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Chapter 15

A cruel fairytale - Chapter 15

A Cruel Fairytale

शाम के वक्त रिदांश बाथरूम में शावर ले रहा था। उस वक्त आरोही कमरे में अकेली थी। सुबह उसने न्यूज़पेपर के मिसिंग कॉलम में अपनी फोटो और एक नंबर देखा था। उसे देखकर आरोही को लगा कि ये उसके पापा ने छपवाया होगा।

आरोही ने तुरंत न्यूजपेपर को फाड़कर उस नंबर को अपने पास रख लिया था। रिदांश जब नहा रहा था तब आरोही ने उसका मोबाइल उठाया और उस नंबर पर कॉल कर दिया।

आरोही को लगा सामने से उसके पापा ने कॉल रिसीव किया है, तो उसने उन्हें जल्दी-जल्दी में सारी बात बताई लेकिन कुछ देर रुकने के बाद सामने से एक आदमी की आवाज आई, जो किसी और की नहीं बल्कि रिदांश की आवाज थी। कॉल के दूसरी तरफ रिदांश की आवाज सुनकर आरोही के हाथ से मोबाइल छूट कर नीचे गिर गया। वो समझ गई थी कि ये रिदांश ने हीं प्लान किया है।

आरोही वहां खड़ी तेज सांसें ले रही थी। डर के मारे उसकी हालत खराब हो रही थी, तभी बाथरूम का दरवाजा खुला। सामने रिदांश था जिसने सिर्फ टॉवल बांध रखा था। उसके हाथ में एक दूसरा मोबाइल था और चेहरे पर गुस्से के भाव।

“प्लीज। प्लीज मुझे माफ कर दो। मैं आगे से ऐसा कुछ नहीं करूंगी।” उसे देखते ही आरोही गिड़गिड़ाने लगी। वो नहीं जानती थी कि रिदांश उसकी इस हरकत पर क्या करेगा पर एक बात जरूर साफ थी कि रिदांश उसकी सजा उसे जरूर देने वाला था।

रिदांश के कदम तेजी से आरोही की तरफ बढ़ रहे थे तो वही उसे अपनी तरफ आता देखकर आरोही अपने कदम पीछे ले रही थी। रिदांश उसके पास गया और आरोही का गला पकड़कर सर्द आवाज में कहा, “क्या लगा था मिस राइटर, तुम्हारी मदद करने के लिए यहां कोई आएगा? ये रिदांश ठाकुर की दुनिया है और यहां मेरी मर्जी के खिलाफ हवा तक उड़कर मेरे घर में नहीं आ सकती, फिर तुमने कैसे सोच लिया कि तुम्हें बात करने के लिए एक नंबर और मोबाइल तक सजाया हुआ तैयार मिल जाएगा।”

आरोही उस वक्त खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही थी। वैसे धोखा तो उसके साथ हुआ था। उसने खुद को सख्त किया और आंखों में आंसू लिए रिदांश से बोली, “तो तुमने ये सब मुझे फंसाने के लिए किया था? क्या लगता है तुम्हें कि मैं यहां से बाहर निकलने की कोशिश नहीं करूंगी? ये एक नर्क है और तुम एक हैवान। अपनी आखिरी सांस तक मैं यहां से बाहर निकलना चाहूंगी। घिन्न आती है मुझे तुमसे... मुझे नहीं पैदा करना तुम्हारा बच्चा।” आरोही एक साथ में काफी कुछ बोल गई। उसकी बातों से रिदांश के लिए उसकी नफरत साफ जाहिर हो रही थी।

रिदांश ने गुस्से में चिल्ला कर कहा, “सोचा था सब कुछ आराम से और तरीके से करूंगा लेकिन तुम उसके लायक ही नहीं हो। अब तो तुम्हें ही ये काम करना होगा। घिन्न आती है तो आती रहे, आई डोंट गिव ए डेम।”

आरोही की बातों ने रिदांश के गुस्से की आग मे पेट्रोल डालने का काम किया। रिदांश ने उसी वक्त आरोही को बेड पर धकेला। आरोही आंखें बड़ी करके हैरानी से उसकी तरफ देख रही थी तभी रिदांश ने अपना टॉवल निकाल कर फेंक दिया। उसके ऐसा करने पर आरोही ने तुरंत अपनी नज़रें दूसरी तरफ कर ली। अगले ही पल रिदांश उसके ऊपर था।

आरोही ने नहीं सोचा था कि अचानक रिदांश उसके साथ वो सब करेगा। वो इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, ना तो फिजिकली और ना ही मेंटली। रिदांश उसकी कहां सुनने वाला था। वो गुस्से में उसके साथ कुछ ज्यादा ही रफ था।

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कमरे में लगभग 1 घंटे तक आरोही के रोने चिल्लाने की आवाजें गूंजती रही। उसके बाद रिदांश ने उसे छोड़ा और उठकर वापस बाथरूम में चला गया। आरोही बिना कपड़ों के एक लाश की तरह बेड पर पड़ी हुई थी, जिसके शरीर पर जगह-जगह पर किसेस और लव बाइट्स के निशान बने हुए थे।

वो जानती थी कि ये सिलसिला इतना आसानी से नहीं रुकने वाला। रिदांश ने अगर बच्चा पैदा करने की ठानी है तो वो तब तक आरोही के साथ ऐसे ही जबरदस्ती करता रहेगा, जब तक आरोही प्रेग्नेंट नहीं हो जाएगी।

आरोही ने जल्दी से खुद को ब्लैंकेट में कवर किया और अंदर सिमट कर सोने की कोशिश करने लगी। कुछ देर बाद रिदांश कपड़े पहन कर बाहर आया तो उसे ब्लैंकेट के बाहर आरोही के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी।

