The Replaced bride - Chapter 18
The Replaced brideग्रीष्मा के अचानक शादी से चले जाने से, घुंघट की आड़ में तारा की शादी ध्रुव से हो चुकी थी। सच से अनजान, ध्रुव कमरे में आया तो उसे देखकर तारा अंदर ही अंदर सिमटने लगी। अगले ही पल क्या होने वाला था, यह सोचकर उसका दिल जोरों से धड़क रहा था।
ध्रुव तारा के पास आकर बगल में बैठा। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट थी।
ध्रुव ने देखा, ग्रीष्मा अभी भी घुंघट में थी। उसे कम्फ़र्टेबल फील कराने के लिए उसने कहा, “मुझे नहीं पता था तुम इन रीति-रिवाजों को इतना सीरियसली लेती हो। अब तो यहां कोई नहीं है, और मां ने कहा था शादी के बाद मैं तुम्हें देख सकता हूं। फिर हमारे बीच यह पर्दा क्यों?”
तारा ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। उसकी आँखों में आँसू थे। “पता नहीं मैं इनका सामना कैसे कर पाऊँगी... कि आज यहां ग्रीष्मा के बजाय मैं यहां पर क्यों बैठी हूँ? इस बात की सफाई कैसे दे पाऊँगी?” तारा ने अपने मन में कहा।
“कहीं इस रूम में कोई छुपा हुआ तो नहीं है?” ध्रुव ने पूछा और इधर-उधर देखने लगा। जब उसे तसल्ली हो गई कि कमरे में कोई नहीं है, तब वह तारा के नज़दीक खिसक सका और हल्के से उसका घूंघट उठाया।
उसने देखा, सामने ग्रीष्मा के बजाय तारा थी, जिसने डर के मारे अपनी आँखें कसकर बंद कर रखी थीं।
उसे वहाँ देखकर ध्रुव ने मुस्कुराकर कहा, “ज़रूर यह साक्षी और साहित्य ने किया होगा। सॉरी तारा, तुम्हें यहाँ ग्रीष्मा की जगह बैठना पड़ा। मैं अभी उनकी ख़बर लेता हूँ। मस्ती-मज़ाक की भी एक लिमिट होती है।” ध्रुव को अभी तक यह सब रस्म का हिस्सा लग रही थी, जहाँ अक्सर दुल्हन के बजाय किसी और को बिठा दिया जाता था।
“ग्रीष्मा कहाँ है?” उसने पूछा। “ज़रूर वह भी कमरे में यहीं कहीं छिपी होगी और हम दोनों को यहाँ देखकर हँस रही होगी। अच्छा बेवकूफ बनाया है तुम लोगों ने आज मुझे.....” ध्रुव वहाँ से उठा और ग्रीष्मा को इधर-उधर देखने लगा।
कमरे में उन दोनों के अलावा और कोई मौजूद नहीं था। तारा डर के मारे चुपचाप बैठी थी। उसे नहीं समझ आ रहा था कि वह क्या बोले। ध्रुव को ग्रीष्मा कहीं भी नहीं मिली तो उसने पूछा, “ग्रीष्मा दूसरे कमरे में है क्या?”
तारा ने ना में सिर हिलाया। उसका कुछ ना कहना ध्रुव को गुस्सा दिला रहा था।
“तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही? तुम तो मुझसे ऐसे डर रही हो जैसे मैं कोई भूत हूँ और अभी तुम्हें खा जाऊँगा। अभी तक तो मेरा मूड बिल्कुल सही है, लेकिन तुमने कोई जवाब नहीं दिया तो सच में मुझे गुस्सा आ जाएगा। चलो अब जल्दी से यहाँ से उठो और ग्रीष्मा को बोलो यहाँ आए। मैंने पूरे दिन से उसे नहीं देखा।” ध्रुव ने अपने गुस्से को काबू में करके कहा।
तारा ने जैसे-तैसे हिम्मत करके धीमी आवाज़ में कहा, “मुझे नहीं पता ग्रीष्मा कहाँ है।”
