Dangerous obsession of love - Chapter 23
Dangerous obsession of loveअमन के बुलाने पर दिव्याना आर्टिस्टिक के ऑफिस आई हुई थी। इस बीच उसकी मुलाकात आंशी से हुई। दिव्याना ने आंशी के सामने खुद को अमन के प्यार के तौर पर इंट्रोड्यूस किया।
आंशी आगे कुछ पूछ पाती उससे पहले लिफ्ट रुक गई। दिव्याना जल्दी से बाहर निकली और वहां से सीधे अमन के केबिन की तरफ बढ़ी। आंशी उसके पीछे धीमे कदमों से चलकर आ रही थी।
“इसने कहा ये अमन सर की गर्लफ्रेंड से भी बढ़कर है..... तो क्या इन दोनों की शादी होने वाली है।” सोचते हुए आंशी की आंखें बड़ी हो गई। “अच्छा जी, अपनी होने वाली वाइफ कैसे भी कपड़े पहने इसे कोई दिक्कत नहीं है, बाकी ऑफिस में काम करने वाले फॉर्मल वियर पहन के आए। कुछ भी हो, मुझे क्या।” आंशी ने मुंह बिगाड़ा और वापस अपनी डेस्क पर आकर काम करने लगी। आंशी ने गलती से दिव्याना को अमन की होने वाली वाइफ समझ लिया था। उसे दिव्याना का बर्ताव काफी अजीब लगा।
दूसरी तरफ दिव्याना अमन के केबिन में पहुंची। उसे देखकर अमन ने अपना सारा काम करना छोड़ दिया और उसे बैठने का इशारा किया। आंशी ने काम करते हुए अंदर की तरफ झांका तो अमन अपना सारा काम छोड़कर दिव्याना के साथ बैठा था।
उन दोनों को साथ देखकर उसने अपना मुंह फेर लिया।
दिव्याना की तरफ देखकर अमन ने कहा, “तुम्हें अभी भी लगता है कि कुछ हो सकता है? वैसे कोई खास बात नहीं है, मुझे तुमसे ऐसी ही चीप हरकतों की उम्मीद थी।”
“मैं यहां काम के सिलसिले में आई हूं मिस्टर कपूर..... आपको कोई हक नहीं है, आप किसी लड़की के कपड़ों को लेकर उसे जज करें।” दिव्याना ने भौंहें उठाकर कहा।
“अच्छी बात है। अगर आप काम के सिलसिले में आई है, तो काम की बात करें मिस बजाज?” अमन ने सारकास्टिक वे में सिर हिला कर कहा।
दिव्याना ने मुस्कुराते हुए हामी भरी। अमन ने अपने डेक्सटॉप पर विधिक राणा की तस्वीर निकाली और उसे दिव्याना की तरफ कर दिया।
“इस इंसान को परिचय की कोई जरूरत नहीं है।” अमन ने बातचीत की शुरुआत में कहा।
“हां..... ये विधिक राणा है। चंडीगढ़ के अलावा और भी कई सिटीज में इसके सेवन स्टार होटल्स हैं। लोगों के लिए सिर्फ एक बिजनेसमैन लेकिन अंडरवर्ल्ड के लोगों में एक जाना पहचाना नाम..... कोई नहीं जानता ये कहां रहता है और कब क्या करता है। तुम्हें इसकी फोटो कहां से मिली? इसे बहुत कम लोगों ने देखा है।” दिव्याना ने हैरानी से कहा।
“बस समझ लो मिल गई। हमारा अगला टारगेट यही है।” अमन ने बताया।
“लेकिन उसने कुछ नहीं किया।” दिव्याना ने जवाब दिया।
“अभी तक तो कुछ नहीं किया लेकिन आगे बहुत कुछ करने वाला है। इसे एक और माफिया रोबिन की वाइफ मेलिसा के साथ देखा गया है। आजकल ये चंडीगढ़ में है और इसकी एक्टिविटीज काफी सस्पीशियस है।” अमन दिव्याना को काम के बारे में बता रहा था।
पूरी बात सुनने के बाद दिव्याना ने काफी ठंडे तरीके से जवाब दिया, “ठीक है जब इतनी सारी इनफार्मेशन तुम लोगों ने जुटा ही ली है, तो फिर मेरा क्या काम है?”
