Dangerous obsession of love - Chapter 10
Dangerous obsession of loveआँशी की मेड शांति दीदी उसे तैयार करके फोटो सेशन के लिए ले जाने लगी। आँशी ने हल्के पीले और सफेद रंग का सूट पहन रखा था। शांति ने उसे अपने तरीके से तैयार किया था इसलिए उसे थोड़ी बहुत ज्वेलरी भी पहना दी थी।
“ये कितने कूल है ना?” आँशी अपने हाथ में पहनी चूड़ियां खनका कर बोली।
“देखना आँशी दीदी, आपको बहुत अच्छा लड़का मिलने वाला है। आपकी सच में बहुत खूबसूरत लग रही हैं। आपको मेरी नजर ना लग जाए इसलिए काला टीका लगा देती हूं।” शांति ने ड्रेसिंग टेबल से काजल उठाया और आँशी के कान के पीछे छोटा सा काला टीका लगा दिया।
“अच्छा फोटो सेशन के बाद क्या होगा शांति दीदी?” आँशी ने मासूमियत से पूछा।
“उसके बाद हम एक अच्छे से पंडित के पास जाएंगे। आप पढ़ी-लिखी है, तो हम मैरिज ब्यूरो भी चल लेंगे। वहां पर हम आपके फोटो और आपको किस तरह का लड़का पसंद है, उन सब की जानकारी लिखवाएंगे।” शांति ने जवाब दिया। वो भी बाहर जाने के लिए तैयार होने लगी।
”इन सब के लिए फोटो सेशन की क्या जरूरत है शांति दीदी। मैं अभी अपनी फोटो किसी मेट्रोमोनियल साइट पर डाल देती हूं। कोई ना कोई अप्लाई कर ही लेगा।“ आँशी मासूमियत से बोली।
“ना बाबा ना। आप विदेश में रही हुई हैं इसलिए यहां के लड़कों को जानती नहीं है, एक नंबर के फ्रॉड होते हैं। होते कुछ है और दिखाते कुछ है। हम पंडित जी के पास ही जाएंगे। उसके बाद पंडित जी आपकी तस्वीर 1–2 अच्छे घरों में दिखाएंगे और फिर वो लोग आपको देखने आएंगे। आपको पसंद करने के बाद सगाई होगी.... फिर शादी होगी।” शांति ने बताया।
“जब वो लोग मेरी फोटो देख चुके होंगे तो वापस देखने क्यों आएंगे?” आँशी के लिए सब कुछ नया था इसलिए वो बहुत सवाल पूछ रही थी।
“क्योंकि फोटो में तो अलग दिखते हैं ना। असलियत में भी तो देखना होता है।” शांति उसके सभी सवालों के जवाब दे रही थी।
“अच्छा इस प्रोसेस में कितने घंटे लगेंगे?” आँशी ने पूछा।
आँशी का सवाल सुनकर शांति जोर जोर से हंसने लगी। आँशी उसकी तरफ देख रही थी। उसे शांति के हंसने का मतलब नहीं समझ आ रहा था।
“सॉरी हां दीदी। ये आपका लंदन तो है नहीं, जो सुबह लड़का मिला और शाम को शादी करके आ गए। अरे इन सब में कम से कम 1 साल का टाइम तो लग ही जाता है।” बोलकर शांति फिर से हंसने लगी।
शांति के बताते ही आँशी ने आंखें बड़ी की और कहा, “1 साल? लेकिन मेरे पास इतना टाइम नहीं है। मैं कुछ नहीं जानती, शांति दीदी... मुझे 2 दिन में ही दूल्हा चाहिए। 2 दिन भी नहीं। अब तो मुझे एक दिन में दूल्हा चाहिए।”
शांति ने आँशी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और सिर पीटती हुई प्रीतो जी के पास गई।
“बिजी। बिजी कहां हो आप? ये आँशी दीदी सुबह-सुबह कैसी बहकी बहकी बातें कर रही है?” प्रीतो जी को ढूंढती हुई शांति उनके कमरे में आई।
“मुझसे क्या पूछ रही है शांति, ये तेरे ही फैलाए स्यापे हैं।” प्रीतो जी ने मुंह बनाकर कहा।
“अब इसमें मेरी क्या गलती है। मुझे लगा आँशी दीदी को शादी करनी होगी इसलिए मैंने उन्हें अच्छा लड़का ढूंढने की प्रक्रिया बता दी लेकिन उन्हें तो एक ही दिन में लड़का चाहिए।” शांति बोली।
“सही कहते हैं, खाली दिमाग शैतान का घर होता है। आँशी 2 महीने से यहां पर कुछ नहीं कर रही, इस वजह से उसके दिमाग में उलटे सीधे ख्याल आ रहे हैं।” प्रीतो जी ने जवाब दिया।