“व्हाट डू यू मीन? तुम्हें नहीं पता? तुम्हें यहाँ किसने बिठाया है? तुमने ग्रीष्मा के कपड़े, ज्वेलरी सब पहन रखे हैं और तुम्हें नहीं पता वह कहाँ है? आर यू सीरियस?” ध्रुव ने हल्का चिल्लाकर कहा।
“मुझे आपको कुछ बताना है।”
“हाँ तारा, तुम्हें मुझे यह बताना है कि ग्रीष्मा कहाँ है। अब प्लीज़ मुझे इरिटेट मत करो और जल्दी बताओ कि ग्रीष्मा कहाँ है? तुम छोड़ो..... मैं खुद ही पता लगा लूँगा।” कहकर ध्रुव ने अपना मोबाइल निकाला और ग्रीष्मा के नंबर पर कॉल करने लगा। ग्रीष्मा का नंबर अवैध बता रहा था।
ध्रुव हैरानी से तारा की तरफ़ देख रहा था। “ग्रीष्मा कहाँ है तारा? अभी दो घंटे पहले हमारी शादी हुई थी, इतनी देर में उसका फ़ोन? तुम सब मेरे साथ मज़ाक कर रहे हो ना?” ग्रीष्मा का नंबर गलत बताने पर ध्रुव को घबराहट होने लगी।
“ग्रीष्मा का नंबर गलत बताने पर आपको जितनी हैरानी हो रही है, उससे ज़्यादा मुझे हुई थी। मुझे नहीं पता पिछले पाँच घंटों से वह कहाँ है।”
“देखो तारा, डोंट टेस्ट माय पेशेंस..... तुम्हें पिछले पाँच घंटों से ग्रीष्मा का नहीं पता तो फिर मेरे साथ मंडप में.....” बोलते हुए ध्रुव की नज़र तारा की तरफ़ गई, जिसकी मांग में सिंदूर भरा था। उसके गले में वही मंगलसूत्र था, जो शादी के वक़्त उसने ग्रीष्मा को पहनाया था। उसे देखते ही ध्रुव के शब्द उसके गले में अटक गए। वह जैसे-तैसे बोलने की कोशिश कर रहा था। “न.....हीं..... यह नहीं हो सकता। घूंघट के पीछे तुम.....”
तारा ने उसकी बात पर हाँ में सिर हिलाया। उसकी आँखों में आँसू थे। ध्रुव को अभी भी इन सब पर यकीन नहीं हो रहा था।
“तुम लोग मेरे साथ मज़ाक कर रहे हो ना?” ध्रुव ने बिल्कुल धीमी आवाज़ में पूछा।
“काश यह सब एक मज़ाक होता, तो आज मेरी ज़िंदगी बर्बाद नहीं होती।”
“ज़िंदगी तुम्हारी नहीं मेरी बर्बाद हुई है। तुम लोगों ने खेल लगा रखा है क्या, जो घूंघट के पीछे कोई भी बैठ जाएगा और किसी से भी शादी हो जाएगी। कहीं तुमने ग्रीष्मा को किडनैप करके..... तुमने उसके साथ कुछ गलत तो नहीं किया ना.....” ध्रुव को ग्रीष्मा की परवाह हो रही थी इसलिए उसके मन में बुरे-बुरे ख़्याल आने लगे। “प्लीज़ मुझे पूरी बात बताओ।”
“ग्रीष्मा के पास एक कॉल आया था। कॉल पर किसी ने उससे कहा कि उसके भाई की डेथ हो गई है। वह उसे शादी में सरप्राइज़ देने के लिए न्यूयॉर्क से आ रहा था। रास्ते में उसका एक्सीडेंट होने की वजह से डेथ हो गई। ग्रीष्मा आखिरी बार उनसे मिलना चाहती थी, बस इसीलिए वह घूंघट में मुझे बिठाकर चली गई। उन्होंने कहा था कि वह आ जाएगी, लेकिन वह नहीं आ पाई। मैंने उन्हें कॉल किया तो उनका नंबर गलत बता रहा था।” तारा ने रोते हुए सारी बात शुरू से लेकर आखिर तक बता दी थी। वह सारी बातें ध्रुव के सामने रखकर निश्चिंत थी। “यकीन मानिए, इन सब में मेरी कोई गलती नहीं है।”
“तुम झूठ बोल रही हो तारा, ग्रीष्मा का कोई भाई नहीं है। अरे उसका कोई कज़िन भी न्यूयॉर्क में नहीं रहता। ग्रीष्मा के कज़िन ब्रदर्स इतने छोटे हैं कि वे अभी स्कूल में हैं। बताओ तुमने कहाँ रखा है ग्रीष्मा को?”
