RUTHLESS MARTIAL SPIRIT EMPEROR - Chapter 12
RUTHLESS MARTIAL SPIRIT EMPERORजादुई भंडारण बहुत कीमती होते थे। अवध राज्य में, जहाँ रुद्र का परिवार रहता था, केवल राजा के पास ही ऐसी चीज़ थी। यहाँ तक कि उसके कबीले के मुखिया के पास भी यह नहीं था। और यह तो अंगूठी या बेल्ट नहीं, बल्कि हथेली में बना एक निशान था, जिसे कोई चुरा भी नहीं सकता था।
उसने अपना ध्यान उस भंडारण के अंदर डाला। वह करीब हज़ार वर्ग मीटर का एक बड़ा इलाका था, जो कीमती किताबों और आध्यात्मिक पत्थरों से भरा पड़ा था।
कमरे की दोबारा जाँच करने के बाद जब कुछ और नहीं मिला, तो रुद्र बाहर निकल आया।
गुफा से बाहर आकर वह फिर से चबूतरे पर पहुँचा, जहाँ नन्हा सफ़ेद भालू अब जाग चुका था।
रुद्र को देखते ही वह खुशी से चीखा और उसके चारों ओर गोल-गोल घूमने लगा।
रुद्र ने गौर किया कि सौभाग्य फल खाने के बाद वह नन्हा जीव पहले से काफी बड़ा हो गया था। उसकी आँखों में जामुनी चमक थी और उसके सफ़ेद बाल और भी चमकदार हो गए थे।
रुद्र ने भालू को उठाया और अपनी 'वज्र तलवार' का सहारा लेकर फिर से खड़ी चट्टान पर चढ़ने लगा। उसकी प्राण-ऊर्जा अब इतनी बढ़ चुकी थी कि ऊपर चढ़ना उसे बाएं हाथ का खेल लगा।
ऊपर पहुँचकर उसने भालू के सिर पर हाथ फेरा, "नन्हे दोस्त, अब मुझे वापस जाना होगा। जब भी समय मिलेगा, मैं तुमसे मिलने आऊँगा..."
रुद्र मुड़ने ही वाला था कि भालू ने फुर्ती से उसका रास्ता रोक लिया। उसने अपना पंजा फैलाकर रुद्र के कपड़े पकड़ लिए और अपना सिर ज़ोर-ज़ोर से ना में हिलाने लगा।
रुद्र ने हैरानी से पूछा, "क्या तुम मेरे साथ चलना चाहते हो?"
भालू ने बिना हिचकिचाए सिर हिलाया और खुशी से आवाज़ निकाली।
रुद्र कुछ पल रुका, फिर मुस्कुराया, "ठीक है, तो चलो साथ चलते हैं!"
रुद्र और वह भालू उस घाटी से बाहर निकल आए। हड्डियों के ढेर के पास से गुज़रते हुए रुद्र के भीतर फिर से वही खूनी ऊर्जा कुलबुलाई, लेकिन अगले ही पल वह शांत हो गया।
'स्वर्ण शिखर' के बाहरी इलाके में पहुँचकर रुद्र ने और साधना नहीं की, बल्कि सीधे अपने मठ की ओर चल दिया।
जैसे ही उसने 'स्वर्ण शिखर मठ' के द्वार में प्रवेश किया, उसकी मुलाक़ात एक परिचित चेहरे से हुई।
सामने नैना खड़ी थी।
नैना के चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी, जैसे वह काफी देर से उसी का इंतजार कर रही हो। जैसे ही उसने रुद्र को देखा, उसका चेहरा खिल उठा और वह दौड़कर उसके पास आ गई।
"रद्र, तुम कहाँ थे? मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ!"
नैना का चेहरा हल्का लाल हो गया था और उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में एक चमक थी। दौड़कर आने की वजह से उसकी साँसें थोड़ी तेज चल रही थीं। रुद्र उसे देखकर एक पल के लिए ठिठक गया। उसे महसूस हुआ कि यह लड़की अब बच्ची नहीं रही, बल्कि काफी बड़ी हो गई है।
"मैं पहाड़ी के पीछे साधना करने गया था। क्या हुआ? सब ठीक तो है?" रुद्र ने नरमी से पूछा, क्योंकि नैना का इतनी देर तक इंतजार करना उसके दिल को छू गया था।
"मैंने सुना कि तुम्हारी आत्मा-शक्ति जागृत हो गई है और तुमने कुणाल की धुलाई भी कर दी! तुम बहुत कमाल के हो..." नैना की आँखों में उत्साह था, लेकिन अगले ही पल उसका चेहरा फिर से गंभीर हो गया। "अरे हाँ रुद्र, वो नील कह रहा था कि वो तुम्हें देख लेगा। तुम्हें सावधान रहने की ज़रूरत है।"
यह सुनकर रुद्र के होठों पर एक हल्की मुस्कान आ गई। अगर पहले की बात होती तो शायद वह चिंतित होता, लेकिन अब 'राक्षस-अनंत विद्या' हासिल करने के बाद, देह-शुद्धि के सातवें स्तर पर मौजूद नील से निपटना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी।
"नील?" रुद्र ने सिर हिलाया और बेफिक्री से कहा, "वो इस लायक नहीं है।"
"अच्छा? बड़ी-बड़ी बातें!"