“तुम्हारा काम ये है दिव्याना तुम इसके पास जाओगी और इसे अट्रैक्ट करने की कोशिश करोगी। तुम कुछ ऐसा करोगी, जिससे ये तुम्हारे प्यार में पागल हो जाए। तुम्हें तो ये सब बखूबी आता है ना?” अमन ने तंज कसा।
उसकी बात सुनकर दिव्याना को बुरा लगा। वो गुस्से में उसे घूर रही थी। “हम यहां प्रोफेशनली मिल रहे हैं तो बेहतर होगा कि प्रोफेशनल बातें करें।”
“ठीक है मैंने तुम्हें सब कुछ समझा दिया है। अब तुम जा सकती हो। दरवाजा उधर है।” अमन ने काफी रूडली जवाब दिया।
अमन के इस तरह बात करने पर दिव्याना गुस्सा हो गई। वो चिढ़ते हुए बोली, “इस काम के लिए तुम लवी को भी भेज सकते थे। लेकिन तुमने जानबूझकर मुझे चुना। तुम क्या चाहते हो कि मैं इस कॉल्ड ब्लडेड मर्डरर के पास जाकर उससे प्यार करने का दिखावा करूं। अगर उसे सच पता चल गया तो वो मेरी जान ले लेगा। मैं ये काम नहीं करने वाली।”
“आपने सर के सामने खुद हामी भरी है और हमारी टीम ज्वाइन करने के लिए पेपर्स भी साइन कर दिए हैं। अब पीछे हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। मैं आपको विधिक राणा की लोकेशन बता दूंगा। अब आप पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह उससे मिलती है।” अमन ने प्रोफेशनल वे में कहा।
अमन दिव्याना को सारी बात समझा चुका था। वो अपनी चेयर से खड़ा हुआ और दिव्याना के साथ बाहर आने को हुआ। दिव्याना को उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था। गुस्से में वो उसके पास आई और उसका कॉलर पकड़ लिया।
“तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो?” उसने अमन की आंखों में आंखें डाल कर पूछा।
“ये सवाल तो मुझे पूछना चाहिए। तुमने मेरे साथ वो सब क्यों किया?” बोलते हुए अमन की आंखें सर्द हो गई।
“तो क्या तुम उस बात का बदला मुझसे इस तरह लोगे?” दिव्याना ने अभी भी अमन को पकड़ रखा था।
आंशी की नजर अंदर की तरफ पड़ी तो दिव्याना और अमन एक दूसरे के काफी करीब थे। उसने जल्दी से अपनी नजरें घुमा ली।
“मैं क्यों बार-बार उनकी तरफ देख रही हूं?” आंशी ने कहा और खुद को काम में व्यस्त करने की कोशिश करने लगी। उसका ध्यान बार बार अमन के केबिन की तरफ जा रहा था।
“जवाब दो अमन..... तुम मुझसे बदला लेने के लिए ये सब कर रहे हो ना?” दिव्याना ने फिर पूछा। वो दोनो एक दूसरे के इतने करीब थे कि उनकी दोनो की नोज आपस में टच हो रही थी।
अमन ने कहा, “नहीं..... लगता है आपको कोई गलतफहमी हो गई मिस बजाज। हम दोनों का कोई रिश्ता नहीं है..... ना ही मेरे दिल में आप को लेकर प्यार या नफरत से जुड़ी हुई कोई फीलिंग..... फिर मैं आपसे बदला क्यों लूंगा?” अमन ने दिव्याना को खुद से दूर किया।
