Dangerous obsession of love - Chapter 17
Dangerous obsession of loveलावण्या विधिक राणा के लिए खाना लेकर होटल के टॉप फ्लोर पर बने उसके घर में गई। वहां विधिक पहले तो उससे बहुत अच्छे से पेश आया, लेकिन फिर उसे बंदूक की नोक पर जबरदस्ती खाना खिला रहा था ताकि वो उसका दिया काम कर सके।
“सर प्लीज मुझे जाने दीजिए।” लावण्या घबराकर बोली।
विधिक ने सिर हिलाकर जवाब में कहा, “तुम्हे यहां रख कर मुझे क्या है। एक छोटा सा काम ही तो है। चलो अब चुप करके खाना खाओ और मुझे भी खाने दो।” विधिक ने अपनी रिवाल्वर डाइनिंग टेबल पर रखी और खाना खाने लगा।
कुछ देर बाद जब दोनों का खाना खत्म हो गया तो लावण्या ने दोनों की प्लेट्स वापस सर्विंग ट्रॉली पर रखी और टेबल साफ करने लगी।
“इंप्रेसिव..... आज से पहले यहां पर जो भी वेट्रेस खाना लेकर आई है, उसने ऐसा कभी नहीं किया। मुझे क्लीनिंग स्टाफ को बुलाना पड़ता था सब कुछ साफ करने के लिए। तुम्हारे इस अच्छे काम के लिए मैं तुम्हे इनाम जरूर दूंगा।”
लावण्या ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। भले ही वो एक सीक्रेट एजेंट थी लेकिन इस जगह पर अकेली थी।
“सर आप किसी काम के बारे में कह रहे थे।” लावण्या ने जैसे-तैसे हिम्मत करके पूछा।
“अरे हां, मैं तो भूल ही गया था लेकिन तुम नहीं भूली। चलो आओ मेरे साथ.....” विधिक ने कहा और वहां से किसी कमरे में जाने लगा।
लावण्या ने उसकी नजरों से छुप कर वहां से एक छूरी को उठाकर छुपा लिया था। उसके बाद वो तेज कदमों से चलती हुई विधिक के पीछे आई।
“शायद तुम्हें यहां किसी ने बताया नहीं की अपना दिमाग नहीं लगाना है। तुम भी अजीब हो। कभी बिल्कुल इंप्रेस कर लेती हो तो अगले ही पल गुस्सा दिला देती हो।” विधिक ने उसे तिरछी निगाहों से देखते हुए कहा।
लावण्या उसके कहने का मतलब नहीं समझी। विधिक उसके बिल्कुल पास आया और उसकी कमर में हाथ डाल कर लावण्या के हाथ से छुरी छीन ली।
“ये बच्चों के खेलने की चीज नहीं है।” विधिक ने सख्त आवाज में कहा और उस छूरी को फेंक दिया।
“सॉरी वो मैं डर.....” लावण्या डरते हुए बोली।
“कम ऑन..... मैं क्या तुम्हें शक्ल से शैतान या राक्षस नजर आता हूं, जो तुम मुझसे डर गई थी? बहुत टाइम वेस्ट हो गया। चलो अब जल्दी से काम पर लगो।” बोलते हुए विधिक सामने लगी अलमारी की तरफ गया।
उसने एक झटके में अलमारी का ड्रोर खोला और लावण्या को इशारे से अपने पास बुलाया।
ड्रोर को देखते ही लावण्या जोर से चिल्लाई। “यह.....ये तो.....ल.....ला.....”
