A cruel fairytale - Chapter 17
A Cruel Fairytaleआरोही का सारा सच जानने के लिए रिदांश ने उसकी फोटो क्लिक करके अपने सभी दुश्मनों के पास भिजवाई थी ताकि अगर किसी ने आरोही को भेजा हो तो उसकी तरफ से जवाब आ जाए।
बाकी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा था कि रिदांश ठाकुर के पास कोई अनजान लड़की आ गई है, जिस पर उसे जासूस होने का शक है क्योंकि उन्होंने किसी को नहीं भेजा था। लेकिन जब उसके सबसे बड़े कंपीटीटर निकोलस जोनस ने आरोही की फोटो देखी तो वो उससे काफी इंप्रेस हुआ। उसे आरोही पसंद आ गई तो उसने अपनी मैनेजर वेरोनिका को कह कर रिदांश के पास ये मैसेज भिजवाया कि आरोही को उसी ने भेजा है। निकोलस को किसी भी हालत में आरोही 24 घंटे में अपने पास चाहिए थी और इसके लिए वो इंडिया तक जाने के लिए निकल गया था।
वहीं दूसरी तरफ इंडिया में जब डेनियल ने रिदांश को निकोलस का मैसेज बताया तो रिदांश जोर-जोर से हंसने लगा। उसकी हंसी खतरनाक थी, जो डेनियल के दिल में डर पैदा कर रही थी।
डेनियल ने धीरे से कहा, “सर प्लीज इस तरह हंसना तो बंद कीजिए। अगर निक ने ये किया है, तो हमारे लिए ये अच्छी खबर नहीं है। पहले से ही उसकी नजर आपकी फार्मिंग पर है।”
“मेरे ऊपर बुरी नजर डालने वालों की मैं आंखें निकाल लेता हूं। निकोलस जोनस शायद इस बात को भूल गया है कि अब मैं उसका स्कूल फेलो नहीं हूं, जो वो मुझे फुटबॉल का मैच समझ कर लाइफ में हराने की कोशिश करेगा।” रिदांश ने सर्द आवाज में जवाब दिया। निकोलस जोनस उसी का स्कूल मेट था।
“तो आगे क्या करना है? क्या उसका सारा सच जानने के बाद भी आप उसे अपने पास रखेंगे?” डेनियल ने पूछा।
“ये तो शाम की मीटिंग के बाद ही डिसाइड होगा। मेरे सारे शेड्यूल फ्री कर दो। शाम को मेरी निकोलस जोनस के साथ मीटिंग है।” रिदांश ने जवाब दिया।
वो वहां से जाने लगा, तभी पीछे से डेनियल ने हैरानी से कहा, “आप लंदन जाने का सोच रहे हैं? मीटिंग का टाइम बता देते तो मैं उसकी मैनेजर को मैसेज कर देता।”
“हमें कहीं जाने की जरूरत नहीं है डेनियल। वो एक कहावत तो सुनी होगी तुमने कि प्यासे को खुद ही कुवे के पास चलकर आना पड़ता है, कुआं कभी प्यासे के पास नहीं जाता... तो बस यूं समझ लो निकोलस जोनस नाम का प्यासा आदमी इस कुवे के पास खुद चलकर आ रहा है।” रिदांश ने काफी रहस्यमई तरीके से जवाब दिया और फिर वहां से चला गया।
निकोलस ने किसी भी तरह की मीटिंग का कोई नोटिस नहीं दिया था, फिर भी रिदांश को अंदाजा हो गया था। डेनियल से मीटिंग करने के बाद रिदांश आरोही के पास पहुंचा, जो बिस्तर पर लेटी हुई थी। आरोही गहरी नींद में थी और उसका सोना जायज भी था क्योंकि रिदांश ने पिछली कई रातों से उसकी नींद हराम कर रखी थी।
आरोही के चेहरे की तरफ देखते हुए रिदांश तिरछा मुस्कुराते हुए बोला, “क्या बात है मिस राइटर, तुम तो बहुत डिमांड में हो। कारण मुझसे बेहतर और कौन जान सकता है?” बोलते हुए रिदांश अपनी आंखों से आरोही की पूरी बॉडी को अजीब नजरों से घूर रहा था।
ऐसे लग रहा था, मानो नींद में भी आरोही को उसकी नजरों की तपिश महसूस हो रही थी, जो वो नींद में भी कसमसाने लगी। रिदांश ने कुछ पल उसे देखा और फिर वहां से चला गया।
थोड़ी ही देर में आरोही की आंख खुल गई थी। जैसे ही उसकी नींद टूटी, उसे कुछ महसूस हुआ और वो दौड़कर बाथरूम में गई। आरोही के चेहरे पर घबराहट के भाव थे और आंखों में रिदांश का डर।
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शाम के वक्त निकोलस जोनस अपनी असिस्टेंट वेरोनिका के साथ मुंबई पहुंच चुका था। रात के लगभग आठ बजे के करीब वो मुंबई के एक सेवन स्टार होटल में था और उसने रिदांश को वहीं पर बुलाया था। उसने पूरा डायनिंग एरिया बुक कर रखा था ताकि उनकी मीटिंग आराम से हो सके।
