Dangerous obsession of love - Chapter 4
Dangerous obsession of loveअमन ने शहर से कुछ दूर एक छोटा सा होटल देखकर उसे तुरंत खरीद लिया था। उसने अपने टीम मेंबर्स को वहां पर मीटिंग के लिए बुलाया।
रात के लगभग 2:00 बज रहे थे। अमन की टीम से लावण्या और दो आदमी होटल पहुंचे। उन्हें मीटिंग के लिए ऊपर बने कमरे में आने के लिए कहा गया था वो लोग आते ही सीधा वहां जाने लगे।
उनका इंतजार करते हुए अमन अपने टेबलेट में घर की फुटेज देख रहा था। “पता नहीं कब तक आएंगे वो लोग। कहीं मॉम नींद से जाग ना जाए।” उसने खुद से कहा।
तभी लावण्या ने बाहर से दरवाजा खटखटाया।
“लगता है वो लोग आ गए हैं।” कहकर अमन बेड से उठा और दरवाजा खोलने गया।
“आने में काफी टाइम लगा दिया।” उसने उन लोगों से कहा।
“हां ये जगह शहर से काफी दूर है। आगे कभी ऐसे अर्जेंट मीटिंग रखनी हो तो शहर में ही किसी जगह को देखना।” उनमें से एक आदमी बोला।
“मिस्टर गुप्ता सही कह रहे हैं।” लावण्या ने उसकी बात पर हामी भरी। “ये जगह शहर से दूर होने के साथ-साथ काफी सस्ती भी है।”
“सच कहूं तो मुझे ये जगह अच्छी लगी और काफी इंटरेस्टिंग भी।” दूसरे लड़के ने मुस्कुराते हुए इधर उधर देख कर बोला।
“तब तो तुम्हें खुश हो जाना चाहिए जस, मैंने इस होटल को खरीद लिया है और आगे से हम यहीं पर मीटिंग करेंगे।” जैसे ही अमन ने कहा वो तीनों आंखें फाड़ कर उसकी तरफ देखने लगे।
“आर यू सीरियस?” लावण्या ने हैरानी से कहा , “जस्ट टू हैंडल सम प्राइवेट मीटिंग्स, यू कैन नॉट बाय ए होटल।”
“यस आई कैन।” अमन ने जवाब दिया।
“लेकिन हम गवर्नमेंट के लिए काम करते हैं और तुम्हें इस तरह अपनी प्राइवेट प्रॉपर्टी को इन सब कामों में खर्च करने की कोई जरूरत नहीं है। सीक्रेट मीटिंग रखने के लिए गवर्नमेंट ने ऑलरेडी हमारे लिए काफी जगहों का इंतजाम कर रखा है।” मिस्टर गुप्ता बोले।
जहां लावण्या और मिस्टर गुप्ता अमन के होटल खरीदने पर नाराजगी जता रहे थे वही जस मुस्कुराते हुए कमरे को गौर से देख रहा था।
“आई लाइक योर एटीट्यूड ब्रो।” जस ने कहा। वो उनकी टीम में नया था और उम्र में उन से कम था और मिस्टर गुप्ता सबसे बड़े। वो लगभग 45 साल के थे।
जहां बाकी सब सूट-बूट पहन कर अच्छे से तैयार हो रखे थे वही जस ने डेनिम कैप्री के ऊपर लूज सा टी-शर्ट पहन रखा था और सर पर कैप लगा रखा था।
“पता नहीं इसे टीम में किस ने ले लिया? तुम्हें देखकर लगता नहीं कि तुम अपने काम को लेकर सीरियस हो तुम्हें ये सब छोड़कर किसी फुटबॉल टीम में ही भर्ती हो जाना चाहिए। लुक एट योर ड्रेसिंग सेंस....” लावण्या ने उसकी तरफ देख कर मुंह बनाया।
“तुम लोग आपस में बहस करना बंद करो। लावण्या तुम अच्छे से जानती हो कि जस कितना टैलेंटेड है। एंड मिस्टर गुप्ता रही बात होटल खरीदने की तो मैं अच्छे से जानता हूं कि इसे अपने हिसाब से कैसे यूज करना है। इससे पहले कि मेरी मॉम नींद से जागे हमें मीटिंग खत्म कर लेनी चाहिए।” अमन ने उन्हें डांट कर बोला।
सभी चुप हो गए और वहां पर बैठ गए। सबके चेहरे के भाव गंभीर थे।
“मुझे आप लोगों को बताने की जरूरत नहीं होगी कि ये मीटिंग किस लिए बुलाई गई है। आज एक लड़की की वजह से हमारे हाथ आया क्रिमिनल भाग गया।” अमन ने कहा।
“डोंट वरी एके हम फिर भी उसे पकड़ लेंगे।” लावण्या ने अमन के हाथ पर हाथ रख कर कहा।
उसके ऐसा करने पर अमन ने उसे घूर कर देखा और अपना हाथ उसके हाथ से दूर करके आगे कहा, “हम में से किसी ने भी उस आदमी को नहीं देखा। वो लोग कुछ बड़ा करने की फिराक में है। ऐसे में उस आदमी का पकड़ा जाना बहुत जरूरी है।”
“क्या उस लड़की ने उस आदमी का चेहरा देखा था जो वहां पर बॉम्ब प्लांट कर रहा था?” मिस्टर गुप्ता ने पूछा।
“कुछ कह नहीं सकते... अगर उसने उसका चेहरा देखा भी है तो हम उसे जाकर ये नहीं कह सकते ना कि हम लोग कौन हैं, ना हीं उससे इस बारे में कुछ पूछ सकते हैं।”
जस उन सब लोगों की बातें गौर से सुन रहा था। “मैं उस लड़की से बात करने की कोशिश कर सकता हूं। आप लोगों को देखकर फिर भी उसे शक हो जाएगा लेकिन मुझे देखकर नहीं होगा।”
“चलो तुमने माना तो सही कि तुम हम में से एक नहीं लगते हो।” लावण्या ने उसका मजाक उड़ाया।
जस ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। उसने उसे पूरी तरह इग्नोर करते हुए अमन से पूछा, “ब्रो क्या आपको उस लड़की का नाम या आईडेंटिटी कुछ पता है?”
