The Replaced bride - Chapter 7
The Replaced brideतारा, ग्रीष्मा और ध्रुव के साथ जयपुर जा रही थी। गाड़ी की फ्रंट सीट पर ध्रुव और ग्रीष्मा बैठे थे, जबकि तारा बैक सीट पर थी।
तारा के साथ होने की वजह से ध्रुव को झुंझलाहट हो रही थी। वह बिना कुछ बोले, चुपचाप गाड़ी चला रहा था। गाड़ी में बैठने के कुछ देर बाद ही तारा को नींद आ गई, और वह खर्राटे ले कर मजे से सो रही थी।
“मेरी नींद हराम करके कितने बजे से खर्राटे लेकर सो रही है यह लड़की…”, ध्रुव बड़बड़ाकर बोला।
“तारा की परेशानी दूर हो गई, इसलिए वह आराम से सो रही है।” ग्रीष्मा ने जवाब में कहा।
“हाँ, सुन रहा हूँ मैं कि तुम्हारी तारा कितने आराम से सो रही है।” ध्रुव मुँह बनाकर बोला।
ध्रुव को चिढ़ते देख ग्रीष्मा के चेहरे पर स्माइल आ गई। वह बोली, “तुम अभी तक इससे नाराज़ हो? देखो ना, कितनी स्वीट है यह।” बोलते हुए ग्रीष्मा ने पीछे की सीट पर तारा को देखा।
ध्रुव ने ग्रीष्मा की बात का कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप गाड़ी चलाने लगा। उसे तारा के खर्राटों की आवाज़ इरिटेट कर रही थी।
“मेरे होते हुए मैं तुम्हें चैन की नींद तो बिल्कुल नहीं सोने दूँगा, तारा…”, ध्रुव ने सोचा और अपना हाथ म्यूज़िक सिस्टम की ओर बढ़ाया। उसने म्यूज़िक ऑन किया और उसका साउंड लाउड कर लिया।
“यह तुम क्या कर रहे हो, ध्रुव? तारा सो रही है। शोर सुनेगी तो उठ जाएगी।” ग्रीष्मा ने म्यूज़िक की आवाज़ कम की।
“इसके खर्राटों की आवाज़ सुनकर मुझे इरिटेशन हो रही है। मैं ड्राइव कर रहा हूँ, ग्रीष्मा, मुझे फ़ोकस करने की ज़रूरत है।” ध्रुव ने बहाना बनाया।
“लेकिन यह जाग जाएगी।” ग्रीष्मा ने सख्ती से कहा।
“जिस हिसाब से यह खर्राटे ले रही है, यहाँ पर बम ब्लास्ट भी हो जाएगा, तब भी यह नहीं उठेगी।” ध्रुव ने मुँह बनाकर कहा और फिर से म्यूज़िक लाउड कर दिया।
ध्रुव ने तेज म्यूज़िक इसलिए किया था ताकि तारा सो ना सके। लेकिन वह अभी भी मजे से सो रही थी। उसे तेज म्यूज़िक का कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था। ध्रुव को इससे और भी चिढ़ हो रही थी।
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सुबह के लगभग चार बजे वे तीनों जयपुर पहुँचे। ध्रुव काफी थक चुका था। ग्रीष्मा भी गाड़ी में सोई हुई थी।
“अब इन दोनों को एक साथ अंदर कैसे लेकर जाऊँ?” ध्रुव ने खुद से कहा और एक नज़र अपने घर की तरफ़ देखी।
घर की लाइट्स बंद थीं। सिक्योरिटी गार्ड ने ध्रुव की गाड़ी आती देखी, तो मेन डोर खोला। उनका घर बिल्कुल किसी महल की तरह था। जल्द ही ध्रुव और ग्रीष्मा की शादी होने वाली थी, इस वजह से ग्रीष्मा की फैमिली भी वहीं पर आई हुई थी।
ध्रुव गाड़ी से उतरा और अपनी कार के पीछे का दरवाज़ा खोलकर तारा को जगाने की कोशिश करने लगा। “हे तारा… चलो उठो, घर आ गया है।”
वह बार-बार तारा को उठाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन तारा आराम से सो रही थी।
“इसका नाम तारा नहीं, बल्कि मुसीबत होना चाहिए था। जब से मिली है, कोई न कोई नई प्रॉब्लम खड़ी कर रही है।” ध्रुव ने आँखें घुमाकर कहा। उसने पानी की बोतल निकाली और तारा के मुँह पर उड़ेल दी।
“बारिश हो रही है… कोई…”, तारा आँख मलती हुई उठी, तो उसने सामने ध्रुव को पाया। “क्या प्रॉब्लम है तुम्हारी? अब क्या चैन से सोने भी नहीं दोगे?”