ध्रुव की बात सुनकर तारा को विश्वास नहीं हुआ। रह-रहकर उसे साक्षी और साहित्य की कही बातें याद आने लगीं, जहाँ वे दोनों ग्रीष्मा पर यकीन ना करने की बात कहते थे।
“मेरा यकीन मानिए मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ। हो सकता है कि आप ग्रीष्मा की पूरी फैमिली से नहीं मिले होंगे। आप उनके मम्मी-पापा से बात कीजिए, वे आपको सारा सच बता देंगे।”
“तुम्हें क्या लगता है मैं बाहर जाकर सबको यह बताऊँगा कि मंडप में घूंघट के पीछे ग्रीष्मा के बजाय तुम मौजूद थीं, तो वे तुम्हें आसानी से जाने देंगे?” ध्रुव ने सिर पकड़कर कहा।
“मैं कुछ नहीं जानती। इन सब में मेरी कोई गलती नहीं है, मुझे ग्रीष्मा ने झूठ बोला। उसने मुझे बेवकूफ बनाकर शादी के मंडप में बिठा दिया। अब मैं नहीं जानती कि आप अपनी फैमिली से कैसे निपटेंगे। मैं वापस अहमदाबाद जा रही हूँ।” कहकर तारा कमरे से बाहर जाने लगी। ध्रुव जल्दी से उसकी तरफ़ बढ़ा और उसका हाथ पकड़कर उसे दीवार से लगा दिया।
वह तारा के बिल्कुल करीब था। उसने तारा को दोनों बाजुओं से पकड़कर उसे दीवार से लगा रखा था। “तुम मुझे अकेले इस सिचुएशन में छोड़कर नहीं जा सकती। मुझे नहीं पता तुम सच बोल रही हो या झूठ, लेकिन फ़िलहाल के लिए ग्रीष्मा मिसिंग है और सारा शक तुम पर जाता है। आखिरी बार तुम ही उसके साथ थीं। क्या पता तुमने उसका किडनैप करवाकर मुझसे शादी कर ली हो।”
“और मैं आपसे शादी क्यों करना चाहूँगी?” तारा ने गुस्से में कहा।
“पैसों के लिए.....”
ध्रुव की बात सुनकर तारा जोर से हँसी। “तुम अपनी पूरी जायदाद भी मेरे नाम कर दोगे, फिर भी मैं तुम्हारे साथ रहना नहीं चाहूँगी, मिस्टर ध्रुव सिंघानिया..... तुम्हें मेरी बात पर यकीन नहीं है, तो जाकर साक्षी से पूछो। मैंने आखिरी बार ग्रीष्मा से बात की थी, तब वह मेरे साथ मौजूद थी। ग्रीष्मा ने मुझे वापिस लौटने को कहा था और यह भी बोला था कि वह इस शादी को रोक देगी। मैंने साक्षी से भी कहा था कि अगर ग्रीष्मा ना आ पाए तो वह इस शादी को रुकवा दे। ना ग्रीष्मा वापिस आई और ना ही साक्षी शादी रुकवाने के लिए आगे आई।”
“तुम्हारी इस मनगढ़ंत कहानी पर यकीन कौन करेगा? साक्षी बच्ची है..... कोई उसकी बात नहीं मानेगा। ग्रीष्मा के मम्मी-पापा तो बिल्कुल नहीं..... सबको यही लगेगा कि तुमने ग्रीष्मा को नुकसान पहुँचाकर मुझसे शादी की है।”
“लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैं सच बोल रही हूँ।”
“हो सकता है तुम सच बोल रही होंगी, लेकिन जब तक ग्रीष्मा खुद अपने मुँह से आकर इस बात को स्वीकार नहीं कर लेती, तब तक तुम यहाँ से नहीं जा सकती।”
तारा ने ध्रुव को खुद से दूर किया। वह जाकर बिस्तर पर बैठ गई। अब तक उसे ध्रुव का सामना करने में डर लग रहा था, लेकिन अब उसे ध्रुव पर गुस्सा आ रहा था।
उसे अपनी तरफ़ घूरता देखकर ध्रुव ने कहा, “मेरी तरफ़ ऐसे मत देखो। मुझे तुम पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है। जब से तुम आई हो, कुछ न कुछ गड़बड़ कर रही हो। मुझे इस तरह देखने के बजाय यह सोचो कि बाकी फैमिली को तुम क्या जवाब दोगी।”
“मैं उन्हें वही कहूँगी, जो मैंने आपसे कहा और जो सच है। कोई मेरे बारे में कुछ भी सोचे, मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। मैंने किसी को धोखा नहीं दिया।” तारा ने जवाब दिया।
“धोखा ही तो दिया है तुमने..... अगर ग्रीष्मा के सो-कॉल्ड भाई का एक्सीडेंट हुआ होता तो वह आकर मुझे बताती..... मैं खुद शादी रोककर उसे उससे मिलवाने के लिए लेकर जाता। लेकिन ऐसा तो तब होता ना, जब ग्रीष्मा का कोई भाई होता।”
तारा ने चिल्लाकर जवाब दिया, “अच्छी बात है..... तुमने शादी करने से पहले एक बार भी ग्रीष्मा के बारे में पता लगाने के बारे में नहीं सोचा। तुमने तो उससे यह भी नहीं पूछा होगा कि वह इस शादी से खुश है भी या नहीं।”
“रियली? तुम्हें मुझसे मिले सिर्फ़ तीन दिन हुए हैं। तुम कुछ नहीं जानती हो। किस बेसिस पर कह सकती हो कि मैंने ग्रीष्मा से पूछा नहीं?”
