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Chapter 4

A cruel fairytale - Chapter 4

A Cruel Fairytale

आरोही को नॉवेल की कहानी याद थी इसलिए वो नॉवेल में फंसने के बावजूद भी खुद को उन सिचुएशन से बचाने की कोशिश कर रही थी, जिसकी वजह से वो प्रॉब्लम में पड़ी थी। सबसे पहली सिचुएशन वो थी, जब उसने रिदांश ठाकुर को किसी को गोली मारते हुए देखा था। उसके बाद से ही रिदांश ने उसे किडनैप कर लिया था और उसे अपने साथ लेकर गया था। वहां रिदांश ने उसके साथ बहुत टॉर्चर किया था और उस टॉर्चर से बचने के लिए आरोही सुबह कॉलेज ही नहीं गई।

आरोही ने अपनी लाइफ के एक बड़े इंसिडेंट को टाल दिया था। इस वजह से वो काफी खुश थी। शाम को उसकी मां ने उसको उसके पापा के लिए बैंगन लाने के लिए कहा तो आरोही अनजाने में उसी जगह पर पहुंच चुकी थी, जहां उसने अपने नॉवेल में उस मर्डर सीन को लिखा था।

आरोही ने अपनी आंखों के सामने उस शख्स को देखा था, जिसे उसने अपने नॉवेल में लिखा था। ऐसे लग रहा था जैसे उसकी कल्पनाएं सच गई हो। आरोही की आंखों के सामने जो खड़ा था, वो रिदांश ठाकुर था। उम्र 27 साल, 6 फीट 1 इंच हाइट, गोरा चेहरा, जिस पर हल्की दाढ़ी थी और गहरी काली आंखें, जिसमें एनीटाइम गुस्सा रहता था। वो दिखने में काफी हैंडसम था और आरोही उसके चेहरे को देखकर एक पल के लिए उसमें खो गई। वो उसकी कल्पना से भी ज्यादा हसीन था।

रिदांश ने अपने हाथ में रिवॉल्वर ले रखी थी और उसके सामने एक आदमी पैरों में गिरकर गिड़गिड़ा रहा था।

वो आदमी रोते हुए रिदांश के पैर पकड़कर बोला, “मुझसे... मुझसे गलती हो गई साहब। मुझे जाने दीजिए। मैंने पुलिस को नहीं बताया था, आप कोलकाता आए हुए हैं। माफ कर दीजिए साहब।”

रिदांश सर्द निगाहों से उसे घूर रहा था। उसने उस आदमी की कॉलर पड़ी और उसके माथे के बीचों शूट किया। अगले ही पल उसकी लाश वहां पर गिरी हुई थी और उसे देखते ही आरोही के माथे पर डर के मारे पसीने की बूंदे थी। उसने अपना मुंह कसके बंद कर लिया और एक गाड़ी के पीछे छुप गई।

आरोही अपने मन में बड़बड़ा कर बोली, “ये सब तो दिन में हुआ था, फिर ये सीन अचानक से बदलकर शाम को कैसे हो रहा है। मुझे खुद के इमोशंस पर काबू रखना होगा। नॉवेल में आरोही पुलिस के पास चली गई थी और उसके बाद ही रिदांश ने उसे किडनैप किया था। नहीं आरोही, उनके जाने के बाद ही तुझे बाहर निकलना है। क्या हुआ, जो मैं उस आदमी का मर्डर नहीं रोक पाई या मैंने इन सब को देख लिया। मैं चुप रहूंगी तो रिदांश को कभी पता नहीं चलेगा कि मैंने ये सब देखा है।” सोचते हुए आरोही की आंखों से आंसू बहने लगे। उसे इस वक्त बहुत डर लग रहा था।

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वो उन लोगों की बातें सुन रही थी। उस आदमी को मारने के बाद रिदांश ने अपने मैनेजर की तरफ देखा। उसका नाम डेनियल था। वो लगभग तीस साल का था।

रिदांश की आंखों में गुस्सा देखकर डेनियल जल्दी से बोला, “सुबह हमने इस आदमी को पकड़ लिया था लेकिन न जाने ये कहां भाग गया। मौत से कोई बच सकता है क्या? सुबह हम इसे नहीं मार पाए तो क्या हुआ, अब तो पकड़ कर मार दिया है ना।”

डेनियल की बात सुनकर रिदांश ने गुस्से में उसकी कॉलर पकड़ ली और सर्द लहजे में कहा, “और इसके चक्कर में मेरा सुबह से टाइम वेस्ट हो रहा है, उसकी क्या सफाई दोगे तुम? तुम मेरी फैमिली को अच्छे से जानते हो। अगर गलती से भी कोई न्यूज़ बाहर निकली तो मैं हर एक इंसान को तबाह कर दूंगा।”

रिदांश ठाकुर रॉयल फैमिली से बिलॉन्ग करता था, जो आजकल लॉस एंजिल्स अमेरिका में रहता था। उनकी फैमिली इंडिया में ही नहीं बल्कि यूएस में भी काफी फेमस थी, जो अपनी लग्जरी लाइफ और पूरी दुनिया में फैले बिजनेस के चलते जानी जाती थी।

“इसका बिजनेस लीगल ही नहीं इलीगल भी है। ये माफियाज़ के साथ भी डील करता है और उनके लिए वेपंस बनाता है।” आरोही ने धीरे से कहा। उसे रिदांश से डर लग रहा था। अचानक आरोही ने सामने देखा तो रिदांश और डेनियल वहां से गायब थे। उन्हें वहां न देखकर आरोही ने राहत की सांस ली और धीमे कदमों से चलकर गाड़ी से बाहर निकल कर आई।