“तुम्हारी? माइंड योर लैंग्वेज, मिस तारा।” ध्रुव ने भौंहें उठाकर कहा।
“तो क्या गलत कह दिया? अब मैं आपके लिए काम नहीं करती, तो आपको जो चाहे कहूँ। चलिए, अब साइड हटिए और मुझे मेरे रुकने की जगह बता दीजिए।” बोलते हुए तारा गाड़ी से बाहर आई।
ध्रुव ने ग्रीष्मा को जगाना सही नहीं समझा और उसे अपनी गोद में उठाकर अंदर ले जाने लगा। तारा उसके पीछे-पीछे आ रही थी।
“यह सही है इसका, अपनी गर्लफ्रेंड को नहीं जगाया और मेरे ऊपर सीधा पानी डाल दिया। किसी दिन इससे इस बात का बदला ज़रूर लूँगी।” तारा खुद से बातें करते हुए अंदर आ रही थी।
उसने देखा ध्रुव का घर भी काफी बड़ा और बिल्कुल किसी महल की तरह था। उसके घर को देखने के बाद तारा ने सोचा, “तभी मैं कहूँ कि इसमें इतना घमंड क्यों है? अब महल जैसे घर में रहता है, तो एटीट्यूड तो होगा ही… सही है इनका… बड़े-बड़े लोग, बड़े-बड़े घर और उससे भी बड़ा एटीट्यूड…”
तारा खोए हुए अंदाज़ में अंदर चल रही थी। अंदर आते ही ध्रुव ने लाइट ऑन की।
“उधर गेस्ट रूम है, तो वहाँ जाकर सो जाओ।” ध्रुव ने उसे एक कमरे की तरफ़ इशारा करके कहा।
“और ग्रीष्मा मैम? आप इन्हें कहाँ लेकर जाओगे?” तारा ने सिर हिलाकर पूछा।
“फ़ॉर योर इनफ़ॉर्मेशन, यह मेरी होने वाली वाइफ़ है, तो मुझे तुमसे ज़्यादा इसकी फ़िक्र है। अपने काम से मतलब रखो।” ध्रुव ने उसे रूखे तरीके से जवाब दिया और ग्रीष्मा को लेकर सीढ़ियों से ऊपर जाने लगा।
तारा ने उसके पीछे से मुँह बनाया और उसके बताए हुए कमरे में चली गई। उसे ध्रुव के बर्ताव की वजह से उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था।
“समझता क्या है यह अपने आप को? एक बार इन दोनों की शादी हो जाए, उसके बाद इस आदिमानव की शक्ल तक नहीं देखूँगी।” तारा गुस्से में बड़बड़ाई और लाइट ऑफ़ करके सो गई।
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अगली सुबह तारा देर तक सो रही थी, लेकिन ध्रुव और ग्रीष्मा बाकी परिवार के साथ मौजूद थे। ध्रुव की माँ, रत्ना जी और ग्रीष्मा की माँ, सरिता जी, दोनों ध्रुव की दादी के पास बैठकर शादी की प्लानिंग कर रहे थे।
ध्रुव, ग्रीष्मा के डैड, भावेश जी के पास बैठकर लैपटॉप में कुछ ज्वेलरी की डिज़ाइन्स देख रहा था।
“आजकल कुंदन की ज्वेलरी काफी ट्रेंड में है, तो सोचा इस बार ज्वेलरी डिज़ाइन करते वक़्त इनका भी यूज़ किया जाए।” ध्रुव उन्हें डिज़ाइन दिखाते हुए बता रहा था।
“तुम्हारी बिज़नेस की परख बहुत अच्छी है। आज तुम्हारे पापा होते, तो उन्हें तुम पर बहुत गर्व महसूस होता।” भावेश जी उसके बनाई डिज़ाइन्स देखकर काफी इम्प्रेस हुए।
“साथ ही उन्हें इस बात की भी उतनी ही खुशी होती, कि उनका किया वादा निभाने के लिए ध्रुव हमारी ग्रीष्मा से शादी कर रहा है।” ग्रीष्मा की माँ, सरिता जी बोलते हुए उनके पास आई।
सब आपस में हल्की-फुल्की बातें कर रहे थे और काफी खुश थे। लेकिन उनसे दूर एक लड़का और लड़की बैठे थे, जो कि मुँह बनाकर उन सब की बातें सुन रहे थे।
“तुझे नहीं लगता, डब्बू, आजकल हमारे भैया बड़े होने से पहले ही बूढ़े हो गए हैं।” लड़के ने अपने पास बैठी लड़की से कहा। लड़के ने डेनिम कैप्री और टीशर्ट पहन रखा था। साथ में कैप लगा रखा था।
डब्बू ने उसका कैप उतारकर अपने सर पर लगा लिया। उसके पूरे बाल चोटियों के रूप में गुँथे हुए थे। “सही कह रहे हो तुम, चिंटू, ऊपर से इनकी तो शादी भी हो रही है। भाई, कितने संस्कारी हैं! यह हमारे बड़ों के बीच में बैठकर बातें करते हैं, जबकि मुझे तो इनकी बातें ठीक से समझ तक नहीं आती।” डब्बू ने जवाब दिया।
दोनों अपनी ही धुन में लगे थे कि तभी ध्रुव की दादी, गायत्री जी ने उन दोनों को आवाज़ लगाई। “डब्बू… चिंटू, तुम दोनों वहाँ पर बैठकर क्या कर रहे हो? तुम दोनों भी हमारे पास आकर कुछ बातें करो।”
“रहने दीजिए, माँ, इन्हें हमारी बातें बोरिंग लगती होंगी।” रत्ना जी ने जवाब दिया। उनकी बात सुनकर सब मुस्कुरा दिए, जबकि डब्बू और चिंटू के मुँह बन गए।
ग्रीष्मा भी वहीं पर मौजूद थी और टेबलेट में कुछ मैसेज देख रही थी। तभी अचानक उसे तारा का ख्याल आया, तो उसने ध्रुव को आवाज़ लगाकर कहा, “ध्रुव, हम उसके बारे में तो भूल ही गए थे। कहाँ है वह?”