“हां ये ल..... ल.....ला नहीं लाश है।” विधिक ने उसकी बात पूरी की।
ड्रोर में एक लड़की की लाश पड़ी थी। वो अलमारी कोई सामान्य अलमारी नहीं थी। वो एक डीप फ्रीज था, जिसके अंदर विधिक सब से छुपा कर अपने मारे हुए लोगों की डेड बॉडीज को रखता था, जब तक कि कोई उन्हें ठिकाने नही लगा देता था।
“तुम्हें इसकी लाश ठिकाने लगाना है।” विधिक बोला।
“लेकिन मैं कैसे?” लावण्या ने हैरानी से कहा।
“देखो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। हमेशा यहां पर खाना देने मेल वेटर आता है और ये उसी का काम है। आज तुम यहां आई। इसका मतलब तुम ही ये काम करोगी।” विधिक ने सिर हिलाकर कहा।
लावण्या डर से कांप रही थी। वो विधिक राणा के बारे में पता लगाने आई थी लेकिन उसने उसे अपने किए क्राइम को छुपाने का काम लगा दिया।
“तुम डर क्यों रही हो? देखो मैं ये सब फ्री में नहीं करवाने वाला। इसके लिए तुम्हें इनाम..... ओके समझ गया। तुम लड़कियों को काम बाद में करना होता है और गिफ्ट पहले चाहिए।” विधिक ने कहा और कुछ सोचते हुए लड़की की लाश की तरफ देखा। उसकी अंगुली में एक महंगी हीरे की अंगूठी थी। वो उसे निकालने की कोशिश करने लगा लेकिन अंगूठी उसके हाथ से नहीं निकल रही थी।
विधिक ने इधर उधर देखा तो उसे सामने लावण्या की लाई हुई छूरी दिखाई दी। वो जल्दी से छूरी ले कर आया और लड़की की उंगली काट कर उस से अंगूठी निकालकर लावण्या की तरफ बढ़ाई।
“तुम्हारे गिफ्ट के हिसाब से ये बहुत ज्यादा महंगी है, लेकिन फिर भी रख लो। कम से कम 5 से 7 लाख के बीच की होगी। डिजाइन देख कर भी लग रहा है कि सिंगल पीस बनाया गया होगा।” विधिक ने कहा।
लावण्या ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया तो विधिक ने जबरदस्ती लावण्या के हाथ में अंगूठी पकड़ा दी और वहां से बाहर चला गया।
उसके जाने के बाद लावण्या ने एक नजर उस लड़की की लाश की तरफ देखा, जिसका गला काटकर बड़ी ही बेरहमी से हत्या की गई थी। चेहरा पहचान में ना आए, इसलिए छूरी या किसी धारदार हथियार से उसका चेहरा बिगाड़ा हुआ था।
अचानक विधिक कमरे में वापस आया और उसके हाथ में गाड़ी की चाबियां थमा कर बोला, “तुम अभी तक यही खड़ी हो? चलो जल्दी से इसकी बॉडी ड्रोर से बाहर निकालो। होटल शहर के मेन एरिया में है। अभी तो सिर्फ 8:00 बज रहे हैं, इसे लेकर जाओगी, ठिकाने लगाओगी और वापस यहां गाड़ी लेकर आओगी, इसमें काफी टाइम लग जाएगा। तुम्हें सब कुछ बहुत जल्दी और पुलिस की नजरों से छुप कर करना होगा। प्राइवेट लिफ्ट से जाना।“
अपनी बात कह कर विधिक वहां से चला गया। लावण्या ने जैसे तैसे उसकी बॉडी बाहर निकाली और उसे घसीट कर बाहर लाने लगी। उसने देखा कि विधिक लिविंग रूम में बैठकर मज़े से मूवी देख रहा था। उसके सामने महंगी शराब की बोतल पड़ी थी और ग्लास भी भरा हुआ था। लावण्या को देखकर उसने मुस्कुराते हुए शराब का गिलास उसकी तरफ किया और चीयर्स बोला।
