A cruel fairytale - Chapter 20
A Cruel Fairytaleरिदांश के पास उसकी मॉम निधि का कॉल आया था। उसके कजन विविध की जहां अगले 15 दिन में सगाई होने वाली थी, वहीं अब शादी होने जा रही थी। रिदांश अच्छे से जानता था कि विविध ने अपनी सगाई प्रीपोन क्यों करवाई होगी। आखिर उसे भी ज्यादा प्रॉपर्टी अपने नाम चाहिए थी। विविध रिदांश के जितना सक्सेसफुल नहीं था लेकिन उसने अपने हिस्से की ज्यादातर प्रॉपर्टी को बेच दिया था, जिसकी वजह से उसका बैंक बैलेंस हाई था।
वही रिदांश की इतनी कोशिशों के बावजूद आरोही प्रेग्नेंट नहीं हो पाई थी। रिदांश के पास अब किसी और को सेलेक्ट करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। रिदांश ने अपने डॉक्टर को दूसरी लड़की ढूंढने को कह दिया था तो वहीं अब आरोही उसके कोई काम की नहीं रही थी। रिदांश आरोही को मारने के लिए उसके कमरे की तरफ बढ़ रहा था।
रिदांश रूम में पहुंचा तो आरोही बुक लिख रही थी और उसके चेहरे पर हल्की स्माइल थी। रिदांश पूरे चार दिन बाद घर लौटा था। एक पल के लिए वो आरोही के मुस्कान में खो गया।
वही आरोही ने रिदांश को देखा तो वो जल्दी से उठकर खड़ी हो गई। उसने रिदांश से कहा, “तुम चार दिन तक कहां थे? डेनियल ने बताया कि तुम किसी काम से आउट ऑफ़ टाउन गए हुए हो।”
“और तुम्हें मेरी फिक्र कब से होने लगी? तुम्हें तो इन फैक्ट खुशी होनी चाहिए कि तुम्हें चार दिन आराम करने का मौका मिल गया। कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हें मेरी आदत लग गई है?” रिदांश ने सिर हिला कर कहा। वो अपने कदम आरोही की तरफ बढ़ा रहा था।
रिदांश को अपने करीब आता देखकर आरोही खुद में ही सिमटने लगी थी। अचानक रिदांश ने उसके पास आकर उसका गला पकड़ा और गन को उसके गाल पर फिराते हुए कहा, “कहा था ना मिस राइटर, तुम मेरे किसी काम की नहीं हो और जिस दिन तुम मेरे लिए पूरी तरह यूजलेस हो जाओगी, उस दिन तुम्हें मार दूंगा।”
रिदांश आरोही का गला दबा भी रहा था। इससे उसकी हालत खराब होने लगी। उसकी आंखों में आंसू आ गए और पूरा चेहरा लाल हो गया था।
रिदांश की बातों और हाव-भाव से उसके इरादे साफ नजर आ रहे थे। उसने फिर आरोही के बेहद करीब आते हुए कहा, “बहुत टाइम दे दिया मैंने तुम्हें... और तुम मेरे किसी काम की नहीं निकली। जिस किसी ने भी तुम्हें भेजा होगा, ना तो तुम उसका काम कर पाई और ना ही मेरा। एक बच्चा तक पैदा नहीं कर सकती तुम मिस राइटर और यहां बैठकर किताबें लिखने का कोई फायदा नहीं है। इन्हें कभी कोई पब्लिश नहीं करवाएगा क्योंकि तुम मरने वाली हो।”