“दादी मुझे आँशी दीदी के लिए बहुत डर लग रहा है। कहीं उनके ऊपर किसी चुड़ैल का।” बोलते हुए शांति रुक गई। प्रीतो जी ने उसे घूर कर देखा और कहा, “उसका पता नहीं लेकिन तेरे ऊपर जरूर किसी चुड़ैल का साया लगता है। मैं कह रही हूं शांति, तू मेरी बच्ची से दूर रहा कर और उसे उल्टी-सीधी पट्टी ना पढ़ाया कर।“
“लेकिन मैंने क्या।” बोलते हुए शांति ने देखा कि प्रीतो जी उसकी तरफ घूर कर देख रही थी इसलिए उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी। “ठीक है, मैं चलती हूं। मुझे और जगह भी सफाई करनी है।”
शांति वहां से चली गई। उसके जाने के बाद प्रीतो जी ने पीछे से चिल्ला कर कहा, “सफाई तो तुझे तेरे दिमाग की भी करवा लेनी चाहिए। पता नहीं क्या उल्टी-सीधी बातें सोचती रहती है।”
शांति के जाने के बाद प्रीतो जी अपनी व्हीलचेयर आँशी के कमरे में लेकर गई। “शांति के दिमाग का तो पता नहीं लेकिन आँशी के दिमाग का जरूर कुछ करना होगा। पता नहीं बच्ची के मन में क्या चल रहा है और कुछ बता ही नहीं रही।”
वो आँशी के कमरे में आई तो उन्होंने देखा कि आँशी ने शांति दीदी पहनाई ज्वेलरी और मेकअप निकाल दिया था लेकिन अभी तक वो ड्रेस पहने बैठी थी।
“आँशी, तुझे कितनी बार कहा है कि शांति की बातें मत सुना कर।” प्रीतो जी अंदर आकर कहा।
“तो और क्या करूं दादी? यहां रुकने के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूं यहां तक की शादी भी। दादी आप समझ नही रही मुझे आपको छोड़कर लंदन नहीं जाना।” आँशी गिड़गिड़ा कर बोली।
“ठीक है, मैं कुछ सोचती हूं। लेकिन प्रॉमिस करो कि तू कुछ भी उल्टा सीधा नहीं करेंगी।” प्रीतो जी ने कहा।
आँशी ने हां में सिर हिलाया और प्रीतो जी के गले लग गई।
“आप दुनिया की सबसे बेस्ट दादी हो। अच्छा दादी मैं अर्जुन से मिलकर आऊं? मुझे उसे बताना है कि मैंने शादी करने का आईडिया ड्रॉप कर दिया है।” आँशी ने खुश होकर कहा। उसके स्वभाव में एक बचपना था।
“अब इतनी सी बात बताने के लिए तू इतनी दूर उसके ऑफिस जाएगी। ये बात तो तू उसे फोन करके भी तो बता सकती है?” प्रीतो जी ने सिर हिलाकर कहा।
“जो मजा आमने सामने बैठकर बात करने में आता है, वो फोन पर करने में कहा? दादी मैं जाऊं?” आँशी ने फिर पूछा।
प्रीतो जी ने मुस्कुराकर हामी भरी। आँशी उसी ड्रेस में अर्जुन के ऑफिस के लिए निकल पड़ी।
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सुबह ऑफिस जाने से पहले अमन ने अपनी टीम को मीटिंग के लिए अपने खरीदे हुए होटल में बुलाया था। उसे जस के किए हुए चेंज के बारे में पता नहीं था।
जैसे ही वो होटल के आगे पहुंचा और वहां का बदला हुआ रूप देखा तो बड़बड़ाकर कहा, “मैं कैसे भूल सकता हूं कि मैंने जस पर कोई बड़ी रिस्पांसिबिलिटी सौंपी है, तो यही होना था। इस लड़के का कुछ नहीं हो सकता।“
अमन आगे बढ़ा तो उसे सामने दीवार पर एक बड़ा सा होल्डिंग दिखाई दिया, जिस पर लिखा था कि यहां ₹100 में 6 घंटे के लिए रूम किराए पर दिए जाते हैं।
“एक और नया सरप्राइज। वैसे जस से और कुछ उम्मीद भी नहीं की जा सकती।“ सोचते हुए अमन ऊपर के कमरे में गया।
अंदर का नजारा देखकर वो फिर से हैरान था। मिस्टर गुप्ता लावण्या और जस तीनों कमरे में बैठे थे। लावण्या लैपटॉप पर कुछ काम कर रही थी जबकि जस और मिस्टर गुप्ता मजे से पिज़्ज़ा खा रहे थे।
“ये सच में बहुत टेस्टी है।” मिस्टर गुप्ता खाते हुए बोले। “मैं तो कहता हूं जस, तुम मेरे लिए भी ऐसा ही रूम अरेंज कर दो। दोनों यही से काम संभालेंगे।”
“ओ रियली मिस्टर गुप्ता?” अमन ने अपने गुस्से को दबाते हुए पूछा। “जस मैंने तुम्हें यहां रुकने की परमिशन दी थी ना कि यहां ये सब चेंजेज करने की?”