“तुम्हें क्या लगता है, ग्रीष्मा, कहाँ जा सकती है? मैडम अभी तक मजे से गेस्ट रूम में खर्राटे लेकर सो रही होगी। वह मुसीबत इतनी आसानी से हमारे सिर से नहीं हटने वाली।” ध्रुव ने इरिटेट होकर जवाब दिया।
“तुम दोनों किसकी बातें कर रहे हो?” ध्रुव की माँ, रत्ना जी ने पूछा।
“माँ, है एक मुसीबत, जिसे जबरदस्ती ग्रीष्मा ने अपने और मेरे गले बाँध दिया। ग्रीष्मा ने शादी की तैयारियों के लिए अपने लिए एक असिस्टेंट हायर की है, वह गेस्ट रूम में सो रही है। तारा नाम है उसका।” ध्रुव ने बताया।
ध्रुव के मुँह से तारा के बारे में जानकर डब्बू और चिंटू एक-दूसरे की तरफ़ देखने लगे। उन दोनों के चेहरे पर शैतानी मुस्कान थी।
“भाई के लिए मुसीबत, इसका मतलब हमारे लिए फ़रिश्ता…” डब्बू ने आँख मारकर कहा।
“अब तो इस मुसीबत से मिलना पड़ेगा।” चिंटू ने जवाब में कहा।
वे दोनों दबे पाँव वहाँ से गेस्ट रूम में जाने लगे। किसी का उन दोनों की तरफ़ ध्यान नहीं गया।
“ग्रीष्मा, क्या ज़रूरत है तुम्हें असिस्टेंट हायर करने की? हम सब लोग हैं तो सही, तुम्हारी मदद के लिए?” सरिता जी ने कहा।
“आई नो, मॉम… आप लोग हैं… लेकिन अब वह भी आ गई है। तारा एनी टाइम मेरे साथ रहेगी, तो मेरी हेल्प हो जाएगी।” ग्रीष्मा ने जवाब दिया।
“हेल्प-वेल्प कुछ नहीं होने वाली। देखना, वह तुम्हारे काम बढ़ा देगी। तुम उससे हेल्प की उम्मीद कर रही हो, जो अब तक उठी तक नहीं…” ध्रुव ने कहा।
“सही ही तो कह रहा है, ध्रुव। दस बज गए हैं। सब लोग नाश्ता करके अपने-अपने काम में लग चुके हैं, लेकिन वह लड़की अभी तक नींद से नहीं उठी। वह तुम्हारी क्या खाक मदद करेगी।” गायत्री जी ने उनकी हाँ में हाँ मिलाई।
ग्रीष्मा का असिस्टेंट रखना किसी को भी पसंद नहीं आ रहा था। उसने उस वक़्त किसी से कुछ नहीं कहा और तारा को जगाने के लिए उसके कमरे में जाने लगी।
तभी ध्रुव ने उसे रोकते हुए कहा, “कोई ज़रूरत नहीं है तुम्हें उसे उठाने जाने की, वह तुम्हारी असिस्टेंट है, ना कि तुम उसकी। उसे अब जितना सोना है, जी भर के सोने दो। उसे कैसे सबक सिखाना है, मैं अच्छे से जानता हूँ।”
ध्रुव के कहने पर ग्रीष्मा को वहीं पर रुकना पड़ा। वह तारा को कॉल करके उठाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह अभी तक आराम से सो रही थी।
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