रिदांश ने आईज रोल की और कमरे में इधर-उधर देखा तो आरोही ने जो रिदांश का शर्ट पहना था, वो फटा हुआ साइड में पड़ा था।

रिदांश बाहर आया और उसने कॉल कनेक्ट करके अपने मैनेजर डेनियल से कहा, “मुझे उस लड़की के लिए हर छोटे से बड़ा सामान चाहिए। किसी मेड को अंदर भेज दो ताकि वो उसके हिसाब से उससे पूछ कर सब कुछ मंगवा सके।” इतना कह कर रिदांश ने कॉल कट कर दिया।

वहीं दूसरी तरफ आरोही को घर से सब्जी लेने के लिए निकले हुए आज पूरे 5 दिन हो चुके थे लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं था। संध्या, जो कि आरोही की मां थी, वो अपने हस्बैंड प्रशांत श्रीवास्तव के साथ में बैठी रो रही थी। उनके पास में काजल भी थी।

संध्या ने सुबकते हुए कहा, “आप इस मामले में कुछ करते क्यों नहीं है। आज मेरी आरू को गायब हुए पूरे 5 दिन बीत चुके हैं। सब मेरी ही गलती है। जब उसकी तबीयत खराब थी तो मुझे इस तरह उसे सब्जी लाने के लिए भेजना ही नहीं चाहिए था।”

“तुम्हें क्या लगता है मैंने पुलिस कंप्लेंट नहीं की? मुझे भी अपनी बेटी की परवाह है लेकिन ऐसे लग रहा है जैसे किसी ने उसका नामोनिशान मिटा दिया हो।” प्रशांत ने उदास चेहरे के साथ कहा।

उनके पास में बैठी काजल बोली, “वो मुझे सुबह ध्यान से जाने को कह रही थी। अब देखिए ना, खुद ही गायब हो गई है।”

सब आरोही के लिए बहुत परेशान हो रहे थे। उन्होंने हर तरीके से उसे ढूंढने की कोशिश कर ली थी।

वहीं दूसरी तरफ रिदांश के घर पर आरोही उसके बेड पर लेटी हुई थी और लेटे लेटे कब उसे नींद आ गई, उसे खुद भी होश नहीं रहा।

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अगली सुबह आरोही की आंख खुली तो उसने महसूस हुआ कि कल रात वो वैसे ही सो गई थी। उसने अब तक कुछ नहीं पहना हुआ था। आरोही ने हिलने की कोशिश की तो उसने पाया कि वो रिदांश की बाहों में जकड़ी हुई है।

“अजीब बेशर्म इंसान है। इतना सब कुछ करके भी इसका दिल नहीं भरा, जो वो सब करने के बाद मुझे इस तरह लेकर सो रहा है।” आरोही ने मन ही मन कहा।

उसने जैसे तैसे करके खुद को रिदांश से अलग किया। आरोही ने आसपास देखा तो वहां रिदांश की एक शर्ट पड़ी हुई थी, जो उसने रात को सोते वक्त निकली थी। आरोही ने उसे पहना और बाथरूम में चली गई। बाथरूम में जाकर वो हैरान थी। वहां आरोही के जरूरत के हिसाब से कपड़े रखे हुए थे।

उसने नहा कर कपड़े बदले और बाहर आई तो रिदांश उठ चुका था। वो वहां पर मौजूद नहीं था। आरोही को भूख लगी थी तो वो कमरे से बाहर आई।

डाइनिंग टेबल पर रिदांश उसका इंतजार कर रहा था। उसे देखते ही रिदांश के चेहरे पर इविल स्माइल आ गई। उसने इशारे से आरोही को अपने पास बुलाया। आरोही जाकर दूसरी चेयर पर बैठने लगी तभी रिदांश ने उसे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया।

“कल रात तुमने जो भी किया, उसके बाद मैंने तुम्हें पनिशमेंट नहीं दी थी। अब इतना बड़ा काम किया है तो रिवॉर्ड देना तो बनता है ना मिस राइटर?” रिदांश ने आरोही के बालों में अपना सिर छुपाते हुए कहा।

आरोही ने धीरे से जवाब में कहा, “इतना सब कुछ कर लिया, वो काफी नहीं है क्या, जो अभी भी तुम्हें पनिशमेंट देने की पड़ी है। तुम्हारी वजह से मैं ठीक से चल तक नहीं पा रही हूं।”

रिदांश ने अपना चेहरा आरोही के बालों से अलग किया और फिर उसकी तरफ देखते हुए इविल स्माइल करते हुए कहा, “हां मेरा स्टैमिना कमाल का है और तुम्हारा बिल्कुल बेकार। आई लव टू क्रश यू ऑन बेड।” बोलते हुए रिदांश ने आई विंक की।

उसकी बात सुनकर आरोही ने गुस्से से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

रिदांश ने गहरी सांस ली और फिर आरोही का चेहरा पकड़कर अपनी तरफ करके कहा, “खैर बातें करने में मुझे टाइम वेस्ट नहीं करना। आई हैव ए सरप्राइज फॉर यू ताकि आगे से तुम मेरे खिलाफ जाकर अपने घर वालों से कांटेक्ट करने की कोशिश तो बिल्कुल ना करो।” बोलते हुए उसके चेहरे के भाव सर्द हो गए, जो आरोही को डरा रहे थे। वो जानती थी कि रिदांश उसे एक और नया झटका देने वाला है, पर वो क्या होगा ये अभी तक सच में एक सरप्राइज ही था।

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