“लेकिन ब्रो।“ जस उसे एक्सप्लेनेशन देने लगा।
अमन ने उसकी बात काट कर कड़े शब्दों में कहा, “लेकिन वेकिन कुछ नहीं जस। मैंने ये होटल मीटिंग करने के लिए खरीदा है ना कि यहां बैठकर मस्ती करने के लिए। सबसे पहले तो तुम वो होल्डिंग हटाओगे।“
“थैंक गॉड अमन, तुम ने इसे कुछ तो कहा वरना।” लावण्या उसके फैसले से खुश हो गई।
तभी अमन ने लावण्या की भी बात बीच में काटी और कहा, “वरना क्या लवी? तुम कल यहां पर आई थी और तुमने एक बार मुझे बताना तक जरूरी नहीं समझा कि जस यहां पर क्या कर रहा है?”
“लेकिन ब्रो, आप ही तो चाहते थे कि चीजें नॉर्मल लगे। अब चंडीगढ़ में एंटर होते ही कोई होटल बंद रहेगा और उसमें लोग आते जाते रहेंगे तो लोगों को तो शक होगा ही ना। एंड डोंट वरी ब्रो मैं ये बिजनेस अच्छे से संभाल लूंगा। हमारा धंधा वैसे भी काफी अच्छा चल रहा है।” जस ने उसे समझाते हुए कहा।
“बेहतर होगा जस, तुम जिस काम के लिए आए हो वही करो। अगर तुम्हें बिजनेस करने का इतना ही शौक है तो ये जॉब छोड़ो और जाकर कोई बिजनेस खोल लो।“ अमन ने चिढ़कर कहा।
जस के होटल में किए गए परिवर्तनों को देखकर अमन बहुत नाराज हुआ। वो लगातार जस और लावण्या को डांटे जा रहा था।
“ठीक है तुम अपनी क्लास बाद में लगा लेना। पहले हम मिशन पर बात करते हैं।” मिस्टर गुप्ता ने उसे शांत कराने की कोशिश की।
अमन ने आगे कुछ नहीं कहा और वहां पर बैठ गया। वो सब लोग विधिक राणा के बारे में बात कर रहे थे।
“तुम्हारा प्लान काफी अच्छा है जस। मैंने अक्सर यही सुना है कि विधिक राणा लड़कियों से घिरा रहता है। इस बात से ये पता चलता है कि वो किस तरह का आदमी होगा।” अमन ने जस की तारीफ करते हुए कहा।
“हां प्लान काफी पुराना है लेकिन काम कर सकता है। मैंने बहुत बार सुना है कि सच्चे प्यार के आगे बड़े से बड़े लोग घुटने टेक देते हैं, तो विधिक राणा क्या चीज है।” मिस्टर गुप्ता ने कहा।
उनकी बात सुनकर अमन हल्का सा हंसा और सिर्फ जवाब में कहा, “सच्चा प्यार? दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं होती है मिस्टर गुप्ता, विधिक जैसा सेल्फिश आदमी तो इसे कभी नहीं समझ सकता। बेहतर होगा कि हम पॉसिबिलिटीज के बजाय लॉजिकली काम करें।”
मिस्टर गुप्ता ने उसकी बात पर हामी भरी। वहां पर काफी देर तक उन लोगों की मिशन को लेकर बातचीत चलती रही लेकिन इन सबके बीच लावण्या का ध्यान कहीं और ही लगा हुआ था।
“अभी-अभी अमन ने कहा कि सच्चे प्यार जैसी कोई चीज नहीं होती, तो फिर वो मेरे साथ क्यों है? क्या वो मुझसे प्यार नहीं करता। उसने कभी अपने मुंह से ये नहीं कहा।” लावण्या ने खोई हुई नजरों से अमन की तरफ देखा।
वो अभी भी मिशन से जुड़ी हुई ही बातें कर रहा था। लावण्या को उसकी बात चुभ रही थी। उसकी आंखें नम हो गई। वो वहां से उठते हुए बोली, “मुझे ठीक नहीं लग रहा। मुझे कुछ देर के लिए अकेला रहना है। मैं आर्टिस्टिक के ऑफिस जा रही हूं।”
“लेकिन लावण्या।” अमन ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन लावण्या ने उसकी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया और वहां से चली गई।
उसके इस तरह जाने से अमन भी परेशान हो गया। वो भी मीटिंग को बीच में छोड़कर उसके पीछे जाने लगा।
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