दिव्याना अमन से दूर थी और उसकी आंखों में नमी थी। “मुझे अपनी गलती का पछतावा है। कम से कम मुझे मेरी भूल सुधारने का एक मौका तो दो।” दिव्याना ने नम आंखों से कहा।
“मैं आपको थोड़ी देर में लोकेशन सेंड कर दूंगा। आप तब तक विधिक से मिलने के लिए प्लान बना लीजिए और हां, आपकी सिक्योरिटी के लिए एनी टाइम आपके एक माइक्रो चिप लगी रहेगी, जिसके जरिए हम आप की लोकेशन ट्रैक करते रहेंगे। आपको कभी भी खतरा महसूस हो तो आप अपने ब्रेसलेट पर लगे अलार्म को प्रेस कर सकती हैं। हमें आपके पास बैकअप टीम भेजने का सिग्नल मिल जाएगा।” अमन अभी भी काम की बात कर रहा था। उसने दिव्याना की बातों का जवाब देने के बजाय मिशन की बातों के जरिए उन्हें टाल दिया।
“ठीक है।” दिव्याना ने खुद को संभाल कर सख्ती से जवाब दिया।
“आपको आपकी एक्सेसरीज विधिक राणा के पास जाने से पहले मिल जाएगी। ऑल द वेरी बेस्ट फॉर दिस मिशन मिस बजाज.....” अमन ने कहा।
दिव्याना ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और केबिन से बाहर आ गई। बाहर आते वक्त उसकी नजर आंशी पर पड़ी, उसने उसे देखकर एक नकली मुस्कुराहट दी।
दिव्याना वहां से जा चुकी थी। उसके जाते ही आंशी अमन के केबिन में गई।
“बोलिए मिस आंशी..... आपको कुछ काम था?” उसे अचानक अपने केबिन में देखकर अमन ने पूछा।
“सबसे पहले तो आप मुझे आप बुलाना और मिस आंशी कहना बंद कीजिए। प्लीज मुझे मेरे नाम से बुलाइए। आप मेरे बॉस है, ना कि मैं आपकी।” आंशी ने चिढ़कर कहा।
“ठीक है। अब बताओगी तुम यहां क्यों आई थी?” अमन ने कंधे उचकाकर कहा।
“आपकी चॉइस बहुत खराब है।” आंशी ने झट से कहा।
“एक्सक्यूज मी?” अमन को उसके कहने का मतलब समझ नहीं आया। आंशी जल्दी से उसकी चेयर के पास आई।
“क्या एक्सक्यूज मी? थोड़ी देर पहले मुझे तो बड़ा ज्ञान दे रहे थे। ऑफिस है फॉर्मल पहनना चाहिए एंड ऑल..... आपकी वाइफ का क्या सर? उसके कपड़े देखे आपने?” आंशी ने गुस्से में अमन को कुछ भी कह दिया।
“मेरी वाइफ?” अमन उलझन में था कि आंशी किस बारे में बात कर रही है।
“आई मीन होने वाली वाइफ..... आपको उस लड़की में क्या पसंद आया। ना तो उसको बोलने का तमीज है ना ही उसे कपड़े पहनने का कोई सेंस? आपका कोई मैच नहीं है, अभी भी टाइम है, शादी से मना कर दीजिए। एक बार के लिए दुख होगा लेकिन उम्र भर पछताने से तो बेहतर ही है ना.....” आंशी एक सांस में बोल गई।
अमन आंशी की बात का जवाब दे पाता उससे पहले दरवाजे से किसी की आवाज आई। “चलो कोई तो मिला जो इसे समझाने की कोशिश कर रहा है। मैं भी यही समझाना चाहती हूं कि अभी भी टाइम है इस शादी के लिए मना कर दो।”
अमन और आंशी हैरानी से सामने की तरफ देख रहे थे। सामने चेतना जी खड़ी थी, जिन्होंने आंशी की कुछ आखिरी बातें सुन ली थी।
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