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Chapter 23

A cruel fairytale - Chapter 23

A Cruel Fairytale

रिदांश ने आरोही को अलग कमरे में शिफ्ट कर दिया था और इससे वो काफी खुश भी थी। शाम के वक्त आरोही अपने टाइम पास के लिए एक किताब पढ़ रही थी। उसने जब वो बुक पढ़ी तो उसे बहुत हैरानी हुई। वो उसी की लिखी हुई एक किताब थी।

अपनी लिखी हुई किताब को नॉवेल की दुनिया में देख कर आरोही के मन में एक उम्मीद सी जागी और वो जल्दी से रिदांश के पास गई।

उसने रिदांश को वो बुक दिखाते हुए कहा, “इस बुक के राइटर का नाम और बाकी डिटेल्स देखकर शायद तुम्हें मुझ पर यकीन हो जाए। मैं झूठ नहीं बोल रही हूं रिदांश, मैं इस दुनिया से नहीं हूं। मैं किसी और दुनिया से आई हूं। मैं एक राइटर हूं और ये बुक मैंने ही लिखी है। पता नहीं कैसे मैं अपनी ही लिखी नॉवेल की दुनिया में फंस गई।”

आरोही अपनी सफाई में बोले जा रही थी कि तभी रिदांश ने आरोही के हाथ से वो किताब ली। उसने किताब को चारों तरफ पलट कर देखा लेकिन वहां उसने राइटर्स का कोई भी इंट्रोडक्शन और नाम नहीं लिखा हुआ था।

रिदांश ने आरोही को पकड़ा और उसकी आंखों में देखते हुए सर्द आवाज से कहा, “मैंने तुम्हें कहा था तुम अपने दिमाग में कोई भी उल्टी सीधी चीज नहीं लेकर आओगी, जिसका गलत असर मेरे बच्चे पर पड़े। मैं ही पागल था जो तुम्हारे कमरे में किताबें रखवाई और सोचा तुम्हारा टाइम पास हो जाएगा लेकिन तुम अपनी हरकतों से बाज़ ही नहीं आ रही हो।”

आरोही हैरानी से रिदांश की तरफ देख रही थी कि वो अचानक उस पर गुस्सा क्यों हो गया था। आरोही की सवालिया नजरों को समझते हुए रिदांश ने किताब का पिछला हिस्सा आरोही की तरफ करके कहा, “इस बुक के राइटर का नाम नहीं लिखा हुआ है। ये किसी अनजान इंसान की लिखी हुई है। मान गए तुम्हें मिस राइटर, किसी और की मेहनत का क्रेडिट तुम ले भी कैसे सकती हो।”

आरोही ने रिदांश के हाथ से किताब छीनी और उसे चारों तरफ पलट कर देखने लगी। रिदांश सही कह रहा था। पिछले पेज पर लेखक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी हुई थी जबकि आरोही को याद था कि उसने अपनी हर किताब के पीछे अपना छोटा जीवन विवरण छपवाया था।

आरोही अपनी सफाई पेश करते हुए बोली, “मेरा... मेरा यकीन करो रिदांश... मै झूठ नहीं बोल रही हूं। मैं नॉवेल में...”

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आरोही अपनी बात खत्म करती उससे पहले रिदांश ने उसकी बात बीच में काटते हुए चिल्लाकर कहा, “आगे से तुम इस बारे में कोई बात नहीं करोगी। मुझे फिर से ये नहीं सुनना है कि तुम किसी नॉवेल में फंस गई हो। तुम प्रेग्नेंट हो, इस वजह से मैं तुम्हारे साथ कुछ कर भी नहीं सकता, तो अपनी इस सिचुएशन का फायदा मत उठाओ।”

इतना कहकर रिदांश ने आरोही को छोड़ दिया था। आरोही अभी भी किताब को हाथ में पकड़ कर रखी थी। उसने किताब को चारों तरफ पलट कर देखा तो वहां वाकई किसी लेखक का नाम नहीं था। उसने एक नजर रिदांश को लाचारी से देखा और फिर अपने कमरे में चली गई।

रिदांश ने उसकी बातों की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वैसे भी वो ये सब पहले भी सुन चुका था और ये उसके नया नही था।

