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Chapter 15

Dangerous obsession of love - Chapter 15

Dangerous obsession of love

आंशी ने चंडीगढ़ में रुकने के लिए जॉब करने का मन बनाया। उसने इंटरव्यू देने के लिए सबसे पहले आर्टिस्टिक्स के ऑफिस को चुना, जिसका मालिक अमन कपूर था।

सुबह-सुबह आंशी तैयार होकर आर्टिस्टिक के ऑफिस जाने के लिए निकल चुकी थी और कुछ ही देर बाद वो ऑफिस के आगे खड़ी थी।

“बिल्डिंग तो काफी ब्यूटीफुल है.... चलो अब अंदर जाकर पता किया जाए कि यहां मेरे लायक कोई काम है भी या नहीं....” आंशी ने खुद से कहा और बिल्डिंग के अंदर जाने लगी।

सामने रिसेप्शन पर एक लड़की मौजूद थी। वो उसके पास जाकर बोली, “एक्सक्यूज मी मैम.... मैं यहां इंटरव्यू के लिए आई थी।”

“लेकिन कंपनी की तरफ से कोई जॉब वेकेंसी नही डाली गई। जहां तक मुझे पता है, न्यूज पेपर वगैरह में या कंपनी की ऑफिशियल साइट पर कोई एड नहीं डाला गया।” रिसेपनिस्ट ने जवाब दिया।

“हां वो तो मैं जानती हूं लेकिन जरूरत इंसान से क्या नहीं करवा देती।” आंशी बड़बड़ा कर बोली।

रिसेपनिस्ट बोली, “लगता है मैम, आपको कोई गलतफहमी हो गई....या आपने कंपनी का नाम सही से नहीं पढ़ा होगा।”

“मुझे कोई गलतफहमी नहीं हुई है। आप अपने बॉस से बात करके देखिए।” आंशी ने आखिरी कोशिश की।

“ठीक है, मैं पूछ लेती हूं लेकिन कॉल करने का कोई फायदा नहीं है। हमारे यहां स्टाफ वेटिंग में रखे जाते हैं ताकि कोई बीच में छोड़कर भी जाए तो हमें प्रॉब्लम ना हो।” रिसेप्शनिस्ट ने आंशी की तसल्ली के लिए ऊपर कॉल लगाया।

फोन पर एक छोटी सी बातचीत करने के बाद उसने आंशी से कहा, “मैंने आपसे कहा था ना मैम, फिलहाल के लिए यहां पर कोई खाली जगह नहीं है। थैंक यू।”

“अच्छी बात है....” आंशी ने मुंह बनाया और वहां से जाने लगी। जाते वक्त हड़बड़ाहट में वो अमन से जा टकराई जो कि उस वक्त ऑफिस आया था।

जॉब ना मिल पाने की फ्रस्ट्रेशन में आंशी अमन पर चिल्लाई। “देख कर नहीं चल सकते तुम?”

“तुम यहां क्या कर रही हो?” अमन आंशी को देखते ही झट से पहचान गया।

“जॉब ढूंढने आई थी लेकिन यहां पर तो ये लोग वेटिंग में स्टाफ रखते हैं। अगर तुम भी जॉब ढूंढने के लिए आए हो तो कोई फायदा नहीं है।” आंशी ने उसे बताया

उसकी बात सुनकर अमन के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। “यहां पर जॉब अवेलेबल है। तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हें....”

अमन आंशी से बात कर रहा था कि तभी उसने उसकी बात बीच में काट कर कहा, “हां बोल तो ऐसे रहे हो जैसे तुम्हारी ही कंपनी हो।”

अमन को वहां देखकर वो रिसेप्शनिस्ट काउंटर से बाहर आई और कहा,“गुड मॉर्निंग सर। इन्हें कोई मिसअंडरस्टैंडिंग हो गई है। यहां पर इंटरव्यू देने के लिए आई थी जबकि हमारे यहां तो कोई वैकेंसी ही नहीं है।”

रिसेप्शनिस्ट के मुंह से सर सुनकर आंशी समझ चुकी थी कि अमन ही वहां का बॉस है। वो सकपकाते हुए बोली,“तो सच में तुम इस कंपनी के मालिक हो?”