रुद्र की बात खत्म होते ही नैना के पीछे से एक तीखी आवाज़ आई। यह नील था, जो तेज़ कदमों से उनकी तरफ आ रहा था। उसके चेहरे पर मुर्दों जैसी शून्यता थी, लेकिन आँखों में नफरत और मज़ाक साफ दिखाई दे रहा था। उसने हँसते हुए कहा, "बच्चे, मैं तुम्हें सलाह देता हूँ कि नैना से दूर रहो, वरना इस बार बात सिर्फ़ हाथ-पैर तोड़ने तक सीमित नहीं रहेगी।"
नील, रुद्र और नैना के बीच आकर खड़ा हो गया और रुद्र की नाक की तरफ उंगली उठाते हुए बेहद घमंड से बोला।
"हाथ तोड़ने तक?" रुद्र ने नील के घमंडी चेहरे को देखते हुए पूछा।
"बिल्कुल। तो क्या हुआ अगर तुम्हारी आत्मा-शक्ति जाग गई? मेरे सामने तुम अभी भी कचरा ही हो। इसलिए जैसा मैं कह रहा हूँ, वैसा करो।"
"नील, तुम्हें रुद्र को परेशान करने का कोई हक़ नहीं है!" नैना तुरंत रुद्र के सामने आकर खड़ी हो गई और गुस्से से नील को घूरने लगी।
नील पहले तो चौंका, लेकिन फिर रुद्र की तरफ उसकी नज़रों में गुस्सा और बढ़ गया।
"रुद्र, क्या तुम अब औरतों के पीछे छिपोगे? अगर हिम्मत है तो सामने आओ और मुझसे एक-ब-एक मुकाबला करो!" नील ने नैना को धक्का देकर साइड किया और सीधे रुद्र पर चिल्लाया।
"ओह? एक-ब-एक मुकाबला?" रुद्र मुस्कुराया।
"ठीक है, मुझे तुम्हारी चुनौती मंज़ूर है। आज से सात दिन बाद, मठ की महा-प्रतियोगिता के दौरान, हमारा जीवन-मृत्यु का युद्ध होगा!" रुद्र ने ऐलान कर दिया।
"क्या?!"
सिर्फ़ नील ही नहीं, बल्कि नैना और वहाँ खड़े बाकी शिष्य भी सन्न रह गए।
"क्या यह पागल हो गया है? यह मठ के सबसे होनहार शिष्य के साथ जीवन-मृत्यु का युद्ध करेगा?"
"मुझे लगता है इसका दिमाग खराब हो गया है, इसे लग रहा है कि आत्मा-शक्ति मिलने से यह नील को हरा देगा।"
"हज़ारों शिष्यों में से कोई नील को चुनौती देने की हिम्मत नहीं करता। इसकी इतनी मजाल?"
भीड़ का शोर और मज़ाक बढ़ने लगा, लेकिन रुद्र उनकी बातों पर ध्यान दिए बिना मुड़ा और अपने छोटे से आँगन की तरफ चल दिया। इन लोगों की फिजूल बातों में वक्त बर्बाद करने से बेहतर था कि वह अपनी साधना पर ध्यान दे।
नील ने रुद्र को जाते हुए देखा, उसकी आँखों में कत्ल का इरादा चमक उठा। एक कचरा, जिसकी आत्मा-शक्ति अभी जागी है, उसे चुनौती देने की जुर्रत कर रहा है? यह एक अच्छा मौका था सबको यह दिखाने का कि स्वर्ण शिखर का असली बॉस कौन है।
अपने क्वार्टर में लौटकर रुद्र ने देखा कि उसका बड़ा भाई रणवीर वहाँ नहीं था। शायद वह बाहर गया होगा। रुद्र ने समय न गँवाते हुए साधना शुरू कर दी।
वह पालथी मारकर बैठ गया और 'राक्षस-अनंत विद्या' के पहले स्तर के मुताबिक ध्यान लगाने लगा। कुछ ही देर में उसके शरीर के भीतर मौजूद प्राण-ऊर्जा बदलने लगी। 'गुप्त नाग कला' की हल्की पीली प्राण-ऊर्जा अब धीरे-धीरे लाल रंग में बदलने लगी थी। यहाँ तक कि रुद्र के आसपास की हवा से जो ऊर्जा वह खींच रहा था, वह भी लाल हो गई।
उसकी श्वेत-बाघ आत्मा-शक्ति के मार्गदर्शन में यह ऊर्जा उसकी नसों में उतरने लगी।