“नहीं...लेकिन उस लड़की को कभी नहीं भूल सकता। इतना तो श्योर हूं कि वो जहां भी होगी, उसके आसपास काफी शोर और भीड़ इकट्ठा होगी।” अमन ने उन्हें आँशी के बारे में बताया।
“क्यों? वो लड़की क्या कोई सेलिब्रिटी है?” मिस्टर गुप्ता ने पूछा।
“सेलिब्रिटी तो नहीं है लेकिन चिल्ला चिल्ला कर अपने आसपास में जरूर इकट्ठा कर लेती हैं। उस लड़की को छोड़िए, हमें हाई कमान को मिशन के फेल होने की अपडेट देनी होगी” अमन ने निराश होकर कहा।
“और अगर ऐसा हुआ तो इस मिशन को हमारे हाथ से छीन कर किसी और को दे दिया जाएगा। एक मामूली सी लड़की हमारे करियर का इतना इंपॉर्टेंट केस हमसे छीन कर ले गई। क्या अब कुछ नहीं हो सकता?” लावण्या ने पूछा।
“मैं भी नहीं चाहता कि ये केस किसी और को दिया जाए हम पिछले 6 महीने से इस पर मेहनत कर रहे हैं। बट एट द सेम टाइम आज नहीं तो 2 दिन बाद उनके पास न्यूज़ पहुंच ही जाएगी।” अमन बोला। वो इस मिशन के फेल होने से काफी परेशान था।
“अगर हम उस लड़की को जैसे तैसे ढूंढ कर उससे उस आदमी के बारे में पूछने की कोशिश करें और उसे पकड़ ले तो शायद बात बन सकती हैं।” जस ने आईडिया दिया।
“मैं जस की बात से सहमत हूं।” मिस्टर गुप्ता ने जस की बात पर सहमति जताते हुए कहा, “हमें उस लड़की को ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए तब तक ये न्यूज़ कॉन्फिडेंशियल रखते हैं शायद कोई करिश्मा हो जाए और वो लड़की हमें मिल जाए।”
उनकी बात सुनकर अमन हल्का सा हंसा और फिर जवाब दिया, “मिस्टर गुप्ता। ये लाइफ है, एक रियल लाइफ, कोई टीवी सीरियल या ड्रामा नहीं, जहां करिश्मे होते हो।”
“करिश्मा नहीं होते तो क्या हुआ कोशिशें तो होती है ना... तुम 2 दिन बाद मिशन से जुड़े अपडेट दे देना तब तक हम उस लड़की को ढूंढने की पूरी कोशिश करेंगे।” लावण्या ने उसकी पीठ पर हाथ रखा
अमन ने उसके बारे में थोड़ा सोचा और फिर उनकी बात पर सहमति जताई। “ठीक है। लेकिन 2 दिन से ज्यादा मैं नहीं रुक पाऊंगा।”
“थैंक्स ब्रो। एंड डोंट वरी उस लड़की के बारे में मैं पता लगा कर रहूंगा।” जस ने एक्साइटेड होकर कहा।
सब ने उसकी बात पर हामी भरी। वो लोग मिशन से जुड़ी बाकी की हल्की फुल्की बातें कर रहे थे जबकि लावण्या अपने मन में कुछ और ही सोच रही थी।
“मिलना तो तुमसे मैं भी चाहती हूं, आखिर तुम कौन हो जिसने एक झटके में हम सब की मेहनत को बर्बाद कर दिया। ट्रस्ट मी इसके लिए तुम्हें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। ये लोग भले ही तुम्हें कुछ ना कहें लेकिन मैं। मैं तुम्हें इसके लिए कभी माफ नहीं करूंगी।” लावण्या ने बड़बड़ाकर कहा।
बातचीत पूरी होने के बाद वो मीटिंग वही खत्म हो गई।
“अच्छा ठीक है चलते हैं अब। एंड रिमेंबर वन थिंग हमारे पास सिर्फ दो ही दिन का टाइम है।” अमन ने उन सब को एक बार फिर याद दिलाया।
पूरी बात फाइनल होने के बाद सब वहां से जाने को हुए। सब सीढ़ियां से उतर कर नीचे आ चुके थे और अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ रहे थे लेकिन जस अभी भी होटल के कंपाउंड में खड़ा उसे देख रहा था।