“मैं इसे यहां से लेकर जाऊंगी तो लोग मुझे देख लेंगे।” लावण्या ने कहा।
“ये मेरा होटल है। तुम्हें कोई कुछ नहीं पूछेगा। और तुम्हें क्या लगा तुम्हें मेन डोर से जाना होगा? वहां घर के पीछे की तरफ गार्डन बनाया हुआ है और उसी के दूसरी तरफ लिफ्ट होगी। वो लिफ्ट सिर्फ मेरे यूज़ के लिए बनाई गई है.....” विधिक ने उसे हर एक बात समझा दी।
उस वक्त लावण्या के पास उसकी बात मानने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। लड़की की बॉडी काफी भारी हो चुकी थी। उसे घसीटते हुए लावण्या को अच्छा खासा जोर लगाना पड़ रहा था। वो मुश्किल से उसे खींचकर लिफ्ट के पास ले जाने लगी।
विधिक पर इन सब का कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। पहले तो वो लावण्या की तरफ देख रहा था। जब वो वहां से निकल गई तो वो मजे से टीवी स्क्रीन पर मूवी देखने लगा।
________
आंशी को आज पहले ही दिन आर्टिस्टिक में अच्छा-खासा काम करना पड़ रहा था। इंपॉर्टेंट प्रोजेक्ट होने की वजह से सभी इंप्लाइज ने रात के 10:00 बजे तक काम करने का सोचा था।
“इससे अच्छा तो मैं कल से ही ज्वाइन कर लेती। कैसे रोबोट की तरह काम करवा रहा है।” आंशी अपनी डेक्स पर बैठी बड़बड़ा रही थी।
वही अमन के केबिन की एक दीवार शीशे से बनी हुई थी, जिससे उसे बाहर का सब कुछ दिखाई देता था। आंशी के चेहरे पर झुंझलाहट देखकर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी।
“मुझे पता है, तुम यही सोच रही होगी कि तुम्हें आज ऑफिस नहीं ज्वाइन करना चाहिए था। यहां आधी रात तक काम करोगी, तो तुम्हें अच्छे से समझ आ जाएगा कि देर रात तक काम करने वाला अमन कपूर स्पाई हो ही नहीं सकता।” अमन ने खुद से कहा।
काम करते हुए आंशी की नजर केबिन में अमन की तरफ गई तो उसने जल्दी-जल्दी अपने हाथ चलाने शुरू कर दिए।
“अपने आप को ओवर स्मार्ट समझता है। अगर इतना ही इंपॉर्टेंट प्रोजेक्ट है तो काम करने के बजाय बाहर घूर घूर कर क्या देख रहा है। मैं तुम्हारे बारे में सब कुछ पता लगा कर रहूंगी अमन कपूर।” आंशी ने सोचा।
आंशी अपने कामों में लगी थी तभी उसके पास मिस्टर सिंह आए। उनके हाथ में कुछ पेपर्स थे।
“आंशी मैम, इन डाक्यूमेंट्स पर अमन सर के साइन होने जरूरी हैं। आप उनके केबिन में जाकर उनके सिग्नेचर ले लीजिए।” मिस्टर सिंह बोले।
“ये काम तो आप खुद भी कर सकते हैं, फिर मुझे क्यों बोल रहे हैं?” आंशी ने पूछा।
उसका जवाब सुनकर मिस्टर सिंह हैरानी से उसकी तरफ देखने लगे। फिर वो बोले, “जी नहीं मैम..... आप लावण्या मैम की जगह काम कर रही हैं। अमन सर के केबिन में लावण्या मैम के अलावा किसी और को जाने की इजाजत नहीं है। इसलिए हमें जब भी साइन चाहिए होंगे या सर से बात करनी होगी, तो पहले आपको बताना होगा।”
“अब ये क्या नया सियापा है।” आंशी बड़बड़ाई और उसने मिस्टर सिंह के हाथ से पेपर्स ले लिए।
पेपर्स लेने के बाद उसने अमन के केबिन का दरवाजा खटखटा कर अंदर आने की परमिशन मांगी।