जैसे ही उसके शरीर की सारी ऊर्जा 'राक्षस प्राण-ऊर्जा' में बदली, रुद्र का पूरा शरीर काँप उठा। उसे लगा जैसे वह उबलते हुए लावे में कूद गया हो। उसका शरीर भट्ठी की तरह तप रहा था और खून खौलने लगा था। रुद्र ने तुरंत अपने दिमाग को स्थिर किया और बहुत सावधानी से उस ऊर्जा को अपने शरीर में घुमाना शुरू किया।
यह 'राक्षस प्राण-ऊर्जा' उसके शरीर में बहुत तेज़ी से दौड़ रही थी। हर साँस के साथ उसका तापमान बढ़ रहा था। दाँत भींचकर वह लगातार साधना करता रहा। कई बार ऊर्जा को शरीर में घुमाने के बाद, वह शांत होकर उसके नाभि-चक्र में जमा होने लगी।
जैसे ही राक्षस प्राण-ऊर्जा ने पहली बार नाभि-चक्र में प्रवेश किया, रुद्र को अपने भीतर एक भयानक ताकत का अहसास हुआ। उसकी मांसपेशियाँ फड़कने लगीं और ऊर्जा बाहर की तरफ उफनने लगी। श्वेत-बाघ आत्मा-शक्ति ने ज़ोरदार दहाड़ लगाई और उसका शरीर लाल रोशनी से चमक उठा।
"देह-शुद्धि स्तर छह?!"
'राक्षस-अनंत विद्या' की पहली साधना के बाद ही वह देह-शुद्धि के पाँचवें स्तर से सीधे छठे स्तर की शुरुआत पर पहुँच गया था! यह परिणाम 'गुप्त नाग कला' से दस गुना बेहतर था।
रुद्र का मन खुशी से भर गया। यह राक्षस प्राण-ऊर्जा साधारण पीले स्तर की तकनीकों से कहीं ज़्यादा ताकतवर थी। हालाँकि उसे इस विद्या का सही स्तर नहीं पता था, लेकिन यह किसी भी साधारण विद्या से बहुत ऊपर थी।
मठ की दुनिया में, अगर तकनीक उच्च दर्जे की हो, तो एक कमज़ोर योद्धा भी अपने से ताकतवर दुश्मन को हरा सकता है। आत्मा-शक्ति हुनर तय करती है, लेकिन साधना की तकनीक ताकत तय करती है।
रुद्र ने दोबारा आँखें बंद कीं और साधना में लीन हो गया।
पूरी रात वह साधना करता रहा। शरीर में राक्षस प्राण-ऊर्जा आने के बाद उसकी तरक्की की रफ़्तार बहुत तेज़ हो गई थी। एक ही रात में वह देह-शुद्धि के छठे स्तर की शुरुआत से उसके मध्य तक पहुँच गया। ऐसी रफ़्तार किसी भी आचार्य को डराने के लिए काफी थी।
रात गहरी थी और आसमान तारों से भरा हुआ था। रुद्र अपने टूटे-फूटे बिस्तर पर बैठा था, उसके चारों तरफ हल्की लाल ऊर्जा की परतें थीं, जिसे उसका श्वेत-बाघ भूख मिटाने की तरह सोख रहा था। उसके शरीर के अंदर ऊर्जा समुद्र की लहरों की तरह टकरा रही थी। जैसे-जैसे वह अगले स्तर के करीब पहुँच रहा था, रुकावटें बढ़ रही थीं। अनजाने में ही उसने देह-शुद्धि के सातवें स्तर की सीमा को छू लिया था।
गहरी साँस छोड़कर रुद्र ने साधना रोकी और कमरे से बाहर निकल आया।
चाँदनी रात में हर तरफ सफेदी बिखरी थी। रुद्र ने एक छलांग लगाई और आँगन के बीच में खड़ा हो गया। उसके हाथ में उसकी वज्र तलवार थी और शरीर से एक खौफनाक आभा निकल रही थी। शरीर में राक्षस प्राण-ऊर्जा का एक चक्कर पूरा होते ही उसकी आँखें खून जैसी लाल हो गईं। उसकी मांसपेशियाँ फूलकर उसके कपड़ों को फाड़ने के लिए तैयार हो गईं। लाल हवा के झोंके उसे घेरने लगे।
'राक्षस-अनंत विद्या' के पहले स्तर से 'राक्षस देह' को जागृत किया जा सकता था। हालाँकि यह अभी शुरुआती चरण था, लेकिन जैसे-जैसे वह आगे बढ़ेगा, यह रूप और भयानक होता जाएगा।