“ब्रो। जब आपने इस होटल को खरीद ही लिया है तो इफ यू डोंट माइंड अगर मैं यहां कुछ दिन रुक सकूं तो।” जस ने अंदर से चिल्लाकर पूछा।
“ओके। बट बी केयरफुल, तुम और ये होटल दोनों ही किसी की नजरों में नहीं आने चाहिए। सब कुछ नॉर्मल लगना चाहिए।” अमन ने उसे रुकने की इजाजत दे दी थी।
“मैंने कहा ना डोंट वरी ब्रो यहां सब कुछ नॉर्मल ही रहेगा... बिल्कुल नॉर्मल।” जस ने जवाब दिया।
“जब भी ये डोंट वरी बोलता है तो मुझे और ज्यादा टेंशन होने लगती है।” अमन ने धीरे से कहा।
“वैसे जस, आखिर तुम्हें अपने रहने लायक जगह मिल ही गई।” लावण्या ने जस को आवाज लगाकर बोला। जवाब में उसने उसकी तरफ़ मुंह बनाया।
सब कुछ सेट हो जाने के बाद वो लोग वहां से अपने अपने घर को निकल गए थे। जस अभी तक वहीं पर रुका था।
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सुबह के 9:00 बज रहे थे। आँशी के घर पर उसकी मेड शांति सफाई का काम निपटा कर ब्रेकफास्ट बना चुकी थी। घर के बाकी के काम भी निपट चुके थे।
वापस आने से पहले शांति उसकी दादी प्रीतो के पास आई और बोली, “बीजी, सुबह के 9:00 बज रहे हैं अभी तक आप की पोती उठी नहीं है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो आगे जाकर ससुराल में क्या करेगी।”
“हाय कुड़िए, तू उसके ससुराल और ससुराल वालों की टेंशन क्यों लेती है? और हम अपनी आँशी के लिए ऐसा मुंडा क्यों ढूंढेंगे जो उसे चैन से सोने तक नहीं देगा।” प्रीतो जी ने लापरवाही से जवाब दिया।
“मैंने तो अपना काम खत्म कर दिया है अब आप जानो और आप की पोती। नाश्ते में परांठे बनाए हैं, दोपहर को खाना बनाने के वक्त आ जाऊंगी।” कहकर शांति मुह बनाते हुए वहां से निकल गई।
उसके जाने के बाद प्रीतो जी ने अपनी व्हीलचेयर आँशी के कमरे के अंदर ली वो अब तक लापरवाही से सो रही थी।
“आँशी। उठ जा बेटा अभी अभी शांति कह कर गई है कि इतना लेट उठेगी तो ससुराल में क्या करेगी? चल बेटा उठ।” वो आँशी को उसके बेड के पास आकर जगाने लगी।
“सोने दीजिए ना दादी और आप भी कहां शांति की बातों पर ध्यान दे रही है। भले ही उसका नाम शांति हो पर सब जानते हैं कि वो कितनी अशांति फैलाती रहती है।” आँशी ने उनींदी आवाज में कहा।
“शांति को छोड़ लेकिन खुद पर तो थोड़ा ध्यान दो। तुम्हें यहां आए 2 महीने हो गए लेकिन अभी भी तुमने वापस जाने के बारे में कुछ सोचा नहीं है।” प्रीतो जी ने प्यार से कहा।
दादी के मुंह से वापस जाने की बात सुनकर आँशी उठी। उसके चेहरे पर उदासी के भाव थे।
“मैं जानती हूं तुम वापस नहीं जाना चाहती लेकिन।” बोलते हुए प्रीतो जी रुक गई।
“लेकिन क्या दादी? जब आप तो सब जानते हो तो फिर। मुझे नहीं पता मैं वापस नहीं जाना चाहती।” आँशी ने जवाब दिया उसके चेहरे पर उदासी के साथ-साथ डर के भाव थे, जिससे प्रीतो जी अभी तक अनजान थी। आँशी उठकर बाथरूम में चली गई, ताकि प्रीतो जी उसके चेहरे के भावों को नोटिस ना कर सके।
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