रिदांश की बातें सुनकर आरोही की आंखें डर से फैल गई थी। उसने ना में सिर हिलाया तो रिदांश जवाब में बोला, “अब तक तुम्हारी आंखों में दर्द दिखाई देता था लेकिन आज ये डर देखकर मुझे बहुत खुशी मिल रही है पर इस सेटिस्फेक्शन के लिए मैं अपना टाइम वेस्ट नहीं कर सकता। वैसे भी तुम्हारे चक्कर में मैं ठीक से अपने काम नहीं कर पाता। जो काम तुम नहीं कर पाई, वो करने के लिए मुझे और भी लोग मिल जाएंगे। सो गुड बाय मिस राइटर। ऊपर जाने के बाद अपनी मौत की कहानी जरूर लिखना।” बोलते हुए रिदांश ने आरोही को एक झटके में छोड़ दिया, जिससे वो कुछ कदम लड़खड़ा गई। आरोही बुरी तरह खांस रही थी क्योंकि उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी तो वही रिदांश अपनी गन लोड कर रहा था।
आरोही रिदांश से कुछ कहना चाह रही थी लेकिन इस वक्त उसकी जुबान और गाल दोनों ही उसका साथ नहीं दे रहा था। उसने हाथ बढ़ाकर बेडसाइड का ड्रॉर खोला और उसमें से कुछ निकाला। रिदांश ने अपनी गन लोड कर ली थी। उसने आरोही की तरफ गन पॉइंट की तभी आरोही ने अपना हाथ सामने करके उसे कुछ दिखाया, जिसे देखकर रिदांश की आंखें छोटी हो गई।
रिदांश ने जल्दी से उसके हाथ से वो छीना और उसे देखकर आरोही की तरफ देखते हुए धीरे से बोला, “तो ये बताना चाह रही थी तुम मुझे? जुबान नहीं है तुम्हारे मुंह में? अभी तुम्हारी वजह से मेरे बच्चे को कुछ हो जाता तो? इतनी मेहनत के बाद मुझे ये न्यूज़ सुनने को मिल रही है और तुम ये वेट कर रही थी क्या कि कब मैं तुम्हारी जान लूं?” रिदांश गुस्से में आरोही पर ही चिल्ला रहा था। इस वक्त उसके हाथ में प्रेगनेंसी किट थी, जिसमें आरोही के प्रेग्नेंट होने की कन्फर्मेशन थी।
रिदांश ने जल्दी से आरोही को बेड पर बिठाया और उसे पानी का ग्लास देने लगा। उसे पानी देने से पहले रिदांश ने आरोही से कहा, “गहरी गहरी सांस लो... अपना ध्यान भटकाने की कोशिश करो। बैक काउंटिंग करो तब तुम्हारी सांसे नॉर्मल हो जाएगी।”
रिदांश के गला दबाने के बाद आरोही की सांसे अभी भी नॉर्मल नहीं हो पा रही थी। वो ब्रेथलेस हो रही थी तभी रिदांश ने उसे पकड़ा और उसके होठों पर अपने होठ रखकर उसे ब्रीदिंग करवाने की कोशिश करने लगा।
लगभग 5 मिनट में जब आरोही की सांसें नॉर्मल हो गई थी तब रिदांश ने उसे पानी दिया। आरोही की आंखों में आंसू थे और वो रो रही थी। उसे लगा था कि रिदांश के आने पर वो उसे ये खबर अच्छे से बताएगी पर सब कुछ उल्टा हो गया। रिदांश वहां उसकी जान लेने के इरादे से आया था और लगभग उसमें कामयाब होने ही वाला था। ये तो सही वक्त पर आरोही ने अपना हाथ बढ़ाकर प्रेगनेंसी किट निकाल ली थी।
रिदांश के चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं था। जैसे नॉर्मल कपल में किसी आदमी को बाप बनने पर खुशी होती है, उस तरह रिदांश के चेहरे पर ऐसी किसी खुशी का भाव नहीं था। पर दिल ही दिल में एक सेटिस्फेक्शन था कि अब उसे उसकी प्रॉपर्टी का ज्यादातर हिस्सा मिल जाएगा।
आरोही ने रिदांश की तरफ गुस्से से देखा और फिर धीमी लेकिन सख्त आवाज में कहा, “तुमने मुझे बोलने का मौका नहीं दिया था। अगर आज तुम्हारे बच्चे की जान जाती तो वो तुम्हारी वजह से ही जाने वाली थी।”
