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Chapter 1

Dangerous obsession of love - Chapter 1

Dangerous obsession of love

शाम के लगभग छह बज रहे थे। चंडीगढ़ शहर के आउटसाइड एरिया में एक बड़ा सा मेला था। वहां काफी भीड़ थी और लोग अपने एंजॉयमेंट में बिजी थे।

उस भीड़ में एक आदमी, जिसका कद साढ़े पांच फीट से भी कम था, उसने खुद के मुंह को कपड़े से कवर कर रखा था। वो हर दुकान पर जाकर समान टटोल रहा था।

इसी भीड़ में से एक लड़की जोर से चिल्लाकर बोली, “ओए अर्जुन, वो देख पानीपुरी... आई वांट देम...” बोलते हुए वो पानीपुरी के ठेले की तरफ जाने लगी। फिर वो अपने साथ वाले लड़के की तरफ मुड़ी। “कम अर्जुन..।” वो मुस्कुराकर बोली, जिससे उसके गालों पर हल्के डिंपल उभरे।

उसने ब्लैक जींस पर पिंक कलर का क्रॉप टॉप पहन रखा था। दौड़ते हुए उसके कमर से कुछ ही छोटे घुघराले बाल हवा में उड़ रहे थे। वो लगभग पांच फीट चार इंच लंबी थी। गोरा रंग, छोटी आंखे और मासूम सा चेहरा।

“ये लड़कियां पानी पुरी के ठेले को देखकर इतना पागल क्यों हो जाती है? ऐसे रिएक्ट कर रही है, जैसे जिंदगी में पहली बार पानीपुरी देखी है।” उसे दौड़ता देख अर्जुन ने मुंह बनाया। वो लगभग पांच फीट दस इंच की करीब की हाइट का था, जिसकी बॉडी फीट थी और क्लीन शेव्ड क्यूट चेहरा था। “आँशी.. आँशी रुक तो सही यार।” अर्जुन आवाज लगाते हुए उसके पीछे दौड़ने लगा।

आँशी दौड़ते हुए गोलगप्पे के ठेले के पास आ गई। “भैया, बिल्कुल तीखी वाली बनाना।” आँशी ने वहां जाते ही कहा।

“हां भैया.. इतनी मिर्ची डालना कि इसकी लाश ही यहां से ले जानी पड़े।” अर्जुन ने उसका मजाक बनाते हुए कहा, जिस पर आँशी उसे घूर कर देखने लगी।

“तुझे मेरे पानी पूरी खाने से जलन क्यों हो रही है? जलकुक्कड़ा कहीं का।” आँशी मुंह बना कर बोली।

“मैं तुम्हें यहां फेयर घुमाने के लिए लाया था, स्ट्रीट फूड खाने के लिए नहीं। तबियत खराब हुई तो बीजी की डांट पड़ेगी।।”

“बस कर यार अर्जुन... बीजी को मैं देख लूंगी। फेयर में घूमने आई हूं तो पानी पूरी भी खाऊंगी, पटियाला ड्रेस भी खरीदूंगी और वो बड़े वाला झूला भी झुलूंगी।” आँशी ने ड्रामेटिक अंदाज में कहा।

“जो करना है कर, लेकिन सात बजे से पहले हमें घर पहुंचना है।” अर्जुन बोला।

“हां तो...” आँशी ने लापरवाही से कहा, “अभी तो सिर्फ छह बज रहे हैं। घर भी चले जाएंगे। कौनसा यहां घर बसाने वाली हूं मैं।” कहकर आँशी वहां से दूसरी स्टॉल पर चली गई।

आँशी वहां पर घूमते हुए सामान खरीद रही थी, तभी उसकी नजर एक आदमी पर पड़ी। वो वही छोटे कद वाला आदमी था, जिसने अपना मुंह ब्लैक कलर के कपड़े से कवर कर रखा था। उसके पास एक बड़ा सा काला बैग था। आँशी ने नोटिस किया वो आदमी हर एक दुकान पर जाकर थोड़ा बहुत सामान बिखेर कर बिना कुछ लिए वापस जा रहा था।

