A cruel fairytale - Chapter 10
A Cruel Fairytaleरिदांश ने जब आरोही को मारा तो डर के मारे उसे बुखार हो गया था और वो बेहोश हो गई थी। रिदांश को आरोही पर तरस से ज्यादा गुस्सा आ रहा था क्योंकि वो उसे सच नहीं बता रही थी। रिदांश ने उसे उठाने से पहले उसका फोटो क्लिक किया और फिर उसे अपने कमरे में लेकर गया।
अंदर आते ही रिदांश ने आरोही का टेंपरेचर चेक किया। उसका टेंपरेचर देखने के बाद रिदांश ने आईज रोल करके कहा, “इतनी जल्दी इतना तेज बुखार कैसे हो सकता है इस लड़की को? मतलब इतना नाजुक, इतना नाजुक तो मैंने कोई बच्चा भी नहीं देखा, जितना ये लड़की है। पता नहीं क्या सोचकर मेरे दुश्मनों ने इस लड़की को यहां पर भेजा है।”
रिदांश उठकर गया और एक बॉल में ठंडा पानी ले कर आया। वो आरोही के माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां कर रहा था ताकि उसका बुखार कम हो जाए।
कुछ देर बाद जब आरोही का टेंपरेचर डाउन हुआ, तब रिदांश ने अपना मोबाइल उठाया और वो फोटो अपने सभी दुश्मनों को भेज दी। उसने साथ में एक मैसेज भी लिखा था।
रिदांश टाइप करते हुए बोल रहा था। उसने लिखा, “इस लड़की को जिस किसी ने भी मेरे पास भेजा है, उसे तो मैं छोड़ने वाला नहीं हूं। इसका जो हाल होगा, उसका जिम्मेदार इसको भेजने वाला होगा। जिसने भी इसे भेजा है, आई मस्ट से उसके पास दिमाग नाम की चीज नहीं है। अपने जासूस को ट्रेन करके भेजा करो।”
उसे सेंड करने के बाद रिदांश ने एक नजर आरोही की तरफ देखा जो सोते हुए काफी मासूम लग रही थी। रिदांश ने तुरंत अपनी नज़रें घुमा ली।
रिदांश रूम से बाहर निकला ही था कि उसका मोबाइल बजा। ये उसके डैड मिस्टर सुशांत ठाकुर का कॉल था।
अपने डैड का कॉल रिसीव करने के बजाय रिदांश ने मोबाइल स्क्रीन की तरफ देखते हुए सिर हिला कर कहा, “लो, अब इनका लेक्चर अलग से सुनना पड़ेगा। मैं अपनी प्रॉपर्टी पर कुछ भी करूं, इन्हे इससे क्या लेना देना है? मुझे लेक्चर दिए बिना इनका खाना नहीं हजम होता होगा।”
रिदांश के हाथ में मोबाइल था फिर भी उसने कॉल रिसीव नहीं किया। जब दोबारा मोबाइल बजा तो रिदांश को मजबूरन कॉल रिसीव करना ही पड़ा। उनका सेकंड कॉल मतलब बात वाकई जरूरी थी।
दूसरी तरफ से मिस्टर सुशांत ठाकुर की सख्त आवाज आई, “लिसन, मुझे तुमसे कोई बहस नहीं करनी है। सीधे-सीधे अपनी बात कह रहा हूं। तुम्हारे चाचा प्रशांत का लड़का, जो उम्र में तुमसे 3 साल छोटा है, वो शादी करने जा रहा है। अफसोस कि तुम मेरे इकलौते बेटे हो... डैड की विल के हिसाब से तुम्हारी नेक्स्ट जेनरेशन को ही इंडिया की सारी प्रॉपर्टी मिलने वाली है। अब तुम्हें समझ जाना चाहिए कि विविध तुमसे पहले शादी क्यों कर रहा है।”
“हो गया आपका लेक्चर?” रिदांश ने काफी बदतमीजी से जवाब दिया, “मैं किसी से शादी नहीं करने वाला हूं। मुझे अपनी लाइफ बहुत प्यारी है। रही बात प्रॉपर्टी की तो इंडिया में मेरी जो भी प्रॉपर्टी है वो मुझे कोई नहीं छीन सकता, चाहे वो कोई बच्चा हो या उसका बाप।”