“हो सकता है पूछा होगा, लेकिन ग्रीष्मा ने मुझे नहीं बताया। अब पता नहीं आपकी उस झूठ की मूर्ति ने मुझसे क्या-क्या झूठ बोले होंगे।” तारा ने गुस्से में जवाब दिया। ग्रीष्मा की कही बातें सोचकर उसका खून खौल रहा था।
तारा के ग्रीष्मा को भला-बुरा कहने की वजह से ध्रुव गुस्सा हो गया। “माइंड योर लैंग्वेज..... एक तो तुमने मेरी होने वाली वाइफ़ को किडनैप करके उसे कहीं छुपा दिया है, ऊपर से सारा ब्लेम उस पर डाल रही हो।”
तारा बेड से उठी और ध्रुव के पास आकर बोली, “तुम अच्छे से जानते हो ध्रुव सिंघानिया, मैं झूठ नहीं बोल रही। तुम्हें अभी भी ग्रीष्मा के धोखे पर यकीन नहीं हो रहा..... इसलिए तुम मुझ पर उल्टे-सीधे इल्ज़ाम लगा रहे हो।”
“मैं ऐसा कुछ नहीं कर रहा। ग्रीष्मा मुझे धोखा दे ही नहीं सकती। कौन सच बोल रहा है कौन झूठ, इसका फ़ैसला तो कल सुबह पुलिस ही करेगी।”
ध्रुव के मुँह से पुलिस की बात सुनकर तारा घबरा गई। उसने सोचा, “हे भगवान..... अब क्या होगा। कहीं यह सच में पुलिस के पास चला गया तो मेरे पास अपनी सच्चाई साबित करने का कोई प्रूफ़ भी नहीं है। मेरी तो कोई फैमिली भी नहीं है, जो मुझे इन सब चक्करों से बाहर निकाल सकें।”
ध्रुव ने देखा तारा के चेहरे पर परेशानी के भाव थे। “क्या हुआ? पुलिस का नाम सुनकर घबरा गई? अभी भी टाइम है, जो भी सच है बता दो, वरना..... मुझे बताने की ज़रूरत नहीं होगी कि पुलिस किस तरह तुम जैसे क्रिमिनल से सच उगलवाती है।”
“मैं कोई क्रिमिनल नहीं हूँ। मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ। आप मेरी बात पर यकीन क्यों नहीं कर रहे?” तारा ने हल्की-भारी आवाज़ में कहा।
“मुझे यकीन दिलाने के अभी दो ही तरीके हैं..... या तो मुझे बता दो ग्रीष्मा कहाँ है या उसे यहाँ लेकर आओ। सच जो भी है वह खुद एक्सेप्ट करेगी, तभी मैं तुम्हारी बात पर यकीन कर लूँगा।” बोलते हुए ध्रुव ने घड़ी की तरफ़ देखा और कहा, “तुम्हारे पास एक्ज़ैक्टली तीन घंटे का टाइम है। सोच लो तुम्हें मेरे और ग्रीष्मा के घरवालों से क्या कहना है। और हाँ..... जब तक ग्रीष्मा आकर खुद तुम्हारी सच्चाई साबित नहीं करने देगी, तब तक मैं तुम्हें जाने नहीं दूँगा।”
अपनी बात कहकर ध्रुव बेड पर लेट गया। भले ही वह तारा के सामने स्ट्राँग होने का दिखावा कर रहा था, लेकिन ग्रीष्मा के वहाँ ना होने की वजह से वह काफ़ी परेशान था। उसकी आँखों में आँसू थे, जो सच सामने होते हुए भी ग्रीष्मा के बजाय तारा को क़सूरवार समझ रहे थे।
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