आरोही वहां रुक कर कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहती थी इसलिए वो जल्दी से वहां से जाने लगी कि तभी अचानक से किसी ने उसके बाल पीछे से पकड़ कर खींचे। इसी के साथ आरोही की चीख निकल गई।

उसके पीछे रिदांश था, जिसने आरोही के बाल खींचे थे। रिदांश ने गाड़ी के बाहर उसके कुर्ते का टुकड़ा देख लिया था। इस वजह से वो कुछ देर के लिए डेनियल के साथ वहां से हट गया। रिदांश ने आरोही के बालों को मुट्ठी में भरा और उसे खींचकर अपने करीब कर लिया। आरोही ने अपने नॉवेल में ये सीन काफी अच्छे से डिस्क्राइब किया था और सब कुछ वैसे ही हो रहा था। हां ये बात अलग थी कि अब आरोही धीरे-धीरे नॉवेल्स के सीन को थोड़ा भूलने लगी थी।

रिदांश ने आरोही के चेहरे को गौर से देखा। वो दिखने में बहुत ज्यादा खूबसूरत थी। एक पल के लिए रिदांश उसके चेहरे में खो गया और फिर गुस्से में उसे देखते हुए कहा, “लगता है उस आदमी की तरह तुम्हें भी मरने का शौक है जो तुम यहां छुपकर मुझे देखने आई थी। क्या इरादा था तुम्हारा। फोटो वोटो क्लिक करके पुलिस में जाकर मेरे खिलाफ रिपोर्ट कराने का या इन फोटोस के जरिए मुझे ब्लैकमेल करने का।” बोलते हुए रिदांश आरोही के बालों को खींच रहा था, जिससे दर्द से उसकी आंखों में आंसू आ गए।

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आरोही ने रोते हुए ना में सिर हिलाया और कहा, “मेरा यकीन मानिए मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली हूं। तुम मुझे गलत समझ रहे हो। मैं तो सब बदलना चाहती हूं। यकीन मानो मैं कहीं नहीं जाऊंगी। रिदांश, मैं बस अपने ही नॉवेल में फंस गई हूं। मैंने तुम्हें बनाया है तुम... तुम प्लीज मुझे जाने दो मैं कुछ नहीं करूंगी।”

आरोही उसके सामने अपनी जान की भीख मांग रही थी तो वही अचानक उसके मुंह से अपना नाम सुनकर रिदांश ने गर्दन टेढ़ी की और आरोही का मुंह अपने हाथ में भरकर दबाते हुए कहा, “अभी-अभी तुमने मेरा नाम लिया। इसका मतलब तुम जानती हो मैं कौन हूं।”

“हां मैं जानती हूं क्योंकि मैं...” आरोही बोलते हुए रुक गई। वो सफाई देने की कोशिश कर रही थी कि वो उसे इसलिए जानती है क्योंकि उसी ने रिदांश को बनाया था लेकिन रिदांश ने उसकी बाद पूरी होने से पहले ही आरोही के गाल पर कस के थप्पड़ मारा। आरोही का मुंह दूसरी तरफ झुका हुआ था। रिदांश के थप्पड़ से उसके होठों के कोनो से खून निकलने लगा।

उसके बाद रिदांश ने डेनियल की तरफ देखकर कोल्ड वॉइस में कहा, “मैं यहां पर अपने किसी पर्सनल काम के लिए आया था लेकिन पता नहीं था कि यहां आने के बाद इतना सब कुछ हो जाएगा। उस आदमी को जान से मार दिया है लेकिन मुझे इसे मारने का मूड नहीं है। इसे अपने साथ लेकर चलो। इसे भी तो पता चले कि गलती से किसी की बात सुनने की सजा क्या होती है।”

रिदांश अपनी तरफ से ऑर्डर पास करके वहां से जा चुका था तो वही आरोही पीछे से रो रही थी। वो डेनियल के सामने हाथ जोड़ते हुए बोली, “प्लीज उसे समझाइए, मैं उसके खिलाफ कुछ नहीं करूंगी। मुझे मत लेकर जाएगी। आई रिक्वेस्ट यू। मुझे नहीं जाना आपके साथ। मैं कुछ नहीं करूंगी आपके खिलाफ।”

आरोही जानती थी कि वो रिदांश के साथ गई तो उसके साथ क्या होगा। एक ऐसा टॉर्चर, जो उसने खुद ही लिखा था और अब उसके ऊपर लौट कर आ रहा था। आरोही के गिड़गिडानें का डेनियल पर कोई असर नहीं हुआ। उसने आरोही का मुंह अपने हाथ से दबाया और उसे घसीटते हुए अपनी गाड़ी में लेकर चला गया।

अक्सर लोगों के साथ जो बुरा होने वाला होता है उसके बारे में उन्हें पता नहीं होता लेकिन यहां आरोही सब जानती थी और सब जानने के बाद डर के मारे उसकी हालत खराब हो रही थी। नॉवेल में उसने जो सीन लिखे थे, वो अब उसके साथ होने वाला था।

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क्या आरोही रिदांश को अपनी सच्चाई साबित कर पाएगी या उसे अपनी लिखी नॉवेल की कहानी के साथ जीना होगा।

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