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Chapter 20

Dangerous obsession of love - Chapter 20

Dangerous obsession of love

अगली सुबह आंशी के कमरे में उसका अलार्म बज रहा था। उसके बावजूद वो कानों पर तकिया लगाए बेफिक्र होकर सो रही थी।

अर्जुन उसके कमरे में आया और अलार्म बंद किया। उसने आंशी को जगाते हुए कहा, “अगर तुम ऐसे ही सोते रही तो तुम्हारा बॉस तुम्हें एक ही दिन में काम से निकाल देगा।”

“कौन सा बॉस और कौन सा काम?” आंशी ने आंखें खोले बिना जवाब दिया।

“वही बॉस जिसके यहां कल तुमने काम करना शुरू किया था।” जैसे ही अर्जुन ने कहा आंशी एक झटके में खड़ी हो गई। उसने घड़ी की तरफ देखा तो 8:00 बज रहे थे।

“रात को देर से सोने की वजह से मेरी आंखें नहीं खुली।” आंशी जल्दी से उठकर बाथरूम की तरफ जाने लगी। अचानक वो रूकी और उसने खुद से कहा, “मैं देर से घर आई थी तो अमन कपूर भी घर पर देर से पहुंचा होगा ना। ऐसे में उसे भी लेट हो गई होंगी। जब वो ही लेट आएगा तो फिर डांटने वाला कौन है? अब तो मैं आराम से ऑफिस जाऊंगी।”

“आराम वाराम छोड़ और जाकर अपने पापा से मिल ले। रात को भी तुम्हारे बारे में पूछ रहे थे।” अर्जुन ने आंशी के पापा के आने की बात बताई।

अर्जुन की बात सुनकर आंशी वही पर रुकते हुए बोली, “क्या सच में वो आ गए हैं?”

अर्जुन ने हां में सर हिलाया और वहां से बाहर चला गया। आंशी के चेहरे पर परेशानी और दुख के मिले-जुले भाव थे।

“समझ नहीं आ रहा बाहर जाऊं या नहीं। आपसे मिले हुए पूरे 10 साल बीत गए हैं। इतने सालों में एक बार भी आपने मुझसे मिलना तक जरूरी नहीं समझा। क्या पैसा ही सब कुछ होता है?” सोचते हुए आंशी की आंखें नम हो गई। “मुझे आपसे नहीं मिलना मिस्टर शिव जिंदल..... मैं तैयार होकर सीधा ऑफिस जाऊंगी।”

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आंशी ने अपने पिता से ना मिलने का फैसला किया और बाथरूम में चली गई। कुछ देर बाद वो वापस आई और ऑफिस जाने के लिए तैयार होने लगी। उसने फॉर्मल्स पहने थे और बालों को लूज पोनीटेल के रूप में बांध रखा था। आगे के बाल लेयर्स में उसके माथे पर बिखरे थे।

आंशी ने अपना बैग उठाया और ऑफिस जाने के लिए बाहर आई। सामने डाइनिंग टेबल पर प्रीतो जी और मिस्टर जिंदल बैठे थे। दोनों ब्रेकफास्ट कर रहे थे। आंशी उनसे नजरें चुराने की कोशिश कर रही थी लेकिन फिर भी उसकी नजर उन पर पड़ी। बीते सालों में वो काफी बदल गए थे।

चेहरे पर हल्की दाढ़ी थी और आंखों पर लगा चश्मा उनकी बढ़ती उम्र की निशानी थी।

“कंट्रोल आंशी कंट्रोल, तुम्हें अपने इमोशंस को काबू रखना होगा। जानती हूं इतने सालों से उनसे नहीं मिली..... अक्सर लड़कियां अपने पापा को लेकर बहुत इमोशनल होती है लेकिन मत भूल इन्होने तेरे साथ क्या किया था। इन्हें बस हमेशा अपने काम की रहती है। ये तुम्हारा प्यार डीजर्व ही नहीं करते।” बड़बड़ाती हुई आंशी वहां से सीधे बाहर जाने लगी।

शिव जिंदल ने उसे बाहर की तरफ जाते देखा। उन्होंने कुछ नहीं कहा। प्रीतो जी की नजर आंशी पर पड़ी तो उन्होंने उसे आवाज लगाकर कहा, “आंशी पुत्तर..... कहां जा रही है? कम से कम खाना तो खा कर जा। कितनी बार कहा है तुम लोगों को, खाली पेट घर से बाहर मत निकला करो।”

