रही थी और वह बार-बार अपना मेकअप सही कर रही थी।

तारा उससे कुछ पूछ पाती, उससे पहले ग्रीष्मा के पास किसी का कॉल आया और वह उठकर दूसरी तरफ़ चली गई।

“इसे अचानक से क्या हुआ? शादी के दिन हर लड़की खुश होती है और इसकी शक्ल उतरी हुई लग रही है। हाँ, वैसे परेशान होना तो बनता है, अब पूरी ज़िंदगी उस खडूस के साथ जो बितानी पड़ेगी।” तारा बड़बड़ाकर बोली।

उसे लगा ग्रीष्मा बात करके तुरंत आ जाएगी, लेकिन ग्रीष्मा लगभग आधे घंटे बाद बात करके उसके पास आई। उसकी आँखों में आँसू थे।

तारा उसके आँसू पोछते हुए बोली, “मैं जानती हूँ आज का दिन आपके लिए काफी इम्पॉर्टेन्ट है। आज के बाद आप अपने माँ-बाप से अलग एक नई ज़िंदगी शुरू करेंगी, इस दिन एक लड़की का इमोशनल होना जाहिर सी बात है, लेकिन प्लीज़ रोइए तो मत…”

तारा की बात सुनकर ग्रीष्मा और ज़ोर से रोने लगी और उसके गले लग गई।

“मैं आपकी मम्मी को बुलाकर लाती हूँ। उनसे बात करके आपको अच्छा लगेगा।” तारा उससे अलग होकर बोली और वहाँ से सरिता जी को बुलाने के लिए जाने लगी।

ग्रीष्मा तेज कदमों से चलकर उसके पास गई और उसका हाथ पकड़कर रोकते हुए कहा, “नहीं तारा… मेरे रोने की वजह मेरे मम्मी-पापा से अलग होना नहीं है।”

“तो क्या हुआ?” तारा ने हैरानी से पूछा।

“तारा, मेरा भाई… मेरा छोटा भाई… पहले उसने शादी में आने से मना कर दिया था, लेकिन अब वह हम सब को सरप्राइज़ देने के लिए लंदन से यहाँ आ रहा था। अभी-अभी मेरे पास एक कॉल आया। उसके ज़रिए मुझे पता चला कि एक रोड एक्सीडेंट में उसकी मौत हो गई।” कहकर ग्रीष्मा फिर से रोने लगी।

उसकी बात सुनकर तारा को एक सदमा सा लगा। वह एकदम से बेड पर बैठ गई। “ये तो सच में बहुत बुरा हुआ। भगवान उसकी आत्मा को शांति दे। पता नहीं सरिता आंटी और भावेश अंकल इस सदमे को कैसे सह पाएँगे।”

“मेरे लिए तो उम्र भर यही गिल्ट रह जाएगा कि मेरी शादी में आने की वजह से मेरे भाई की जान चली गई। मैं तो इस लायक भी नहीं कि आखिरी वक्त जाकर उसको देख सकूँ।”

“आप ध्रुव सर से बात कीजिए। वह ज़रूर समझेंगे।” तारा ने कहा।

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“मैं ध्रुव से बात नहीं कर पाऊँगी। ना ही वह मुझे इस बात की इजाज़त देगा। तारा, मुझे बस एक आखिरी बार अपने भाई का चेहरा देखना है।”

“आई विश कि मैं आपकी कोई मदद कर पाती ग्रीष्मा…”

ग्रीष्मा ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और वहीं चेयर पर बैठकर रो रही थी। तारा उसे समझाने की बहुत कोशिश कर रही थी, लेकिन वह बार-बार अपने भाई से मिलने की बात कर रही थी।

“तारा, तुम चाहो तो मेरी हेल्प कर सकती हो।” ग्रीष्मा अचानक से बोली।

“लेकिन मैं आपकी क्या हेल्प कर सकती हूँ?”

