A cruel fairytale - Chapter 6
A Cruel Fairytaleअपनी नॉवेल में फंस जाने के बाद आरोही सिचुएशंस को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। उसने जैसे लिखा था, वो उन सब को चाह कर भी बदल नहीं पा रही थी। आरोही ने रिदांश को किसी को मारते हुए देख लिया था तो रिदांश ने उसे किडनैप कर लिया था। इस वक्त आरोही रिदांश की गाड़ी में थी और उसे ये यकीन दिलाने की कोशिश कर रही थी कि वो अपनी लिखी नॉवेल में फंस चुकी है।
रिदांश ने आरोही की बातों को गौर से सुना, फिर उसने आरोही के सामने ये शर्त रखी कि अगर वो ये प्रूफ कर दे कि वो किसी नॉवेल में है, तो वो उसे जाने देगा।
आरोही के पास अच्छा मौका था जब वो अपने साथ होने वाले टॉर्चर को रोक सकती थी लेकिन इस वक्त उसके पास कोई प्रूफ नहीं था। आरोही ने बिना कुछ कहे ना में सिर हिला दिया।
रिदांश ने उसकी तरफ बिना किसी भाव के देखा और सख्त आवाज में कहा, “तो तुम्हारे पास कोई प्रूफ नहीं है। फिर मैं तुम्हारी बात पर कैसे यकीन कर लूं?”
“मेरा सबसे बड़ा प्रूफ यही है कि मैं तुम्हारे बारे में सब कुछ जानती हूं।” आरोही ने जवाब दिया।
उसकी बात सुनकर रिदांश जोर से हंसा। उसकी हंसी आरोही को डरा रही थी। फिर वो अचानक ही अपनी निगाहें सर्द करके आरोही की तरफ देखकर बोला, “तुम्हें पता है ना मैं कौन हूं? रिदांश ठाकुर, जो रॉयल फैमिली से बिलॉन्ग करता है। इंडिया के अलावा मेरा बिजनेस एलए में भी है। मेरे रियल बिजनेस के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मेरी वेपन मेकिंग फैक्ट्री है लेकिन वो अंडरवर्ल्ड के लिए भी हथियार बनाती है, इस बात को तुमने बताया तो तुम आम इंसान नहीं हो सकती हो मिस श्रीवास्तव। ऊपर से ड्रग्स उगाने वाली बात, वो गवर्नमेंट के लिए मेडिसिंस बनाने के लिए उगाई जाती हैं लेकिन तुमने बताया कि वो ड्रग्स मैं इलीगली भी बेचता हूं। हां तुम मेरे बारे में सब कुछ जानती हो। वो सब बातें, जो किसी भी दुश्मन को ही पता होती है। तुम्हें किसने भेजा है, ये मैं पता लगा लूंगा। अब अपना मुंह बंद रखना वरना अपने साथ होने वाली हर अनहोनी की जिम्मेदार तुम खुद होने वाली हो।”
अनजाने में आरोही ने रिदांश के सामने उसकी पूरी सच्चाई खोल कर रख दी थी, जिसके बाद वो उसे किसी भी कीमत पर नहीं जाने दे सकता था। ऊपर से आरोही ने उसे किसी को मारते हुए भी देख लिया था।
रिदांश जिस तरह से आरोही को देख रहा था, उसे उससे डर लग रहा था। आरोही का डर जायज भी था। आखिर उसने ही रिदांश को इतना क्रुएल लिखा था कि कोई गलती से भी उसकी तरफ नज़र उठा कर देखे तो वो उसकी आंखें निकाल लेता था।
आरोही ने डर कर अपनी नज़रें नीचे कर ली। कुछ देर बाद गाड़ी एयरपोर्ट पर थी। बाहर निकलने से पहले रिदांश ने आरोही के मुंह को पकड़ कर दबाते हुए कहा, “गाड़ी से बाहर निकलते ही अगर तुमने तमाशा करने की कोशिश की या किसी से मदद मांगने के लिए शोर किया तो आई स्वेयर उसी वक्त गोली मार कर तुम्हारी जान ले लूंगा।”
रिदांश ने फिर आरोही का मुंह छोड़ दिया। दर्द से उसकी आंखों में आंसू थे। गाड़ी से बाहर निकालने के बाद आरोही और रिदांश उस एरिया की तरफ बढ़ रहे थे, जहां प्राइवेट जेट खड़े होते थे। रिदांश का खुद का प्राइवेट जेट था, जो इस वक्त रनवे पर खड़ा था।