उसे देखकर आँशी बड़बड़ा कर बोली, “चंडीगढ़ के मुंडे भी काफी तेज हो रहे हैं। उसे तो देखो, कब से समान इधर-उधर बिखेर कर विंडो शॉपिंग कर रहा है। कोई लड़की होती तो फिर भी देखती, लेकिन लड़के भी ऐसा करते हैं, आज पता चला।”

आँशी का ध्यान उस आदमी पर अटक गया। वो उसे नोटिस करने लगी और काफी देर तक करती रही। कुछ देर तक तो उसने कुछ नही कहा लेकिन उससे रहा नहीं गया। वो दौड़कर उस आदमी के पास गई।

“एक बात बताइए भाई साहब, आखिर आप खरीदना क्या चाहते हैं?” आँशी उससे बोली। “और ये शाम के टाइम आप अपना फेस कवर करके क्यों घूम रहे हो?”

उस आदमी ने कोई जवाब नही दिया। आँशी उस पर चिल्लाकर बोली, “क्या? कही तुम चोर तो नही, जो सब दुकानों पर थोड़ी थोड़ी देर तक रुककर उनका समान चुरा रहे हो?”

“तुम्हें उससे मतलब...” उसने आँशी को घूर कर देखा और जवाब दिया।

“अच्छा। उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, अब तुमसे तो यहां के लोग ही निपटेंगे।” आँशी ने उससे कहा और फिर जोर-जोर से शोर मचाने लगी। “अरे भाइयों, बहनों, अंकल, आंटीयों जल्दी से आओ। देखो, ये आदमी चोरी करके भाग रहा है।”

उसकी आवाज ने कई लोगों का ध्यान खींच लिया। लोग उस तरफ बढ़ने लगे। आँशी ने उसके मुंह का कपड़ा खींच लिया। उस आदमी ने जल्दी से आँशी को धक्का दिया और वहां से भागने लगा। भागदौड़ में उसका बैग नीचे गिर गया।

आँशी ने बैग की तरफ देखा। वो उसके पास गई और उसे खोला। बैग खोलते ही वो जोर से चिल्लाई, “ब...बॉम... ये एक बॉम्ब है। ये आदमी सब जगह बॉम्ब प्लांट कर रहा था।”

उसके चिल्लाने की आवाज सबको सुनाई दी और कुछ ही देर में वहां पर अफरा-तफरी मच गई। सब लोग बॉम्ब बॉम्ब चिल्लाते हुए वहां से बाहर भागने लगे।

अफरा-तफरी मचने की वजह से अर्जुन भी घबरा गया। वो इधर-उधर आँशी को ढूंढने लगा।

“ये आँशी की बच्ची जहां भी जाती हैं, हंगामा मचा देती हैं।” अर्जुन ने सिर पकड़ कर कहा।

वहां सभी लोग अपने अपनों को ढूंढने लगे और इस चक्कर में भगदड़ बढ़ गई। जल्दी से जल्दी लोग बाहर निकल रहे थे। उन सब के बीच एक सॉफ्ट टॉयज की छोटी सी दुकान के अंदर धमाका हुआ। उसके अंदर का सारा सामान एक झटके में बाहर आ गया। वहां आग लग चुकी थी। पर धमाका छोटा था।

इस धमाके ने वहां की भागदौड़ को और बढ़ा दिया। आँशी अभी भी बॉम्ब बॉम्ब चिल्लाते हुए लोगों की बाहर निकलने में मदद कर रही थी।