“यस, कम इन मिस आंशी.....” अमन ने अपनी मुस्कुराहट छुपा कर जवाब दिया।
ज्यादा देर काम करने की वजह से आंशी चेहरे से काफी थकी हुई और परेशान लग रही थी। “लीजिए सर, इन पेपर्स पर साइन कर दीजिए।” आंशी ने पेपर्स लापरवाही से अमन की टेबल पर रख दिए।
“आपको देखकर लग रहा है कि आप से ये जॉब नहीं होंगी। अभी भी कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं हुआ है आप चाहे तो पीछे हट सकती है मिस आंशी.....” अमन ने हल्का मुस्कुरा कर कहा।
“जी नहीं सर..... एक बार मैं कोई काम करने का सोच लेती हूं। फिर उससे पीछे कभी नहीं हटती।” आंशी ने जवाब दिया। उसका मुंह बना हुआ था।
“जैसी आपकी मर्जी।” अमन ने जवाब दिया।
“आप मुझे यहां से इसलिए निकालना चाहते हैं ना ताकि मैं ये प्रुफ ना कर पाऊं कि आप एक सीक्रेट एजेंट हो और आपने दो बार मेरी जान बचाई थी।” अचानक आंशी बोली।
अमन पेपर्स साइन कर रहा था। जैसे ही उसने आंशी की बात सुनी उसके हाथ रुक गए। वो उसे घूरते हुए बोला, “लगता है मिस आंशी आपको किसी साइकोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए। किसी ने आपको बताया नहीं कि आपको हेल्युशनेशंस होते हैं।”
“और किसी ने आपको ये नहीं बताया कि खुद की पहचान छुपाने के लिए चेहरे पर सिर्फ मास्क से कुछ नहीं होता। साथ में आंखों पर गॉगल्स भी लगा लेने चाहिए। आपको कोई भी पहचान सकता है सर.....” आंशी ने सिर हिलाकर कहा।
दोनों के बीच हल्की फुल्की नोकझोंक चल रही थी, तभी अमन के फोन पर लावण्या का कॉल आया। आंशी सामने होने की वजह से अमन ने उसका कॉल पिक नहीं किया।
“सर आपका फोन बज रहा है। हो सकता है कोई इंपॉर्टेंट कॉल हो, वैसे सीक्रेट एजेंट के तो सभी कॉल इंपॉर्टेंट होते हैं।” आंशी ने कहा।
“ऐसा भी कोई इंपोर्टेंट नहीं है।” अमन ने लापरवाही से जवाब दिया और आंशी के लाए हुए डाक्यूमेंट्स साइन करने लगा।
लावण्या को विधिक के लिए काम के बारे में अमन को बताना था इसलिए वो बार-बार उसे फोन कर रही थी।
“अब तो सच में मुझे डाउट हो रहा है कि आप एक सीक्रेट एजेंट हो। ऐसा भी क्या है इस फोन कॉल में जो आप मेरे सामने नहीं पिक करना चाहते।” आंशी ने कहा।
अमन ने आंशी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और फोन पिक किया।
“अमन..... यहां एक बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई है। मैं तुम्हें लोकेशन सेंड करती हूं। तुम अभी के अभी यहां पर पहुंचों।” लावण्या ने घबराई आवाज में कहा।
“डोंट वरी लवी, मैं अभी आता हूं।” उसकी आवाज सुनकर अमन भी परेशान हो गया। उसने जल्दी से फोन रखा और लावण्या के पास जाने लगा।
“सर आप अपने इंपॉर्टेंट प्रोजेक्ट को भूल रहे हैं, जिसके लिए आप का पूरा स्टाफ यहां लेट तक रुक कर काम कर रहा है।” आंशी ने पीछे से कहा।
अमन ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और जल्दी से हड़बड़ाहट में वहां से निकल गया। उसकी इस हरकत ने आंशी के शक को और भी बढ़ा दिया था।
°°°°°°°°°°°°°°°°