थोड़ी देर में रिदांश भी डेनियल के साथ पहुंच चुका था। वहां आते ही रिदांश और निकोलस दोनों ने हीं अपने-अपने मैनेजर को बाहर भेज दिया था। उनके जाने के बाद वो दोनों एक दूसरे को खा जाने वाली निगाहों से घूर रहे थे।
कुछ देर की चुप्पी के बाद निकोलस ने गहरी सांस ली और सर्द आवाज में कहा, “आई एग्री उस लड़की को मैंने भेजा है। मुझे उसे वापस कर दो। मेरे लिए वो बहुत इंपॉर्टेंट है। बदले में मैं तुम्हारी पंजाब वाली लैंड छोड़ने को तैयार हूं, जिस पर इलीगल तरीके से कब्जा किया गया था।”
निकोलस की बात सुनकर रिदांश के चेहरे पर इविल स्माइल थी। वो भौहें उठाकर बोला, “क्या लगता है डियर निक, रिदांश ठाकुर ने उस मामले में कुछ किया नहीं इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि उसने हार मान ली है। मैं अपनी एनर्जी फालतू जगह वेस्ट नहीं करता हूं। उस बंजर जमीन का मैं क्या करूंगा? अपने पास ही रखो, वैसे भी तुमने उसकी 5 गुना कीमत चुकाई है मुझे।”
रिदांश की बात सुनकर निकोलस उसे कंफ्यूजन से देख रहा था तभी रिदांश ने उसके सामने चुटकी बजाई और भौंहे उठाकर कहा, “क्या लगता है तुम्हें, कोई मेरी जमीन पर ऐसे ही कब्जा करके तुम्हें बेच देगा? किसी काम की नहीं थी वो लैंड, तो सोचा उसे बेच देता है, पर एक ऐसा इंसान चाहिए था, जो उसकी ज्यादा कीमत दे सके। बस तुम्हारे तक एक खबर ही तो पहुंचानी थी कि रिदांश ठाकुर की जमीन पर किसी ने कब्जा कर लिया है और वो बेचारा डर के मारे उस लैंड को किसी को बेचना चाहता है। देखो, कितनी जल्दी तुम किसी की भी बातों में आ गए।”
“रिदांश....” निकोलस जोर से चिल्ला कर बोला, “अपनी हद में रहो।”
“मेरी कोई हद नहीं है निक, ये तो तुमने स्कूल टाइम में ही समझ लिया होगा। वैसे मुझे बहुत मजा आता है तुम जैसे ओवर स्मार्ट लोगों को बेवकूफ बनाने में।” रिदांश बातों ही बातों में निकोलस के साथ खेल रहा था।
निकोलस ने गहरी सांस ली। वो टाइम वेस्ट नहीं करना चाहता था इसलिए उसने सीधे-सीधे कहा, “कम टू द पॉइंट... आई वांट माय गर्ल बैक।”
“अच्छा? और मैं तुम्हें उसे वापस क्यों दूं?” रिदांश ने कंधे उठाकर कहा।
“क्यों? उसने तुम्हारे कोई ऐसे राज जान लिए हैं क्या, जिसकी वजह से तुम्हें डर लग रहा है कि तुम उसे छोड़ दोगे तो वो मुझे सब बता देगी? रिदांश ठाकुर के चेहरे पर डर देखकर अच्छा लग रहा है।” निकोलस ने तिरछा मुस्कुराते हुए कहा।
रिदांश ने कुछ पल रुक कर जवाब में कहा, “अजीब बात है ना निकोलस जोनस, वन नाइट स्टैंड करने के लिए एक लड़की को लेने के लिए लंदन से इतनी दूर आ गए। इतनी पसंद आ गई है क्या तुम्हें वह।”
निकोलस हैरानी से रिदांश की तरफ देख रहा था। रिदांश ने सिर हिला कर कहा, “बेवकूफ समझा है क्या मुझे, जो तुम्हारी बातों में आ जाऊंगा। उस लड़की को कोई भी भेज सकता है लेकिन तुम तो बिल्कुल नहीं। देखा, मैंने तुम्हारी स्ट्रैंथ को पहचान लिया कि तुम ऐसी वैसी लड़की को मेरे पास नहीं भेजोगे और तुम बिना उसके बारे में जाने उसे लेने के लिए यहां तक आ गए। वैसे तुम्हें बता दूं वो बेड पर कमाल की है पर कभी तुम्हारे हाथ नहीं आएगी।”
इतना कहकर रिदांश वहां से मुस्कुराते हुए चला गया। उसके जाने के बाद निकोलस जोर से चिल्लाया।
रिदांश को समझते देर नहीं लगी कि निकोलस वहां क्यों आया होगा। आखिरकार वो अपने दुश्मनों के बारे में सब कुछ खबर जो रखता था। निकोलस पैर पटकते हुए वहां से वापस चला गया तो वही रिदांश भी घर आ गया था।
रिदांश रूम में पहुंचा तब आरोही वहां नहीं थी। उसने देखा बाथरूम का दरवाजा बंद है।
रिदांश ने दरवाजा खटखटाकर कहा, “2 मिनट में बाथरूम से बाहर आओ वरना मैं अंदर आ सकता हूं। एंड ट्रस्ट मी मुझे बाथरूम में कुछ भी करने से शर्म नहीं आएगी।”
रिदांश की आवाज सुनकर आरोही जल्दी से बाहर आई। उसकी नज़रें झुकी हुई थी और चेहरे पर गहरे डर के भाव थे। ऐसा लग रहा था वो रिदांश को कुछ बताना चाहती है पर डर के मारे उसके मुंह से कुछ नहीं निकल रहा था।
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