भीड़ से कुछ दूर दो आदमी खड़े थे। उनमें से एक के हाथ में एक ब्रीफकेस था और उसने ऑरेंज कलर का हेलमेट लगा रखा था। उसके पास वाले आदमी ने ब्लैक सूट पहना था और उसने चेहरे पर मास्क लगा हुआ था। परफेक्ट मस्क्यूकर बॉडी और लगभग छह फीट के करीब हाइट। उसकी गहरी काली आंखें आँशी को गुस्से में घूर रही थीं।

“अच्छा खासा अपना काम निपटा रहे थे, पर पता नहीं इस लड़की में कहां से बॉम्ब बॉम्ब चिल्लाकर सारे सीक्रेट मिशन का सत्यानाश कर दिया।” सूट वाले आदमी ने आँशी को चिल्लाते देखकर कहा।

“सर अब क्या करेंगे, इतनी अफरा-तफरी में बॉम्ब डिफ्यूज करना आसान काम नहीं होगा।” हेलमेट वाला आदमी बोला।

“जानता हूं। तभी बॉम्ब प्लांट होने की न्यूज़ सुनकर जगह खाली कराने के बजाय टीम ने चुपचाप बॉम्ब डिफ्यूज करने का आर्डर दिया था। पर इस लड़की ने सब बिगाड़ के रख लिया।” उस आदमी में सधे लहजे में कहा।

“अभी जो धमाका हुआ, वो छोटा था। लीड के हिसाब से यहां पांच से सात छोटे बॉम्ब, और एक बड़ा बॉम्ब प्लांट करने की साजिश है। यहां पर इतनी अफरा-तफरी नहीं होती, तो हम उसे आराम से ढूंढ सकते थे, लेकिन इतनी भीड़ में।” उस आदमी ने परेशान होकर कहा।

“तुम अपना काम करो। बाकी टीम मेंबर्स को भी चुपचाप अपना काम करने को कहो। मैं बॉम्ब ढूंढने की कोशिश करता हूं।” कहकर वो आदमी बॉम्ब ढूंढने के लिए चला गया।

सब लोग बाहर की तरफ जा रहे थे, मगर बॉम्ब ढूंढने वो आदमी अंदर जा रहा था। आँशी ने उस आदमी को अंदर जाते देखा। वो वही से जोर से चिल्लाई। “अरे ओ, सूट बुट वाले पढ़े लिखे अनपढ़ आदमी...पागल तो नहीं हो गए हो? अंदर बॉम्ब लगा है और तुम यहां पर बाहर जाने के बजाय अंदर जा रहे हो।”

उस आदमी ने गुस्से में आँशी की तरफ देखा। ‌“तुमसे तो मैं बाद में निपटुंगा चिल्लाने वाली लड़की.... सारा प्लान चौपट कर दिया और अब भी वहां पर खड़े होकर मुझे अंदर जाने से रोक रही हैं।” उसने अपने मन में कहा और आंशी की बात को अनसुना कर के अंदर चला गया।

टीम बॉम्ब डिफ्यूज करने के काम में लगी हुई थी। एक बॉम्ब धमाके के बाद में दूसरा छोटा धमाका और हुआ, लोगों में दहशत फैल चुकी थी। ‌

“आँशी की बच्ची।” अर्जुन आँशी को देखा तो वो दौड़ कर उसके पास आकर बोला, “क्या जरूरत थी यहां इतना हंगामा मचाने की? बेवजह लोग पेनिक हो गए, हमें पुलिस को बुलाना चाहिए था ना कि बॉम्ब बॉम्ब करके यहां पर शोर मचाना चाहिए था।”

“पुलिस को आने में टाइम लगता, वो जब तक आती तब तक लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी।” आँशी ने जवाब दिया।