रिदांश आरोही को लेकर जेट में बैठ गया और कुछ ही देर में वो लोग मुंबई पहुंच चुके थे। रिदांश उसे अपने प्राइवेट घर में लेकर आया था, जो मुंबई से काफी दूर जंगलों में बना हुआ था। एक ऐसा इलाका, जहां दूर-दूर तक कोई घर या इंसान का नामोनिशान भी नहीं था।
अपने घर में जाते वक्त रिदांश ने आरोही की बाजू पकड़ी और उसे खींचते हुए अंदर ले जा रहा था। आरोही ने एक नजर उस घर की तरफ देखा तो वो बिल्कुल वैसा ही था, जैसे उसने लिखा हुआ था। जंगल में बना हुआ एक बड़ा सा कॉटेज, जो काफी लग्जरियस और खूबसूरत था।
घर के बाहर काफी सारे गार्ड्स थे लेकिन अंदर कोई नहीं था क्योंकि रिदांश को शांति पसंद थी। अंदर आते ही रिदांश ने आरोही को लिविंग रूम के काउच पर पटका। वो दूसरी तरफ पलटा ही था कि उसके पास डेनियल का कॉल आया।
सामने से डेनियल ने कहा, “अजीब बात है सर, आज तक किसी को नहीं पता था कि हमारे राजस्थान वाली जमीन पर ईलीगली गांजा उगाया जा रहा है लेकिन अचानक ही वहां पुलिस वाले चेकिंग के लिए आ गए। हालांकि उनकी इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वो रॉयल लैंड में एंट्री कर सके। मैंने मिनिस्टर से बात करके मामला रफा दफा कर दिया है लेकिन एक बार बात उठी है तो जल्दी से दबाना आसान नहीं होगा।”
रिदांश ने कोई जवाब नहीं दिया और कॉल कट कर दिया। वो आरोही की तरफ देख रहा था।
रिदांश अपने कदम आरोही की तरफ बढ़ा रहा था, जिसके बाद उसे डर लगने लगा। रिदांश आरोही के पास आया और उसके बाल अपने मुट्ठी में भरकर खींचते हुए कहा, “तो तुम कह रही थी कि मैं तुम पर यकीन कर लूं? कैसे यकीन कर लूं मिस श्रीवास्तव। आज तक किसी को कानो कान भनक नहीं थी कि मेरी कौन सी जमीन पर क्या उगाया जा रहा है। सब कुछ काफी लीगल था। अचानक से वहां पुलिस चेकिंग करने के लिए आ गई। सच-सच बताओ तुम्हें किसने भेजा है वरना मैं अपने तरीके पर आया तो तुम्हारी रूह तक कांप जाएगी।”
बाल खींचने पर आरोही की आंखों में आंसू थे। उसने मासूमियत से ना में सिर हिला कर कहा, “मेरा यकीन करो, मुझे किसी ने नहीं भेजा है। मुझे सब इस वजह से पता है क्योंकि ये नॉवेल मैंने ही लिखी है रिदांश। प्लीज ट्रस्ट मी मुझे छोड़ दो। वरना तुम भी बहुत पछताओगे। अगर तुम मेरे करीब आए या मेरे पास रहे तो तुम्हें दर्द के सिवा कुछ नहीं मिलेगा। आखिर में तुम्हारे हाथ भी दर्द ही लगेगा रिदांश ठाकुर तो खुद की खुशी के लिए मुझे छोड़ दो।”
रिदांश ने गर्दन टेढ़ी करके सर्द आवाज में कहा, “अच्छा तो मैं पछताऊंगा? तुम जानती नहीं हो रिदांश ठाकुर को। मैं वो आग हूं, जिसके पास आने वाला हर पतंगा जल जाता है तो तुम्हारी क्या औकात है।” बोलते हुए रिदांश ने गुस्से में आरोही को छोड़ दिया।
रिदांश ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और अचानक आरोही से पूछा, “क्या तुमने कभी शराब पी है?”
आरोही ने ना में सिर हिला दिया। वो कन्फ्यूजन से रिदांश की तरफ देख रही थी। आरोही ने खुद ही लिखा था कि आगे क्या होने वाला है लेकिन धीरे-धीरे वो सब भूल चुकी थी। अब उसे ये याद नहीं था कि रिदांश आगे क्या करने वाला है वहीं रिदांश आरोही से सब सच उगलवाने के लिए अब हर हद पार करने के लिए तैयार था।
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