Dangerous obsession of love - Chapter 24
Dangerous obsession of loveआंशी अमन के ऑफिस में थी और उसे दिव्याना से शादी ना करने के लिए समझा रही थी। उसी वक्त चेतना जी वहां आई और उन्होंने आंशी की कुछ बातें सुन ली। उन्हें लगा आंशी लावण्या के बारे में बात कर रही है।
“चलो कोई तो समझदार मिला जो इसे समझाएं। मैं तो इसे एक ही बात बार-बार बता कर थक गई हूं कि इसका उस लड़की के साथ कोई मैच नहीं है।” बोलते हुए चेतना जी अंदर आई और अमन के सामने लगी चेयर पर बैठ गई।
“आंशी जाओ, जाकर अपना काम करो।” अमन ने आंशी की तरफ देख कर कहा।
चेतना जी ने भी एक नजर आंशी की तरफ देखा। “इसे बाहर क्यों भेज रहे हो? मुझे इससे कुछ जरूरी बात करनी है।”
“कम ऑन मॉम..... आपको इससे मिले अभी 1 मिनट भी नहीं हुआ और आपको इससे जरूरी बात करनी है? अमन ने आईज रोल करके कहा। फिर उसने आंशी से कहा, “आंशी ये कुछ फाइल्स है, इन्हें मिस्टर सिंह को दे आओ।”
आंशी ने अमन की बात पर हामी भरी और फाइल्स उठाने लगी।
“मैंने कहा ना ये कहीं नहीं जाएगी मुझे इससे कुछ बात करनी है।” चेतना जी ने कहा। “हां तो आंशी..... जब मैं अंदर आई तो मैंने तुम्हारी बातें सुन ली थी। मैं तुम्हारी बातों से पूरी तरह से सहमत हूं। मेरी तो ये एक नहीं सुनता, अब तुम ही इसे समझाओ कि वो लड़की..... पता नहीं क्या सोचकर इसने उसे पसंद किया है।”
आंशी ने फाइल्स वापस अमन की टेबल पर रख दी और चेतना जी के पास आकर खड़ी हो गई। “हां मैम, आप बिल्कुल ठीक कह रही हैं। मुझे भी वो लड़की सर के हिसाब से अच्छी नहीं लगी।”
“उसे तो बोलने तक का सलीका भी नहीं है और ड्रेसिंग सेंस का तो क्या ही कहूं।” चेतना जी हाथ हिलाकर बोली।
“मैं भी आपकी बात से पूरी तरह एग्री करती हूं मैम, ऑफिस में ऐसे कपड़े पहन कर कौन आता है? अब आप मेरे कपड़ों को देखिए..... इन में कोई खराबी है?” आंशी ने पूछा।
“नहीं, कोई खराबी नहीं है। तुम इन कपड़ों में बहुत क्यूट लग रही हो।” चेतना जी मुस्कुरा कर कहा।
चेतना जी का जवाब सुनकर आंशी ने अमन की तरफ देखा और कहा, “देखा आपने..... इन कपड़ों में कोई खराबी नहीं है। फिर पता नहीं कुछ लोगों को समझ नहीं आता कि फैशन क्या होता है?”
“अरे इसका छोड़ो तुम..... इसे ना तो फैशन का पता है, ना ही इंसानों की पहचान है। खुद तो एक जैसे कपड़े पहनता रहता है और दोस्तों के नाम पर सिर्फ एक वही लड़की है। अब तो उससे शादी करने की भी जिद पकड़ रखी है। पता नहीं मेरी उसके साथ कैसे बनेगी। एक बहू को लेकर मेरी बहुत एक्सपेक्टशंस थी लेकिन अब उन सब पर इसने पानी फेर दिया है।” चेतना जी ने अमन की तरफ देख कर मुंह बनाया।
चेतना जी और आंशी लगातार बातें किए जा रही थी। वो अमन के सामने उसी की बुराइयां कर रही थी। उन दोनों की बातें सुनकर अमन ने अपना सिर पकड़ लिया।
“आंटी, आप मुझे बहुत स्वीट लगी। मुझे नहीं लगता अमन सर आप पर गए होंगे। किसके जैसे हैं ये, जो इतने सडू़ और खड़ूस बन कर रहते हैं।” आंशी ने मुंह बनाकर कहा।
“हां बिल्कुल बोरिंग है। ये कभी गलती से भी मेरे साथ टाइम स्पेंड करने के बारे में नहीं सोचता। बस पूरे दिन ऑफिस में रहना होता है और रात को तो पता नहीं कहां गायब रहता है? देखो ना अब कल रात को भी घर नहीं आया। ऊपर से मेरा फोन भी नहीं उठा रहा था। इसकी खैर खबर लेने के लिए मुझे ही ऑफिस आना पड़ा।” चेतना जी ने बताया।
“मॉम आप हर चीज को इतना हाइप क्यों कर रही है? कल रात में ऑफिस में ही था।” जैसे ही अमन ने कल रात ऑफिस में होने की बात बताई आंशी उसे घूर कर देखने लगी।
“ओह..... तभी मैं सोचूं आप इतनी जल्दी ऑफिस कैसे आ गए? वैसे आप रात भर कहां गायब रहते हैं सर..... कहीं कोई सीक्रेट.....” आंशी अपनी बात पूरी कर पाती उससे पहले अमन बीच में बोल पड़ा, “मिस आंशी, लगता है आपको आपकी जॉब प्यारी नहीं है। मैं तो कहता हूं कि आपको लंदन का टिकट बुक करवा ही लेना चाहिए।”
अमन की बात सुनकर आंशी ने आगे कुछ नहीं कहा। उसने जल्दी से टेबल पर रखी फाइल्स उठाई और चुपचाप वहां से बाहर चली गई।
आंशी के इस तरह जाने पर चेतना जी को बहुत हैरानी हुई। उन्होंने अमन को डांटते हुए कहा, “तुम क्या इस तरह अपने एंप्लोईज को डरा कर रखते हो?”