अमन ने मुस्कुराकर उसकी बात पर हामी भरी और कहा, “चलो मेरे साथ आओ। लावण्या के जाने के बाद मुझे एक पर्सनल सेक्रेटरी की जरूरत थी। देखते हैं कि तुम इस जॉब के लायक हो या नहीं।”

अपनी बात कह कर अमन लिफ्ट की तरफ बढ़ा। उसके जाने के बाद आंशी ने रिसेप्शनिस्ट की तरफ देख कर कहा,“मैंने कहा था ना मेरे लिए यहां जॉब अवेलेबल होगी।”

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आंशी वहां से चली गई। उसके जाने के बाद रिसेप्शनिस्ट हैरानी से उन दोनों को देख रही थी। “लेकिन अमन सर को तो असिस्टेंट रखना पसंद ही नहीं है। फिर उन्होंने उस लड़की को हां क्यों की? उनका सारा काम तो लावण्या मैम संभालती है।”

“वैसे तो मुझे अब तुम्हारी जरूरत नहीं है चिल्लाने वाली लड़की लेकिन फिर भी इस वक्त तुम्हे जॉब पर रखकर मेरे लिए काफी फायदेमंद होगा। तुम्हारे जरिए मैं उस आदमी को पकड़ कर पूरे मास्टर प्लान को जान सकता हूं। तुम मेरे साथ काम करोगी तो कैसे भी करके मैं तुमसे उसके बारे में जान ही लूंगा।” अमन ने अपने मन में कहा।

आंशी भी उसके साथ लिस्ट में मौजूद थी। वो एकटक अमन की तरफ देखे जा रही थी।

“मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैंने इससे पहले भी इसे देखा है.... आई मीन इसकी आवाज.... इसकी आवाज जानी पहचानी सी है।” आंशी ने सोचा।

लिफ्ट बिल्डिंग के 5th फ्लोर पर आकर रुकी, जहां अमन का केबिन था। उसने इशारे से आंशी को अपने पीछे आने को कहा।

आंशी उसके पीछे पीछे चलते हुए आसपास देख रही थी। उसने देखा बाकी का स्टाफ तन्मयता से अपने काम में लगा हुआ था।

“यहां सब कितने डेडिकेटेड होकर काम कर रहे हैं जबकि अर्जुन के ऑफिस में काम कम और गप्पे ज्यादा लड़ा रहे थे।” आंशी ने धीमी आवाज में कहा।

अमन आंशी के साथ अपने केबिन में था। अपनी चेयर पर बैठने के बाद उसने आंशी को सामने बैठने का इशारा किया।

“जैसा कि रिसेप्शनिस्ट ने तुम्हें बताया था कि हमारे यहां पर स्टाफ वेटिंग में रहते है। मेरा सारा काम मिस बजाज मेंटेन करती है लेकिन कुछ दिनों की छुट्टी पर होने की वजह से आप उनका काम करेंगी।” अमन ने आते ही कहा।

“और जब आपकी मिस बजाज वापस आ जाएगी, तो फिर मेरा क्या होगा?” आंशी ने आंखें बड़ी करके पूछा।

“तब आप मिस बजाज की असिस्टेंट के तौर पर काम करेंगी। लेकिन तभी, जब आप इस जॉब के लायक होंगी.... आपका रिज्यूमे कहां है?” अमन ने कहा।

अमन के कहते ही आंशी ने अपने बैग से रिज्यूमे निकाल कर उसकी तरफ बढ़ाया। वो उसका रिज्यूमे पढ़कर बोला,”आपकी स्टडीज लंदन यूनिवर्सिटी से हुई है?”

आंशी ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाया।

“आपकी एमबीए की स्टडी बीच में छोड़ने का कारण जान सकता हूं?” अमन ने हैरानी से पूछा।

“मैं आपको बताना जरूरी नहीं समझती। मैं इस जॉब के लिए इलेजिबल हूं या नहीं?” आंशी ने काफी रुखे तरीके से जवाब दिया।

“ये एक मामूली असिस्टेंट की जॉब है और तुम्हारी क्वालिफिकेशन हाई है। सब कुछ जानने के बाद भी तुम ये जॉब करना चाहोगी?” अमन ने एक बार फिर पूछा।

“हां क्योंकि मुझे इस जॉब की बहुत ज्यादा जरूरत है।” आंशी ने लाचारी से कहा।

अमन ने आंशी की तरफ देखा, जिसने एक ब्रांडेड ड्रेस पहनी थी। उसकी स्टडी भी लंदन से कंप्लीट हुई थी।

“तुम्हें देखकर लगता नहीं कि तुम्हें पैसों की कमी होगी। फिर इस जॉब की तुम्हें क्या जरूरत हो सकती है?” अमन ने उसे घूरते हुए पूछा।

“जरूरी नहीं हर काम पैसों के लिए किया जाए। कुछ काम खुद को प्रूफ करने के लिए और खुद की सेल्फ रिस्पेक्ट मेंटेन करने के लिए भी किए जाते हैं।” आंशी ने पूरे कॉन्फिडेंस से जवाब दिया।

“ठीक है.... तुम्हारी जॉब फाइनल लेकिन एक बार फिर सोच लो, अगर तुम स्टडी करने के लिए वापस जानना चाहोगी तो ये पॉसिबल नहीं होगा। हम हर इंप्लाइज के साथ 1 साल का कॉन्ट्रैक्ट करते हैं। हम चाहे तो उसे निकाल सकते हैं लेकिन वो अपनी मर्जी से जॉब छोड़कर नहीं जा सकता।” अमन ने सारी बात सीधे उसे बता दी थी।

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उसकी बात सुनकर आंशी के चेहरे पर चमक आ गई। उसने हड़बड़ाहट में कहा, “बस मुझे इसी पल का बेसब्री से इंतजार था।”

“व्हाट?” अमन ने हैरानी से कहा।

आंशी ने जल्दी से कहा, “कुछ नहीं.... मैं क्या कह रही थी 1 साल का टाइम बहुत कम होता है। क्यों ना हम कॉन्ट्रैक्ट का टाइम पीरियड बढ़ाकर इसे 5 साल का कर देते हैं?”