रिदांश गुस्से में कॉल कट करता उससे पहले मिस्टर सुशांत ने फिर से तेज आवाज में कहा, “ठीक है मत करो शादी लेकिन मेरे हाथ में एक बच्चा लाकर रख दो, जो तुम्हारा अंश हो ताकि मैं प्रॉपर्टी पर क्लेम कर सकूं। अब ये मत कहना कि बच्चों के लिए शादी करना जरूरी होता है। विविध की शादी और बच्चा होने में कम से कम 1 साल का टाइम लग ही जाएगा। तुम बिना शादी के भी किसी भी लड़की के साथ में बच्चा पैदा कर सकते हो।” सुशांत आगे कुछ कहते उससे पहले रिदांश ने कॉल कट कर दिया। उसने अपना मोबाइल साइड में रखा और गहरी सांस लेकर छोड़ी।
रिदांश ने सिर हिला कर कहा, “एनीटाइम बच्चे बच्चे की रट लगा कर रखते हैं, जैसे बच्चा रोड पर रखा हुआ है और उन्हें उठाकर दे दूंगा, ये लीजिए बच्चा और दे दीजिए प्रॉपर्टी। मुझे भी प्रॉपर्टी प्यारी है और मेरा ज्यादातर काम इंडिया में ही चल रहा है। उस विविध ने अगर जल्दी बच्चा पैदा कर दिया तो मेरी प्रॉपर्टी खतरे में आएगी पर अचानक से बच्चा उठाकर कहां से लाकर रख दूं?”
रिदांश के चेहरे पर हल्के परेशानी के भाव थे। उसने भले ही सुशांत के सामने जाहिर न किया हो पर वो परेशान था। उसका ज्यादातर काम इंडिया में ही चल रहा था और उसके डैड मिस्टर तेज प्रताप ठाकुर की विल के अनुसार इंडिया की सारी प्रॉपर्टी रिदांश या विविध के बच्चे के नाम होने वाली थी, बस फर्क ये था कि बच्चा पहले कौन पैदा करता है।
रिदांश ने फिर अपने लॉयर को कॉल किया और उसे कहा, “दादाजी की विल का कोई लूपहोल है? मैं नहीं चाहता कि मेरी इतनी मेहनत किसी कल के आए बच्चे के नाम हो।”
“आप ये सवाल मुझसे काफी बार पूछ चुके हैं सर और इसका कोई तरीका नहीं है। अब तो उस विल के बारे में आपके दुश्मनों तक को पता चल गया है और तभी वो आपके खिलाफ आजकल कुछ कर नहीं रहे। हां, बच्चा पैदा करो तो शायद कुछ...” लॉयर उसे समझाने की कोशिश कर रहा था लेकिन रिदांश ने उसके बाद भी नहीं सुनी और कॉल कट कर दिया।
रिदांश गुस्से में चिल्ला कर बोला, “हद है यार... एक तो मुझे बच्चों से इतनी चिढ़ है, ऊपर से जिसे देखो बच्चे बच्चे की रट लगाकर बैठा है, जैसे मैं अपने ससुराल की कोई बहू हूं और जिसने बच्चा पैदा नहीं किया।”
रिदांश आगे कुछ कहता उससे पहले उसकी नजर आरोही पर पड़ी, जो दरवाजे पर खड़ी उसकी बातें सुन रही थी। रिदांश कुछ देर तक आरोही की तरफ देखता रहा और फिर उसके दिमाग में कुछ सूझा।
अचानक रिदांश आरोही की तरफ बढ़ने लगा। उसे अपने पास आता देख कर आरोही को डर लग रहा था। वो अपने कदम पीछे ले रही थी। रिदांश आरोही से थोड़ी ही दूरी पर था कि उसने उसे पकड़ कर वहीं पर रोक दिया। फिर रिदांश ने आरोही से अपनी सख्त आवाज में पूछा, “लास्ट टाइम पीरियड्स कब आए थे तुम्हें?”
उसका सवाल सुनकर आरोही की आंखें हैरानी से बड़ी हो गई। वो तो वैसे भी नॉवेल की दुनिया में थी तो कैसे अपने मेंस्ट्रूअल का एग्जैक्ट टाइम बता सकती थी पर फिर भी रिदांश का सवाल काफी क्रीपी था। वो उसका बॉयफ्रेंड या कोई हस्बैंड नहीं था, जो उसे उसके पीरियड्स के बारे में पूछे।
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क्या लगता है रिदांश के दिमाग में क्या चल रहा है? आई हॉप आपको कहानी पसन्द आ रही होगी, अगर आ रही है तो कमेंट करो यार।