“मॉम, क्या आप भी उसके सामने शुरू हो गई। मैं किसी को डराकर नहीं रखता। इसने कल ही ज्वाइन किया है। पता नहीं क्यों लेकिन इसे लंदन जाने से सख्त चिढ़ है।” अमन ने कहा।
“अगर चिढ़ है तो मत जाओ ना, कौन सी जबरदस्ती है।” चेतना जी बोली।
“इसकी स्टडीज वहीं से हुई है।” अमन ने बताया।
“बड़ी प्यारी बच्ची है। मुझे तो बहुत अच्छी लगी।” बोलते हुए चेतना जी ने मुंह बनाया और आगे कहा, “लेकिन मेरे नसीब में अच्छी बहू कहां? देखो अब तो बाहर वाले भी कहने लगे हैं कि तुम्हारा और लावण्या का कोई मैच नहीं है।”
“यही तो मुझे समझ नहीं आ रहा, ये लवी से कब मिली? इसके ज्वाइन करने के बाद से तो वो ऑफिस आई जी नही।” अमन ने हैरानी से कहा।
“अच्छा तुम अपना काम निपटा लो, मैं आंशी से मिल लेती हूं।” चेतना जी उठते हुए बोली।
“आप ऐसा कुछ नहीं करेंगी मॉम। आप जिस काम के लिए आई थी, वो हो गया है। आप इस तरह मेरे ऑफिस के एम्पलाॅइज से बात करने लगी तो फिर वो काम कब करेंगे?” अमन ने चेतना जी को आंशी से मिलने के लिए मना कर दिया था। उसने चेतना जी को फिर से चेयर पर बैठा दिया।
“ठीक है फिर उससे उसका नंबर ले लेती हूं। संडे को घर बुला लूंगी। दोनों साथ में चिल करेंगे।” चेतना ने कहा।
अमन चेतना जी को रोक पाता उससे पहले वो उठकर बाहर चली गई। “आंशी मॉम के सामने गलती से भी मेरे सीक्रेट एजेंट होने की बात ना कह दे।” अमन ने परेशान होकर कहा। वो जल्दी से केबिन से बाहर आया।
चेतना जी बाहर खड़ी होकर आंशी को ढूंढ रही थी। आंशी अपनी डेस्क पर मौजूद नहीं थी। उसे वहां ना देखकर अमन ने राहत की सांस ली।
“मॉम..... मैंने उसे किसी काम के लिए भेजा था। उसे आने में टाइम लगेगा। अब आप घर चले जाइए।” अमन ने चेतना जी के पास आकर कहा।
“ठीक है। मैं तुम्हें ये बताने के लिए आई थी कि आज रात को घर आ जाना। कहते हुए बहुत दुख हो रहा है लेकिन आज तुम्हारी दादी वापस आ रही है।” चेतना जी ने कहा।
“तब तो आपकी बैंड बजने वाली है। आपका साथ देने के लिए आंशी है, तो मेरा साथ देने के लिए भी मेरी दादी है। चलिए शाम को मिलते हैं।” अमन ने हंसकर कहा और चेतना जी को बाय बोल कर वापस अपने केबिन में आ गया।
वही उसकी बात सुनकर चेतना जी मुंह बनाते हुए वहां से चली गई।
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