आंशी के कहते ही अमन ख़ांसने लगा। “एक बार फिर सोच लीजिए मिस जिंदल.... ये जॉब है कोई एफडी नहीं जो आप 5 साल के लिए फिक्स करना चाहती हैं।”

“ठीक है 5 साल रहने देते हैं.... 2 साल?” आंशी ने झट से कहा।

“आपका बैकग्राउंड तो क्लियर है ना? कही कोई क्राइम हिस्ट्री....“ जैसे ही अमन ने कहा, आंशी गुस्से में उस पर बिफर पड़ी,“मतलब क्या है तुम्हारे कहने का? मैं क्या तुम्हें कोई चोर डाकू नजर आती हूं, जो मेरे बैकग्राउंड के बारे में पूछ रहे हो?”

“ओके.... मैं तो बस पूछ रहा था। सबके साथ 1 साल का कॉन्ट्रैक्ट होता है और आपके साथ भी 1 साल का ही होगा। आप अपनी डिटेल्स बाहर सबमिट करवा दीजिए.... 2 दिन बाद आपको कॉन्ट्रैक्ट मिल जाएगा” अमन ने शांति से कहा।

आंशी ने बच्चो सा मुंह बनाकर कहा, “क्या? 2 दिन बाद.... लेकिन मुझे तो अभी चाहिए था।”

“अब तो मुझे आप पर और भी डाउट हो रहा है।” अमन ने उसे शक भरी नजरों से देखा।

“न.....नहीं, वो मैं जल्दी से ये जॉब ज्वाइन करना चाहती थी। बस तभी कह रही थी।” आंशी ने जैसे-तैसे बात को संभाला।

“आप चाहे तो आज से ज्वाइन कर सकती हैं लेकिन कॉन्ट्रैक्ट 2 दिन बाद ही बनेगा। जाइए बाहर जाकर मिस्टर सिंह से मिल लीजिए, वो आपको आपका काम समझा देंगे।” अमन बोला।

अमन ने आंशी को सारी बात बता दी। आंशी बार-बार उसके आंखों की तरफ देख रही थी। उसने आंख बंद करके सोचना चाहा तो उसकी आंखों के सामने अमन का धुंधला चेहरा घूमने लगा। फिर उसने आंखें खोल कर अमन की तरफ गौर से देखा। उसे अमन की आंखें देख कर उस इंसान की याद आई, जिसने उसकी जान बचाई थी।

“मुझे इसकी आवाज भी सुनी हुई सी लग रही है और इसकी आंखें.... इसकी आंखें भी उसी तरह की लग रही है जैसी उस आदमी की थी, जिसने मेरी जान बचाई थी। कहीं ये वही तो नहीं....” आंशी अपने ख्यालों में खोई हुई एकटक अमन की आंखों की तरफ देख रही थी।

अमन बार बार आंशी का नाम ले रहा था जबकि वो किसी और ही दुनिया में खोई हुई थी। अमन ने अपने पास रखें पानी का गिलास उठाया और उठकर उसका आधा पानी वहां रखे प्लांट में डाल दिया।

वो वापस आंशी के पास आया और बचा हुआ आधा पानी उसके मुंह पर डाला, जैसे ही पानी आंशी के मुंह पर गिरा, वो एक झटके में खड़ी हो गई।

“ये क्या बदतमीजी है?” आंशी चिल्ला कर बोली।

“तुम क्या कभी भी नॉर्मली बिना चिल्लाए बात नहीं कर सकती चिल्लाने वाली लड़की....” अमन ने इरिटेट हो कर कहा।

“क्या कहां तुमने? चिल्लाने वाली लड़की? अब तो मुझे पक्का यकीन हो गया तुम वही हो।” बोलते हुए आंशी अमन के पास आई और उसे दोनों बाजुओं से पकड़कर उसकी आंखों में गौर से देखने लगी।

उसके ऐसा करने पर अमन और इरिटेट हो गया और उसे खुद से दूर किया।”पागल हो गई हो? ये क्या बकवास कर रही हो और कौन हूं मैं?”

“तुम..... तुम वही हो। तुम एक स्पाई हो ना? एक सीक्रेट एजेंट...” आंशी बोली।

आंशी की बातें सुनकर अमन हैरान हो गया। आंशी के सामने उसका पूरा सच था, जिसे वो आज तक लोगों से छुपाए हुए था।

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