“दादी मैं बाहर ही कुछ खा लूंगी।” आंशी ने बिना मुड़े जवाब दिया। वो जानती थी कि अगर एक बार उसने अपने पापा से बात कर ली तो वो उनकी बात टाल नहीं पाएगी और उसे फिर से लंदन जाना पड़ेगा।

“आंशी..... दादी कुछ कह रही है। आकर चुपचाप ब्रेकफास्ट करो।” मिस्टर जिंदल ने अपनी कड़क आवाज में कहा।

उनकी बात सुनकर आंशी के इमोशंस गुस्से में बदल चुके थे। वो उनकी तरफ मुड़ी और झल्लाकर कहा, “जरूरी नहीं आपकी सारी बात मानी जाए..... मैंने कह दिया ना कि मुझे भूख नहीं है तो मैं खाना नहीं खाने वाली।”

“और जरूरी नहीं कि तुम बच्चे जो सोचो, वो हमेशा सही हो। कुछ फैसले बड़े उनकी भलाई के लिए लेते हैं। भले ही उन्हें पहले समझ ना आए लेकिन जब वो मैच्योर हो जाते हैं, तब उन्हें ये समझ आ ही जाता है। तुम भी समझ जाओगी।” मिस्टर जिंदल बोले। आंशी के आते ही प्रीतो जी ने उन्हें आंशी की नाराजगी के बारे में बता दिया था।

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“मुझे ऑफिस जाने में देर हो रही है मैं आकर बात करती हूं।” कहकर आंशी वहां से जाने लगी। तभी मिस्टर जिंदल उठे और उसके पास तेज कदमों से चलते हुए आए।

“बेटा मुझे तुमसे बात करनी है। जानता हूं तुम मुझसे नाराज हो। तुम्हारी नाराजगी भी जायज है। मैं पिछले 10 सालों से तुमसे नहीं मिला लेकिन..... प्लीज जिद मत करो।” मिस्टर जिंदल ने नरमी से कहा। आंशी ने प्रीतो जी की तरफ देखा तो उसने उसे बैठ कर नाश्ता करने का इशारा किया।

“आपके पास 15 मिनट का टाइम है। आपको जो कहना है, कह सकते है। मुझे ऑफिस जाने में देर हो रही है।” आंशी ने जवाब दिया और डाइनिंग टेबल पर आकर नाश्ता करने लगी।

“बेटा तुम क्यों बेवजह की जिद कर रही हो। ये तुम्हारी फ्यूचर का सवाल है। बस 1 साल की ही तो बात है। उसके बाद तुम्हारी एमबीए पूरी हो जाएगी। बीजी से पता चला कि तुमने नौकरी कल ही ज्वाइन की है। ऐसा करो, जाकर कह दो कि तुम फिर से अपनी स्टडी कंटिन्यू करना चाहती हो। तुम लंदन जा रही हो, इस वजह से तुम ये जॉब कंटिन्यू नहीं कर पाओगी।” मिस्टर जिंदल ने उसे समझाने की कोशिश की। बातों ही बातों में उन्होंने अपना फैसला आंशी को सुना दिया था।

उनकी बात सुनकर आंशी हल्के से हंसी और फिर जवाब में कहा, “मिस्टर जिंदल आपके सामने एक 11 साल की बच्ची नहीं बल्कि 22 इयर्स की एडल्ट बैठी है। आप इस तरह अपने फैसले मुझ पर थोप नहीं सकते। मुझे नहीं जाना लंदन।”

“जिद मत करो आंशी बेटा, ये सब तुम्हारी भलाई के लिए है।” शिव ने कहा।

“मैं अपनी भलाई खुद सोच सकती हूं। एंड ट्रस्ट मी इंडिया में मुझे लंदन से ज्यादा ज्यादा अपनापन और अच्छा फील होता है। नाउ एक्सक्यूज मी प्लीज.....” अपने दिल की बात बता कर आंशी ने इस बातचीत को वहीं रोक दिया था। उसने अपना बैग उठाया और ऑफिस जाने लगी।

मिस्टर जिंदल के हिसाब से वो बातचीत अभी भी अधूरी थी और इस तरह आंशी के बीच में जाने की वजह से वो गुस्सा हो गए। उन्होंने पीछे से चिल्ला कर कहा, “तुम चाहे कितनी भी मनमानी कर लो लेकिन मैं तुम्हें लंदन भेज कर रहूंगा।”

“चैलेंज एक्सेप्टेड मिस्टर जिंदल.....” आंशी ने बिना उनकी तरफ देखे जवाब दिया और वहां से चली गई। उसकी आवाज में एक कॉन्फिडेंस था और चेहरे पर गुस्सा।

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