“अच्छी बात है अब इन सब को छोड़ो और मेरे साथ बाहर चलो।” अर्जुन आँशी का हाथ पकड़कर उसे बाहर ले जाने लगा। तभी आँशी ने अपना हाथ छुड़ाया और कहा, “तुम जाओ, मैं अपना देख लूंगी। मैंने अभी-अभी एक आदमी को अंदर की तरफ जाते देखा। मुझे लगता है वो आदमी सुन नहीं सकता, तभी उसे यहां की भगदड़ के बारे में पता नहीं चला। बेचारा आदमी, मुझे उसके लिए बहुत बुरा लग रहा है अर्जुन।” आँशी ने मासूमियत से कहा।

“देखो आँशी, उसकी जान बचाने के चक्कर में तुम अपनी जान खतरे में नहीं डाल सकती। अब अपनी जिद छोड़ो और घर चलो।” अर्जुन ने जवाब दिया।

“मैं नहीं जाने वाली। मैंने उस आदमी को देखा था। वो ज्यादा दूर नहीं गया होगा। तू बाहर निकल कर गाड़ी स्टार्ट कर, मैं उसको लेकर आती हूं।” कहकर आँशी ने अपना हाथ छुड़ाया।

“लेकिन मैं तुझे छोड़कर...” अर्जुन बात खत्म कर पाता उससे पहले आँशी उसे वहीं छोड़कर अंदर की तरफ भागने लगी। ‌

“आँशी..” वो पीछे से जोर से चिल्लाया।

आँशी पीछे की तरफ मुड़ी और चिल्लाकर जवाब दिया, “डोंट वरी, मैं 5 मिनट में आ जाऊंगी। मेरे पीछे मत आना।”

अर्जुन दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया और आँशी का इंतजार करने लगा। आँशी अंदर जा रही थी। जाते वक्त हड़बड़ाहट में वो झूले के हैंडलर से टकरा गई और नीचे गिर गई।

उसने देखा कि वहां पर एक बड़ा सा बॉम्ब लगा हुआ था जिसमें 5 मिनट का टाइम शो हो रहा था। उसे देखकर वो जोर से चिल्लाई, “बॉम्ब... इसमें 5 मिनट का टाइमर लगा है। ये फटने वाला है।”

वो आदमी वही आस पास था और आँशी की आवाज सुनकर उसकी तरफ देखने लगा। उसका ध्यान नीचे गिरे हुए बॉम्ब की तरफ गया। फिर उसने इधर उधर देखा तो सब लोग बाहर जा चुके थे।

“पागल लड़की, जब दिखाई दे रहा है कि इसके अंदर 5 मिनट का टाइमर लगा है और ये फटने वाला है, तो इसके पास बैठकर क्या टाइम काउंट कर रही थी? “‌वो इरिटेट हो कर बोला।

उसने जल्दी से अपनी टीम मेंबर को वहां आने का मैसेज छोड़ा और दौड़ कर आँशी के पास गया।

तभी अचानक उस बॉम्ब से थोड़ी दूरी पर एक छोटा धमाका और हुआ।

“बॉम्ब फटने वाला है, मैं मरने वाली हूं।“ आँशी डर कर बेहोश हो गई। वो आदमी उसके पास आ चुका था।

“चलो अब तुम्हें भी बचाया जाए चिल्लाने वाली लड़की।“ उसने कहा और आँशी को अपनी गोद में उठा लिया।

टीम के मेंबर्स तब तक वहां पहुंच चुके थे और बॉम्ब डिफ्यूज करने के काम में लग गए थे। इन सबके बीच में वो आँशी को गोद में उठाकर बाहर ले जा रहा था।

टीम बॉम्ब डिफ्यूज कर चुकी थी। आँशी ने अपनी आंखें खोली तो उसने खुद को किसी की बाहों में पाया। वो ठीक से देख नहीं पा रही थी लेकिन उसे धुंधला सा उस आदमी का चेहरा दिखाई दिया। हल्का गोरा चेहरा, गहरी काली आंखें और चेहरे पर हल्की सुकून भरी मुस्कुराहट। आँशी ने यही उसकी एक धुंधली सी झलक देखी थी।

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