“मैं जानती हूँ मुझे तुम्हें ये नहीं कहना चाहिए, लेकिन… तारा, मैं अपने भाई से मिलना चाहती हूँ। हम दोनों का पूरा बचपन एक साथ बिता है। आज मैं नई ज़िंदगी शुरू करने जा रही हूँ, तो वही मेरे भाई ने अपनी ज़िंदगी से अलविदा कह दिया। मुझे आखिरी बार उसका चेहरा देखना है। तारा, तुम मेरे कपड़े पहनकर, दुल्हन के रूप में तैयार होकर यहाँ बैठ जाना…”

ग्रीष्मा ने अपनी बात खत्म भी नहीं की थी कि तारा उसकी बात काटते हुए बीच में बोली, “ये आप कैसी बात कर रही हैं ग्रीष्मा? मैं आपकी जगह कैसे बैठ सकती हूँ? आपकी और ध्रुव सर की शादी होने वाली है। आपके घरवालों की आपकी शादी से कितनी ख्वाहिशें जुड़ी हुई हैं। आप ऐसा करने को कह भी कैसे सकती हैं?” वह गुस्से में ग्रीष्मा पर बिफर पड़ी।

“तारा… तारा, पहले मेरी पूरी बात तो सुन लो।” ग्रीष्मा उसे चुप कराते हुए बोली, “मैं तुम्हें ध्रुव से शादी करने के लिए नहीं कह रही। बस यहाँ पर दुल्हन के तौर पर बैठने को कह रही हूँ। शादी का मुहूर्त शुरू होने में अभी 2 से ढाई घंटे का टाइम है, मैं तब तक जाकर वापस भी आ जाऊँगी। तुम… तुम यहाँ घूँघट निकालकर बैठ जाना। कोई तुम्हारा घूँघट हटाकर नहीं देखेगा। शादी शुरू होने से पहले मैं आ जाऊँगी।”

“मुझे आपके साथ पूरी हमदर्दी है ग्रीष्मा मैम, लेकिन मैं ये नहीं कर पाऊँगी।” कहकर तारा वहाँ से जाने लगी।

“तारा, आज मेरी जगह तुम्हारी खुद की बहन होती या तुम्हारे खुद के भाई की मौत हो जाती, तो क्या तुम उसे भी ऐसे ही हाल में छोड़ देती?” ग्रीष्मा ने पीछे से आवाज़ लगाकर कहा।

उसकी बात सुनकर तारा के क़दम वहीं रुक गए। वह उसकी तरफ़ मुड़ी और बोली, “मुझे आपके लिए बहुत बुरा लग रहा है ग्रीष्मा मैम, लेकिन आप जो करने को कह रही हैं, वह सही नहीं है। कल को आपको आने में देर हो गई, तो मैं बाकी लोगों को क्या जवाब दूँगी कि आप कहाँ गई हैं? अचानक से आपके मम्मी-पापा को आपके भाई की मौत की न्यूज़ मिलेगी, तो वह कैसे रिएक्ट करेंगे?”

“तारा, मैं शादी शुरू होने से पहले आ जाऊँगी। फिर भी अगर मुझे आने में पाँच-दस मिनट इधर-उधर हो जाए, तो तुम फेरों के लिए चले जाना। आई प्रॉमिस, मैं शादी नहीं होने दूँगी। मैं बीच में आकर रुकवा दूँगी और सबको सब कुछ समझा भी दूँगी।”

“भगवान करे उसकी नौबत ना आए ग्रीष्मा। अब आप जल्दी चाहिए, और जल्दी से वापस आ जाइए।”

ग्रीष्मा ने उसकी बात पर हामी भरी और वहाँ के पिछले दरवाज़े से बाहर चली गई। तारा ने ग्रीष्मा की जगह बैठने के लिए हाँ तो कह दी थी, लेकिन घबराहट के मारे उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

तो, फ़ाइनली, प्रोमो सीन आने वाला है। आपको क्या लगता है कि तारा की शादी ध्रुव से हो जाएगी या ग्रीष्मा टाइम पर आकर उसे रोक लेगी?

समीक्षा में ज़रूर बताइएगा।

कीप सपोर्टिंग ऑलवेज़

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