रात को आरोही ने अपना खाना कमरे में ही मंगवा लिया था क्योंकि रिदांश उसके साथ काफी बदतमीजी से पेश आया था। वही आरोही के बिना रिदांश डाइनिंग टेबल पर काफी अकेलापन महसूस कर रहा था पर उसने कुछ कहा नहीं।

रिदांश को आरोही की फिक्र हो रही थी कि उसने ठीक से खाना खाया है या नहीं इसलिए उसने उस मेड को बुलाया, जो उसने आरोही के लिए रखी थी।

रिदांश उसकी तरफ देखकर सख्त आवाज में बोला, “खाना खाया उसने जन्नत?”

उस लड़की का नाम जन्नत था। उसने हां में सिर हिला कर कहा, “पूरा तो नहीं खाया पर पेट भरने जितना खा लिया था। उन्होंने कहा कि आज वो पूरे दिन से कुछ ना कुछ खा रही है इसलिए उन्हें ज्यादा भूख नहीं है।”

रिदांश ने उसे वापस भेज दिया था और खुद भी वहां से उठ गया था। उसने ठीक से खाना नहीं खाया था क्योंकि आरोही के बिना उसे वहां बैठने का बिल्कुल मन नहीं था। रिदांश इस बात को समझ नहीं पा रहा था कि उसे आरोही के साथ रहने की आदत हो गई है।

उसके बाद रिदांश ने अपने कुछ जरूरी काम निपटाए और फिर वो अपने कमरे में सोने के लिए आया।‌ वो भले ही ये बात एक्सेप्ट ना करे पर पिछले डेढ़ महीने में उसका पूरा रूटीन बदल चुका था, जिसमे उसका ज्यादातर टाइम आरोही के साथ बीतता था।

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जहां एक तरफ आरोही गहरी नींद में आराम से सो रही थी तो वहीं रिदांश की आंखों से नींद कोसों दूर थी। कल रात भी यही हुआ था, वो ठीक से सो नहीं पाया था।

इतना थके होने के बावजूद रिदांश बेड पर करवटें बदल रहा था। काफी कोशिशो के बाद भी रिदांश को नींद नहीं आई तो उठकर बैठ गया।

रिदांश ने गहरी सांस ली और खुद से कहा, “पूरी पांच रातों बाद घर आया था। काफी कुछ सोच कर आया था पर लगता है मुझे अपने इमोशंस पर कंट्रोल रखना होगा।” रिदांश ये बात एक्सेप्ट नहीं कर रहा था पर वो कहीं ना कहीं आरोही को मिस कर रहा था। उसने लाइट्स ऑफ की और फिर सोने की कोशिश करने लगा।

लाख कोशिश करने के बाद भी रिदांश को नींद नहीं आई तो वो एक झटके में बिस्तर से उठा। उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था कि उसे आरोही के बिना नींद क्यों नहीं आ रही है।

रिदांश अपने बिस्तर से उठा और इस वक्त उसके कदम बाहर की तरफ बढ़ रहे थे।

बाहर जाते हुए रिदांश ने डेनियल को कॉल पर कनेक्ट करके कहा, “अरेंज एनी क्लासी डेट फॉर मी... मुझे नींद नहीं आ रही है।”

डेनियल ने जवाब में हामी भरी और कॉल कट कर दिया। वो धीरे से बोला, “2 महीनों में पहली बार इन्होंने किसी लड़की की डिमांड की है। इनके पास घर पर वो लड़की मौजूद तो है, फिर किसी और के साथ रात बिताने के बारे में कैसे सोचा अचानक? खैर मैं इस मामले में कुछ नहीं कर सकता, मेरा काम उनके ऑर्डर्स फॉलो करना है।”

रिदांश आरोही के अलावा पहले भी कई लड़कियों के साथ वन नाइट स्टैंड कर चुका था। ऐसा वो तभी करता था जब वो डिप्रेस्ड होता था या उसकी फिजिकल नीड्स उस पर हावी हो जाती थी और आज भी कुछ ऐसा ही हो रहा था।

विला के सिक्योरिटी टाइट करवाने के बाद रिदांश अपनी गाड़ी लेकर डेनियल के भेजे एड्रेस पर जा रहा था।

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