“मेरी कोई गलती नहीं है। तुम चुपचाप खड़ी थी। अब मेरे साथ बहस करना बंद करो। मुझे ये बताओ तुमने खाना खाया या नहीं और कब पता चला तुम्हें यह?” रिदांश आरोही से काफी केयरिंग वे में बात करने लगा।
आरोही इसका मतलब अच्छे से समझती थी। रिदांश के दिल में उसके लिए कोई प्यार नहीं था। ये केयर थी तो सिर्फ अपने होने वाले बच्चे के लिए।
“आज सुबह ही टेस्ट किया था तब रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। कंफर्मेशन के लिए मैंने चार से पांच बार टेस्ट किया था।” आरोही ने जवाब दिया।
“हां ठीक है। कल हम डॉक्टर के पास चलेंगे। तुम बताओ तुमने खाना खाया?” रिदांश ने पूछा, जिस पर आरोही ने ना में सिर हिला दिया।
रिदांश ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। वो मोबाइल में कुछ देख रहा था। फिर उसने आरोही की तरफ देखकर कहा, “कल हम डॉक्टर से फिर से कंसल्ट कर लेंगे। अभी मैंने थोड़ा बहुत सर्च किया है तो तुम्हें अपना बहुत ख्याल रखना पड़ेगा खासकर पहले ट्रिमेस्टर में... चलो बाहर चलते हैं। डिनर कर लो। लेट नहीं होना चाहिए।”
आरोही ने उसकी बात पर हामी भरी। वो उठकर आगे चलने को हुई तभी रिदांश ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया।
आरोही हैरानी से उसकी तरफ देख रही थी तो रिदांश बेपरवाही से बोला, “मुझे ऐसे मत देखो। ऐसी हालत में ज्यादा चलना फिरना नहीं चाहिए बस इसीलिए उठाया है।”
“2 मिनट का भी रास्ता नहीं है और इतना हम चल सकते हैं तो मुझे नीचे उतार दो और ये झूठी केयर मत दिखाओ मुझे। मैं तुम्हारे बच्चे का तुम्हारे कहें बिना ही अच्छे से ध्यान रखूंगी। आफ्टर ऑल इसके चक्कर में तुमने मुझे इतने दर्द जो दिए हैं।” आरोही ने गुस्से में कहा।
“बट आई डोंट ट्रस्ट यू मिस राइटर। क्या पता मेरे दिए दर्द का बदला तुम मेरे बच्चे से लो? आज से तुम एनीटाइम मेरी आंखों के सामने रहोगी।” रिदांश ने जवाब दिया। आरोही के कहने के बावजूद उसने उसे नीचे नहीं उतारा था और डाइनिंग टेबल तक ले आया था।
इतना ही नहीं रिदांश आरोही को अपने हाथों से धीरे-धीरे खाना खिला रहा था। अगर यही चीज वो पहले करता तो शायद आरोही उसके प्यार में पड़ चुकी होती लेकिन अब वो जो कर रहा था उसके पीछे उसका स्वार्थ छुपा हुआ था।
“बस अब 9 महीने का इंतजार है मुझे... 9 महीने इस बच्चे के बाहर आने का और वही 9 महीने मेरी जिंदगी के।” आरोही ने अपने मन में कहा।
उसकी आंखें नम होने लगी थी। आखिर यही तो उसकी लिखी कहानी का क्लाइमेक्स था, जिसे वो चाह कर भी नहीं भूल पाई थी। बच्चे के पैदा होने के कुछ दिन बाद में आरोही की मौत खुद उसने अपने ही हाथों लिखी थी।
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ओके तो आरोही ने नॉवेल में जो कहानी लिखी थी वो चेंज नहीं हुई है। बस कुछ एक दो इवेंट बदल गए थे क्योंकि आरोही ने उन्हें बदलने की कोशिश की थी पर आखिर में हुआ वही, जो उसने लिखा था। पार्ट पढ़ कर कमेंट कर देना। मिलते हैं अगले पार्ट पर।